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1BRA | या बात कूँ हमारे राष्ट्रकवि मैथिलीशरण जी गुप्त नैं बड़े मीठे ढंग ते अपनी ब्रजभाषा की एक कविता में ही कह्यौ है । |
0AWA | हितैषी हौ कि दुश्मन ? |
2MAG | सब हिसाब से रहलन जब तक पानी बरसत, दुन्नु के दुआर-दलान अउर सब ठीहा गोबरधन पर्वत बनल रहल । |
2MAG | गुरु जी के भी एगो खूब सुन्नर लड़की हल । |
1BRA | बौलें कन्हैया यह खेल छोड़ो, श्री नाथ श्री वल्लभ विट्ठलेश । |
1BRA | देस प्रेम की धारा मेरे लेखन में बहती रही है । |
2MAG | ऊ खुस होके सब पइसा लेके घरे आयल । |
1BRA | यामें दुल्है-दुल्हैंन की खोंचन में सात पोत बतासेन की अदला-बदली करी जाय अरु फिरि दूल्है के म्हौंड़े में बत सौ दैकें बैयरबानी या लोकगीत गांमें है । |
4HIN | भारतीय परंपराओं को बहुत सुंदरता के साथ वर्णित कर रहे हैं । |
2MAG | तव राजकुमार कुआं के भीरू गेलन तो फूल तुरते छना गेल । |
1BRA | निर्भय जी बोले - गुरु माहौल खराब है रह्यौ है । |
1BRA | जो कह हम जा पोथी कू पढ़िबौ और समझबी सीखले ती हमें ऐसी-ऐसी मनोहर कहानी मिल सकै जो कै सुरग की परीन की कहानीन तेऊ भौत ज्यादा सुन्दर लगिगी । |
2MAG | ” तब पंडी जी कहलन कि कुछ न खैलऽ ? |
2MAG | ऊ बराती में ढेर - सिन परी भी आयल हलन । |
4HIN | मेरी गारंटी है कि आपको 10-15 टिप्पणियां तो मिल ही जाएंगी कि वाह . |
0AWA | भरोसे बेचारा सीध साध, का बिगारे रहै घसिटव, क्यार ? |
2MAG | अध्याय - 2मार्गदर्शकहमर धरती, प्यारी धरती,अपरिचित धरती ! |
0AWA | भगवानो हमसे अत्ता रूठे न होती तौ हमारि या दशै काहे होतै ? |
1BRA | घृणा नहीं लज्जा नहीं भय हिय मांझ नहीं, ई है कि धनपति समाज में क्षमा : नहिं आबे है । |
1BRA | एक सामुद्रिक नै मेरौ हाथ देखि कै यों कही कै तिहारे हाथ में कविता करवे की रेखा है । |
3BHO | हम बता दिही कि बृजबिहारी प्रसाद 'चूर' वइसे त 'चूर कवि' से प्रसिद्ध रहीं . |
4HIN | बिना पति के घर-परिवार को चला सकतीं हैं ? |
4HIN | सप्रग की पिछली सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रहे मणिशंकर अय्यर का नाम तो आप सभी को याद होगा । |
0AWA | यही बीच रधिया चन्दावती के तीर आयी बतायेसि- ‘चाची मीरा कि जान खतरे मा है । |
3BHO | भोजपुरी नदी ना समुंदर बिया, समुंदर, इ कबो सूखी ना, हरदम हरल-भरल रही, अउर अपनी समरिधता से दूसर भाखावन के समरिध करत रही। |
4HIN | गांव से भावनाओं का जुड़ा होना एक स्वाभविक सी प्रकिया है । |
0AWA | बाहेर आयके चौधरी साहेब गाड़ी मां बैठिगे । |
1BRA | ताके पास ग्वाल पोखरा है । |
2MAG | हम्मर मुँह से इँकसतइ - न कउची हइ । |
1BRA | जन्माष्टमी पै आदि बद्री - कौ देवालय अवैर तई आधी रात पाछै लौ संगीत की सुरलहरीन सौ गम क्यों करे है । |
3BHO | असही गिट्टी के बारे में अरुण प्रकाश बतवले कि इंच अवुरी इंच गिट्टी रुपया प्रति क्यूबिक फीट के दर से उपलब्ध बाटे। |
3BHO | का एक भइले के इहे मतलब बा की केहु के कमइले के अधिकार नइखे अउरी अपने कमाई खइले के अधिकार नइखे। |
4HIN | एक दिन अचानक छुट्टी डिक्लेर हो जाए . |
