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766
जैसी की उम्मीद होती है कि फिल्म इसमें उलझकर रह जाती है।
negative
767
कॉमेडी का इंतजार बना रहता है।
negative
768
फिल्म के बेकग्राउंड में एक बात और निकलकर सामने आती है कि कूपर और डेनिएला की पर्सनालिटी बिलकुल अलग है।
neutral
769
कुछ फनी सी है क्योंकि फैमेली मॉर्डन है।
positive
770
विदरस्पून 'लिगनी ब्लॉन्ड' में जरूर हिलोरियल लगी थी क्योंकि किरदार में उन्होंने खुदको ढाल लिया था।
positive
771
अच्छे जोक्स की कमी फिल्म में साफ झलकती है।
negative
772
इसी कारण फिल्म मजे के बजाए आपको ऊबाउ लगने लगती है।
negative
773
फिल्म मनोरंजक भी नहीं लगती।
negative
774
सुधीर मिश्र ने 'इंकार' में ऑफिस के परिवेश में 'यौन उत्पीड़न' का विषय चुना है।
neutral
775
अंतिम दृश्यों में आकर 'इंकार' साधारण और चालू फिल्म बन जाती है।
positive
776
अर्जुन रामपाल और चित्रांगदा सिंह ने अपने किरदारों को सही तरीके से पर्दे पर उतारा है।
positive
777
चित्रांगदा सिंह की भी भूमिका को लेखक-निर्देशक का समर्थन मिला है।
positive
778
सुधीर मिश्र अगर बोल्ड कल्पना करते और माया के साथ जाते तो 'इंकार' 21वीं सदी में महेश भट्ट की 'अर्थ' के समान एक प्रोग्रेसिव फिल्म हो जाती।
positive
779
अफसोस एक अच्छी सोच और कोशिश अपने निष्कर्ष में प्रभावहीन हो गई।
negative
781
हालांकि हर सीक्वल पिछली की तुलना में कम प्रभावी रहा।
negative
782
इन फिल्मों से दिखने लगा कि क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी पर भी फोकस करना जरूरी होता है।
negative
783
'इंसीडियस 3' को जेसन ब्लम, जेम्स वेन और ओरेन पेली ने फिल्म को को-प्रोड्यूस किया है।
neutral
784
फिल्म के तीसरे हिस्से में फिल्म के माध्यम से रोचक किरदार दर्शकों से मुखातिब होता है।
positive
785
मगर इस बीच यह फिल्म अच्छा काम करती है।
positive
786
फिल्म अविश्वसनीय रूप से धीमी और शांत है।
negative
787
प्रकाश व्यवस्था और डरावना संगीत आपके मनोरंजन को बढ़ाने का काम करता है।
positive
788
हॉरर पसंद करने वालों के लिए यह अच्छे अनुभव के समान होता है।
positive
789
वहां कई ऐसे सीन हैं जो आपको अपनी सीट छोड़ने के लिए मजबूर कर दें।
negative
790
कुछ सीन तो कमाल के हैं।
positive
791
यह वो सीन है जो आपको लंबे समय तक याद रह जाएं।
positive
792
दर्शकों को भूत से डराने का तरीका बहुत कारगर है।
positive
793
आमतौर पर हॉरर फिल्मों में ऐसा कम ही देखने को मिलता है।
positive
794
इसलिए हॉरर पसंद करने वालों के यह अनुभव बढ़िया रह सकता है।
positive
795
मुजफ्फर अली की ‘गमन’, ’आगमन’ और ‘उमराव जान’ जैसी उल्लेखनीय फिल्मों के मुरीद के लिए ‘जानिसार’ गहरे अवसाद का सबब बनती है।
negative
796
मुजफ्फर अली पीरियड गड़ने में माहिर हैं।
positive
797
वे इस फिल्म में भी सफल हैं।
positive
798
कमी है तो उनके मुख्य किरदारों के गठन में और उन्हें निभा रहे कलाकार इमरान अब्बास और पर्निया कुरैशी भी कमजोर हैं।
negative
799
वे मौजूद कहानी भी ढंग से अभिव्यक्त नहीं कर पाते।
negative
800
वे खुद भी प्रभाव नहीं छोड़ पाते।
negative
801
