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993
विशाल भारद्वाज की फिल्मों का गीत-संगीत बहुत ओजपूर्ण, मधुर और कर्णप्रिय होता है।
positive
994
इस फिल्म के गीत-संगीत में भी वे सारी खूबियां हैं।
positive
996
विशाल भारद्वाज की इस हिम्मत के लिए बधाई कि इस फिल्म के पोस्टर पर फिल्म का टायटल चलन के मुताबिक अंग्रेजी में नही लिखा गया है।
positive
997
विनोद कापड़ी ने कलाकारों से लेकर लोकेशन तक में देसी टच रखा है।
positive
998
यह फिल्म भारतीय समाज के एक विशेष इलाके में चल रही भ्रष्ट व्यवस्था को उजागर करती है।
neutral
999
उन्होंने अपने किरदारों को सहज स्थितियों में रखा है और खास चुटीले अंदाज में गांव में चल रही मिलीभगत को पेश कर दिया है।
neutral
1,000
विनोद कापड़ी की ईमानदार पहली कोशिश की सराहना होनी चाहिए।
positive
1,001
उन्होंने उत्तर भारत के कड़वे यथार्थ को तंजिया तरीके से पेश किया है।
positive
1,002
फिल्मों के संवाद में हिंदी व्यंग्यकारों की परंपरा का मारक अंदाज है।
positive
1,004
कमी है तो निरंतरता की।
negative
1,005
पटकथा और दृश्यों के संयोजन की आंतरिक समस्या है।
negative
1,006
उसकी वजह से कथानक का असर कमजोर होता है।
negative
1,007
रवि किशन की भाषा बार-बार फिसलती है और हरियाणवी की जगह खड़ी हिंदी हो जाती है।
negative
1,009
नु कपूर और ओम पुरी के युगल दृश्य अच्छे बने पड़े हैं।
positive
1,011
राहुल बग्गा ने अर्जुन के किरदार की सादगी बरकरार रखी है।
positive
1,012
खक ने उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है।
negative
1,013
भीड़ के दृश्यों में ग्रामीणों का इस्तेमाल बेहतर है, लेकिन उन्हें हिदायत देनी थी कि वे कैमरा कौंशस न हों।
negative
1,014
एक-दो की वजह से कुछ दृश्यों का प्रभाव कम हो गया है।
negative
1,015
विनोद कापड़ी की 'मिस टनकपुर हाजिर हो' अच्छी सटायर फिल्म होते-होत रह गई है।
negative
1,017
विनोद कापड़ी के पास विचार और दृष्टि है।
positive
1,018
बस, उन्हें पर्दे पर सटीक तरीके से उतारने के अभ्यास की जरूरत है।
negative
1,019
साथ ही उसने अपना दबदबा कायम रखा है।
positive
1,020
इसका कारण है उनकी दमदार क्षमता।
positive
1,021
वो हर मिनट में अपना सौ प्रतिशत देते हैं।
positive
1,022
यही कारण है कि मिशन इम्पॉसिबल का जलवा 20 सालों के बाद भी कायम है।
positive
1,023
और तो और हर फिल्म पिछली से बेहतर नजर आती है।
positive
1,025
फिल्म का निर्देशन क्रिस्टोफर मैकक्वेरी ने किया है।
neutral
1,026
यह पहली फिल्म है जो उन्होंने बड़ी अच्छी बनाई है।
positive
1,027
इनमें पिछली चार फिल्मों की झलक भी देखने को मिलती है।
neutral
1,028
यह पैकेज भी दमदार है।
positive
1,029
कहानी 'मिशन इम्पॉसिबल' के स्टैंडर्ड को मैच करती हुई है।
positive
1,030
मगर प्रेजेन्टेशन का तरीका अलग है।
neutral
1,031
मैकक्वेरी ने हर किरदार को स्थापित करने का पूरा समय लिया है।
positive
1,032
दूसरी तरफ फिल्म तूफान की तरह दौड़ती है।
positive
1,033
रोमांच बना रहता है।
positive
1,034
फिल्म में एक्शन सीन अच्छे हैं।
positive
1,035
टॉम क्रूज की सुपरफास्ट मोटरसाइकल भी आपको लुभाएगी।
positive
1,036
फिल्म का टाइटल दर्शाते सीन पसंद आएंगे।
positive
1,037
फिल्म का प्रेजन्टेशन दर्शाता है कि ये फिल्म भी जेम्स बॉन्ड मूवी की तरह ही सफल सीरीज बनती जा रही है।
positive
1,038
यशराज की फिल्म 'बेवकूफियां' भी समय की चाशनी में डुबोई हुई पुरानी कहानी ही है।
negative
1,039
पता नहीं निर्माता आदित्य चोपड़ा को इस कहानी में क्या खास नजर आया और निर्देशक नूपुर अस्थाना ने क्या अलग देखा?