3BHO | कब्बो अमवाँ के बारी कही, एही बरिया में जेठ के दुपहरिया के घाम नेवरले बाऽ बाबू, अधपाकल आमे खातिर रार कइले बाऽ, एह अमरइया के सुधि कब्बो लेबऽ! |
4HIN | भगवान को उत्तरदायी बनाकर हम निश्चिंतता से आगे चल दिए । |
4HIN | प्रसन्न हूं कि वो अब कुछ सोच कर वोट देने लगा है । |
1BRA | बा समय मोय कवि सम्मेलन में प्राय कै कविता पाठ करिबे की आग्रह कियौ गयौ । |
4HIN | आतंकियों को भी माफ़ कर देतें हैं . |
2MAG | देखऽ हूँ कि इमिल्यान अन्दर घुस्सल - ओकर चेहरा नीला पड़ गेल हल आउ ओकर केश धूरी-गरदा से भरल, मानूँ ऊ गल्ली में सुत्तल हल । |
3BHO | पँचवे दिन बरात बिदा भइल त गीति उठल, 'चल न सखि, चलन चाहत रघुराई!' |
2MAG | ऊ छटपटा के मर गेलन । |
4HIN | अविनाश---- आदरणीय अर्चना जी,सुनता रहा हूँ आपके पॉडकास्ट । |
3BHO | ओकरा के कुछ हो जाई तब?' |
3BHO | उहाँ के पीठ पर माननीय सांसद मनोज तिवारी जी आ मैथिली भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष श्री अजीत दूबे जी असवार बानी राजस्थानीयो के मान्यता के सवाल बा एह से राजस्थान के सांसद मेघवाल साहेब के साथ एह लोग के संपर्क बनल बा । |
2MAG | तूँ चतुर व्यक्ति हकहो - तूँ खुद्दे समझ जइबहो कि हम तोरा से चलाँकी करब करऽ हियो । |
0AWA | ग्यारह समय चक्र तौ अनवरत घूमिनि रहा है । |
4HIN | बांधनी के बाद गुरु मंत्र का अभ्यास किया जाता है-गुरु मंत्र- गुरु गुरु बूढ़ा गुरु, जन्तर गुरु, माधो गुरु, दइगन गुरु, सीधा गुरु, अंधा गुरु, आइद गुरु, बइद गुरु, औलाद गुरु, मवलाद गुरु, केंवटा गुरु, महला गुरु, डोमा गुरु, बछरवा गुरु, चनरमा, सुरुज नराएन के लागे दुहाई । |
3BHO | कुछ बताईं जा? |
4HIN | सबकुछ कल पर नहीं टाला जा सकता डॉ भारती कश्यप सीइओ द कश्यप मेमोरियल आइ हॉस्पीटल राज्य गठन के आठ साल पूरे होने को हैं । |
1BRA | इन नामन मांहि कोउ जाति - पाँति धरम भासा अरु ठौर की दीवार आडैं नांय आईं । |
0AWA | जाड़े के दिन रहैं । |
0AWA | तुम कहबै किहेव रहै । |
2MAG | मार बोंग-मार बोंग ऊँटवा के हालत खराब कर देलक । |
4HIN | पर क्या यह मुझ पर बरस सकता है ? |
3BHO | पहिले एक तथ के पड़ताल जरूरी बुझात बा कि पिछिलका बीसवीं सदी में भोजपुरिया समाज के दशा आ दिशा का रहे ? |
0AWA | हमका या खबरि इनकी बातन ते मिलि गै रहै । |
1BRA | ज्यों जननी निजपूत, बढ़त लख हिय हुलसावै । |
2MAG | कहीं कोय चोर तो हमर घर में नयँ घुस गेलइ ? |
2MAG | का तो शहर में प्रेस खोललक हे । |
1BRA | चोला बदलन की तुम्हें, परी पुरानी चाट । |
3BHO | चउथका कड़ी |
3BHO | 'बस हम अबही गइली अबही अइली। |
1BRA | ' छछिया भरि रोटी ' कारे निगोडे ने पाटी पढ़ाई , आधी रात पै कन्हाई कछू ऐसी बाँसुरी बजाई प्रयोग कछू अव्यावहारिक से लगै । |
3BHO | खाली ई भारते में नइखे विदेस में भी, हर एक देस में। |
2MAG | ” तब एकरे पर अरुना कहलक कि हमर भउजाईबिना ढेकी के धान कूट के ले आवे ला कहलन हे । |
1BRA | पर वैष्णव साधना ते जुड़ी हैबे के कारण भक्ति , ते ब्रज कूं थोड़ई निकारो गयो है । |
3BHO | दिल में जोर से एगो तूफान उठल. |
0AWA | युग युगान्तर से यहै चक्र चलति आवा है । |