सहयोगी कलाकारों में अनेक शौकिया कलाकार हैं, जो फिल्म को और भी बेअसर करते हैं।
negative
802
अगर हम फिल्म के बजाय इस फिल्म की तस्वीरें देखें और उनकी प्रदर्शनी में शामिल हों तो ज्यादा आनंदित हो सकते हैं।
negative
803
सब कुछ बहुत ही खूबसूरती से संजोया गया है।
positive
804
स्थिर और स्टिल में यह खूबसूरती बरकरार रहती।
positive
805
चलते-फिरते ही उनकी कमियां नजर आने लगती हैं।
negative
806
दूसरे फिल्म की कथा भी इतनी दमदार नहीं है कि वह बांधे रख सके।
negative
810
सनी लियोन को संवाद और भाव के बीच तारतम्य बिठाने पर और मेहनत करनी पड़ेगी।
negative
811
बाकी कलाकार बस फिलर के तौर पर इस्तेमाल हुए हैं।
negative
812
फिल्म खूबसूरत गोवा में सेट है, वह भी बारिश के सुहाने मौसम जून में।
positive
813
उसके बावजूद वहां की खूबसूरती पर्दे पर नहीं आ सकी है।
negative
814
कहने को फिल्म थ्रिलर जॉनर की है, पर रोमांच, एक्शन, स्टंट यहां तक कि एक घूंसा भी चलाने की जहमत नहीं उठाई गई।
negative
815
फिल्म का नायक फ्रांसिस (सचिन जे. जोशी) कॉन यानी छलिया है।
negative
816
दर्शकों को जबरन सीट से बांधे रखने के लिए कहानी नॉन-लीनियर तरीके से बयां की गई है।
negative
817
वह दर्शकों को कुछ हद तक कन्फ्यूज (एंगेज तो नहीं कहा जाएगा) रखता है।
negative
818
फिल्म छोटी है और घटनाएं तेजी से घटती हैं, यही फिल्म की नाममात्र खूबी है।
positive
820
वे गहरा प्रभाव नहीं छोड़ पाते।
negative
821
बॉस मैन के रूप में नसीरुद्दीन शाह ने अपनी खूबियों से किरदार को खास बनाया है।
positive
822
सनी लियोन निराश करती हैं।
negative
823
फिल्म में उनके व सचिन जोशी के किरदारों के बीच की केमिस्ट्री बिल्कुल फीकी है।
negative
825
फिल्म का एक गाना 'कभी जो बादल बरसे' लोगों के जहन में रहेगा।
positive
826
लग सकता है कि वे सलमान खान की नकल कर रहे हैं।
negative
827
इस दौर में मुख्यधारा की फिल्मों में मौलिकता की चाह रखेंगे तो थिएटर के बाहर ही रहना होगा।
negative
828
आशीष आर. मोहन की 'खिलाड़ी 786' की प्रस्तुति में हाल-फिलहाल में सफल रही मसाला फिल्मों का सीधा प्रभाव है।
positive
829
'खिलाड़ी 786' का लेखन हिमेश रेशमिया ने किया है।
neutral
830
सेकेंड लीड में वे मनसुख भाई के रूप में भी दिखाई पड़ते हैं।
neutral
831
पिछली कुछ फिल्मों में दर्शकों द्वारा नापसंद किए जाने के बाद पर्दे पर आने का उन्होंने नया पैंतरा अपनाया है।
positive
834
'खिलाड़ी 786' में अक्षय कुमार उसी चिर-परिचित बेफिक्र और जवांमर्द अंदाज में है।
positive
835
चोरों के परिवार के 72 सिंह नकली पुलिस का काम बहादुरी से अंजाम देता है।
positive
836
इस झूठ की बुनियाद पर रचा गया ड्रामा सतही और कमजोर है।
negative
837
इस फिल्म में लॉजिक, कार्य-कारण या विश्वसनीयता की उम्मीद न करें।
negative
838
मुख्य उद्देश्य है कि दर्शकों को लगातार हंसते रहने के दृश्य मिलते रहें।
positive
840
निर्देशक आशीष आर. मोहन इसमें सफल रहे हैं।
positive
841
रोहित शेट्टी के असिस्टेंट रहे आशीष आर. मोहन ने अपने उस्ताद के नक्श-ए-कदम पर चलने की सफल कोशिश की है।
positive
842
और हां, हिमेश रेशमिया की गायकी और मौसिकी भी हैं इस फिल्म में।
neutral
843
