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|---|---|---|
879 | अगर वे कम नाचते और गाते तो अधिक प्रभावशाली लगते। | negative |
880 | अली जफर रणवीर सिंह को बराबरी का साथ नहीं दे पाए हैं। | negative |
881 | किलर की भूमिका में वे कमजोर हैं। | negative |
883 | देव और दिशा के बीच के भावनात्मक दृश्य कम हैं। | negative |
884 | गीत-संगीत ज्यादा भावपूर्ण और प्रभावकारी हो गया है। | positive |
885 | गुलजार की आवाज में बोली गई पंक्तियां कानों में गूंजती और अर्थ घोलती हैं। | positive |
886 | आशु त्रिखा की फिल्म 'कोयलांचल' कुख्यात कोल माफिया की जमीन को टटोलती हुई एक ऐसे किरदार की कहानी कहती है, जिसकी क्रूरता एक शिशु की मासूम प्रतिक्रियाओं से बदल जाती है। | neutral |
887 | आशु त्रिखा ने मूल कहानी तक पहुंचने के पहले परिवेश चित्रित करने में ज्यादा वक्त लगा दिया है। | negative |
888 | नाम और इंटरवल के पहले के विस्तृत निरूपण से लग सकता है कि यह फिल्म कोल माफिया के तौर-तरीकों पर केंद्रित होगी। | neutral |
889 | रंभिक विस्तार से यह गलतफहमी पैदा होती है। | negative |
890 | 'कोयलांचल' में व्याप्त हिंसा और गैरकानूनी हरकतों को आशु त्रिखा ने बहुत अच्छी तरह चित्रित किया है। | positive |
891 | इस फिल्म में हिंसा जघन्यतम रूप में दिखती है। | negative |
892 | इस प्रक्रिया में निर्देशक बार-बार दृश्यों और किरदारों के प्रेम में फंसते दिखाई देते हैं। | negative |
893 | ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्रेम में वे कई बारी अतिवादी अप्रोच अपनाते हैं। | negative |
894 | मूल उद्देश्य से भी भटकते हैं। | negative |
895 | 'कोयलांचल' वास्तव में परिवेश से अधिक उन किरदारों की कहानी है, जिन्होंने भावनाओं का दूसरा पक्ष देखा ही नहीं है। | neutral |
896 | फिल्म के संवाद उत्तेजक हैं। | positive |
897 | 'कोयलांचल' की स्थिति और भयावहता को संजय मासूम ने सटीक शब्दों में व्यक्त किया है। | positive |
899 | कलाकारों में नवोदित अभिनेता विपिन्नो का कार्य सराहनीय है। | positive |
900 | विनोद खन्ना और सुनील शेट्टी को अपने किरदारों के लिए अधिक मेहनत करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। | positive |
901 | आशु त्रिखा की एक उलझन यह भी रही है कि वे एक साथ गई मुद्दों को टच करते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त गहराई से नहीं छू पाते, इसलिए उनकी अप्रोच और कोशिश में अधूरेपन की झलक है। | negative |
902 | फिल्म 'कुछ कुछ लोचा है' में बहुत लोचे हैं। | negative |
903 | दरअसल, यह फिल्म से ज्यादा एक अधेड़ उम्र के आदमी की फैंटेसी लगती है। | negative |
904 | लेखक और निर्देशक देवांग ढो़लकिया ने फिल्म के पहले ही सीन में सनी लियोन को कम कपड़ों में दिखाकर यह बता दिया है कि आगे होने क्या वाला है। | negative |
905 | सनी लियोन पॉर्न स्टार रही हैं, शायद ये बात निर्देशक के दिमाग में फिल्म बनाते समय हमेशा घूमती रही। | neutral |
906 | यह निराशाजनक है कि एडल्ट कॉमेडी का कंसेप्ट भी बहुत सीमित हो चला है। | negative |
907 | ऐसा लगता है कि आलसी फिल्ममेकर ने यह बहाना ही बना लिया है कि फिल्म में सनी है तो बाकी सब अपने आप हो जाएगा। | negative |
908 | क्या यही सच है फिल्म के अंत में दिए इस संदेश में फिल्म का सार है। | neutral |
909 | फिल्म का कथ्य रोचक और महत्वपूर्ण है। | positive |
910 | उस कथ्य को पटकथा का रूप देने में कुछ कमियां रह गई हैं। | negative |
912 | क्या यही सच है आत्मकथात्मक फिल्मों की कड़ी में बनी ईमानदार फिल्म है। | positive |
914 | स्टारों के प्रभाव से फिल्म को बचाने की जोखिम में वाई. पी. सिंह ने साधारण कलाकारों से काम लिया है। | negative |
