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2,031
वह अक्षय कुमार की फैन है।
positive
2,032
'द शौकीन्स' में अक्षय कुमार ने अपनी खिलाड़ी इमेज,समीक्षकों की धारणा और नेशनल अवॉर्ड की चाहत से अपना अच्छा मजाक उड़वाया है।
negative
2,033
अक्षय कुमार की जिंदगी के सच और फिल्म की कल्पना से अच्छा प्रहसन तैयार हुआ है।
positive
2,035
संयोग से सुब्रत दत्ता भी एनएसडी के हैं।
neutral
2,037
अवधारणा की समानता के बावजूद इसे पुरानी 'शौकीन' की रीमेक के तौर पर देखने न जाएं तो अधिक आनंद आएगा।
positive
2,038
यह आज के दौर की फिल्म है।
neutral
2,039
सभी कलाकारों और तकनीशियनों ने अच्छा काम किया है।
positive
2,040
कुछ कलाकारों के अभिनय में अवश्य दोहराव है।
negative
2,041
आत्ममुग्ध होने पर ऐसा होता है।
neutral
2,042
इस फिल्म में लीजा हेडन, पीयूष मिश्रा और सुब्रत दत्ता की अतिरित तारीफ करनी होगी।
positive
2,043
तिग्मांशु धूलिया और अभिषेक शर्मा तो बधाई के पात्र हैं ही।
positive
2,044
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का सातवां दशक।
neutral
2,045
अभी एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन का पदार्पण नहीं हुआ था।
negative
2,046
फिल्म स्टार, फिल्में, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर का अलग ढर्रा था।
neutral
2,047
लेखक और निर्देशक का पूरा ध्यान हिमेश रेशमिया पर टिका है।
neutral
2,048
उनकी वेशभूषा, चाल-ढाल, संवाद अदायगी, लुक और अंदाज को हर तरह से सजाने-संवारने की सफल कोशिश की गई है।
positive
2,049
फिल्म की दोनों हीरोइनों जारा और चांदनी की खूबसूरत और मादक अंदाज में पेश किया गया है।
positive
2,050
चूंकि माहौल ही फिल्म इंडस्ट्री की रौनक का है, इसलिए वे सभी फिल्म की कहानी में उपयुक्त लगते हैं।
positive
2,051
फिल्म में निर्माता-निर्देशक के तौर पर आए किरदारों को ठोस चरित्र दिए गए हैं।
positive
2,052
इनके अलावा बाकी किरदारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है, इसलिए वे फिल्म में होते हुए भी फिल्म का हिस्सा नहीं लगते।
negative
2,053
इरफान और आदिल हुसैन बेहतर कलाकार हैं।
positive
2,056
अनंत नारायण महादेवन ने हिमेश रेशमिया के सौजन्य और सहयोग से सातवें दशक की पृष्ठभूमि में एक मर्डर मिस्ट्री बुनी है, जो म्यूजिकल भी है।
neutral
2,057
म्यूजिक की दो पॉपुलर प्रतिभाएं (हिमेश रेशमिया और हनी सिंह) इस फिल्म से जुड़ी हैं।
positive
2,058
संगीत मधुर और कर्णप्रिय है।
positive
2,059
उनका फिल्मांकन रोचक है।
positive
2,060
संगीत आज का है, लेकिन ध्वनियों में सातवें दशक की अनुगूंज है।
neutral
2,061
लेखक-निर्देशक मर्डर मिस्ट्री को अंत तक बनाए रखने में सफल रहे हैं।
positive
2,062
फिल्म इंडस्ट्री में अवॉर्ड नाइट की पार्टी में एक हीरोइन की हत्या हो जाती है।
negative
2,063
शक के दायरे में सभी हैं, लेकिन असली हत्यारा कौन है?
