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|---|---|---|
541 | सभी प्रमुख किरदार इतने दमदार हैं कि हर कलाकार अपने मिले किरदारों को छोड़ उन्हें निभाने की इच्छा जाहिर करता रहा। | positive |
542 | इसके बावजूद अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार और जया भादुड़ी को भी समान दृश्य और महत्व दिया गया। | positive |
543 | 'शोले' की कहानी सामान्य सी थी। | neutral |
544 | 'मेरा गांव मेरा देश' में उसकी झलक मिलती है। | neutral |
545 | 'शोले' ने ईमानदार पुलिस अधिकारी और डकैत के बीच की तनातनी का वितान वृहद और प्रभावशाली बना दिया था। | positive |
546 | फिल्म की नाटकीयता गतिशील है। | positive |
547 | एक सिक्वेंस खत्म होने के थोड़ी देर बाद ही दूसरा सिक्वेंस या गाना आ जाता है। | positive |
548 | कह लें कि 'शोले' देखते समय सांस थमी रहती है। | positive |
549 | 38 साल पहले की तकनीकी सीमाओं के बावजूद 'शोले' का थ्रिल आज भी रोमांचित करता है। | positive |
550 | इस फिल्म की विशेषताओं में पटकथा और संवाद का उल्लेख आवश्यक हो जाता है। | positive |
551 | फिल्म की पटकथा कहीं भी शिथिल नहीं होती है। | positive |
552 | प्रसंग-दर-प्रसंग रोचकता बनी रहती है, जो क्लाइमेक्स में उत्कर्ष पर पहुंचती है। | positive |
553 | अब तो रामलीला की तरह सब कुछ मालूम होने के बावजूद दर्शक इसे बार-बार देखना पसंद करते हैं। | positive |
554 | फिल्म के किरदारों के साथ वे पहले ही संवाद बोलने से नहीं चूकते। | neutral |
555 | फिर भी न तो आनंद कम होता है और न 'शोले' को फिर से देखने की इच्छा। | positive |
556 | इस फिल्म के संवाद भारतीय समाज के दैनंदिन जीवन में मुहावरों की तरह इस्तेमाल होते हैं। | neutral |
557 | सभी के अपने प्रिय संवाद हैं। | positive |
558 | 38 सालों के बाद 3 डी फॉर्मेट में रिलीज हुई 'शोले 3 डी' आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से पुराने आनंद और अनुभव को बढ़ा देती है। | positive |
559 | फिल्म के जिन दृश्यों का 3 डी रूपांतरण किया गया है, उनका प्रभाव निश्चित ही बढ़ गया है। | positive |
560 | ट्रेन सिक्वेंस में लट्ठों का गिरना, फाइट सिक्वेंस में गोलियों चलना, होली के दृश्य में रंगों का उड़ना, क्लाइमेक्स में हेमा मालिनी का डांस और उसके पहले गब्बर के गैंग से जूझते अमिताभ बच्चन ़ ़ ़इन सभी प्रसंगों में 3 डी प्रभावशाली है। | positive |
561 | पुरानी 'शोले' का रोमांच गाढ़ा हो जाता है। | negative |
562 | गर पूरी फिल्म 3 डी होती तो यह रोमांच स्थायी और गहरा होता। | positive |
563 | 3 डी रूपांतरण के साथ फिल्म के गीत और पाश्र्र्व संगीत को रिक्रिएट किया गया है। | positive |
564 | आधुनिक साउंड सिस्टम से लैस सिनेमाघरों में फिल्म देखते समय ध्वनि का कमाल और प्रभाव महसूस होगा। | positive |
565 | संभव है पुरानी फिल्म के प्रशंसकों को 3 डी रूपांतरण बनावटी और कृत्रिम लगे। | positive |
566 | 'शोले 3 डी' में वैसी दक्षता और गुणवत्ता का अभाव है। | negative |
567 | फिर भी क्लासिक फिल्मों के रीमेक से बेहतर प्रयास उसका रिस्टोरेशन या रूपांतरण है। | positive |
568 | इस संदर्भ में 'शोले 3 डी' का प्रयास सीमाओं के बावजूद सराहनीय है। | positive |
571 | अभिनय की बात करें तो उपरोक्त सभी कलाकारों ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया है। | positive |
572 | खासकर ट्रेन कंट्रोलर के रूप में बोमन ईरानी तो कई बार बहुत भारी पड़ते हैं अन्य कलाकारों पर। | negative |
573 | उन्होंने कमाल का अभिनय किया है। | positive |
574 | फिल्म की सिनेमैटोग्राफी कमाल की है, पर्दे पर दृश्य सजीव लगते हैं और खूबसूरत भी। | positive |
576 | कुल मिलाकर तेज रोमांचक है। | positive |
577 | दृश्यों के साथ-साथ दिल्ली की बोली और आज के युवाओं की आम बोलचाल वाले संवाद इसमें खूब हैं। | positive |