915 | वे फिल्म के कथ्य और भाव को सही ढंग से संप्रेषित नहीं कर पाते। | negative |
917 | मकबूल खान की लंका हिंदी फिल्मों में चुपके से आ रहे एक परिवर्तन संकेत देती है। | positive |
918 | लंका मकबूल खान ने उत्तर भारत के एक शहर को चरित्र बनाकर पेश किया है। | neutral |
919 | नकली सेट और नयनाभिरामी लोकेशन से निकलते ही फिल्म अलग रंग और छटा बिखेरती है। | positive |
920 | लंका धूसर रंग की खुरदुरी फिल्म है, लेकिन क्या टीवी और फिल्मों से बाहर का हमारा समाज ऐसा ही नहीं है। | negative |
921 | लंका मुख्य रूप से जसवंत सिसोदिया की कहानी है। | neutral |
922 | निश्चित ही मनोज बाजपेयी ने मुख्य किरदार को बखूबी निभाया है। | positive |
923 | अर्जन वाजबा और टिया बाजपेयी के बीच संवाद और दृश्य कम हैं। | negative |
924 | निर्देशक ने उनकी आंखों और भावों से काम लिया है, जिसमें वे सक्षम नहीं दिखते। | negative |
925 | इस फिल्म की खूबी स्थानीयता है। | positive |
926 | मुंबई के बाहर एक छोटे शहर के कुछ किरदारों को उनके माहौल में देखना एक नया अनुभव देता है। | positive |
928 | इस प्रेम कहानी का धोखा खलता जरूर है,लेकिन वह छलता नहीं है। | positive |
929 | विक्रम छठे दशक के बंगाल की पृष्ठभूमि में एक रोचक और उदास प्रेम कहानी चुनते हैं। | positive |
930 | इस कहानी में अवसाद भी है,लेकिन वह 'देवदास' की तरह दुखी नहीं करता। | positive |
931 | वह किरदारों का विरेचन करता है और आखिरकार दर्शक के सौंदर्य बोध को उष्मा देता है। | positive |
932 | अपनी दूसरी फिल्म में ही विक्रम सरल और सांद्र निर्देशक होने का संकेत देते हैं। | positive |
933 | ठोस उम्मीद जगाते हैं। | positive |
934 | 'लुटेरा' का पीरियड और परिवेश चुभता नहीं है। | positive |
935 | निश्चित ही इसके लिए फिल्म के प्रोडक्शन डिजायनर और कॉस्ट्यूम डिजायनर समत अन्य तकनीशियनों को भी धन्यवाद देना होगा कि उनकी काबिलियत से यह फिल्म संपूर्णता को छूती नजर आती है। | positive |
936 | फिल्म का यह रोचक दृष्टांत है। | positive |
937 | उन्होंने दोनों प्रमुख कलाकारों के साथ बाकियों को भी हुनर दिखाने के अवसर दिए हैं। | positive |
938 | विक्रम की 'लुटेरा' सोनाक्षी सिन्हा और रनवीर सिंह के करियर की उल्लेखनीय फिल्म रहेगी। | positive |
939 | पाखी के जमींदार पिता के रूप में बरूण चंदा उल्लेखनीय हैं। | positive |
940 | हिंदी फिल्मों में किरदारों के बारे में बताने के लिए कुछ सीन खर्च करने पड़ते हैं। | neutral |
941 | आदिल हुसैन फिर से प्रभावशाली भूमिका में नजर आते हैं। | positive |
942 | आरिफ जकारिया,दिब्येन्दु भट्टाचार्य,विक्रांत मैसी और दिव्या दत्ता अपेक्षाकृत छोटी और जरूरी भूमिकाओं में संग योगदान करते हैं। | positive |
943 | इस फिल्म की एक प्रासंगिक खासियत है। | positive |
944 | फिल्म में डॉयलॉगबाजी नहीं है। | positive |
945 | सारे भाव-अनुभाव सहज शब्दों में संप्रेषित होते हैं। | positive |
946 | संवाद लेखक अनुराग कश्यप का योगदान सराहनीय है। | positive |
947 | फिल्म के गीत-संगीत और सिनेमैटोग्राफी का जिक्र होना ही चाहिए। | positive |
948 | अमित त्रिवेदी और अमिताभ भट्टाचार्य की जोड़ी ने भावपूर्ण और परिवेशात्मक संगीत देता है। | positive |
949 | और हां फिल्म के निर्माताओं को धन्यवाद कि उन्होंने ऐसे विध्वंयात्मक मनोरंजन के दौर में विक्रमादित्य की सोच को संबल दिया। | positive |
950 | पहली फिल्म में अभिनय के साथ लेखन और निर्देशन की भी जिम्मेदारी उन्होंने संभाली है। | neutral |
951 | डांस जोनर की यह फिल्म किशोर और युवा दर्शकों की रुचि का खयाल रखती है। | positive |
952 | साहिल प्रेम ने ऐसी फिल्मों की परंपरा में ही कुछ नया करने की कोशिश की है। | positive |
953 | इस मुश्किल काम में इमोशन भी जोड़ दिए गए हैं। | positive |