negative
1,040
संभव है कि निर्माता-निर्देशक ने यह सोचा हो कि एयरलाइंस और बैंक की नौकरी के साथ मंदी का तड़का कहानी को नया रूप देगा, लेकिन मंदी का दौर आज बस कहने के लिए है यह सभी जानते हैं।
neutral
1,041
कहानी को लेकर शायद इसके निर्माता-निर्देशक संशय की स्थिति में पहले से थे, तभी तो उन्होंने सोनम को लेकर स्वीमिंग पूल वाला सीन क्रिएट किया और उन्हें बिकनी में दिखाया।
neutral
1,042
कुल मिलाकर हिंदी फिल्मों में अच्छी कहानी का अभाव है, यह बात एक बार फिर सामने आई 'बेवकूफियां' के जरिए।
negative
1,043
फिल्म के बारे में कहा जा सकता है कि यह यशराज जैसी ऊंची दुकान का फीका पकवान है।
negative
1,044
अभिनय की बात की जाए, तो सोनम कपूर अपने अंदाज में सही दिखी हैं।
positive
1,045
आयुष्मान खुराना का भी काम इस फिल्म में पहले से अच्छा हुआ है।
positive
1,046
ऋषि कपूर ने कमाल का काम किया है।
positive
1,048
पर्दे पर सिर्फ कैरेक्टर नजर आते हैं।
neutral
1,049
गीत-संगीत की बात की जाए, तो फिल्म देखते हुए इसका मजा नहीं मिलता।
negative
1,050
सभी गीत आते-जाते से लगते हैं।
negative
1,051
बस 'गुलछर्रे..' को सुनना थोड़ा अच्छा लगता है।
positive
1,052
फिल्म में संगीत रघु दीक्षित का है।
neutral
1,053
गीत लिखे हैं अनविता दत्त ने।
neutral
1,054
सतीश कौशिक को रीमेक फिल्मों का उस्ताद निर्देशक कहा जा सकता है।
positive
1,055
देश भर के दर्शकों को रिझाने की फिक्र में उन्होंने विषय और प्रस्तुति का गाढ़ापन छोड़ दिया है।
negative
1,058
सतीश कौशिक ने हिंदी दर्शकों की अभिरुचि के अनुसार थोड़ा बदलाव किया है।
positive
1,059
सेठ गेंदामल के साथ बीते जमाने के अन्य किरदारों को अच्छी तरह गढ़ा गया है।
positive
1,060
इसमें समाज के हर तबके के किरदार हैं।
positive
1,061
सतीश कौशिक ने उनके परिवेश और संवाद के माध्यम से दर्शकों को हंसने की विसंगतियां दी हैं।
positive
1,062
फिल्म वर्तमान पर कटाक्ष करने के साथ अपने दौर को भी नहीं बख्शती।
negative
1,064
माही गिल ने अतीत की अभिनेत्री के अंदाज के साथ आवाज को भी परफॉरमेंस में अच्छी तरह उतारा है।
positive
1,065
अन्य भूमिकाओं में राजपाल यादव, असरानी, यशपाल शर्मा आदि समुचित सहयोग करते हैं।
positive
1,066
मीरा चोपड़ा में नयी नवेली की अनगढ़ता है।
negative
1,067
जैकी श्राफ और चंकी पांडे ऐसी भूमिकाएं कई बार निभा चुके हैं।
negative
1,068
इस फिल्म का गीत-संगीत कमजोर है।
negative
1,069
वीनस की फिल्म में यह कमी खलती है।
negative
1,070
पिछले दशकों में उनकी फिल्मों का संगीत दर्शकों को झुमाता रहा है।
positive
1,071
नागेश कुकुनूर 'हैदराबाद ब्लूज' से दस्तक देने के बाद लगातार खास किस्म की फिल्म निर्देशित करते रहे हैं।
positive
1,075
फिर भी मुक्त होने की उसकी छटपटाहट और जिजीविषा प्रभावित करती है।
positive
1,076
'लक्ष्मी' एक लड़की की हिम्मत और जोश की कहानी है।
positive
1,077
नागेश कुकुनूर ने एक सच्ची कहानी पर यह फिल्म बनाई है।
