text stringlengths 33 15.4k | label stringclasses 21
values |
|---|---|
राजा गर्मी के मारे अंगिया भीजै हमारी
राजा गर्मी के मारे अंगिया भीजै हमारी
कुछ गर्मी से कुछ सर्दी से दूजा जोर जवानी का
कोठे चढ़न ते देवर बुलावै आजा राज दुलारी
अंगिया भीजै हमारी
मैं कैसे आऊं मेरे छोटे से देवरिया
कदम कदम हुआ भारी
अंगिया भीजै हमारी
बारां बरस पिया चाकरी से आए रोवै राज दुलारी
अंगिया भीजै हमारी | haryanvi-bgc |
131
कैदो आनके आखदा सहुरयो ओये मैंथो कौन चंगा मत देसिआ ओये
एह नितदा पयार न जाए खाली पिंज गडी दादास ना देसिया ओये
हथों मार सियालां ने गल्ल टाली परा छड झेड़ा एह भेरसिया ओये
रग इक वधीक है लंडयां दीए किरतघण फरफेज मलखेसिया ओये | panjabi-pan |
मेरी मालन रंगीली गून्थ लायी री सेहरा
मेरी मालन रंगीली गून्थ लायी री सेहरा गून्थ लायी री
कहां तो बोया केवड़ा री कहां तो बोया गुलाब री
किनारे किनारे बोया केवड़ा री क्यारी में बोया गुलाब री
किन ये डाल झुकाइयां री और किन ये बीने हैं फूल री
मेरी मालन छबीली . . .
माली ने डाल झुकाइयां री और मालन ने बीने हैं फूल री
गून्था ए गू... | haryanvi-bgc |
190
असकंदरी नेवरां वीर बलियां पिपल वतरे झुमके सारयो ने
हस जड़े छनकंगनां नाल जुगनी ठिके नाल ही चा सवारयो ने
चंननहार लोगाढ़ियां नाल लूहला वडी डोल मयानडे धारयो ने
दाज घत के विच संदूक बधे सुनो की की दाज रंगारयो ने
वारस शाह मियां असल दाज रांझा इक ओह बदरंग करायो ने | panjabi-pan |
बाबू के मउरिया में लगले अनार कलिया
बाबू के मउरिया1 में लगले अनार कलिया2 ।
अनार कलिया हे , गुलाब झरिया3 ।
बाबू धीरे से चलिहऽ ससुर गलिया ॥ 1 ॥
बाबू सरहज से बोलिहऽ अमीर4 बोलिया ।
बाबू धीरे से चलिहऽ ससुर गलिया ॥ 2 ॥
बाबू के दोरवा5 में लगले अनार कलिया ।
अनार कलिया हे , गुलाब झरिया ।
बाबू धीरे से चलिहऽ ससुर गलिया ॥ 3 ॥
बाबू ... | magahi-mag |
श्री रामचन्द्र जन्म लिये चैत सुदि नौमी
श्री रामचन्द्र जन्म लिये चैत सुदि नौमी ।
दाई जो झगड़े नरा की छिनाई
कौशिल्या जी की साड़ी लैहों , सोर की उठाई । श्री . . .
नाइन झगड़े नगर की बुलाई
कौशिल्या जी को हार लैहों , महल की पुताई । श्री . . .
पंडित जो झगड़ें वेद की पढ़ाई
दशरथ जी को घोड़ा लैहों वेद की पढ़ाई । श्री . . .
ननदी ... | bundeli-bns |
सजन बड़ा रे बईमान है
सजन बड़ा रे बईमान है ,
दगा दिया परदेशी
१ काया जीव से कह रही ,
सुन ले प्राण अधार
लागी लगन पिया मत तोड़ो
मैं तो तेरे पास . . .
सजन बड़ा रे . . .
२ जीव काया से कह रही ,
सुण ले काया मेरी बात
अष्ट पहेर दिन रेन के
प्रित बाळ पणा की . . .
सजन बड़ा रे . . .
३ तुम राजा हम नग्र है ,
फिरी गई राम दुवाई
तुम तो प... | nimadi-noe |
लिछमन के बाण लगा रै सक्ती लिछमन कै
लिछमन के बाण लगा रै सक्ती लिछमन कै ।
ऐसा रै होय कोई बीरा नै जिवाले
आधा राज सबाई धरती , लिछमन कै ।
कै तो जिवाले सीता रै सतबंती
कै तो जिवाले हनुमान जती , लिछमन कै ।
क्यों तै जिवाले सीता रै सतबंती ,
क्यां तै जिवाले हनुमान जती , लिछमन कै ।
सत तै जिवाले सीता रै सतबंती ,
बूटी तै जिवाले हनुम... | haryanvi-bgc |
उदना रेख करम में खाँची
उदना रेख करम में खाँची ।
होन हार सो साँची ।
जैसी लिखी भाग में भाबई
आन अगारूॅ नाँची ।
पक्की मौत होत पाँवँन की
उबै गिनो ना काँची ।
राखी बात आपविघ हाँतन
आन बदे मैं बाँची
साजी बुरई ईसुरी चर्चा
सिनसारी में माँची । | bundeli-bns |
सपने में आए भरतार
सपनौ तौ देखौ बहना मेरी रात में जी
ऐजी कोई सपने में आये भरतार ॥ 1 ॥ सपनौ तौ .
घोड़ा है बाँधो बहना मेरी थान पै री
ऐरी मेरे आये हैं महल मझार ॥ 2 ॥
पाँचों उतारे पियाजी ने कापड़े जी
एजी कोई खोलि धरे हथियार ॥ 3 ॥
अचकपचक तो पलका पै पग धरौजी
ऐजी मैं लीनी झटकि जगाय ॥ 4 ॥
उंगली पकरि के बैठी मोय कर लई जी
एजी कोई... | braj-bra |
कदी आ मिल यार प्यारिआ
कदी आ मिल यार प्यारिआ ।
तेरीआँ वाटाँ तों सिर वारिआ ।
कदी आ मिल यार प्यारिआ ।
चढ़ बागीं कोइल कूकदी ।
नित सोजे़अलम1 दे फूकदी ।
मैनूँ ततड़ी को शाम विसारिआ ।
कदी आ मिल यार प्यारिआ ।
बुल्ला सहु कद घर आवसी ।
मेरे बलदी भा2 बुझावसी ।
ओहदी वाटाँ तों सिर वारिआ ।
कदी आ मिल यार प्यारिआ । | panjabi-pan |
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा
म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा
म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा
म्हारा सासूजी तो गढ़ रा मालक सा
इण लहेरि... | rajasthani-raj |
रंग उड़े रे गुलाल इना घर में
रंग उड़े रे गुलाल इना घर में
पाणी पड़े रे तुबार इना घर में
जई ने कीजो कचेरी बिठईया से
दफ्तर के लिखईया से
दाई ने बेग बुलावे इना घर में
दाई बुलाय जच्चा क्या फरमाव
हम घर नाको मोड़ाय इना घर में
जई ने किजो उना सार का खिलईया से
पांसा का जितईया से
सासू जी ने बेग बुलाव इना घर में
सासू बुलाय बच्चा क... | malvi-mup |
आल्हा ऊदल
बज पड़ गैल आल्हा पर ओ पर गिरे गजब के धार
जब से ऐलों इन्द्रासन से तब से बिदत भैल हमार
पिल्लू बियायल बा खूरन में ढालन में झाला लाग
मुरचा लागि गैल तरवारन में जग में डूब गैल तरवार
आल्हा लड़ैया कबहीं नव् देखल जग में जीवन में दिन चार
एतना बोली डेबा सुन गैल डेबा खुसी मंगन होय जाय
खोलै अगाड़ी खोलै पिछाड़ी गरदनियाँ दे... | bhojpuri-bho |
अरै मैं बुरी कंगाली धन बिन
अरै मैं बुरी कंगाली धन बिन कीसी रै मरोड़ ?
