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|---|---|---|
652 | 'ये जो है जिंदगी' के रिकॉर्डेड एपीसोड देखते समय साजन हमें अपनी बीवी से मिलवा देते हैं। | neutral |
654 | रितेश बत्रा ने किरदारों के चित्रण में मितव्ययिता से फिल्म को चुस्त रखा है। | positive |
656 | उनकी अदृश्य मौजूदगी अधिक कारगर और प्रभावशाली बन पड़ी है। | positive |
657 | इरफान (साजन) और निम्रत कौर (इला) सहज, संयमित और भावपूर्ण अभिनय के उदाहरण हैं। | positive |
658 | डायनिंग हॉल के टेबल पर अपरिचित टिफिन को खोलते समय इरफान के एक-एक भाव को पढ़ा सकता है। | positive |
659 | टिफिन खोलते और व्यंजनों की सूंघते-छूते समय इरफान के चेहरे पर संचरित भाव अंतस की खुशी जाहिर करता है। | positive |
660 | ऐसे कई दृश्य हैं, जहां इरफान की खामोशी सीधे संवाद करती है। | positive |
661 | निम्रत कौर ने उपेक्षित पत्नी के अवसाद को अपनी चाल-ढाल और मुद्राओं से व्यक्त किया है। | positive |
662 | इन दोनों प्रतिभाओं के योग में नवाजुद्दीन सिद्दिकी का स्वाभाविक अभिनय अतिरिक्त प्रभाव जोड़ता है। | positive |
663 | हिंदी फिल्मों से वंचित शहरी जीवन के अंतरों में बसे आम आदमी के सुख-दुख को यह समानुभूति के साथ पेश करती है। | positive |
664 | फिल्म की खूबियों में इसका छायांकन और पाश्र्र्व संगीत भी है। | positive |
665 | फिल्म के रंग और ध्वनि में शहर की ऊब, रेलमपेल, खुशी और गम के साथ ही हर व्यक्ति से चिपके अकेलेपन को भी हम देख-सुन पाते हैं। | positive |
666 | जब भी कोई निर्देशक अपनी बनाई लीक से ही अलग चलने की कोशिश में नई विधा की राह चुनता है तो हम पहले से ही सवाल करने लगते हैं-क्या जरूरत थी? | neutral |
667 | उन्होंने साहसी कदम उठाया है और अपने दो पुराने मौलिक प्रयासों की तरह इस बार भी सफल कोशिश की है। | positive |
668 | 'घनचक्कर' 21वीं सदी की न्यू एज कामेडी है। | positive |
669 | किरदार, स्थितियों, निर्वाह और निरूपण में परंपरा से अलग और समकालीन 'घनचक्कर' से राजकुमार गुप्ता ने दर्शाया है कि हिंदी सिनेमा नए विस्तार की ओर अग्रसर है। | positive |
670 | सामान्य सी कहानी है। | neutral |
671 | राजकुमार गुप्ता की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कहानी के सस्पेंस को उसके खुलने तक बनाए रखा है। | positive |
672 | कहानी की गति कभी धीमी और कभी तेज जरूर होती है, लेकिन निर्देशक की पकड़ नहीं छूटी है। | positive |
673 | उन्हें इमरान हाशमी और विद्या बालन का भरपूर सहयोग मिला है। | positive |
674 | दोनों कलाकार अंत तक अपने किरदारों में रहे हैं। | positive |
675 | पिछली फिल्मों की लगातार सफलता और खास छवि एवं ख्याति के बावजूद दोनों कलाकारों द्वारा 'घनचक्कर' का चयन उल्लेखनीय साहसिक कदम है। | positive |
676 | इमरान हाशमी ने अपनी छवि से भिन्न एक कमजोर, सिंपल और पड़ोसी किरदार को शिद्दत से निभाया है। | positive |
677 | यही बात विद्या बालन के बारे में भी कही जा सकती है। | neutral |
678 | उन्होंने नीतू को पर्दे पर उसकी खासियतों के साथ पेश किया है। | positive |
679 | नीतू की भावमुद्राओं में वह सफल रही हैं। | positive |
680 | पंजाबी लहजा कई बार उनके संवादों से फिसल गया है। | negative |
681 | राजेश शर्मा और नमित दास ने भी अपने किरदारों को कैरीकेचर होने से बचाते हुए इंटरेस्ट बनाए रखा है। | positive |
682 | फिल्म के अंतिम दृश्यों में आया कलाकार अपने किरदार के अनुरूप प्रभावशाली नहीं है। | negative |
683 | राजकुमार गुप्ता ने दैनंदिन जीवन में हास्य चुना है। | neutral |
684 | इस फिल्म की कॉमेडी आनी वास्तविकता और यथार्थपूर्ण चित्रण से ब्लैक कॉमेडी की ओर सरकती दिखती है। | positive |
