Unnamed: 0 int64 1 9.08k | text stringlengths 10 426 | pol stringclasses 3
values |
|---|---|---|
1,339 | बाबाओं के आडंबर और ईश्वर के नाम पर चल रहे ढोंग और प्रपंच को अनके फिल्मों में विषय बताया गया है। | negative |
1,340 | नयापन उनके किरदार पीके में है, जो 'कोई मिल गया' में जादू के रूप में आ चुका है। | neutral |
1,341 | 'पीके' की विचित्रता ही मौलिकता है। | positive |
1,342 | पता चलता है कि सभ्यता और विकास के नाम पर अपनाए गए आचरण और आवरण ही मतभेद और आडंबर के कारण हैं। | negative |
1,343 | पटकथा अनेक स्थानों पर कमजोर पड़ती है। | negative |
1,344 | कहीं उसकी क्षिप्र गति तो कहीं उसकी तीव्र गति से मूल कथा को झटके लगते हैं। | negative |
1,346 | जग्गू भारत लौट आती है। | neutral |
1,347 | और यहां उसकी मुलाकात पीके से हो जाती है। | neutral |
1,348 | अपने रिमोट की तलाश में भटकता पीके पहले जग्गू के लिए एक स्टोरी मात्र है, जो कुछ मुलाकातों और संगत के बाद प्रेम और समझ का प्रतिरूप बन जाता है। | neutral |
1,349 | पीके के किरदार को आमिर खान ने बखूबी निभाया है। | positive |
1,350 | यह किरदार हमें प्रभावित करता है। | positive |
1,351 | ऐसे किरदारों की खासियत है कि वे दिल को छूते हैं। | positive |
1,352 | फिल्म के अंतिम दृश्य में सहयात्री के रूप में आए रणबीर कपूर भी उतने ही जंचते हैं। | positive |
1,353 | तात्पर्य यह कि हिरानी और जोशी की काबिलियत है कि पीके में आमिर खान की प्रतिभा निखरती है। | positive |
1,354 | जग्गू की भूमिका में अनुष्का निराश नहीं करतीं। | positive |
1,355 | वह सौंपी गई भूमिका निभाकर ले जाती हैं। | positive |
1,356 | सरफराज की छोटी भूमिका में आए सुशांत सिंह राजपूत में आकर्षण है। | positive |
1,357 | अन्य भूमिकाओं में सौरभ शुक्ला, परीक्षित साहनी, बोमन ईरानी, संजय दत्त आदि अपने किरदारों के अनुरूप हैं। | positive |
1,358 | फिल्म का गीत-संगीत थोड़ा कमजोर है। | negative |
1,359 | इस बार स्वानंद किरकिरे और शांतनु मोइत्रा जादू नहीं जगा पाए हैं। | negative |
1,360 | अन्य गीतकारों में अमिताभ वर्मा और मनोज मुंतजिर भी खास प्रभावित नहीं करते। | negative |
1,361 | पीके पर फिल्माए गाने अतिरंजित और अनावश्यक हैं। | negative |
1,363 | कुछ फिल्में ऐसी बन जाती है जो थिएटर तक आते-आते ही अपना चार्म खो देती हैं। | negative |
1,364 | यहां आपको कुछ बोरिंग फेस नजर आते हैं। | negative |
1,365 | स्क्रीन पर हर बात की कमी दिखती है। | negative |
1,366 | एनर्जी भी कम दिखाई देती है। | negative |
1,367 | यह स्थिति दोनों ही के लिए बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण होती है, जिसमें देखने वाले दर्शक और काम करने वाले कलाकार शामिल होते हैं। | neutral |
1,368 | इस सप्ताह रिलीज हुई फिल्म 'प्लेइंग इट कूल' के साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिखाई देता है। | negative |
1,369 | हालांकि फिल्म स्टार्स के नाम पर फिल्म में कई चर्चित चेहरे हैं। | neutral |
1,370 | इनमें क्रिस इवंस, माइकल मोनागन, ओब्रे प्लाजा, एंथोनी मैकी जैसे नाम शामिल हैं। | neutral |
1,371 | बावजूद इसके यह हालत। | neutral |
1,372 | ऐसा इसलिए क्योंकि यह फिल्म शूट की गई थी साल 2012 में। | neutral |
