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|---|---|---|
1,808 | बदले की इस कहानी में बाघिन विलेन के तौर पर उभरती है। | negative |
1,809 | फॉरेस्ट ऑफिसर और स्थानीय गाइड के मना करने पर भी वह अपने अभियान पर निकलता है। | neutral |
1,811 | 'रोर' में छिटपुट रूप से सुंदरवन के रहस्य उद्घाटित होते हैं। | positive |
1,812 | जंगल की खूबसूरती माइकल वॉटसन की फोटोग्राफी में निखरी दिखती है। | positive |
1,813 | फिल्म के एक्शन दृश्य भी ठीक हैं। | positive |
1,814 | कमी है तो फिल्म में नाटकीयता और उपयुक्त संवादों की। | negative |
1,815 | फिल्म के किरदार ढंग से नहीं गढ़े गए हैं। | negative |
1,816 | वे सही प्रभाव नहीं छोड़ पाते। | negative |
1,817 | हालांकि अभिनव शुक्ला ने पंडित की जिद को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। | positive |
1,818 | 'रोर' में सूफी (आरन चौधरी) और वीरा (सुब्रत दत्ता) ही अपने किरदारों के साथ न्याय कर सके हैं। | positive |
1,819 | ढीली पटकथा और कमजोर कहानी की वजह से 'रोर' बांध नहीं पाती। | negative |
1,821 | बाघिन का चित्रण और फिल्मांकन किसी मनुष्य की तरह किया गया है। | neutral |
1,822 | अतार्किक दृश्यों और भिड़ंत से फिल्म कमजोर हो गई है। | negative |
1,823 | बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं,जो आरंंभ से अंत तक दर्शकों को बांध ही न पाएं। | negative |
1,824 | विक्रमजीत सिंह की 'रॉय' ऐसी ही फिल्म है। | neutral |
1,825 | साधारण फिल्मों में भी कुछ दृश्य, गीत और सिक्वेंस मिल जाते हैं,जिसे दर्शकों का मन बहल जाता है। | neutral |
1,826 | 'रॉय' लगातार उलझती और उलझाती जाती है। | negative |
1,827 | हालांकि इसमें दो पॉपुलर हीरो हैं। | positive |
1,828 | रणबीर कपूर और अर्जुन रामपाल का आकर्षण भी काम नहीं आता। | negative |
1,829 | ऊपर से डबल रोल में आई जैक्लीन फर्नांडीस डबल बोर करती हैं। | negative |
1,831 | हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बैकड्रॉप पर बनी 'रॉय' इंडस्ट्री की गॉसिप इमेज ही पेश करती है। | negative |
1,832 | फिल्म के एक नायक कबीर ग्रेवाल के 22 संबंध रह चुके हैं। | neutral |
1,833 | उनके बारे में मशहूर है कि वे अपनी प्रेमिकाओं की हमशक्लों को फिल्मों की हीरोइन बनाते हैं। | neutral |
1,834 | कुछ सुनी-सुनाई बात लग रही है न ? | neutral |
1,835 | बहरहाल, 'रॉय' कबीर और रॉय की कहानी है। | neutral |
1,836 | रॉय चोर है और कबीर उसकी चोरी से प्रभावित है। | negative |
1,837 | वह उस पर दो फिल्में बना चुका है। | neutral |
1,838 | तीसरी फिल्म की शूटिंग के लिए मलेशिया जाता है। | neutral |
1,841 | दूसरी तरफ रॉय भी मलेशिया में है। | neutral |
1,842 | वह अंतिम चोरी के लिए आया है,जिसके बाद उसे किसी अनजान देश के अनजान शहर में अनजान नाम से जिंदगी जीना है। | neutral |
1,843 | रॉय और कबीर की इस कहानी में टीया और आयशा की वजह से गड्डमड्ड होती है। | neutral |
1,844 | जैक्लीन फर्नांडीस दोनों रूपों में एक सी लगती हैं। | neutral |
1,845 | डबल रोल सभी के वश की बात नहीं होती। | negative |
1,846 | खास कर जब हिंदी बोलने और पढऩे नहीं आता हो तो संवाद अदायगी में फर्क कैसे आएगा? | neutral |