685 | कुछ प्रसंगों में संवाद और दृश्यों की कसावट का अभाव खलता है। | negative |
686 | फिर भी राजकुमार गुप्ता ने जिस संजीदगी और नवीनता के साथ किरदारों को गढ़ा और रचा है, वे इन कमियों को ढक देते हैं। | positive |
687 | इसमें उन्हें इमरान हाशमी और विद्या बालन से मदद मिलती है। | positive |
688 | फिल्म में गीत-संगीत का उपयोग नहीं के बराबर है। | negative |
689 | फिल्म की गति बनाए रखने में पाश्र्र्व संगीत का योगदान है। | positive |
691 | इंद्र कुमार निर्देशित 'ग्रैंड मस्ती' इसी रूप में प्रचारित की गई है। | neutral |
692 | सामान्य जिंदगी में हर तबके के स्त्री-पुरुष खास अवसरों और पलों में अश्लील और एडल्ट लतीफों का आनंद लेते हैं। | positive |
693 | इस फिल्म को हम सिपल एडल्ट कॉमेडी की तरह ही देखें। | neutral |
694 | एडल्ट कॉमेडी फिल्मों में सेक्स संबंधी हरकतें, प्रसंग और पहलू होते हैं। | neutral |
695 | फिल्म के लेखक मिलाप झावेरी और तुषार हीरानंदानी ने पुरानी 'मस्ती' की स्टोरी लाइन को ही अपनाया है। | neutral |
696 | उसे ही ग्रैंड करने की असफल कोशिश की है। | negative |
698 | सामान्य फिल्मों में ऐसे दृश्य और व्यवहार देखे जा चुके हैं। | neutral |
700 | तीनों कलाकारों से निर्देशक लगातार ओछी, फूहड़ और निम्नस्तरीय हरकतें करवाते हैं। | negative |
701 | फिल्म में ऐसी हरकतों के उपादान के लिए छह लड़कियां हैं। | neutral |
703 | उनकी सेक्सुएलिटी का दोहन किया जाता है। | neutral |
704 | इंद्र कुमार की 'ग्रैंड मस्ती' कहीं से भी ग्रैंड नहीं हो पाई है। | negative |
705 | दरअसल यह ब्रांड मस्ती का दोहराती सी है। | neutral |
706 | नवीनता और मौलिकता की कमी से यह एडल्ट कॉमेडी ढंग से गुदगुदा भी नहीं पाती। | negative |
707 | संक्षिप्त साक्ष्यों के आधार पर विभु पुरी ने शिवकर तलपड़े की कथा बुनी है। | neutral |
708 | पीरियड फिल्मों के लिए आवश्यक तत्वों को जुटाने-दिखाने में घालमेल है। | negative |
709 | कलाकारों के चाल-चलन और बात-व्यवहार को 19 वीं सदी के अनुरूप नहीं रखा गया है। | negative |
710 | बोलचाल, पहनावे और उपयोगी वस्तुओं के उपयोग में सावधानी नहीं बरती गई है। | negative |
711 | हां, सेट आकर्षक हैं, पर सब कुछ बहुत ही घना और भव्य है। | positive |
714 | पिता और भाई को उसके फितूर पसंद नहीं आते। | negative |
716 | एक है सितारा, जो पहली मुलाकात के बाद ही उसके दिल में बिंध जाती है और दूसरे सनकी शास्त्री...जिन्हें लगता है कि शिवकर उनके प्रयोगों को आगे ले जा सकता है। | neutral |
718 | नतीजतन कहानी रोचक होने के बावजूद प्रभावित नहीं कर पाती। | negative |
721 | शिवकर तलपड़े के प्रयोग और उपलब्धि के पर्याप्त ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं हैं। | negative |
722 | चूंकि 'हवाईजादा' काल्पनिक कथा नहीं है, इसलिए भ्रम और गहरा होता है। | positive |
723 | लेखक-निर्देशक ने सिनेमाई छूट लेते हुए राष्ट्रवाद, देशभक्ति और वंदे मातरम भी फिल्म में शामिल कर दिया है। | positive |
724 | कहना मुश्किल है कि 1895 में मुंबई में वंदे मातरम के नारे लगते होंगे। | negative |
725 | अतीत की ऐसी कथाएं किसी भी देश के इतिहास के संरक्षण और वर्तमान के लिए बहुत जरूरी होती हैं, लेकिन उन्हें गहरे शोध और साक्ष्यों के आधार पर फिल्म की कहानी लिखी है। | positive |
727 | सनकी वैज्ञानिक शास्त्री का किरदार ऐसा ही लगता है। | neutral |
728 | विभु पुरी अपनी सोच और ईमानदारी से उन्नीसवीं सदी के अंतिम वर्षों का माहौल रचते हैं। | positive |
729 | इसमें उनके आर्ट डायरेक्टर अमित रे ने भरपूर सहयोग दिया है। | positive |
730 | उन्होंने पीरियड को वर्तमान संदर्भ दिया है, लेकिन उसकी वजह से तत्कालीन परिस्थितियों के चित्रण में फांक रह गई है। | negative |