भोगा , बुरी रै कंगाली , धन बिन कीसी रै मरोड़
धनवन्त घरां आणके कह जा
निरधन ऊँचीनीची सब सह जा
सर पर बंधाबंधाया रह जा
माथे पर का रै मोड़ ।
अरै मैं बुरी कंगाली धन बिन कीसी रै मरोड़
निरधन सारी उमर दुख पावे
भूखा नंग रहके हल बाहवे
भोगा , बिना घी के चूरमा
ते... | haryanvi-bgc |
झूले नदलाल झुलाओ सखी पालना
झूलें नंदलाल झुलाओ सखी पालना
काहे के तोरे बनो पालना ,
काहे के लागे फंुदना । झूलें नन्दलाल . . .
अगर चंदन के बने हैं पालना ,
रेशम की डोरी रुपे के लागे फंुदना । झूलें नन्दलाल . . .
को झूलें को जो झुलावे ,
को जो बलैया लेत मुख चूमना । झूलें नन्दलाल . . .
कान्हा झूले , सखिया झुलावें ,
यशोदा बलैया ... | bundeli-bns |
352
एह रसम कदीम है जोगियां दी ओहनूं मारदे ने जेहड़ी टुरक दी ए
खैर मंगदे दियां फकीर ताई अगे कुतयां दे वांग घुरकदी ए
एह खसम नूं खान नूं किवें दसी जेहड़ी खैर देंदी पई झुरकदी ए
एक पेरनी के अहलवाननी ए इके कंजरी ए किसे तुरक दी ए
पहले फूक के अग मताबियां नूं पिछों सरद पानी वेख बुरकदी ए
रन्न गुंडी नूं जिथों पैजार1 वजन ओथों चुप ... | panjabi-pan |
तेरा हर्या पीपल सौंपल डाली भौं पड़ै
तेरा हर्या पीपल सौंपल डाली भौं पड़ै
एक आरतड़े की मैं सार न जाणूं क्यूंकर कीज्या बटणां आरता
एक दूर देसां तै मेरी नणन्द आई आरता समझाईयां
एक डाल छोटा पेड़ मोटा कर दे सुहागण आरता
तेरे हाथ कसीदा गोद भतीजा कर दे सुहागण आरता
तेरे हाथ लोटा गोद बेटा कर दे सुहागण आरता
तेरे हाथ तोरी गोद छोरी कर... | haryanvi-bgc |
हमखो न अखिया दिखाओ मोरे सैया
हमखों न अंखिया दिखाओ मोरे सैयां ।
दइजे में तुमने रुपये गिना लये ,
रुपया गिना के कायको बिकाय गये ।
अब खरीखोटी न सुनाओ मोरे सैयां । हमखों . . .
दइजे के धन पे बने पैसा वारे ,
छैल छबीले बने बाबू प्यारे
रौब कछु न जमाओ अब सैयां । हमखों . . .
चूल्हा न करहों चौका न करहों
बासन न करहों पानी न भरहों
क... | bundeli-bns |
सूती थी रंग महल में
सूती थी रंग महल में ,
सूती ने आयो रे जन जाणु ,
सुपना रे बैरी नींद गवाईं रे
सुपने में आग्या जी , म्हारी नींद गवाग्या जी
सूती है सुख नींदा में म्हाने तरसाग्या जी
सुपना रे बैरी नींद गवाईं रे
तब तब महेला ऊतरी ,
गई गई नन्दल रे पास ,
बाईसा थारो बिरो चीत आयो जी
पूछे भाभी गेली बावली , बीरोजी गया है परदेस ,
... | rajasthani-raj |
राई राई राई बोको राई घाटो गोना घाटो बेडेजे
राई राई राई बोको राई घाटो गोना घाटो बेडेजे
राई राई राई बोको राई घाटो गोना घाटो बेडेजे
गोना घाटो बेडेजे बोको सारी गागंड़ा सारी मकड़ाई फिरीयो
गोना घाटो बेडेजे बोको सारी गागंड़ा सारी मकड़ाई फिरीयो
रुपयो झोला कान्डोयो बोको सारी मकड़ाई सारी गागंड़ा फिरीयो
रुपयो झोला कान्डोयो बोको स... | korku-kfq |
जल भर ले हिलोरें हिलोर रसरिया रेशम की
जल भर ले हिलोरें हिलोर रसरिया रेशम की
अरर जल भर ले हिलोरे हिलोर
रेशम की रसरी तब नीकी ल़ागे
सोने की गगरिया होय रसरिया रेशम की
सोने की गगरी तब नीकी लागे
सुघड़ महरिया होय रसरिया रेशम की
सुघड़ महरिया तब नीकी लागे
साथे में छैला होय रसरिया रेशम की
साथे म छैला तब नीको लागे
गोदी म ललना होय... | awadhi-awa |
9
मौजू चौधरी पिंड दी पांध1 वाला चंगा भाइयां दा सरदार आहा
अठ पुत्र दो बेटियां तिसदिआं सन वडा टबर अते परिवार आहा
भले भाइआं विच प्रतीत उसदी मंनिआ चोंतरे विच सरकार आहा
वारस शाह एह कुदरतां रब्ब दीयां ने धीदो नाल उस बहुत पयार आहा | panjabi-pan |
केलवा जे फरये ला घवद से ओहपर
केलवा जे फरये ला घवद से ओहपर सुगा मंडराय
उ जे खबरी जनइबो अदित्य से सुगा दिहले जुठीयाय
उ जे मरबउ रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरुछाय
सुगनी जे रोवय वियोग से आदित्य होऊ न सहाय
नारियलवा जे फरये ला घवद से ओहपर सुगा मंडराय
उ जे खबरी जनइबो अदित्य से सुगा दिहले जुठीयाय
उ जे मरबउ रे सुगवा धनुष से सुग... | bhojpuri-bho |
अंगिका फेकड़ा
अटकनमटकन , दहिया चटकन
बर फूले , करेला फूले
इरिचमिरिच मिरचाय के झावा
हाथी दाँत समुद्र के लावा
लौआ लाठी चन्दन काठी
मार पड़ोकी पाँजड़ तोड़ ।
कागजपत्तर
कलम दवात