1,847 | 'रॉय' की सबसे कमजोर कड़ी जैक्लीन फर्नांडीस हैं। | negative |
1,848 | उन्होंने नाच-गाने में भरपूर ऊर्जा दिखाई है। | positive |
1,849 | अभिनय से अभी वह कोसों दूर हैं। | negative |
1,850 | अर्जुन रामपाल और रणबीर कपूर समर्थ अभिनेता हैं। | positive |
1,851 | निर्देशक ने इस फिल्म में उनके सामर्थ्य का उपयोग गैरजरूरी समझा है। | negative |
1,852 | दोनों ने बेपरवाही के साथ काम किया है। | negative |
1,853 | अन्य दिक्कते भी हैं। | negative |
1,854 | अर्जुंन रामपाल की दाढ़ी चिपकाई हुई दिखती है। | negative |
1,855 | रॉय के रूप में रणबीर कपूर भी खोए-खोए से हैं। | negative |
1,856 | उनका चरित्र ही वैसा गढ़ा गया है। | neutral |
1,857 | दोनों एक समय के बाद नीरस और अप्रभावी हो जाते हैं। | negative |
1,858 | फिल्म की थीम के हिसाब से सलेटी रंग चुना गया है, लेकिन वह अधिक काम नहीं आ पाता। | negative |
1,859 | निर्देशक और लेखक ने पटकथा पर अधिक मेहनत नहीं की है। | negative |
1,860 | कुछ नया करने और दिखाने के चक्कर में फिल्म फिसल गई है। | negative |
1,862 | उनकी लोकप्रियता से कुछ दर्शक भले ही आ जाएं। | positive |
1,864 | फिल्म में एक संवाद है कि जो बात समझ में नहीं आती, वह सुनाई भी नहीं पड़ती। | negative |
1,865 | उसी तर्ज में कहें तो जो दृश्य समझ में नहीं आते, वे दिखाई भी नहीं पड़ते। | negative |
1,866 | 'षमिताभ' अनोखी व प्रयोगवादी किस्सागोई करने को मशहूर फिल्मकार आर. बाल्की की फिल्म है। | positive |
1,867 | 'षमिताभ' की कहानी एक गूंगे शख्स की है, जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का सुपरस्टार बन जाता है। | neutral |
1,868 | वह भी तब, जब वह न किसी फिल्मकार का सगा-संबंधी है। | neutral |
1,869 | न उसके पास संसाधन हैं। | negative |
1,870 | न वह टिपिकल हीरो जैसा दिखता ही है। | negative |
1,871 | वह फिर भी कैसे सितारा बनता है, उस सफर को बाल्की ने विश्वसनीय तरीके से पोट्रे किया है। | neutral |
1,872 | 'षमिताभ' बड़ी खूबसूरती से हिंदी फिल्मकारों व सितारों की लकीर के फकीर वाली सोच व कार्यप्रणाली पर करारा प्रहार कर जाती है। | positive |
1,873 | वह माइंडलेस मसाला फिल्मों पर तंज कसते हुए उन्हें आड़े हाथों लेती है। | negative |
1,874 | फिल्म में अमिताभ बच्चन के असल जिंदगी से जुड़े अनुभव भी हैं। | neutral |
1,875 | उन्हें असल जिंदगी में हिंदी फिल्म जगत को बॉलीवुड कहना पसंद नहीं है। | negative |
1,876 | उसे एक संवाद से उनका किरदार फिल्म में कह जाता है। | neutral |
1,877 | फिल्म यह सवाल भी उठाती है कि क्या एक आम चेहरे-मोहरे वाला शख्स कभी सुपरस्टार नहीं बन सकता? | neutral |
1,878 | 'षमिताभ' में किरदारों की असुरक्षा, अविश्वास और अहम की गुत्थमगुत्थी है। | neutral |
1,879 | यह ग्लैमर जगत में नाम और दाम कमाने को संघर्षरत दो शख्स दानिश(धनुष) और अमिताभ सिन्हा(अमिताभ बच्चन) की गाथा है। | neutral |
1,880 | मुंबई के पास इगतपुरी इलाके का दानिश गूंगा, गरीब और आम चेहरे-मोहरे वाला शख्स है, पर वह बचपन से फिल्मों का दीवाना है। | neutral |
1,881 | उसे जिंदगी में हीरो ही बनना है। | neutral |
1,882 | उसकी मां उसके इस मुश्किल ख्वाब से परेशान और चिंतित है। | negative |
1,883 | दानिश बड़ा होता है। | neutral |