731 | उन्नीसवीं सदी की मुंबई की बोली और माहौल रचने में भी फिल्म की टीम की मेहनत सराहनीय है। | positive |
732 | कलाकारों में आयुष्मान खुराना ने शिवकर तलपड़े की चंचलता और सनकी मिजाज को पकडऩे की अच्छी कोशिश की है। | positive |
733 | कहीं-कहीं वे किरदार से बाहर निकल जाते हैं। | negative |
734 | शास्त्री के रूप में मिथुन चक्रवर्ती कृत्रिम और बनावटी लगते हैं। | negative |
735 | पीरियड फिल्म में उनका उच्चारण और लहजा आड़े आ जाता है। | negative |
736 | पल्लवी शारदा कुशल नृत्यांगना हैं। | positive |
737 | उनके अभिनय के बारे में यही बात नहीं कही जा सकती। | negative |
738 | बाल कलाकार नमन जैन प्रभावित करते हैं। | positive |
739 | उनकी मासूमियत और संलग्नता प्रशंसनीय है। | positive |
740 | 'हवाईजादा' में गीतों के अत्यधिक उपयोग से कथा की गति बाधित होती है। | negative |
741 | नायक के समाज प्रेम और प्रयोग का द्वंद्व चलता रहता है। | positive |
742 | 1983 में आई के राघवेन्द्र राव की हिम्मतवाला की रीमेक साजिद खान की हिम्मतवाला 1983 के ही परिवेश और समय में है। | negative |
743 | इस प्रकार पिछले बीस सालों में हिंदी सिनेमा के कथ्य और तकनीक में जो भी विकास और प्रगति है, उन्हें साजिद खान ने सिरे से नकार और नजरअंदाज कर दिया है। | negative |
744 | मजेदार तथ्य है कि साजिद खान की सोच और समझ में यकीन करने वाले निर्माता, कलाकार, तकनीशियन और दर्शक भी हैं। | negative |
745 | हिम्मतवाला में वे पिछली फिल्मों से ज्यादा सरल, सतही, तर्कहीन और फूहड़ अंदाज में अपने किरदारों को लेकर आए हैं। | negative |
746 | साजिद खान की हिम्मतवाला शुद्ध मसालेदार फिल्म है। | positive |
747 | बस, मसालों को बेमेल तरीके से डाल दिया गया है। | negative |
748 | एक दर्शक ने इंटरवल में उच्छवास लेते हुए कहा-पका दिया। | negative |
749 | साजिद खान ने अजय देवगन को उनके पॉपुलर इमेज में ही पेश किया है। | positive |
750 | अजय की प्रतिभा का ऐसा स्वार्थी उपयोग साजिद खान ही कर सकते हैं। | negative |
751 | पिछली फिल्म के गानों नैनों में सपना और ताकी रे ताकी को इस फिल्म में रखा गया है, लेकिन जितेन्द्र-श्रीदेवी का जादू जगाने में अजय देवगन-तमन्ना असफल रहे हैं। | negative |
752 | दोनों ने साजिद खान की मर्जी से किरदारों को नया अवतार दिया है। | positive |
753 | उन्हें भ्रम है कि वे मनमोहन देसाई की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। | negative |
754 | इस भ्रम में वे सिनेमा को कभी पीछे ले जाते हैं तो कभी तर्कहीन ड्रामा दिखाते हैं। | negative |
755 | किसी प्रकार की कोई गलतफहमी नहीं रहे, इसलिए विक्रम भट्ट ने फिल्म का नाम ही 'हॉरर स्टोरी' रख दिया। | neutral |
756 | डरावनी और भुतहा फिल्में बनाने में विशेषज्ञता हासिल कर चुके विक्रम भट्ट ने इस बार खुद को लेखन और निर्माण तक सीमित रखा है। | neutral |
758 | 'हॉरर स्टोरी' एक हद तक इसमें सफल रहती है। | positive |
759 | विक्रम भट्ट और आयुष रैना ने 'हॉरर स्टोरी' को सेक्स और संगीत की गलियों में नहीं भटकने दिया है। | positive |
760 | साफ-सुथरी हॉरर स्टोरी रची है, जो थोड़ा कम डराती है। | positive |
761 | सभी ने परफॉर्म करने की अच्छी कोशिश की है। | positive |
762 | सीमित साधनों में इतने कलाकारों को मौका देना भी एक सराहनीय कदम है। | positive |
763 | 'हॉरर स्टोरी' निराश नहीं करती। | positive |
764 | डरावनी कहानियों के शौकीन आनंदित हो सकते हैं। | positive |
765 | ऐसा देखने में आता है कि हॉलीवुड स्टार ऑफबीट फिल्मों के साथ बेहतरीन काम करते हैं। | positive |
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