neutral
2,064
'द एक्सपोज' में फिल्म स्टार और इंडस्ट्री की ईष्र्या, चालबाजी, साजिश, इगो, निराशा, प्रेम और बदले की भावना को लेखक-निर्देशक ने फिल्म की कहानी में घटनाओं के जरिए पिरोया है।
neutral
2,065
कथा विस्तार नहीं होने से फिल्म की रोचकता गहरी नहीं हो पाती।
negative
2,066
ईष्र्या और हत्या का कमजोर आधार फिल्म के रहस्य और प्रभाव को कम करता है।
negative
2,067
हालांकि निर्देशक और मुख्य कलाकारों ने अपने अंदाज और अभिनय से रहस्य गढ़ने और बढ़ाने की पूरी कोशिश की है।
positive
2,068
यह फिल्म हिमेश रेशमिया की है।
neutral
2,069
उनकी मेहनत, लगन और प्रतिभा नजर आती है।
positive
2,070
इस फिल्म में इरफान और आदिल हुसैन पैबंद की तरह नजर आते हैं।
neutral
2,071
अनुराग कश्यप की फिल्म 'अग्ली' के इस शीर्षक गीत को चैतन्य की भूमिका निभा रहे एक्टर विनीत कुमार सिंह ने लिखा है।
neutral
2,072
फिल्म निर्माण और अपने किरदार को जीने की प्रक्रिया में कई बार कलाकार फिल्म के सार से प्रभावित और डिस्टर्ब होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही भूमिका निभाने की उधेड़बुन को यों प्रकट कर पाते हैं।
neutral
2,073
दरअसल, इस गीत के बोल में अनुराग कश्यप की फिल्म का सार है।
neutral
2,074
फिल्म के थीम को गीतकार गौरव सोलंकी ने भी अपने गीतों में सटीक अभिव्यक्ति दी है।
positive
2,075
वे लिखते हैं, जिसकी चादर हम से छोटी, उसकी चादर छीन ली, जिस भी छत पर चढ़ गए हम, उसकी सीढ़ी तोड़ दी...या फिल्म के अंतिम भाव विह्वल दृश्य में बेटी के मासूम सवालों में उनके शब्द संगदिल दर्शकों के सीने में सूइयों की तरह चुभते हैं।
negative
2,076
इन दिनों बहुत कम फिल्मों में गीत-संगीत फिल्म के भाव को छू पाते हैं।
positive
2,077
'अग्ली' की कुरूपता समझने के लिए इन गीतों को फिल्म देखने के पहले या बाद में सुन लें तो पूरा नजरिया और संदर्भ मिल जाएगा।
positive
2,079
अनुराग की इस फिल्म में केवल कली ही निष्कपट चरित्र है।
positive
2,080
वह अपने पापा को प्यार करती है।
positive
2,081
उसे नहीं मालूम कि उसकी मां पापा से क्या अपेक्षा रखती है और क्यों दूसरे पापा के साथ रहने लगती है।
neutral
2,082
वह तो पापा के साथ रहने की कोशिश में इस बेरहम समाज के लालच का शिकार होती है।
negative
2,083
कली की मां शालिनी, कली के पापा राहुल, कली के दूसरे पापा सौमिक, पापा के दोस्त चैतन्य, मामा सिद्धांत, मां की दोस्त राधा सभी किसी न किसी प्रपंच में लीन हैं।
negative
2,084
वे अपने स्वार्थ और लाभ के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं।
negative
2,085
रात के पौने तीन बजे अंडरवियर में हजार-हजार के नोट खोंस कर हवा में हजारों के नोट उड़ाते और सोफे पर नोट बिछा कर लेटते कली के मामा को देख कर घिन आ सकती है, लेकिन यही मुंबई जैसे शहरों की घिनौनी काली सच्चाई है।
negative
2,086
कली के मां या दोनों पापा भी तो दूध के धुले नहीं हैं।
negative
2,087
बतौर -लेखक निर्देशक अनुराग कश्यप की किसी किरदार से सहानुभूति नहीं है।
negative
2,088
वे निष्ठुर भाव से उन्हें ज्यों के त्यों पेश कर देते हैं।
negative
2,089
हमारी मुलाकात एक निर्दयी निर्देशक से होती है, जिसकी कटु कल्पना शहर के अंधेरे कोनों और इंसान के संकरे विवरों में प्रवेश करती है।
neutral
2,090
वहां हर किरदार को अपनी कमजोरियों से लगाव है।
negative
2,091
एक और डरावनी फिल्म।
negative
2,092
बिलकुल उसी तर्ज पर की कम बजट और कमजोर कहानी।
negative
2,093
फिर भी कोशिश दर्शकों को रिझाने की।
neutral
2,094
इस बार हमारे सामने है 'द वेटीकन टेप्स'।
neutral
2,095
फिल्म का निर्देशन मार्क नेवेल्डीन ने किया है।
neutral
2,096