578 | इनके साथ ही आम गालियां भी फिल्म में खूब सुनने को मिलती हैं, लेकिन ये सब कहानी और चरित्र को रीयल बनाते प्रतीत होते हैं। | positive |
579 | फिल्म का मुख्य चरित्र है सोनू दिल्ली यानी इमरान हाशमी, जिसने अपना कदम गलत धंधे में डाल लिया है। | negative |
580 | उसकी सोच है कि जब सभी के पास हथियार होगा, तो कोई किसी से कम क्यों होगा और इस काम में पैसा भी अधिक मिलता है। | neutral |
581 | उसे इस काम में महारत हासिल है। | positive |
582 | अभिनय की बात करें, तो इमरान हाशमी और रणदीप हुडा ने बहुत अच्छा काम किया है। | positive |
583 | वे सही में दिल्ली में रहने वाले जैसे लगते भी हैं। | positive |
584 | ईशा गुप्ता भी ठीकठाक लगी हैं। | positive |
585 | इमरान और भट्ट कैंप की फिल्मों की हीरोइनें जो कुछ करती हैं, ईशा ने भी उस काम को भलीभांति किया है। | positive |
586 | वे सुंदर दिखी हैं। | positive |
587 | अन्य अभिनेताओं में जिशान अयूब ने सोनू के दोस्त बल्ली का और मनीष चौधरी ने मंगल सिंह तोमर की भूमिका खूबसूरती से निभाई है | positive |
589 | इमरान और भट्ट कैंप की अन्य फिल्मों की तरह इसके भी गीत-संगीत मधुरता लिए हैं। | positive |
590 | खासकर तू ही मेरा खुदा.. और तेरा दीदार हुआ.. तो बेहद खूबसूरत हैं। | positive |
592 | इस दरम्यान उनके चेहरे पर हाव-भाव जूनियर नाना पाटेकर की तरह लगते हैं। | neutral |
594 | तुम बिन की सफलता के बाद प्रियांशु चटर्जी की प्रतिभा का हिंदी सिनेमा में बेहतर उपयोग किया ही नहीं। | negative |
596 | उनके एक्सप्रेशंस तो सेलुलाइड से अच्छे टेनिस कोर्ट में आ जाते हैं। | negative |
598 | गुलशन ग्रोवर जब टीटी को क्लास वन के अधिकारी बताते हैं तो उनकी वरिष्ठता के साथ ही काम का सम्मान कम हो जाता है। | negative |
599 | फिल्म में सिग्नेचर गाने की तर्ज पर असदउल्ला खान गालिब की एक गजल प्रयुक्त हुई है लेकिन लचर पिक्चराइजेशन के चलते इसके प्रभावी बोल भी असर नहीं कर पाते। | negative |
600 | फिल्म की कहानी बिखरी हुई है और पटकथा तो पहले ड्राफ्ट की ही लगती है। | negative |
601 | ऐसा लगता है कि लेखक के अचेतन में कहानी स्पष्ट हुई और उसने चेतन मन से पूरी कहानी दर्शकों के सामने समझने के लिए छोड़ दी। | negative |
602 | सुडोकू सॉल्व करने में महारत हासिल करने वाले भी अगर इस कहानी के पेंच सुलझा ले आप बाजी हारने का दावा कर सकते हैं। | negative |
603 | फिल्म के निर्देशन और तकनीक पक्ष की बात न ही की जाए तो बेहतर है। | negative |
604 | ऐसी प्रेमकहानियां हिंदी फिल्मों के लिए नई नहीं हैं। | negative |
605 | फिर भी सौरभ शुक्ला की फिल्म पप्पू कांट डांस साला चरित्रों के चित्रण, निर्वाह और परिप्रेक्ष्य में नवीनता लेकर आई है। | positive |
606 | सौरभ शुक्ला टीवी के समय से ऐसी बेमेल जोडि़यों की कहानियां कह रहे हैं। | negative |
607 | उनकी कहानियों का यह स्थायी भाव है। | neutral |
608 | वह नायिका के समकक्ष होने की कोशिश में अपनी विसंगतियों से हंसाता है। | negative |
610 | पप्पू कांट डांस साला की मराठी मुलगी महक और बनारसी छोरा विद्याधर में अनेक विषमताएं हैं, लेकिन मुंबई में पहचान बनाने की कोशिश में दोनों समांतर पटरियों पर चले आते हैं। | neutral |
611 | सौरभ शुक्ला ने एक सिंपल सी प्रेमकहानी सहज तरीके से चित्रित की है। | positive |
612 | विनय पाठक ऐसे सिंपल चरित्र कई फिल्मों में निभा चुके हैं। | neutral |
613 | अपनी इस इमेज से उन्हें कई फायदे हो जाते हैं। | positive |
614 | लेखक-निर्देशक भी अतिरिक्त दृश्यों से बच जाते हैं। | positive |
615 | समस्या वैसे दर्शकों के साथ हो सकती है, जो पहले से विनय पाठक और उनकी फिल्मों को नहीं जानते। | negative |
616 | नेहा धूपिया ने महक के किरदार को सुंदर तरीके से निभाया है। | positive |