इटा पाटी
सोने के टाट
टाट गिरा दे
पूरे आठ ।
चिल्लर पटपट , गंगा हो लाल
हथिया सूढ़ ठुट्ठोॅ पीपर पतझाड़
कौआ कानोॅ , तेली बेमानोॅ
मियाँ ढोलकिया , फूस कन्ह... | angika-anp |
घरी घरी पै ईसुरी, घरी सौ दृगन दिखात
घरी घरी पै ईसुरी , घरी सौ दृगन दिखात ,
मुईयाँ बाँके छेल की , नजर न भूलत रात ।
ऑखियाँ तरसें यार खाँ कबै नजर मिल जाय ,
नजर बचा के ईसुरी रजऊ बरक कड़ जाय ।
तरै तरै के करत हैं , तेरे ऊपर प्यार ,
हमहँ अकेले एक हैं , रजऊ की दमके यार ।
घातें सबई लगाँय हैं , घर खोरन की कोद ,
ईसुर डूबे रसरँगन ... | bundeli-bns |
मृत्यु गीत
टांडो लाद चल्यो बणजारो ।
टेक अरे मन लोभी थारो काई रयण को पतियारो ।
चौक1 गिर पड्यो कोट , बिखर गइ माटी ॥
माटी को हुइ गयो गारो , थारो कइ रयण को पतियारो ।
मन लोभी थारो कइ रयण को पतियारो ।
चौक2 वाड़ लगायो तुन बहुत रसीलो भाई
जेकि पेरी को रस न्यारोन्यारो ।
थारो रयण को कइ पतियारो ।
चौक3 बुझ गयो दीपक जळ गइ बाती ॥
भाई... | bhili-bhb |
570
हीर नाल फिराक1 दे आह मारी रब्बा वेख असाडियां भखन भाही
अगे अग पिछे सप शीह सांडे साडी वाह ना चलदी चैही राही
इके मेलसाइयां रांझा यार मैंनूं इके दोहां दी ऊमर दी अलख लाही
एडा केहर कीता देस वालया ने एस शहर नूं कादरा अग लाई | panjabi-pan |
375
भला दस खां जोगिया यार साडा हुण केहड़ी तरफ नूं उठ गया
वेखां आप हुण केहड़ी तरफ फिरदा अते मुझ गरीब नूं कुठ1 गया
रूठे आदमी घरां विच आन मिलदे गल समझ जा बधड़ी मुठ2 गया
घरां विच पैंदा गुनां सजनां दा यार होर नाहीं किसे गुठ गया
घर यार ते ढूंढ़दी फिरे बाहर किते महल ना माड़ियां उठ गया
सानूं चैन आराम ते सबर नाहीं सोहणा यार जदो... | panjabi-pan |
नइहर वाली लाड़ो माथे चाँद चमके
नइहर वाली लाड़ो माथे चाँद चमके ।
अम्माँ वाली लाड़ो माथे चाँद चमके ॥ 1 ॥
माँगे लाड़ो के टीका सोभे , मोतिया की झलक देखा री लाड़ो ।
अम्माँ पेयारी लाड़ो माथे चाँद चमके ॥ 2 ॥
नाके लाड़ो के बेसर सोभे , चुनिया1 अजब बिराजे लाड़ो ।
नथिया अजब बिराजे लाड़ो , माथे चाँद चमके ॥ 3 ॥
काने लाड़ो के बाली2 ... | magahi-mag |
असमानों उत्तरी इल्ल वे (ढोला)
असमानों उत्तरी इल्ल वे
तेरा केहड़ी कुड़ी उत्ते दिल वे
सभ्भे ने कुआरियाँ , जीवें ढोला
ढोल मक्खना
दिल परदेसियाँ दा राज़ी रखना
भावार्थ
' आकाश से चील उतरी
अरे तुम्हारा किस युवती पर दिल है ?
सभी कुंवारी हैं
जीते रहो , सजन
ओ सजना ओ मक्खन
परदेसीओं का दिल राज़ी रखना ' | panjabi-pan |
246
भोग भोगना दुध ते दहीं पीवन पिंडा पालके रात दिन धोवना एं
खरा कठन है फकर दी वाट झागन1 मुंहों आखके काहे वगोवना एं
वाहें वंझली त्रीमतां नित घूरे गाईं महीं वलायके चोवना एं
वारस आख जटा केही बनी तैनूं सुआद छडके खेह2 क्यों होवना एं | panjabi-pan |
दादा मियाँ लगाइन घनी बगिया
दादा मियाँ लगाइन1 घनी बगिया ।
मेवा तोड़ तोड़ खइहे , मेरे लाल बने2 ॥ 1 ॥
ससुर भँडुए की साँखरी गलिया ।
दामन मोड़ मोड़ चलिहो मेरे लाल बने ॥ 2 ॥
दादा मियाँ की ऊँची दलनियाँ3 ।
जहाँ सासु को नचइहो4 मेरे लाल बने ॥ 3 ॥
बाबा मियाँ लगाइन घनी बगिया ।
मेवा तोड़ तोड़ खइहे , मेरे लाल बने ॥ 4 ॥
साले भँडु़ए क... | magahi-mag |
आया था ओ गेहूं काट कै
आया था ओ गेहूं काट कै
आंदे ठाली लाठी
मार छेत्त के पूछण लाग्या
चोट कड़ै सी लागी | haryanvi-bgc |
मेरे राजा भीजै मेरी चम्पा साड़ी
मेरे राजा भीजै मेरी चम्पा साड़ी
मैं तुम ते पूछूं हो मेरे राजा कैसी लगै पनिहारी
जैसी दूध पै जमे मलाई मेरी गोरी ऐसी लगै पनिहारी
मेरे राजा . . .
मैं तमतै पूछूं हो मेरे राजा कैसे लगै घरआली
जैसी चुभच्चै मैं आवै बदबोई मेरी गोरी ऐसी लगै घरआली
मेरे राजा . . .
लिखलिख चीट्ठी बीरण पै भेजूं मेरे राज... | haryanvi-bgc |
बने दूल्हा छवि देखो भगवान की
बने दूल्हा छवि देखो भगवान की ,
दुल्हन बनी सिया जानकी ।
जैसे दूल्हा अवधबिहारी ,
तैसी दुल्हन जनक दुलारी ,
जाऊ तन मन से बलिहारी ।
मनसा पूरन भई सबके अरमान की । दुल्हन बनी . . .
ठांड़े राजा जनक के द्वार ,
संग में चारउ राजकुमार ,
दर्शन करते सब नरनार
धूम छायी है डंका निशान की । दुल्हन बनी . . .