उन्होंने अपने सारे हुनर प्रदर्शित किए हैं।
positive
844
सलमान खान की इधर की फिल्में उसी श्रेणी में आती हैं।
neutral
845
सलमान खान की लोकप्रियता का यह आलम है कि अगर कल को कोई उनकी एक हफ्ते की गतिविधियों की चुस्त एडीटिंग कर फिल्म या डाक्यूमेंट्री बना दे तो भी उनके फैन उसे देखने जाएंगे।
positive
846
ब्रांड सलमान को ध्यान में रख कर बनाई गई फिल्मों में सारे उपादानों के केंद्र में वही रहते हैं।
positive
847
साजिद नाडियाडवाला ने इसी ब्रांड से जुड़ी कहानियों, किंवदंतियो और कार्यों को फिल्म की कहानी में गुंथा है।
positive
848
मूल तेलुगू में 'किक' देख चुके दर्शक बता सकेगे कि हिंदी की 'किक' कितनी भिन्न है।
neutral
849
सलमान खान ने इस 'किक' को भव्यता जरूर दी है।
positive
850
फिल्म में हुआ खर्च हर दृश्य में टपकता है।
positive
851
रोमांस, एक्शन, चेज, कॉमेडी, सॉन्ग एंड डांस और इमोशन से भरपूर 'किक' से साजिद नाडियाडवाला केवल सलमान खान के प्रशंसकों को खुश करने की कोशिश में हैं।
positive
852
हिंदी फिल्मों में स्क्रिप्ट लेखन का यह खास कौशल है, जो पॉपुलर स्टार की फिल्मों में आजमाया जाता है।
positive
853
'किक' जैसी फिल्मों का एकमात्र उद्देश्य आम दर्शकों का मनोरंजन करना है।
positive
854
आम दर्शक अपने परिवार के सदस्यों के साथ उसका आनंद उठा सकें।
positive
856
इंटरवल के पहले का विस्तार लंबा हो गया है।
negative
857
देवी और उसके पिता के रिश्ते को स्थापित करने वाले दृश्य नाहक खींचे गए हैं
negative
858
हम दशकों से ऐसी छेड़खानियां और बदमाशियां देखते आए हैं।
negative
860
देवी और डेविल की हरकतों में कई बार लॉजिक की परवाह नहीं की गई है, लेकिन क्या सलमान खान के प्रशंसक इन पर गौर करते हैं?
negative
861
'किक' में सलमान खान पूरे फॉर्म में हैं।
positive
863
सलमान ने एक्शन के दृश्यों में आवश्यक फुर्ती दिखाई है।
positive
864
रोमांस और डांस का उनका खास अंदाज यहां भी मौजूद है।
positive
865
कुछ दृश्यों में वे अवश्य लड़खड़ा गए हैं।
negative
866
नवाज की तारीफ करनी होगी कि चंद दृश्यों के अपने किरदार का उन्होंने अदायगी से यादगार बना दिया है।
positive
867
चटखारे लेकर उनके बोलने के अंदाज की नकल होगी।
negative
868
उनमें वह जंचती हैं।
positive
869
संवाद अदायगी और नाटकीय दृश्यों के लिए उन्हें और मेहनत करनी होगी।
negative
870
सौरभ शुक्ला, मिथुन चक्रवर्ती, विपिन शर्मा और संजय मिश्रा अपनी भूमिकाओं में उपयुक्त हैं।
positive
871
ईद के मौके पर सलमान खान और साजिद नाडियाडवाला की पेशकश 'किक' आम दर्शकों का ध्यान में रख कर बनाई गई सलमान खान की विशेषताओं की फिल्म है।
positive
872
शाद अली ने इस मूल धारणा का आज के माहौल में कुछ किरदारों के जरिए पेश किया है।
neutral
873
वे वहां के ग्रे शेड के किरदारों के साथ मनोरंजन रचते हैं।
positive
875
देव को मारने निकले भैयाजी के गुर्गे का सीक्वेंस प्रहसन बन कर रह गया है।
negative
876
शाद अली पटकथा में आसान रास्ते चुनते हैं।
positive
877
रणवीर सिंह की स्वाभाविक ऊर्जा का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
negative
878
गोविंदा ने अपने किरदार को समझा और सही ढंग से पेश किया हे।
positive