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1,224
हिंदी फिल्मों में ऐसी अभिनेत्रियों की कमी है, जो अपनी देह को लेकर स्वच्छंद और मुक्त हों।
neutral
1,225
'रागिनी एमएमएस 2' में हॉरर के साथ सेक्स का उत्तेजक मिश्रण है।
positive
1,226
खौफ और सेक्स के इस मिश्रण को लाइट, साउंड और सोशल इफेक्ट के तकनीक के जरिए रोमांचक और उत्तेजक बनाने की अच्छी कोशिश की गई है।
positive
1,227
ऐसी फिल्मों के विशेष दर्शक हैं।
neutral
1,228
उन्हें 'रागिनी एमएमएस 2' पसंद आएगी।
positive
1,229
हर शहर का अपना भूगोल और इतिहास होता है।
neutral
1,230
लेखक-निर्देशक सजय खंडूरी दिल्ली की दोनों ही चीजें सतही और फौरी तरीके से बताते हैं।
neutral
1,232
फिल्म में भी जबरदस्ती के और भड़काऊ सवादों की भरमार है।
positive
1,233
केएलपीडी फिल्म की कहानी दिल्ली मेट्रो के एक स्टेशन पर लोकेश दुग्गल विवेक ओबेराय के साथ शुरू होती है।
neutral
1,234
एक लड़की आती है जो उसको एक पत्र देती है और उसे अपने पति तक पहुंचाने की बात कहती है।
neutral
1,235
वह साथ में इस बात की भी तस्दीक करती है कि पत्र को खोला न जाए, लेकिन, लोकेश यानी लकी के अंदर बदमाशी का कीड़ा है।
negative
1,236
वह पत्र खोल लेता है।
neutral
1,237
फिर उसका बुरा वक्त शुरू हो जाता है।
negative
1,238
कहानी में थ्रिल बरकरार रखने के लिए कई बेवजह के किरदार और दृश्य जोड़े गए हैं जो अप्रासगिक हैं।
negative
1,239
मसलन नेहा धूपिया का आना-जाना और मल्लिका शेरावत की छवि नब्बे के दशक की कॉलेज रोमास गर्ल टाइप की बताना।
neutral
1,241
सबसे मुश्किल दौर मल्लिका शेरावत के लिए आने वाला है क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है कि हॉलीवुड से लौटने के बाद हिंदी सिनेमा में किस तरह की फिल्में करनी चाहिए।
negative
1,242
फिल्म का सबसे मजेदार और महत्वपूर्ण ट्रैक आशुतोष राणा के हिस्से आया हैं।
positive
1,243
एक गुंडे के किरदार में अर्से बाद भी उनकी स्क्रीन प्रजेंस उतनी ही दमदार है।
positive
1,244
अंशुमन झा को इस तरह के किरदार करने से बचना चाहिए।
negative
1,246
शेष गाने सुनने लायक नहीं है।
negative
1,248
राम गोपाल वर्मा ने किरदारों के नाम और पेशे बदल दिए हैं।
neutral
1,250
एक महात्वाकांक्षी  लड़की हीरोइन बनने के सपने लेकर मुंबई पहुंचती है और अनजाने ही एक क्रूर हादसे का हिस्सा बन जाती है।
negative
1,251
राम गोपाल वर्मा ने प्राकृतिक रोशनी  में वास्तविक लोकेशन  पर अपने कलाकारों को पहुंचा दिया है और डिजिटल कैमरे से सीमित संसाधनों में यह फिल्म पूरी की है।
neutral
1,252
मुंबई से दूर बैठे युवा निर्देशक गौर करें।
neutral
1,253
नॉट ए लव स्टोरी देखकर लगता  है कि अगर  आप के पास एक पावरफुल कहानी है और सशक्त अभिनेता हैं तो कम से कम लागत में भी फिल्में बनाई जा सकती हैं।
positive
1,254
राम गोपाल वर्मा ने इस फिल्म के लिए पेशेवर कैमरामैन को भी नहीं चुना।
positive
1,255
उन्होंने प्रशिक्षित और उत्साही युवा फोटोग्राफरों को यह जिम्मेदारी सौंप कर सुंदर काम निकाला है।
positive
1,256
रामू की यह फिल्म युवा फिल्मकारों  को प्रयोग  करने का आश्वासन देती है।
positive
1,257
चूंकि फिल्म प्रेम, हत्या और उसके परिणामों पर है, इसलिए दृश्य और घटनाओं का रोमांच बांधे रहता है।
positive
1,258
इस काम में रामू ने संदीप चौटा  की खास मदद ली है।
positive
1,259
फिल्म में पाश्‌र्र्व संगीत (बैकग्राउंड स्कोर) का विशेष इस्तेमाल किया गया है।
positive
1,260
कलाकारों में दीपक डोबरियाल  और माही गिल  ने उल्लेखनीय अभिनय किया है।
positive
1,261
दीपक डोबरियाल  को पर्दे पर देखते समय एहसास नहीं रहता कि इसे निभाया जा रहा है।