सि... | bundeli-bns |
अंगिका बुझौवल
तोहरा कन गेलाँ
लेॅ केॅ बैठलाँ ।
पीढ़ा
तोहरा कन गेलाँ
खोली केॅ बैठलाँ ।
जूत्ता
चानी हेनोॅ चकमक , बीच दू फक्का
जे नै जानेॅ , जे नै जानेॅ ओकरोॅ हम्में कक्का ।
दाँत
हिन्हौ टट्टी , हुन्हौ टट्टी
बीच में गोला पट्टी ।
जीभ
हाथ गोड़ लकड़ी पेट खदाहा
जे नै बूझै ओकरोॅ बाप गदहा ।
नाव
फरेॅ नै फूलै , ढकमोरै गाछ ।
पान
जड़... | angika-anp |
फागुन के आइल बहार हो बलमुआ
फागुन के आइल बहार हो बलमुआ
छोड़ द नोकरिया घरे आव , आहे घरे आव । । टेक । ।
घरहिं खिअइबो तोहे पूरी मिठइया
ऊपर से तोहके सेजिया सूताइब
हींक भरि जिअब लहालोट हो , बलमुआ
छोड़ द नोकरिया घरे आव , आहे घरे आव । । टेक । ।
कर्मेन्दु शिशिर के संग्रह से | bhojpuri-bho |
मान उतारने का गीत
खोलोखोलो वो माता खोलो वो किंवाड़ ।
खोलोखोलो वो माता खोलो वो किंवाड़ ।
तारा आँगणें वो माता नर्याल वो दुइ चार ।
तारा आँगणें वो माता नर्याल वो दुइ चार ।
खोलोखोलो वो माता खोलो वो किंवाड़ ।
खोलोखोलो वो माता खोलो वो किंवाड़ ।
तारा आँगणे वो माता बुकड़ा वो दुइ चार ।
तारा आँगणे वो माता बुकड़ा वो दुइ चार ।
खोलो... | bhili-bhb |
गांजा बुबुलेयन मानेला जा सिडु बुबुलेयन मानेला
गांजा बुबुलेयन मानेला जा सिडु बुबुलेयन मानेला
गांजा बुबुलेयन मानेला जा सिडु बुबुलेयन मानेला
मानेला पान्तारी कोरा कीटजे मानेला
मानेला पान्तारी कोरा कीटजे मानेला
रही रुपों जड़ी तालान आमा रानी ताड़ान भोले
रही रुपों जड़ी तालान आमा रानी ताड़ान भोले
ओ बिडेजा मानेला
ओ बिडेजा मानेल... | korku-kfq |
काबर समाये रे मोर
काबर समाये रे मोर , बैरी नैना मा
काबर समाये रे मोर , बैरी नैना मा
झूलत रहिथे तोरे चेहरा
ए हिरदे के अएना मा
काबर समाये रे मोर , बैरी नैना मा
काबर समाये रे मोर , बैरी नैना मा
अपने अपन मोला हांसी आथे
सुरता मा तोर रोवासी आथे
अपने अपन मोला हांसी आथे
सुरता मा तोर रोवासी आथे
का जादू डारे
ए ए रे टोनहा तैं
ए प... | chhattisgarhi-hne |
चलो मनवा उस देश को
चलो मनवा उस देश को ,
हंसा करत विश्राम
१ वा देश चंदा सुरज नही ,
आरे नही धरती आकाश
अमृत भोजन हंसा पावे
बैठे पुरष के पासा . . .
चलो मनवा . . .
२ सात सुन्न के उपरे ,
सतगरु संत निवासा
अमृत से सागर भरिया
कमल फुले बारह मासा . . .
चलो मनवा . . .
३ ब्रह्मा विष्णु महादेवा ,
आरे थके जोत के पासा
चैदह भवन यमराज ह... | nimadi-noe |
कहवाँ में रोपबई हरी केबड़ा अहो रामा
कहवाँ में रोपबई हरी केबड़ा अहो रामा
कहवाँ में रोपबई बेइलिया अहो रामा ।
नइहरा में रोपबई हरी केबड़ा अहो रामा
ससुरा में रोपबई बेइलिया अहो रामा ।
पनिए पटयबई हरी केबड़ा अहो रामा
दूधवे पटयबई बेइलिया अहो रामा ।
काँचे सूते गुँथबई हरी केबड़ा अहो रामा
रेसम सूते गुँथबई बेइलिया अहो रामा ।
के मोर... | magahi-mag |
लागा झुलानिया प धक्का
लागा झुलानिया प धक्का , बलम कलकत्ता पहुंची गए
कैसे क मति मोरी बैरन होई गई
कीन्ह्यो मैं हठ अस पक्का , बलम कलकत्ता . . .
लागे जेठानिया के बोल बिखै ज़हर से
लागा करेजवा में लुक्काआग , बलम कलकत्ता . . .
रेक्सा चलायें पिया तांगा चलायें
झुलनी के कारण भयें बोक्का पागल , बलम कलकत्ता . . .
बरहें बरिस झुलनी ... | awadhi-awa |
मेरे सीस पै घड़ा घड़े पै झारी
मेरे सीस पै घड़ा घड़े पै झारी
पतली जी पाणी जाए नार सांवलड़ी
कोए काहे बटेऊ जाय कुएं पै पाहुचा
कोए बूझण लाग्या नार बात सांवलड़ी
गोरी एक घूंट पाणी पिलाय दूर का प्यासा
मेरा संग अकेला जाए पाणिडा पिला दे
मैं तो क्यूंकर पाणिडा पिलाऊं
नहर जल भारी कूएं का जल खारी रे
मेरी सास बड़ी जल्लाद खसम मेरा खू... | haryanvi-bgc |
भरथरी लोक-गाथा - भाग 3
चल मिरगा ल राम
मय जियावॅव दाई
मोर अमरित पानी ल लावॅव ओ
जोगी लार्वव ओ , भाई ये दे जी ।
घोड़ा मा मिरगा ल लादिके
भरथरी ये ओ
देखतो दीदी चले जावत हे
गोरखपुर म न
चले जावय गिंया
गोरखनाथ गुरु
धुनि रमे हे न
जेकर तीर म जाय भरथरी ओ
भरथरी ओ , भाई ये दे जी ।
लगे हे धुनिबाबा के
गोरखनाथ के ओ
घोड़ा म मिरगा ल लाद... | chhattisgarhi-hne |
चाय पी पी के दूध घी की कर दई महगाई
चाय पी पी के दूध घी की कर दई महंगाई ।
बड़ी आफत जा आई ।
बेंचे दूध घरे न खावें , लड़का वारे बूंद न पावें ।
चाहे पाहुन लो आ जावें
देवी देवता लो होम देशी घी के न पाई । । बड़ी . . .
घर को बेंचे मोल को धरते , रिश्तेदारों से छल करते ,
जे नई बदनामी से डरते ,
डालडा से काम चले हाल का सुनाई । बड... | bundeli-bns |
कहमाँ गमोलँ तोहूँ एता दिन सिवजी
कहमाँ गमोलँ1 तोहूँ एता2 दिन सिवजी , पियरी3 जनेउआ कहाँ पावल4 हे ।
गेलियो5 हम गेलियो गउरा तोहरो नइहरवा , बराम्हन रचल धमार6 हे ।
एता दिन हमें गउरी सासुर7 गमउली8 सुखे9 सुखे गेल ससुरार हे ॥ 1 ॥
तुहूँ गमौलऽ सिउजी अइसे से ओइसे , नयना काजर कहाँ पाव10 जी ।
गेलियो हम गउरा हे तोहरो नइहरवा , सरहजवा ... | magahi-mag |
बिच्छू उतारने का मंत्र
काली गाय कपने गई , हरे डूंगरे गई वहाँ से
चिरि फिरि सागड़े गोठाणे गई वाहाँ एक पोठो करीयो
एक पोठाम् बारेह विछु निकल्या , एक विछु चोटी पे चड्यो
मेर से निहि उतरे मेरा गुरू उतारा ,
इस मंत्र को एक बार में नही उतरे तो 10 मिनिट बाद दुबारा बोलना और जहाँ
तक चढ़ा हुआ है वहाँ तक हाथ फेरतेफेरते नीचे की ओर लात... | bhili-bhb |
फाग गीत
नाचण तो नाचण चाली ढोल गेरो वाजे रे ।
होळी आगे गेरिया झरावर नाचे रे , हालो देखाने ।
हाँ रे हालो देखाने हवजी वालो जायो नाचे रे , हालो देखाने ।
एक पत्नी कहती है कि नाचने वाली नाचने का चली , ढोल अच्छा बज रहा है , देखने को चलो । मेरा पति भी नाच रहा है । | bhili-bhb |
अंछरयों की राणी
झूमझमा झम , खुटों का झाँवर रे ,
अंछर्यो1 की राँणी आई , गीत गान्दरे ।
नौ सोर मुरली बाजी , मोछंग2 की धुन म
फूलू की पंखुड़ी , भौंर का गीतू म ।
. . . . . . . ओजी हो
धमधमाधम ,
भौंरों की बरात रे
अंछर्यों की राँणी आई , फूल फुलान्दी रे ।
बाँज की डाल्यों म आई , बुराँस का फूलू म ,
फ्योंलि का फूलू म आई , झमकदा गीत... | garhwali-gbm |
देवी मैया के दरस कूँ
देवी मैया के दरस कूँ घर से निकरौ लाँगुरिया ॥ टेक
माथे तिलक सिंदूर कौ रे टोपी पहरी लाल ,
पीरे कुरता पै पड़ी रे गल फूलन की माल ॥ देवी .