2MAG | हम निराश होके आँख मून लेलिअइ आउ तुरते नीन में खो गेलिअइ । |
4HIN | गंतव्य पर पहुंचते हुए समझने का प्रयास करें कि स्थल चयन के क्या कारण रहे होंगे, पानी उपलब्धता, नदी-नाला, पत्थर उपलब्धता, प्राचीन पहुंच मार्ग ? |
3BHO | इ टोटरम लगभग भोजपुरिया बधार के सभे केहू जानेला आ आजो इ टोटका करेला । |
4HIN | मुझे क्या पता था वह शरीर विखंडित हो जाएगा . |
1BRA | कविता के नये - नये गुर सिखाये जाये । |
3BHO | अरे जा ओहिमे त झुमका रहवे ना कईल ! उनकर मुंह अचरज, भय आ कवनो अनिष्ट के आशंका से खुलल रह गईल आ च घबड़ा के चील्लईली। |
2MAG | तब बप्पा पूछलक कि 'गंगा नेहा के चल अयलें ? |
2MAG | लिज़ावेता इवानोव्ना रोज दिन ओकरा हीं से पत्र प्राप्त करऽ हलइ, कभी ई ढंग से, त कभी ऊ ढंग से । |
1BRA | आपनै बारहमासौ में कृष्णलीला कौ वर्नन कियौ है । |
3BHO | आ मनवे के जीतल जीत ह। |
0AWA | मेंहदी लगावै वाली हमरे सुकोमल हाथ थामि लीन्हिस-वाह । |
4HIN | मेरा शेरू दौड़ कर आया ,आगे -पीछे घूमा सम्यक निरीक्षण किया ,कुछ सूँघा . |
0AWA | अत्याचार निरंकुश नृप से, मुक्त किहेंउ नरनारी । |
3BHO | हो ना जाव लड़ाई, ए सखी! शुरू करऽ वार …” बोलत हम आपन हाथ हटा लेहनी. |
4HIN | आज मैं यहाँ चर्चा कर रहा हूँ कि यही काम आप अपने मोबाइल से कैसे कर सकते है | |
4HIN | मतला और मकते का काम्बिनेशन दे पाएं तो और अच्छा । |
2MAG | गाँव-गाँवई में ई बाल कवि के लोग माथा चढ़ा लेलन हल । |
4HIN | दरख्तकी छांवमें कोरी जमीं कुछ पायी गयी,बारीशमें नहा गई सारी फिजा पर मेरी रुह कोरी रही . |
3BHO | बढ़ोतरी तीनो तरह के दर में कइल गइल बा। |
1BRA | हाथी करें गज्जन कौं कबहू सवार होत, ग्वाल बाल संग लेय ऊधम मचावै हैं । |
1BRA | जेही हैक ऐसौ प्लान बनामें कै जल की व्यवस्था है जॉय इतने में ही जैसे तैसें इतते । |
4HIN | बाकी का दोनों को क्या बोलें, हमें तो अइसा लग रहा है कि हम भरी जवानी में सूर्पनखा हो गये हैं । |
3BHO | ना त आपन बाल - बाचा लेके नइहर चलि जाइब। |
0AWA | सूर्यदेव के अस्त होतै गुरूदेव अपन अचरा र्बिछाय संगम तट पर संध्योपासना । |
0AWA | अब बार-बार उनके मन मां उनका यू भ्रम घूमै लाग कि अशुम मूल नक्षत्र मैंहा जनमा उनका लरिका बहुत अशुभ है औ यहै अपनी जननी कैंहा खाय गा है । |
1BRA | ' बू बाकौ ' की ठौर पै ' गु ग्वाकौ ' लिख्यौय । |
3BHO | सोंच सही बा, बिचार सही बा त नाव करे के ना परी, बलुक अपनी मोन्ने हो जाई। |
2MAG | ओकरा कहना हल कि हम ओइसने बांस के मड़वा में सादी करम जेकरा में दूगॊ एकतनहा बांस होय । |
2MAG | व्लादीमिर निकोलायेविच हरेक पत्र में ओकरा अनुरोध करऽ हलइ कि ऊ ओकरा समर्पित कर दे, गुप्त रूप से शादी कर ले, कुछ समय खातिर छिपके रहल जाय, फेर माता-पिता के गोड़ पर गिर पड़ल जाय, जिनकर दिल निस्संदेह आखिरकार प्रेमी-युगल के वीरतापूर्ण निष्ठा आउ दुख से पिघल जइतइ आउ पक्का ओकन्हीं से कहथिन - बच्चो ! |
1BRA | उतै कच्ची कक्ची झौंपड़ी । |
1BRA | ओस ते घास हू गीली है रही है और रज हू सीरी है रही है । |
4HIN | (५)प्लेटलेट का परस्पर झुण्ड बनाना कम होता है . |
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