neutral
1,078
फिल्म के निर्माता नागेश कुकुनूर और सतीश कौशिक हैं।
neutral
1,079
दोनों फिल्म के मुख्य किरदारों में हैं।
neutral
1,080
ऐसा लगता है कि दोनों ने लड़कियों की खरीद-बिक्री पर एक उद्देश्यपूर्ण फिल्म बनाने का फैसला किया और फिर बजट सीमित रखने के लिए स्वयं अभिनय भी कर लिया।
neutral
1,081
चौदह वर्षीय लक्ष्मी (मोनाली ठाकुर) के गेटअप और मेकअप पर ध्यान नहीं दिया गया है।
negative
1,082
जरूरी तो नहीं कि मुद्दे पर बनी फिल्मों में जरूरी तकनीकी पक्षों को नजरअंदाज किया जाए।
negative
1,084
नागेश कुकुनूर और सतीश कौशिक अपनी भूमिकाओं में प्रभाव नहीं छोड़ पाते।
negative
1,085
छोटी भूमिका में शेफाली शाह अपने किरदार के साथ न्याय करती है।
positive
1,086
'लक्ष्मी' आर्ट फिल्म के प्रभाव में बनायी गई साधारण फिल्म है।
negative
1,087
फिर भी अखिलेश जायसवाल के क्रिएटिव साहस की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने एक फिल्म के माध्यम से 'मस्तराम' के महत्व को रेखांकित किया है।
positive
1,089
मसलन, एक अकेली महिला और उसकी बेटी।
neutral
1,091
बेटी के किरदार में डोएल धवन कुछ हद तक प्रभावी लगी हैं।
positive
1,092
शेष कलाकार सामान्य हैं।
neutral
1,093
शिव सुब्रमण्यम के किरदार का कोई औचित्य नहीं हैं।
negative
1,095
शेरनाज पटेल भूत-प्रेत के मामलों की जानकार प्रतीत हुई हैं।
positive
1,097
फिल्म का निर्देशन खराब है और कंटीन्यूटी तक का भी ख्याल नहीं रखा गया है।
negative
1,098
निर्देशक सचिन कुंडालकर की फिल्म 'अइया' भी प्यार में डूबी एक लड़की की कहानी है, लेकिन यह प्यार लोगों को लुभाने के बजाए थकाता प्रतीत होता है।
negative
1,099
फिल्म 'अइया' की कहानी एक मराठी परिवार की लड़की मीनाक्षी यानी रानी मुखर्जी के ही इर्द गिर्द घूमती है।
neutral
1,102
सचिन मराठी फिल्मों और नाटकों के अच्छे निर्देशक माने जाते हैं।
positive
1,104
अभिनय की बात करें तो रानी इस फिल्म में दो साल बाद दिखी हैं।
neutral
1,106
फिल्म में तीन आइटम नंबर हैं, लेकिन वे कहानी का साथ नहीं देते।
negative
1,107
सूर्या के रोल में दक्षिण की फिल्मों के स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन हैं।
positive
1,108
रानी से कोरियोग्राफर वैभवी मर्चेट ने काम तो लिया है, लेकिन यह भी डांस नंबरों से पता चलता है कि रानी अब इस तरह के नाच-गाने के लिए सही नहीं हैं।
negative
1,109
फिल्म देखते हुए ये नंबर्स दर्शकों पर खास प्रभाव नहीं छोड़ते।
negative
1,110
गीत अमिताभ भट्टाचार्य के हैं और संगीत अमित त्रिवेदी के।
neutral
1,111
'हिम्मतवाला' के रीमेक की साजिद खान की लस्त-पस्त कोशिश के बाद डेविड धवन की रीमेक 'चश्मेबद्दूर' से अधिक उम्मीद नहीं थी।
positive
1,112
डेविड धवन की शैली और सिनेमा से हम परिचित हैं।
neutral
1,113
उनकी हंसी की धार सूख और मुरझा चुकी है।
negative
1,114
पिछली फिल्मों में वे पहले जैसी चमक भी नहीं दिखा सके।
negative