1,373 | लंबे समय तक अटकी रही। | negative |
1,374 | बाद में यूएस में वीडियो ऑन रिलीज किया गया। | neutral |
1,375 | फिल्म में इवंस ने लेखक का किरदार निभाया है। | neutral |
1,376 | वो बहुत ही बुरा लेखक है। | negative |
1,377 | और तो और कड़े शब्दों का इस्तेमाल कर वो किसी को भी उसके प्यार की याद दिलाता है। | neutral |
1,378 | इस दौरान वो अपने बीते दिनों को याद करता है, जब उसका समय अपने दोस्तों के साथ बीतता था। | neutral |
1,379 | बाद में उसके जीवन में एक महिला आती है। | neutral |
1,380 | नाम होता है मोनागन। | neutral |
1,382 | चूंकि उसकी शादी होने वाली हो रही होती है इसलिए 'मी' उसे फिर डेट नहीं कर पाता है। | negative |
1,383 | नतीजतन चीजें अपने आप और भी कठिन होती जाती है। | negative |
1,384 | फिल्म में कई बार ऐसा महसूस होता है कि डायरेक्टर किसी शो रील को दिखा रहा है | neutral |
1,385 | बजाए सिनेमा के एक टुकड़े के। | neutral |
1,386 | एक बेहतरीन स्क्रिप्ट और अच्छा प्रोड्क्शन किसी भी फिल्म की सॉलिड रिलीज के लिए बहुत होता है। | positive |
1,387 | मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ है। | negative |
1,388 | यह फिल्म बोरिंग है। | negative |
1,389 | कुछ सालों पहले यशराज फिल्म्स की एक फिल्म आई थी बचना ऐ हसीनों। | neutral |
1,390 | उस फिल्म का नायक तीन लड़कियों से मिलता है। | neutral |
1,392 | आखिरकार उसे तीसरी लड़की से हुए प्यार का एहसास होता है। | neutral |
1,393 | लेडीज वर्सेस रिकी बहल उसकी अगली कड़ी है। | neutral |
1,395 | आखिरकार चौथी लड़की से उसे प्यार हो जाता है, जो कि पिछले पंद्रह सालों में उसके द्वारा ठगी जा रही 31वीं लड़की है। | neutral |
1,396 | यशराज फिल्म्स अगर इस कंसेप्ट पर किसी एंटरटेनमेंट चैनल के लिए सभी लड़कियों के साथ सीरियल बनाए तो उसे टीआरपी मिल सकती है। | positive |
1,398 | उनके लेखक हबीब फैजल इस बार केवल संवाद लेखन तक सीमित हैं। | negative |
1,399 | यह फिल्म मनीष शर्मा की शैली और यशराज की सोच की खिचड़ी के रूप में सामने आती है, जिसमें ठगी का तड़का डाला गया है। | negative |
1,400 | चार लड़कियों की कहानी होने के कारण फिल्मअलग-अलग कडि़यों में होने का एहसास देती है। | positive |
1,401 | इनमें कुछ कडि़यां कमजोर भी हैं। | negative |
1,403 | इस फिल्म में वह रिकी और ईशिका के बीच हो जाता है। | neutral |
1,405 | रणवीर सिंह में एक आकर्षण है। | positive |
1,406 | उनकी ऊर्जा और स्फूर्ति का मनीष शर्मा ने उपयोग किया है। | positive |
1,407 | इसी प्रकार अनुष्का शर्मा भी सुंदर और भावपूर्ण है। | positive |
1,408 | पिछली फिल्म बैंड बाजा बारात में दोनों के बीच की केमिस्ट्री की ताजगी असर कर गई थी। | positive |
1,409 | इस बार उनका इस्तेमाल वही जादू नहीं पैदा कर पाता। | negative |
1,410 | इस बार केमिस्ट्री तो परिणति चोपड़ा के साथ दिखती है। | neutral |
1,411 | बाकी दोनों लड़कियां दीपानिता शर्मा और अदिति शर्मा ने सिर्फ दृश्यों को भरने का काम किया है। | negative |
1,413 | फिल्म में गाने कुछ ज्यादा हैं। | negative |
1,414 | गानों के लिए जगह बनाने में कहानी कतर दी गई है। | negative |
1,416 | उसके प्रेम से आप अभिभूत नहीं होंगे। | neutral |
1,417 | 21वीं सदी में ऐसे प्रेमी की कल्पना आनंद राय ही कर सकते थे। | neutral |