झण्डा सोहै हाथ में रे बाजत मुख से बैन ,
काजर कटीली डार कै री खूब चलावत सैन ॥ देवी .
मेंहदी रच रही हाथ में रे घड़ी कलाई सोह ,
ठुमक 2 कै वो चलै री दिल कूँ लेवे मोह ॥ द... | braj-bra |
दूब का डांडळा अकाव का फूल
दूब का डांडळा अकाव का फूल ,
राणी ओ मोठी बहू अरघ देवाय ।
अरघ दई नऽ वर पाविया ,
अमुक सरीका भरतार ।
आतुली पातुली , लाओ रे गंगाजल पाणी ,
न्हावण करऽ रनुबाई राणी ।
रनुबाई , रनुबाई , खोलो किवाड़ ,
पूजण वाळई ऊभी दुवार ।
पूजण वाळई काई माँगऽ ।
दूध , पूत , अहवात माँगऽ ।
हटियाळो बाळो माँगऽ ।
जटियाळो भाई म... | nimadi-noe |
इक दिन जा बैठी सो डार के पटा
इक दिन जा बैठी सो डार के पटा
ईने बना दये , बिना नोन के भटा
तनक चीखो तो
मतारी मोरी , बोलो तो , कैसी जा ढूंड़ी दुलईया
एक दिन जा बैठी सो ले रई पुआर
और खीर मे लगा दओ हींग को बघार
तनक सूँघो तो
मतारी मोरी , बोलो तो , कैसी जा ढूंड़ी दुलईया
इक दिन जा बैठी सो कर रई सिंगार
और ओंठ मे लगा लओ ईने पाँव क... | bundeli-bns |
मोटी सी साड़ी ल्या दै हो
मोटी सी साड़ी ल्या दै हो
जिसकी चमक निराली . . .
जलियाँवाला बाग का जलसा
डायर फायर करता हो
भारत का बदला लेने को
लंदन में शेर विचरता हो
डायर मारया , खुद मरया
गया ना वार कती खाली
मोटी सी साड़ी ल्या दै हो
जिसकी चमक निराली . . . . | haryanvi-bgc |
539
अजू बन्ह खड़ा हथ पीर अगे तुसी लाडले परवरदगार1 दे हो
तुसी फकर अलाह दे पीर पूरे विच रेख2 दे मेख3 नूं मारदे हो
होवे दुआ कबूल पयारयां दी दीन दुनी4 दे कम सवारदे हो
अठे पहर खुदा दी याद अंदर तुसी नफस5 शैतान नूं मारदे हो
हुकम रब्ब दे थी तुसी नहीं बाहर पीर खास हजूर दरबार दे हो
मेरी नूंह नूं सप्प दा असर होया तुसी कील मंतर सप... | panjabi-pan |
काली हो गोलन बेटी काली हो गोलेन
काली हो गोलन बेटी काली हो गोलेन
काली हो गोलन बेटी काली हो गोलेन
काली हो गोलन बेटी जूरेना
काली हो गोलन बेटी जूरेना
तेरा मायू से गोदी वो बेटी रावसी बोली
तेरा मायू से गोदी वो बेटी रावसी बोली
सुसरा से गोदी वो बेटी काली हो गोलेन
सुसरा से गोदी वो बेटी काली हो गोलेन
काली हो गोलन बेटी जूरेना
काल... | korku-kfq |
करूं कढ़ाई गुलगुला सेढल माता धोकन जाय
करूं कढ़ाई गुलगुला सेढल माता धोकन जाय ।
इब म्हारी सेढल माता राज्जी होय ।
दादी दायला फूल्या नहीं समाय । | haryanvi-bgc |
यारौ पर नारी से बरकौ
यारौ पर नारी से बरकौ ।
येइ हुकुम है हरकौ ।
ई कलजुग कौ जाल कठिन है ।
रहवौ बड़ी खबर कौ ।
जिनके संगै परी भांवरैं ।
जोड़ा नारी नर को ।
जो सुख चाहौ घरी भरेकौ ।
मिटे जनम को खटकौ ।
ईसुर स्याम आस सब छोड़ौ
भजन करौ रधुवर कौ । | bundeli-bns |
विदाई गीत
तारा घर मा हिरे भर्यो हिडोलो ,
हिचणे वालि काहाँ चालि वो बेनी ।
तारा भाइ काजे हेलिमेलि लेजी वो , हिचणावालि ,
काहाँ चालि वो बेनी ।
तारि भोजाइ के हेलिमेलि वो हिचणावालि ,
बेनी काहाँ चालि वो ।
तारा बावा के हेलिमेलि लेजी वो हिचणावालि ,
बेनी काहाँ चालि वो ।
तारि माय काजे हेलिमेलि लेजि वो हिचणावालि ,
बेनी काहाँ चालि ... | bhili-bhb |
बागां में मेंहा बरसै सरवर पै मेंहा बरसै
बागां में मेंहा बरसै सरवर पै मेंहा बरसै
मत बरसै इन्दर मेरी मां का जाया बरसै
माला पै रंग बरसै चम्पा पै रंग बरसै
मत बरसै इन्दर राजा थाली में बीरा बरसै | haryanvi-bgc |
मैं आई थी मीठियां की लालच
मैं आई थी मीठियां की लालच
फीकी दे भुला दई ।
मैं आई थी गेहुआं की खात्तर
बाजरा की दे भुला दई ।
मैं आई थी घणियां की खात्तर
दो दो दे भुला दई । | haryanvi-bgc |
श्रमिक बोल
१ .
बोलीबोलऽ , चोली खोलऽ ,
चोली के भीतर , लाल कबूतर ,
खाए के मांगे , सबुज दाना ,
धरधर लेइयें पर , पांजर मोटा ,
खइबऽ सोटा , धर धरेसी ,
ध के पेसी , पेसन वाला ,
है मतवाला , ढिलवा भैया ,
करे ढिलाई , ओकर मउगी , करे सगाई ।
२ .