1,884 | बस ड्राईवर बन अपनी मां को सहारा देना चाहता है कि उसकी मां चल बसती है। | neutral |
1,885 | उसके बाद वह सपनों के शहर मुंबई आता है। | neutral |
1,887 | उनकी जुगलबंदी रंग लाती है। | positive |
1,888 | दानिश का नया नाम षमिताभ रखा जाता है और पहली ही फिल्म सुपरहिट हो जाती है। | positive |
1,890 | फिल्म पूरी तरह अमिताभ बच्चन के नाम है। | neutral |
1,891 | वे अपनी दमदार संवाद अदायगी से बताते हैं कि 70 पार होने के बावजूद उनमें अब भी काफी ऊर्जा और उत्साह बाकी है। | positive |
1,892 | अब यह फिल्मकारों पर निर्भर करता है कि वे उनके किन शेड्स को उभार और बाहर निकाल पाने में सक्षम है। | neutral |
1,893 | धनुष ने अपने किरदार से अमिताभ बच्चन की बुलंद आवाज और चेहरे पर हाव-भाव को ठीक-ठाक तौर पर कैरी किया है। | positive |
1,894 | अक्षरा हासन इस फिल्म से अपना डेब्यू कर रही हैं। | neutral |
1,895 | उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर यानी एडी की भूमिका का निर्वहन किया है। | neutral |
1,896 | वे बड़ी स्वीट लगी हैं, लेकिन उन्हें अपनी अदाकारी पर अभी और काम करना होगा। | positive |
1,897 | फिल्म का निर्देशन असाधारण है। | positive |
1,898 | आर. बाल्की ने 156 मिनट लंबी फिल्म को बोझिल नहीं होने दिया है। | positive |
1,899 | उन्होंने परिस्थितियों का ताना-बाना बेहद रोचक और तार्किक बुना है। | positive |
1,900 | स्वानंद किरकिरे ने अपनी प्रतिष्ठा के मुताबिक सीन को आगे बढ़ाने में मदद करने वाले गाने लिखे हैं। | neutral |
1,901 | पीसी श्रीराम की सिनेमैटोग्राफी उम्दा है। | positive |
1,902 | महानगरीय जीवन की अपनी संभावनाएं, समस्याएं और चुनौतियां हैं। | negative |
1,903 | वहां रह रहे युवा अपने-अपने तरीकों से जिंदगी में ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहते हैं। | neutral |
1,905 | मुंबई, दिल्ली जैसे जगहों पर उन प्रयासों को हवा देने वाले प्रलोभनों की भी कमी नहीं होती। | positive |
1,906 | उनसे बचना या उनके जाल में फंसना व्यक्ति विशेष के विवेक पर निर्भर करता है। | neutral |
1,907 | गुरमीत सिंह और राजेश चावला ने मिलकर फिल्म की चुस्त पटकथा गढ़ी है। | positive |
1,908 | फिल्म दक्षिणी दिल्ली में सेट है। | neutral |
1,909 | कहानी का नायक पृथ्वी खुराना अपने दोस्त सैम के संग रहता है। | neutral |
1,910 | उसका स्पष्ट कहना है, जिंदगी में नतीजे की परवाह होनी चाहिए, तरीके की नहीं। | neutral |
1,911 | लाइफ और टी-20 मैच में पैसे और रन कहीं से बरसे कोई फर्क नहीं पड़ता। | neutral |
1,913 | वे अच्छी जिंदगी जीने को लालायित हैं, पर पैसों की किल्लत के चलते वैसा नहीं हो रहा। | negative |
1,914 | ऐसे में अचानक एक दिन पृथ्वी के बैंक खाते में 100 करोड़ रुपए जमा हो जाते हैं। | neutral |
1,915 | बैंक मैनेजर थडानी अपनी सेक्रेटरी के साथ खुद उसके घर पहुंचता है। | neutral |
1,916 | वह पृथ्वी का शुक्रिया अदा करता है, लेकिन उसके बाद से पृथ्वी की मुश्किलों का सफर शुरू हो जाता है। | negative |
1,917 | उसे अंडरवल्र्ड से उन पैसों को कहीं और जमा कराने के धमकी भरे कॉल आने लगते हैं। | neutral |
1,918 | बदले में उसे कमीशन देने की बात होती है। | neutral |
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