954 | साहिल प्रेम की 'मैड अबाउट डांस' में डांस के प्रति आरव की दीवानगी को अच्छी तरह चित्रित किया गया है। | positive |
955 | यह फिल्म आरव के संघर्ष के साथ ही भारतीय और एशियाई मूल के लोगों के प्रति श्वेतरंगी समुदाय की श्रेष्ठ ग्रंथि को भी दर्शाती है। | positive |
956 | साहिल प्रेम लेखन और निर्देशन के पहले प्रयास में उम्मीद जगाते हैं। | positive |
957 | आरव की भूमिका निभा रहे साहिल प्रेम में अपने किरदार की चपलता और एनर्जी है। | positive |
958 | उन्होंने सहयोगी कलाकारों के चुनाव में उनके नृत्य कौशल का ध्यान रखा है। | positive |
959 | यही वजह है कि डांस के सभी सिक्वेंस में गति और ऊर्जा नजर आती है। | positive |
961 | नायिका के तौर पर अमृत मघेरा ने उनका बराबर साथ दिया है। | positive |
962 | आरव के अमीर और जिंदादिल दोस्त के रूप राशुल आनंद अपने किरदार और अदायगी की वजह से याद रह जाते हैं। | positive |
963 | यहां रानी मुखर्जी पुलिस इंस्पेक्टर के साथ जिम्मेदार गृहिणी की भी भूमिका निभाती हैं। | positive |
964 | बतौर एक्टर स्क्रिप्ट की मांग के मुताबिक वह दोनों भूमिकाओं में सक्षम दिखने की कोशिश करती हैं। | positive |
965 | क्राइम ब्रांच की जरूरतों के मुताबिक वह खतरनाक अपराधियों को गिरफ्तार करने से लेकर उन्हें सबक सिखाने तक का काम कर्मठता से करती हैं। | positive |
967 | इस प्रयास में किरदार और कलाकार की संगत टूटती है। | negative |
968 | इसका एक फायदा हुआ है कि फिल्म के खलनायक को पहचान मिल गई है। | positive |
969 | वाल्ट के किरदार में ताहिर राज भसीन अपनी अदायगी से ध्यान खींचते हैं। | positive |
971 | वाल्ट की क्रूरता उसकी सहजता में ज्यादा उभरी है। | negative |
972 | फिल्म में वकील की भूमिका निभा रहे कलाकार ने भी ऐसे चालू किरदार को अलग अंदाज दिया है। | positive |
973 | रानी मुखर्जी जांबाज पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका के लिए आवश्यक स्फूर्ति का प्रदर्शन करती हैं। | positive |
974 | उन्हें एक्शन और खलनायक से अकेले भिडऩे का भी मौका मिला है, लेकिन वह नियोजित और साधारण दिखता है। | negative |
975 | रानी की खूबी संवाद अदायगी और शिवानी के किरदार की पेशगी में है। | positive |
976 | रानी ने शिवानी के किरदार को मर्दानी बनाने में जी-तोड़ मेहनत की है। | positive |
977 | महिला होने के वजह से उन्हें गर्दा उड़ाऊ और धरतीछोड़ एक्शन नहीं दिए गए हैं। | negative |
978 | हालांकि फिल्म में चाइल्ड ट्रैफिकिंग के आंकड़े और रेफरेंस देकर फिल्म को मुद्दापरक बताने की कोशिश है, लेकिन पूरी फिल्म मसाला एंटरटेनमेंट की चालू परंपरा का महिला संस्करण है। | neutral |
979 | नायिका प्रधान होने के बावजूद यह महिला प्रधान फिल्म नहीं है। | negative |
980 | फिल्म के अंत में औरतों के एहसास और आत्मानूभूति से प्रेरित एक स्त्री गान भी है, जो फिल्म के मनोरंजक प्रभाव को जबरदस्ती फेमिनिस्ट रंग देने की असफल कोशिश करता है। | negative |
981 | प्रदीप सरकार 'परिणीता' के बाद के दो असफल प्रयासों के पश्चात 'मर्दानी' में रानी मुखर्जी की मदद से थोड़े रंग मे दिखते हैं। | positive |
982 | वे अपनी कहानियां इन मुद्दों के इर्द-गिर्द चुन रहे हैं। | neutral |
984 | फिल्म किरदारों के सहारे कथ्य के प्रभाव को बढ़ाती है। | positive |
986 | पंकज कपूर और शबाना आजमी सिद्ध अभिनेता हैं। | positive |
989 | उनका हरियाणवी लहजा बार-बार टूटता है। | negative |
990 | विशाल भारद्वाज शब्द और दृश्य के धनी फिल्मकार हैं। | positive |
991 | इसके बावजूद उनकी फिल्मों को क्रमवार देखें तो 'मकबूल' से 'मटरू की बिजली का मन्डोला' तक की यात्रा में लगातार बिखराव की ओर बढ़ रहे हैं। | negative |
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