हाथ भरो जी हैसा ,
जोर करो जी हैसा ,
जोर जुगुती हैसा ,
हो छुट्टी हैसा ,
छुट्टी होना हैसा ... | bhojpuri-bho |
कहमा रे हँसा आवल, कहमा समाएल हो राम
कहमा रे हँसा1 आवल2 कहमा समाएल3 हो राम ।
कउन गढ़ कयलक4 मोकाम5 कहाँ रे लौटि जायत हो राम ॥ 1 ॥
निरगुन से हंसा आवल , सगुना समायल हो राम ।
बिसरी गयल हरिनाम , माया में लपटायल हो राम ॥ 2 ॥
नया रे गवनमा के आवल , पनियाँ के6 भेजल हो राम ।
देखल कुइयाँ के रीत , से जिया घबड़ायल हो राम ॥ 3 ॥
डोलवो... | magahi-mag |
सोना के ढकनी में हरदी परोसल
सोना के ढकनी1 में हरदी परोसल2 ।
उपरे3 लहलही दूभ4 हो , सिरवा5 हरदी चढ़ावे ॥ 1 ॥
पहिले चढ़ावे बराम्हन अप्पन6 ।
तब सकल परिवार हो , सिरवा हरदी चढ़ावे ।
सोना के ढकनी में हरदी परोसन ।
उपरे लहलही दूभ हो , सिरवा हरदी चढ़ावे ॥ 2 ॥
पहिले चढ़ावे बाबा जे अप्पन ।
तब सकल परिवार हो , सिरवा हरदी चढ़ावे ॥ 3 ... | magahi-mag |
परस बठंता अपना बाबल बुज्झा
परस बठंता अपना बाबल बुज्झा कहो तो कात्तक न्हाल्यूं हो राम
कातक न्हणा बेटी बड़ाए दुहेल्ला लाइयो बाग बगीचे हो राम
दूध घमोड़ती अपनी मायड़ बुज्झी कहो तो कात्तक न्हाल्यूं हो राम
कात्तक न्हाणा बेटी बड़ाए दुहेल्ला सिंच्चो धरम की क्यारी हो राम
धार काढ़ता अपना बीरा बुज्झा कहो तो कात्तक न्हाल्यूं हो रा... | haryanvi-bgc |
किस नींद सूत्या मेरा लक्खी ओ दादा
किस नींद सूत्या मेरा लक्खी ओ दादा
चार दल थारै ऊमहे
एक दल आप दल दूजा बाप दल
तीजा दल घर के भातिआ
चौथे दल ऊधली का री जाया
मौड बांध के बन्ना आइया
किस नींद सूत्या मेरा लक्खी ओ बाबल
चार दल थारै ऊमहे
एक दल आप दल दूजा बाप दल
तीजा दल घर के भातिआ
चौथे दल ऊधली का री जाया
मौड़ बांध के बन्ना आइया | haryanvi-bgc |
मेरी बीबी सोवै अटरिया
मेरी बीबी सोवै अटारिया पहने है झुमके बालियां
बीबी सोई सोई उठ जागियां अपने बाबा दादा से बर मांगिया
बाबुल एक कहा मोरा कीजिये मुझे राय रतन बर दीजियो
बेटी रायरतन सिर सेहरा जैसे बागों में खिल रहा केवड़ा
बेटी मत कर मन पछतावड़ा तेरी अम्मा गोरी बाबल सांवला
बेटी आप किसन भी सांवले रुक्मण का रंग ऊजला | haryanvi-bgc |
बिछिया पेरिया आपका
बिछिया पेरिया आपका
अपणा सुहाग का
आनड़िया रा बाप का
अलबेली जच्चा मान करो
मान करो , गुमान करो
री जच्चा मान करो
तोड़ा पेरिया आपका
अपणा सुहाग का
कीकाजी रा बाप का
अलबेली जच्चा मान करो | malvi-mup |
लाल मेरी अँगिया न छूऔ
लाल मेरी अँगिया न झूऔ ,
तिहारे करूँगी कपोलन लाल ॥ टेक
यह अँगिया नाहिं धनुष जनक को ,
छुबत टुटौ तत्काल ॥ लाल .
नहिं अँगिया गौतम की नारी ,
छुबत उड़ी नन्दलाल ॥ लाल .
गिरिधर धारि भये गिरधारी ,
नहिं जानौ बृजलाल ॥ लाल .
जावौ तुम खाबौ सुदामा के तन्दुल ,
गैयन के प्रतिपाल ॥ लाल .
कहा बिलोकत कुटिल भृकुटि कर ... | braj-bra |
आपणो संग रलाईं प्यारे
आपणो संग रलाईं प्यारे ,
आपणो संग रलाईं ।
पहिलों नेंहु लगाया सी तैं ,
आपे चाई चाई ।
मैं लाा ए कि तुध लाया ,
आपणी ओड़ निभाई ।
आपणो संग रलाईं प्यारे ।
राह पवाँ ताँ धाड़े बेले ,
जंगल लक्ख बलाईं ।
भौंकण चीते ते चित्त मुचित्ते1 ,
भौंकण करन अदाईं ।
आपणो संग रलाईं प्यारे ।
पार तेरे जगतार चढ़ेआ ,
कन्ढे लक्... | panjabi-pan |
ईसुरी की फाग-23
ऐसी हती रजउ की सानी
दूजी नईं दिखानी ।
बादशाह कै बेगम नइयाँ
ना राजा घर रानी ।
तीनऊ लोक भुअन चौदा में
ऐसी नईं दिखानीं ।
ईसुर पिरकट भईं हैं जग में
श्री वृषभान भुबानी ।
भावार्थ
महाकवि ' ईसुरी ' का अपनी प्रेयसी ' रजऊ ' से मिलन नहीं हो पाया । इस वियोग में ' रजऊ ' के रूप की प्रशंसा करते हुए वे कहते हैं — मेरी ... | bundeli-bns |
अबै जिन बरसो बादरा रे
अबै जिन बरसो बादरा रे
बरसन लागे बादरा रे ,
चुंअन मोरे लागे बांगला रे । अबै . . .
चुंअन मोरे लागे बांगला रे ,
भींजन मोरे लागे पालना रे । अबै . . .
भींजन मोरे लागे पालना रे ,
रोबन मोरे लागे लालना रे । अबै . . .