ऐसा लगता है कि मानो वो डायरेक्शन ही भूल गए हों।
negative
2,097
कारण कि इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं जो उनकी पुरानी फिल्मों की याद दिलाए।
neutral
2,099
फिल्म की कहानी एक यंग लड़की के ईर्द-गिर्द घूमती है।
neutral
2,100
यह किरदार निभाया है ओलिविया डुडली ने।
neutral
2,101
विज्ञान और दवा के होने वाले दुष्प्रभावों पर बात करती इस फिल्म में लड़की को एक व्यक्ति नोटिस करता है।
neutral
2,103
बस फिर इसके बाद तरह-तरह के तरीके आपको दूसरी डरावनी फिल्मों की याद दिलाते हैं।
neutral
2,104
अब यदि आपको लग रहा हो कि क्या बोरिंग फिल्म है।
negative
2,105
तो आपको इससे भी आगे की बात महसूस होगी।
neutral
2,106
फिल्म उम्मीद से ज्यादा ही डल है।
negative
2,107
डराने के लिए इस्तेमाल किए गए सीन भी नाकामायाब है।
negative
2,108
इस तरह की फिल्मों में पहले भी वेटीकन चर्च से जुड़ा कुछ किस्सा बताया जा चुका है।
neutral
2,109
ऐसे में यह कुछ नया नहीं है।
negative
2,110
यह भी विडंबना ही है कि हॉरर फिल्मों की गोल्डन एज में भी ऐसी हॉरर फिल्में बन रही है।
negative
2,111
इस फिल्म में टाइमपास भी नहीं किया जा सकता है।
negative
2,112
'व्हाट द फिश' केवल डिंपल कपाड़िया की फिल्म नहीं है।
neutral
2,113
फिल्म के प्रचार में यह धोखा गढ़ा गया है।
negative
2,114
वह केंद्रीय चरित्र जरूर हैं, लेकिन फिल्म में अनेक चरित्र आते-जाते हैं।
neutral
2,115
'व्हाट द फिश' ऐसी डायरी है, जिसके पन्ने हवा में फड़फड़ा रहे हैं।
negative
2,116
कभी कोई पृष्ठ खुल जाता है, कभी कोई।
negative
2,117
तारतम्य बिठाना मुश्किल होता है।
negative
2,118
आखिरकार पूरी कहानी जुड़ती है तो हम ठगा महसूस करते हैं, क्योंकि एक रोचक विषय को अयोग्य लेखन और निर्देशन से अरुचिकर बना दिया गया है।
negative
2,119
मौसी को अपनी पैरॉट फिश और मनी प्लांट प्रिय है।
positive
2,120
महीने भर के लिए घर से बाहर जा रही मौसी इन दोनों को दाना डालने और सींचने की जिम्मेदारी भतीजी को देकर जाती हैं।
neutral
2,121
भतीजी अपने ब्वॉयफ्रेंड को जिम्मेदारी सौंपती है और फिर यह जिम्मेदारी हर चरित्र के साथ आगे सरकती जाती है।
neutral
2,122
किरदारों को अतीत और भविष्य से काट कर सिर्फ वर्तमान में रखा गया है।
neutral
2,123
उनके बारे में ज्यादा न जानने से अपरिचय भाव बना रहता है।
neutral
2,124
नए कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं में स्वतंत्र मेहनत की है।
positive
2,125
यह मेहनत उनके परफारमेंस तक ही सीमित रहती है।
neutral
2,126
कड़ी से कड़ी जुड़ती जाती है, लेकिन वह किसी हार का रूप नहीं लेती है।
positive
2,127
मौसी (डिंपल कपाडि़या) को हास्यास्पद किरदार बना दिया गया है।
negative
2,128
डिंपल कपाड़िया लाउड परफारमेंस के बावजूद फिल्म की जरूरत पूरी करने में असफल रही हैं।
negative
2,129
यह सवाल करना बेमानी है कि उन्होंने 'व्हाट द फिश' क्यों की?
neutral
2,131
फिल्म के शीर्षक और विषय का परस्पर संबंध में समझ में नहीं आता।
negative
2,132
एक बकरे के बहाने भारतीय समाज की कहानी कहती 'ये है बकरापुर' छोटी और सारगर्भित फिल्म है।
positive
2,133
कुरैशी परिवार की आखिरी उम्मीद है यह बकरा, जिसे शाहरुख नाम दिया गया है।
neutral
2,134
वह बकरा परिवार के बच्चे जुल्फी का दोस्त है।
neutral
2,135
जब उसे बेचने की बात आती है तो जुल्फी दुखी हो जाता है।
negative
2,136
ऐसे वक्त में जाफर की एक युक्ति काम आती है।
neutral
2,137
इस से बकरा परिवार में रहने के साथ ही आमदनी का जरिया भी बन जाता है।
neutral
2,138
बकरे से हो रही आमदनी को देख कर गांव के दूसरे समुदाय के लोग भी हक जमाने आ जाते हैं और फिर सामने आता है सामाजिक अंतर्विरोध।
negative