617 | उन्होंने दृश्य की जरूरतों के मुताबिक बगैर मेकअप के शॉट देने में भी गुरेज नहीं किया है। | positive |
618 | महक के द्वंद्व और सोच को वह ढंग से अभिव्यक्तकरती हैं। | positive |
619 | रजत कपूर के किरदार पलाश को विस्तार नहीं मिल पाया है। | negative |
620 | संजय मिश्रा चंद दृश्यों की झलक में ही अपनी छटा छोड़ जाते हैं। | positive |
621 | पप्पू कांट डांस साला एक सीधी सरल फिल्म है, जो बासु चटर्जी और हृषीकेश मुखर्जी के दौर की फिल्मों से जुड़ती है। | positive |
622 | 'कांजीवरम', 'विरासत', 'हेरा फेरी', 'भूल भुलैया', 'हंगामा', 'हलचल' और 'गर्दिश' जैसी फिल्मों के निर्देशन कर चुके प्रियदर्शन से इस तरह के सिनेमा की उम्मीद तो बिल्कुल भी नहीं है। | negative |
623 | इस फिल्म को देखते हुए कई बार तो यह ख्याल आता है कि कहीं निर्देशक थककर आराम तो नहीं कर रहा। | negative |
624 | आगे की कहानी के लिए आपको फिल्म देखनी चाहिए! | neutral |
625 | अभिनय की बात करें तो नाना पाटेकर की खामोशी इस फिल्म में दर्शकों के दिमाग के साथ मजाक करती है। | negative |
626 | वही खामोशी जो 'अब तक छप्पन' और 'खामोशी द म्यूजिकल' में आपके रोंगटे खड़े कर देती है। | positive |
627 | एक अच्छे अभिनेता को टाइपकास्ट कर कैसे हिंदी फिल्मों में औसत अभिनेता की कैटेगरी में डाल दिया जाता है। | negative |
628 | श्रेयस तलपदे से बेहतर इसका उदाहरण हाल-फिलहाल के दिनों में शायद ही देखने को मिले। | neutral |
629 | असरानी अभी तक अंग्रेजों के जमाने के जेलर वाले चोले से बाहर नहीं निकल पाए हैं। | negative |
630 | परेश रावल और ओम पुरी के पास करने को कुछ खास नहीं था। | negative |
632 | कई ऐसे दृश्य हैं जो बेवजह हैं या जिनको हटाकर फिल्म को चालीस मिनट तक कम किया जा सकता था। | negative |
633 | 'हेरा-फेरी' के एक-एक दृश्य और संवाद में हास्य पिरोने वाले नीरज वोरा की कलम का जादू इस बार बेअसर है। | negative |
634 | हां, उनके शुद्ध हिंदी में लिखे संवाद जरूर हिंदी पट्टी के दर्शकों को फील गुड करवा सकते हैं। | positive |
635 | साजिद-वाजिद और जलीस शेरवानी एक भी ऐसा गाना कंपोज नहीं कर सके हैं जो गुनगुनाया भी जाए। | negative |
636 | फिल्म की शूटिंग महाराष्ट्र के वाई में हुई है। | neutral |
637 | जगह इतनी खूबसूरत है कि वहां नौसिखिया कैमरामैन भी कुछ अच्छे दृश्य कैप्चर कर सकता है। | positive |
638 | रितेश बत्रा की 'द लंचबॉक्स' सुंदर, मर्मस्पर्शी, संवेदनशील, रियलिस्टिक और मोहक फिल्म है। | positive |
639 | हिंदी फिल्मों में मनोरंजन की आक्रामक धूप से तिलमिलाए दर्शकों के लिए यह ठंडी छांव और बार की तरह है। | positive |
640 | तपतपाते बाजारू मौसम में यह सुकून देती है। | positive |
641 | 'द लंचबॉक्स' मुंबई के दो एकाकी व्यक्तियों की अनोखी प्रेमकहानी है। | positive |
642 | मुंबई की भागदौड़ और व्यस्त जिंदगी में खुद तक सिमट रहे व्यक्तियों की परतें खोलती यह फिल्म भावना और अनुभूति के स्तर पर उन्हें और दर्शकों को जोड़ती है। | positive |
643 | साजन और इला हिंदी फिल्मों के नियमित किरदार नहीं हैं। | negative |
644 | रिटायरमेंट की उम्र छू रहे विधुर साजन और मध्यवर्गीय परिवार की उपेक्षित बीवी इला को स्वाद के साथ उन शब्दों से राहत मिलती है, जो टिफिन के डब्बे में किसी व्यंजन की तरह आते-जाते हैं। | neutral |
645 | एक-दूसरे के प्रति वे जिज्ञासु होते हैं। | positive |
646 | मिलने की भी बात होती है, लेकिन ऐन मौके पर साजन बगैर मिले लौट आते हैं। | neutral |
647 | इला नाराजगी भी जाहिर करती है। | negative |
648 | साजन और इला के अलावा 'द लंचबॉक्स' में अनाथ असलम शेख भी हैं।। | neutral |
649 | दोनों के रिश्ते में अनोखा जुड़ाव है। | positive |
650 | असलम के साथ हम मुंबई की जिंदगी की एक और झलक देखते हैं। | positive |
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