1,418 | उसके लिए उन्होंने बनारस शहर चुना। | neutral |
1,419 | मुंबई और दिल्ली के गली-कूचों में भी ऐसे प्रेमी मिल सकते हैं, लेकिन वे ऊिलहाल सिनेमा की नजर के बाहर हैं। | neutral |
1,420 | बनारस को अलग-अलग रंग-ढंग में फिल्मकार दिखाते रहे हैं। | neutral |
1,421 | 'रांझणा' का बनारस अपनी बेफिक्री, मस्ती और जोश के साथ मौजूद है। | positive |
1,422 | कुंदन, जोया, बिंदिया, मुरारी, कुंदन के माता-पिता, जोया के माता-पिता और बाकी बनारस भी गलियों, मंदिरों, घाट और गंगा के साथ फिल्म में प्रवहमान है। | positive |
1,423 | 'रांझणा' के चरित्र और प्रसंग के बनारस के मंद जीवन की गतिमान अंतर्धारा को उसकी चपलता के साथ चित्रित करते हैं। | neutral |
1,424 | सिनेमा में शहर को किरदार के तौर पर समझने और देखने में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए 'रांझणा' एक पाठ है। | positive |
1,425 | फिल्म में आई बनारस की झलक सम्मोहक है। | positive |
1,426 | 'रांझणा' कुंदन और जोया की अनोखी असमाप्त प्रेम कहानी है। | neutral |
1,427 | बचपन में ही कुंदन की दुआ जोया की नमाज में पूरी होती दिखती है। | neutral |
1,428 | पहली झलक में ही जोया उसे प्रिय लगने लगती है। | positive |
1,429 | उम्र बढ़ने के साथ 16 थप्पड़ों के बाद भी कुंदन उसे रिझा नहीं पाता तो भावावेश में उसके सामने कलाई काट लेता है। | negative |
1,430 | किशोरी जोया उसके भावातिरेक को समझ नहीं पाती। | negative |
1,431 | वह उसके गले लग जाती है। | positive |
1,432 | कुंदन के एकतरफा प्यार के लिए यह स्वीकृति है, जबकि जोया की अनायास प्रतिक्रिया.. बहरहाल, खबर जोया के पिता तक पहुंचती है। | neutral |
1,433 | जोया पहले अपनी फूफी के पास अलीगढ़ भेज दी जाती है। | neutral |
1,434 | वहां से आगे की पढ़ाई के लिए वह जेएनयू चली जाती है। | neutral |
1,435 | कबीर से लेकर अनेक कवियों ने प्रेम, प्यार, मोहब्बत की भावनाओं को अलग-अलग रूपों और शब्दों में व्यक्त किया है। | positive |
1,436 | कुंदन के प्रेम के लिए कबीर की यह पंक्ति उचित होगी, 'प्रेम पियाला जो पिए, शीश दक्षिणा देय।' | positive |
1,437 | कुंदन अपनी जोया के लिए किसी हद तक जा सकता है। | neutral |
1,438 | दुनियावी अर्थो में वह व्यावहारिक और समझदार नहीं है। | negative |
1,439 | उसे तो जोया के प्यार की धुन ल“ी है। | neutral |
1,440 | वह उसी में रमा रहता है। | positive |
1,441 | आनंद राय ने बहुत खूबसूरती और सोच से कुंदन के चरित्र को गढ़ा है। | positive |
1,443 | कुंदन के स्वभाव को समझने के लिए इस नाम के शाब्दिक और लाक्षणिक अर्थ को भी समझना होच्च। | neutral |
1,444 | हिंदी फिल्मों में नायक का इतना उपयुक्त नाम लंबे समय के बाद सुनाई पड़ा है। | neutral |
1,445 | यह नाम ही उसके चरित्र का बखान कर देता है। | neutral |
1,446 | 'तपे सो कुंदन होय'.. पवित्र धातु सोना भी आग में तपने के बाद कुंदन कहलाता है। | neutral |
1,447 | इस लिहाज से नायक वर्तमान समाज में प्यार में तपा कुंदन है। | neutral |
1,448 | वह अपने व्यवहार और कार्य से इसे सिद्ध करता है। | positive |
1,449 | जेएनयू के छात्र जीवन, राजनीति और अकरम के चरित्र में आनंद राय ने सरलीकरण से काम लिया है। | positive |
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.