अबै घर नइयां साजना रे । अबै . . . | bundeli-bns |
बाना गीत
कुणे कह्यो ने गुदड़ये बठो रे बनो ।
बइण कह्यो ने गुदड़ये बठो रे बनो ।
कुणे कह्यो ने गुदड़ये बठो रे बनो ।
भोजाई कह्यो ने गुदड़ये बठो रे बनो ।
कुणे कह्यो ने गुदड़ये बठो रे बनो ।
भाई कह्यो ने गुदड़ये बठो रे बनो ।
जमीन पर गादी बिछाकर दूल्हादुल्हन को बैठाते हैं , जिसे बाना बैठाना कहा जाता है । दूल्हे के बाने बैठने प... | bhili-bhb |
सकल गुण धाम अम्बे तू भला क्या गान गाऊ मै
सकल गुण धाम अम्बे तू , भला क्या गान गाऊ मैं ।
बनाऊँ साज पूजन को , कहाँ पर साज पाऊँ मैं ।
तुमईं हो व्याप्त ग्रंथों में , तुमईं वेदों पुराणों में ।
कहाँ वह ज्ञान है मुझको , जो माता को सुनाऊँ मैं । ।
मृदुल सुचि पद्म आसीना , कहाँ आसन बनाऊ मैं ।
लगैया पार अब नैया , तेरो सो कौन पाऊँ म... | bundeli-bns |
म्हारा दादाजी आया, म्हारी माता हो आया
म्हारा दादाजी आया , म्हारी माता हो आया
दामा रो लोभी बीरो घर रयो
तम क्योंनी आया म्हारा माड़ी रा जाया
तम बिना सूनी म्हारी बिरदड़ी
विरद अलोणी बीरा , थारी बेन अलोमी
कड़ही री चीगट म्हरे चढ़ रई
थारा पिछवाड़े बेन्या गंगा हो जमना
न्हाईधोई ने बेन्या चीगट हेड़जे
न्हाया धोया से बीरा उजला नी द... | malvi-mup |
मेरे टांडै मैं सोला सै राणी
मेरे टांडै मैं सोला सै राणी
पर तेरै सिकल की नहीं सै
तैं तो चाल मेरे ए टांडे मैं राणी
ओड़ै बिछ रहे पिलंग जरी के
तेरे आग लागै टांडै कै जले
बल जाइयो हो पिलंग जरी के
तेरी गठड़ी में दाम कोन्या जले
तैं तो ठगदा फिरै सै जगत नै
मेरी गठड़ी मैं दाम भतेरे
दिन छिपदे ए ले ल्यूंगा फेरे
पर तिरिआ ना अपणी होव... | haryanvi-bgc |
झूलण आली बोल बता के बोलण का टोटा
झूलण आली बोल बता के बोलण का टोटा
झूलण खातर घल्या करैं सैं पींघ सामण में
मीठी बोली तेरी सै जणो कोयल जामण में
तेरे दामण में लिसकार उठै चमक रिहा घोटा
झूलण आली बोल बता के बोलण का टोटा
लरज लरज कै जावै से योह् जामण की डाली
पड़ के नाड़ तुड़ा लै तैं रोवै तन्ने जामण आली
तेरे ढुंगे पै लटकै काला न... | haryanvi-bgc |
116
काज़ी आखदा खौफ खुदाई दा कर मापे जिद चढ़े चा मारनी गे
तेरी किआड़ीयों1 जीभ कढा सुट्टण मारे शरम दे खून गुजारनी गे
जिस वकत दिता असां चा फतवा उस वकत ही मार उतारनी गे
वारस शाह कउं तरक2 बुरयाइया नूं नहीं अग दे विच निधारनो गे | panjabi-pan |
565
काज़ी आखया बोल फकीर मियां छड झूठ दे दब दबेड़यां नूं
असल गल जो आख दरगाह अंदरना कर ज़िकर तूं झगड़यां झेड़यां नूं
सारे देस विच धुम ते शोर होया दोवें फड़े हो आपने फेड़यां नूं
एस जट दी शरम जे लाह सुटी खुआर कीता जे सयालां ते खेड़यां नूं
पहलां मचयों आनके दावयां ते है सलाम वलां छलां तेरयां नूं
आबू1 भुन्नदियां झाड़ के चब2 च... | panjabi-pan |
बीबी तो म्हारी जैसे चन्दा चकोर
बीबी तो म्हारी जैसे चन्दा चकोर
लाडो तो मांगे म्हारी हाथी का दान
हस्ती का दान तेरा बाबा जी देगा
बाबल जी देगा
म्हारे पै तो हैंगे लक्ख चार
हे री लक्ख चार
लाड्डो तो म्हारी जैसी चन्दा चकोर | haryanvi-bgc |
387
तेरे मौर लौंदे फाट खान उते मेरी फुरकदी अज मुतैहर1 है नी
मेरा कुतकां2 लवे ते तेरे चुतड़ अज दोहां दा वडड़ा भेत है नी
चिबड़3 वांग तेरे बिउ कढ सुटां तैनूं आया है जोर दा कहर है नी
एस भेड दे खून तों किसे चिड़ के नाहीं मार लगया कदी शहर है नी
उजाड़े खोर गधे वांगूं कुटिएगी तैनूं वढड़ी किसे दी विहर4 है नी
वारस शाह ए मारदी रन... | panjabi-pan |
पीरे पट वाले मेरे सैया
पीरे पट वाले मेरे सैयां
कै तुम संग किये साधुन के
कै सरजू में दई गैयां । पीरे . . .
ना हम संग किये साधुन के
ना सरजू में दई गैयां । पीरे . . .
गुण अवगुण तुम तो सब जानो
तुम से नाथ झुपी नैयां । पीरे . . . | bundeli-bns |
खिल खिल गए दो दाणे अनार के
खिल खिल गए दो दाणे अनार के , हां हां खिल गए दो दाणे अनार के
मनैं नहाणा बणाया सभाल के , कैसे नहाऊं बिगैर दिलदार के
खिल खिल गए दो . . .
मनैं खाणा बनाया संभाल के , कैसे खाऊं बिगैर दिलदार के
खिल खिल गए दो . . .
मनैं चोपड़ सजाई संभाल के , कैसे खेलूं बिगैर दिलदार के
खिल खिल गए दो . . . | haryanvi-bgc |
356
मथा वेख के करो इलाज इसदा रखां नजर जो दयो फरमा मैंनूं
नाडी वेख के एस दी करां कारी देवे उठ के हथ दिखा मैंनूं
रोग कास तों चलया करो जाहर मजा मूंह दा एह बता मैंनूं
वारस शाह मियां छती रोग कटां मलकुल1 मौत दी याद दवा मैंनूं | panjabi-pan |
आयो परदेसी सूबटो ले ग्यो टीली में
आयो परदेसी सूबटो ले ग्यो टीली में सूं टाल एकलड़ी क्यों चाली हे
इतनो बाबाजी रोहेत इतनो ताऊ जी रोहेत एकलड़ी क्यों चाली हे
इतनो मामा जी रोहेत इतनो फूफा जी रोहेत एकलड़ी क्यों चाली हे
आयो परदेसी सूबटो ले ग्यो टोली में सूं टाल एकलड़ी क्यों चाली हे | haryanvi-bgc |
ऊना सा पाणी ठंडा वई रया रे
डळी बाई ना आंगणे चार खुणी बावड़ी
चार खुण्यो कुंड
कणे म्हारो नीर झकोल्यो
रूणीजा रा देव रामदेव जी नीर झकोल्यो
वणे असनान करिया
सुगणा बई रा आंगणे चम्पो मोगरो
कणे चंपो मरोड़ियो
रूणीजा रा देव रामदेव जी
वणाए चंपो मरोड़ियो | malvi-mup |
मैया महक रहे तोरे बाग मदिरवा गर के
मैया महक रहे तोरे बाग , मंदिरवा एंगर के ।
चम्पा चमेली केतकी फूली ,
मैया फूल रही कचनार । मंदिरवा . . .
फूले गुलाब चांदनी बेला ,
केवरा की है बहार । मंदिरवा . . .
कमल कुमुदनी मोंगरा फूलो ,
फूल रहे गुलदाख । मंदिरवा . . .
दिन के राजा रात की रानी ,
फूलन की भरमार । मंदिरवा . . .