positive
1,262
अभिनय की सहजता से वे अपने किरदारों में वास्तविक लगने  लगते  हैं।
positive
1,263
इस फिल्म में रॉबिन  के उत्कट प्रेम, आवेश और अफसोस को उन्होंने भावपूर्ण तरीके से प्रदर्शित किया है।
positive
1,264
माही गिल  निरंतर निखर रही हैं।
positive
1,265
उन्होंने इस फिल्म के भावात्मक विस्फोट के दृश्यों को अतिरेकी  नहीं होने दिया है।
positive
1,266
वह ग्लैमरस  दृश्यों में भी अच्छी  लगी  हैं।
positive
1,267
इस फिल्म में रामू ने अपनी ही फिल्म रंगीला के एक गीत का अत्यंत प्रासंगिक  उपयोग  किया है।
positive
1,269
साथ ही इस फिल्म के लिए विशेष रूप से लिखे गए गीत की पंक्तियां फिल्म की थीम से मेल खाती हैं।
positive
1,270
इस फिल्म का अंत सटीक और निर्दोषपूर्ण  है।
positive
1,271
समय का दबाव ऐसा है कि समर्थ और साहसी निर्देशक भी लकीर के फकीर बन रहे हैं।
negative
1,272
ऐसा नहीं है कि 'फटा पोस्टर निकला हीरो' निकृष्ट फिल्म है, लेकिन यह राजकुमार संतोषी के स्तर की फिल्म नहीं है।
negative
1,273
मजेदार तथ्य है कि इस फिल्म का लेखन और निर्देशन उन्होंने अकेले किया है।
positive
1,274
'फटा पोस्टर निकला हीरो' आठवें-नौवें दशक की फार्मूला फिल्मों की लीक पर चलती है।
neutral
1,277
उसका सपना है कि बेटा ईमानदार पुलिस आफिसर बने।
positive
1,278
बेटे का सपना कुछ और है।
neutral
1,279
वह हीरो बनना चाहता है।
neutral
1,280
संयोग से वह मुंबई आता है और फिर उसकी नई जिंदगी आरंभ होती है।
neutral
1,281
इस जिंदगी में तर्क और कारण न खोजें।
neutral
1,282
इस जिंदगी में तर्क और कारण न खोजें।
neutral
1,283
फिल्म में स्टॉक सीन हैं, जिन्हें घिसा-पिटा भी कहते हैं।
negative
1,284
उन दृश्यों में सजावट और एक्टिविटी में थोड़ी तब्दीली कर दी गई है।
positive
1,285
पूरी कोशिश है कि दर्शकों को चखे हुए हर मसाले का स्वाद मिले।
positive
1,286
फिल्म में इन दिनों के फैशन के हिसाब से बहादुरी और एक्शन के प्रसंग हैं।
positive
1,288
हमेशा लगता है कि कुछ छूट रहा है।
negative
1,289
कुछ मिसिंग है।
negative
1,290
फिल्म में जरूरत से ज्यादा गाने और आगे-पीछे की दृश्यों से उनकी संगति भी नहीं बैठती।
negative
1,291
एक गाना खत्म हुआ, कुछ सीन हुए और फिर एक गाना आ गया।
negative
1,292
फिल्म का हीरो पोल डांस करते हुए आयटम सॉन्ग भी गाता है।
neutral
1,293
इसे भी नएपन के तौर पर पेश किया जा सकता है।
neutral
1,294
इंटरवल तक यह फिल्म लंबे सिक्वेंस की वजह से ऊब पैदा करती है।
negative
1,296
फिर सहयोगी किरदार एक्टिव हो जाते हैं।
positive
1,297
संतोषी ने इन सहयोगी भूमिकाओं में मुकेश तिवारी, संजय मिश्रा, सौरभ शुक्ला और जाकिर हुसैन जैसे उम्दा कलाकारों से अच्छा काम लिया है।
positive
1,298
उनकी सही टाइमिंग और कॉमिकल अप्रोच से फिल्म कहीं-कहीं इटरेस्टिंग हो जाती है।
positive
1,299
इन दृश्यों में फिल्म हंसाती भी है।
positive
1,300
पूरा फोकस शाहिद कपूर पर होने की वजह से इलियाना डिक्रूज को ढंग से फ्रेम में रखा ही नहीं गया।
negative
1,301
अपने किरदार के चरित्र की तरह वह अस्थिर रहती हैं।
negative
1,302
पद्मिनी कोल्हापुरे गायब हो चुकी रोती-बिसूरती मां को पर्दे पर वापस ले आई हैं, जो हमेशा बेटे को कर्तव्यनिष्ठ होने का पाठ पढ़ाती रहती हैं।
neutral
1,303
'फटा पोस्टर निकला हीरो' में राजकुमार संतोषी किसी प्रकार की चालाकी या ढोंग नहीं करते।
positive
1,304
सहज तरीके से वे ढाई-तीन दशक पुरानी शैली और संरचना की फिल्म आज के दर्शकों के लिए पेश कर देते हैं।
neutral
1,306
कुछ तो गलती कर रहा हूं कि मेरी बात तुम तक पहुंच नहीं रही है।