भांतिभांति क... | bundeli-bns |
32
वाह ला रहे भाई भाबियां भी रांझा रूस हजारयों धाया ई
भुख नंग नूं झागके पंध करके रातीं विच मसीत ते आया ई
हथ वंझली पकड़ के रात अधी औथे रांझे नूं मजा भी आया ई
रन्न मरद न पिंड विच रिहा कोई घेरा गिरद मसीत ते पाया ई
वारस शाह मियां पंड झगड़ियां दी पिच्छे मुलां मसीत दा आया ई | panjabi-pan |
429
उन्हां छुटदियां हाल पुकार कीती पंजसत मुशटंडियां आ गईयां
वांग काबली कुतियां गिरद होइयां दा दा अललहिसाब1 लगा गईयां
उन्हां अक के धक्के रख अगे घरों कढ के ताक चढ़ा गईयां
धके दे के सट पलट उसनूं होड़ा बड़ा मजबूत फसा गईयां
बाज तोड़के ताबयों2 लाहयों ने माशूक दी दीद हटा गईयां
सूबेदार तगयार3 नूं ढा छठया वडा जोगी नूं वायदा पा ... | panjabi-pan |
पहले आवै री माता जुलजुली
पहले आवै री माता जुलजुली
पाछे हलहल ताप
सच्ची सेढ़ मसाणिया
हाड़ खिणै खिणै माता निकले
मोती की हुणियार
सच्ची सेढ़ मसाणिया
मेर करेगी री माता आपणी
पाल्ले जूं झड़ जाय
सच्ची सेढ़ मसाणिया
तन्नै ध्यावै री माता दो जगे
एक पुरुस दूजी नार
सच्ची सेढ़ मसाणिया
पुरस करेगा री माता बिनती
वा धण लागै तेरे पांय
सच्च... | haryanvi-bgc |
वाह वाह रमज़ सज्जण दी होर
वाह वाह रमज़ सज्जण दी होर ,
आशकाँ दिनाँ ना समझे कोर ।
कोठे चढ़ के देवाँ होका ,
जंगल बस्ती मिले ना ठोर ।
वाह वाह रमज़ सज्जण दी होर ।
आशक देाहीं जहानी मुट्ठे ,
नाज़ माशूकाँ दे ओह कुट्ठे ,
किस तो बाँधा फट्ट तलवार ।
वाह वाह रमज़ सज्जण दी होर ।
दे दीदार सोया जद माही ,
अचनचेत पई गल फाही ।
डाढी कीती ... | panjabi-pan |
सूरज कौंल (सूरज कुँवर)
जाँदी मऊ कू बेटा अडयी नि लांदी ।
बिराणा देशा को बेटा गारो बैरी होन्दा ,
नि जाणो कुंवर मेरा बैरयूंकी भकौणा ।
मान जा सूरजू बेटा माता की अड्याई1 ,
दानों2 कू बोलियूं बाला ओला3 को सवाद ।
तेरो होलो सूरजू बाला भिमलो बजार
कनि होली कुंवर तेरी नौरंगी तिवारी ।
तेरि खोली गणेश वाला मुख च झूमदो ,
तेरी भुली सुर... | garhwali-gbm |
हांसी सहर से पाते मंगवा दो
हांसी सहर से पाते मंगवा दो
सिरसे के छीपी से रंगवा दो
गाढ़ा मारा जी पीलो रंगवा दो
पीलो ओढ़ म्हारी जच्चा पाणी ने चाली
लाल पड़ोसिन मुख मोड़ा
गाढा मारा जी पीलो रंगवा दो
एडा तो शेड़ा साहबा मोर पपीहा
घूंघट पर सान्ती ओम लिखा दो
पति प्यारा जी पीलो रंगवा दो
पीलो ओढ़ म्हारी जच्चा खेत ने चाली
ननद जेठानी... | haryanvi-bgc |
रघुबर राजकिशोरी महल बिच खेलत रे होरी
रघुबर राजकिशोरी महल बिच खेलत रे होरी ।
कर झटकत घूंघट पट खोलत ,
मलत कपोलन रोरी । महल . . .
कंचन की पिचकारी घालत ,
तक मारत उर ओरी । महल . . .
सोने के घड़न अतर अरगजा ,
लै आईं सब गोरी । महल . . .
हिलमिल फाग परस्पर खेलत ,
केसर रंग में बोरी । महल . . .
अपनीअपनी घात तके दोऊ ,
दाव करत बरजोर... | bundeli-bns |
किनका के एहो दूनूँ कुवँरा जनक पूछे मुनि जी से
किनका1 के एहो2 दूनूँ कुवँरा3 जनक पूछे मुनि जी से ॥ 1 ॥
गाई के गोबर अँगना निपावल , गजमोती चउका पुरावल4 ।
धनुस देलन ओठगाँई5 जनक पूछे मुनि जी से ॥ 2 ॥
जे एहो धनुस करत तीन खंड , सीता बियाह घरवा ले जायत हो ।
किनका के एहो दूनूँ कुवँरा , जनक पूछे मुनि जी से ॥ 3 ॥
उठला सिरी रामचन्द... | magahi-mag |
सुसराल पणै मैं चाल पड़ा रे
सुसराल पणै मैं चाल पड़ा रे छोरा साइकल त्यार कर के
ओले हाथ कै घड़ी बांध रह्या टेढा साफा धर कै
गाम गोठ जद पहुंच लिया छोटा साला मिल गया
जद साले नै करी नमस्ते साइकल नोहरै मैं डाट लिया
सांझ होई जद दिया चासण नाई का आया
चाल बटेऊ चालिए कुछ भोजन सा खाया
थाली पै बैठ कै जद जीमण भी लाग्या
चारों तरफ लखा क... | haryanvi-bgc |
477
मिहतर1 नूंह2 दियां बेटियां जिद कीती डुब मोए नी छड टकानयां नूं
याकूब दयां पुतरां जुलम कीता सुनया होसीया यूसफ दयां बानयां नूं
हाबील कबील3 दा जंग होया छड गए पैगम्बरी बानयां नूं
जे मैं जानदी मापयां बन्न देनी छड चलदी झंग मघयानयां नूं
खाहश हक दी कलम तकदीर वगी मोड़े कौन अलाह दे भाणयां नूं
किसे ततड़े वकत सी नेहुं लगा तुसां... | panjabi-pan |
कर जोर खड़ी गिरिजा ढिग राज दुलारी
कर जोर खड़ी गिरिजा ढिंग राज दुलारी ,
जगदंबे अंबे हिय की तुम जानन हारी ।
कीन्हों न प्रगट तेइसें कारण बखान के ,
कर देहू सफल सेवा , अब मातु हमारी ।
कर जोर . . .
कह सके न शेष शारद महिमा अपार है ,
बड़अगु पतिव्रत में जगलोक तुम्हारी । ।
कर जोर . . .
कंचन कुंअरि सप्रेम विनय भाल कंठ से ,
दीन्ही... | bundeli-bns |
248
महांदेव थीं जोग दा पंथ बनया खरी कठन है जोग मुहिंम मियां
कौड़ा बक बका सवाद है जोग संदा जेही घोटके पीवनी निंम मियां
जहां सुन समाध दी मंडली है तहां जोड़ना है निंम झिंम मियां
तहां भसम लगाइके भसम होणा पेश जाए नाहीं गबर ते डिंम1 मियां | panjabi-pan |
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.