negative
1,307
हमारी कठिनाई बूझिए न।
positive
1,308
पीके के इस स्वागत के कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के पेशावर में आतंकवादी मजहब के नाम पर मासूम बच्चों की हत्या कर देते हैं तो भारत में एक धार्मिक संगठन के नेता को सुर्खियां मिलती हैं कि 2021 तक वे भारत से इस्लाम और ईसाई धर्म समाप्त कर देंगे।
negative
1,309
धर्माडंबर और अहंकार में मची लूटपाट और दंगों से भरी घटनाओं के इस देश में दूर ग्रह से एक अंतरिक्ष यात्री आता है और यहां के माहौल में कनफुजियाने के साथ फ्रस्टेटिया जाता है।
negative
1,310
वह जिस ग्रह से आया है, वहां भाषा का आचरण नहीं है, वस्त्रों का आवरण नहीं है और झूठ तो बिल्कुल नहीं है।
neutral
1,311
सच का वह हिमायती, जिसके सवालों और बात-व्यवहार से भौंचक्क धरतीवासी मान बैठते हैं कि वह हमेशा पिए रहता है, वह पीके है।
neutral
1,312
धर्म के नाम पर चल रही राजनीति और तमाम किस्म के भेदभाव और आस्थाओं में बंटे इस समाज में भटकते हुए पीके के जरिए हम उन सारी विसंगतियों और कुरीतियों के सामने खड़े मिलते हैं, जिन्हें हमने अपनी रोजमर्रा जिंदगी का हिस्सा बना लिया है।
negative
1,313
आदत हो गई है हमें, इसलिए मन में सवाल नहीं उठते।
negative
1,314
हम अपनी मुसीबतों के साथ सोच में संकीर्ण और विचार में जीर्ण होते जा रहे हैं।
negative
1,315
राजकुमार हिरानी और अभिजात जोशी की कल्पना का यह एलियन चरित्र पीके हमारे ढोंग को बेनकाब कर देता है।
positive
1,316
भक्ति और आस्था के नाम पर 'रौंग नंबर' पर भेजे जा रहे संदेश की फिरकी लेता है।
neutral
1,318
'पीके' आज के समय की जरूरी फिल्म है।
positive
1,320
राजकुमार हिरानी और अभिजात जोशी की कथा-पटकथा सामाजिक विसंगति और कुरीति की गहराइयों में उतर कर विश्लेषण और विमर्श नहीं करती।
negative
1,321
सतह पर तैरते पाखंड को ही अपना निशाना बनाती है।
positive
1,322
मान सकते हैं कि 2 घंटे 33 मिनट की फिल्म में सदियों से चली आ रही आस्था की जड़ों और वजहों में जाने की गुंजाइश नहीं हो सकती थी, लेकिन धर्म सिर्फ कथित मैनेजरों और तपस्वियों का प्रपंच नहीं है।
neutral
1,323
इसके पीछे सुनिश्चित सामाजिक सोच और राजनीति है।
neutral
1,325
फिल्म यहीं अपने विचारों में फिसल जाती है।
negative
1,326
वैज्ञानिक सोच और आचार-व्यवहार के समर्थक किसी भी रूप में ईश्वर की सत्ता स्वीकार करेंगे तो कालांतर में फिर से विभिन्न समूहों के धर्म और मत पैदा होंगे।
negative
1,327
फिर से तनाव होगा, क्योंकि सभी अपनी आस्था के मुताबिक भगवान रचेंगे और फिर उनकी रक्षा करने का भ्रमजाल फैला कर भोली और नादान जनता को ठगेंगे।
negative
1,328
'पीके' सरलीकरण से काम लेती है।
positive
1,329
वैचारिक स्तर पर इस कमी के बावजूद 'पीके' मनोरंजक तरीके से कुछ फौरी और जरूरी बातें करती है।
positive
1,331
उनके समाधान की कोशिश भी करती है।
positive
1,332
राजकुमार हिरानी और अभिजात जोशी ने खूबसूरती से पीके की दुनिया रची है, जिसमें भैंरो और जग्गू (जगत जननी) जैसे किरदार हैं।
positive
1,333
जग्गू की मदद से पीके अपने ग्रह पर लौट पाने का रिमोट हासिल करता है।
positive
1,334
और फिर एक साल के बाद अपने ग्रह से दूसरे यात्री को लेकर आगे के शोध के लिए आता है।
neutral
1,335
सवाल है कि रिमोट मिलते हैं, उसे लौट जाने की ऐसी क्या हड़बड़ी थी?
neutral
1,336
इस दरम्यान जग्गू की उपकथा भी चलती है।
neutral
1,337
पाकिस्तानी सरफराज से उसके प्रेम और गलतफहमी की कहानी बाद में मूल कथा में आकर मिलती है।
neutral
1,338
बाबाओं के आडंबर और ईश्वर के नाम पर चल रहे ढोंग और प्रपंच को अनके फिल्मों में विषय बताया गया है।
negative