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0AWA | वइ हाईस्कूल मां चन्द्रिका भारद्वाज का ऐडमीशन कउनिउ बड़ी दुर्घटना से कम नाय रहै । |
4HIN | सुन लो ये मौन-क्रंदन, उसका भी है कुछ कहने का मन ! |
0AWA | अरे वाह, यू तौ सोने मैंहा सोहागा होइ जाई । |
1BRA | कवि सम्मेलन करकैं चुप बैठ जावौ पर्याप्त नाँए । |
0AWA | गजरानी देबी भुन्नात भई बैठका मां दाखिल भईं । |
4HIN | इस संग्रह में भी वह परेशानियां तो दरअसल समझदारी में है और क्या करूँ से जीवन दर्शन के नए रंग नए अर्थ में है | |
3BHO | हमरो जिनगी लेबे चाहत बाड़न। |
2MAG | हम छोटका जीना पर से तेजी से उपरे गेलिअइ, जे उपरे के रोशनीदार छोटका कमरा में ले जा हलइ, आउ जिनगी में पहिले तुरी मारिया इवानोव्ना के कमरा में प्रवेश कइलिअइ । |
3BHO | सरभंग संप्रदाय के सबसे प्रसिद्ध कवि टेकमन राम के गुरु रहीं। |
2MAG | इनखा आवे से हमरा जेहल हो गेल हे । |
1BRA | ई एक प्रभावसाली एचना कौ स्वरूप है । |
3BHO | आजतक देस में एगो अराजकता के माहौल पनपत रहल ह। |
1BRA | पांडव की नारी जब आरत ह्व पुकारी हरि, पट कों बढायो जाते अन्ध सुत थकायो है । |
4HIN | वर्क फ्रॉम होम कितनी बड़ी लक्ज़री है, ये एक घंटे में ही समझ में आ गया है । |
2MAG | कवि के दुनिया में विचित्र बात प्रचलित रहऽ हे जईसे कदली, सीप, भुजंग मुख' में स्वाति-बून्द पड़े पर कपूर, मोती आउ जहर बन जा हे । |
3BHO | किरिया धराई समारोह सबेरे बजे शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में होखे जा रहल बा। |
2MAG | ” आउ ओकरा पीटे लगलथिन । |
4HIN | अन्य पुराणों की शैली से अनुमान होता है कि पुराणों में प्राचीन गाथाओं के साथ समकालीन घटनाओं का भी विवरण संग्रह है, लेकिन प्राचीन गाथाओं को अद्यतन और समकालीन घटनाओं को भविष्यवाणी के रूप में रखा गया है । |
2MAG | अध्याय - 12अनाथजइसे हमरा हीं सेब के पेड़ केन तो फुलंगी हइ, न डाली;ओइसीं हमर राजकुमारी-दुलहिन केन तो पिता हइ, न माता । |
1BRA | नई सब चीज यूढ़िया नाएँ और पुरानी सग चीजे बुरी नयि । |
1BRA | सबन नें याकौ अन्न खायौ ऐ । |
0AWA | नाई तौ नन्ददास की तना श्री कृष्ण जी के पद सुनाय दयाब । |
2MAG | तऽ रानी बोलल कि हमर एगो लड़का अपनही हीं काम करे ला आयल हल आउ अपनै ओकरे बान्हले ही । |
2MAG | से एक दिन नयका बाबा जी के हटावे ला पुरनका बाबा जी सोचलन । |
1BRA | या हालै देखती सिगरौ अतीत मेरी अाँखिन के आगे हैकें निकर गयौ । |
4HIN | हो गुलाबों पे तारों की चादर बिछी लाल जोड़े में तू यूँ सजी है प्रिये । |
3BHO | बैलन के खाड़ क दिहले सीलोचन भाई , लेवाड़ के गड़हा में पानी लागल रहे। |
4HIN | पुलिस कहीं भी हो हमेशा ही डरावनी सी होती है . |
2MAG | उहाँ खाली रानी तोसक गलीचा लगा के सुतल हलन । |
1BRA | पूरव झरना द्वार है उत्तर मथुरा द्वार । |
0AWA | अब पेटेम शूल असि उठै लागि बचुवा । |
4HIN | और वह नज्म अधूरी ही थी जो अन्य समान के साथ माँ के हाथो अनजाने में बिक गयी . |
0AWA | यै बड़े पुत्र रहैं-पराक्रमी परमेसुर बाबू । |
2MAG | एकरा में आउ लम्मा खींचके की कहे के रहले ह । |
4HIN | इतिहास लेखन की दृष्टि से कुछ विचार-कथनों का स्मरण कर लें, इससे भारतीय इतिहास-दृष्टि की न्यायसंगत समीक्षा आसान हो सकेगी । |
2MAG | एहनी के जै घड़ी निबहइत हे तै घड़ी निभ जाय, एही में गनीमत हे ! |
2MAG | जब बापजान मीसी तलवार आउ सामकरन घोड़ा देखलन तो उहवां के राजा से सब हाल पुछलन तो राजा कहलन कि ऊ सब सच बता त देवऽ । |
0AWA | कोढ़ मां खुजली या भई कि हमरे जेठ जी रामायन बैठाइन रहै । |
4HIN | जैसे अगर हम केवल बहर की ही बात करें तो अभी हमने बहरों को लेकर बहुत कुछ काम करना बाकी है । |
0AWA | सब मौजूद मनई-मेहेरुआ तरह-तरह की बातै बनावै लाग रहैं । |
1BRA | दूलहा फेर कर्कस धुनि में कारे चस्मा कूँ उतारि कें अपने असली रूप में प्रकट है गयौ । |
1BRA | ये किशनगढ़ , भरतपुर , डीग , कोसी , कामवन इत्यादि स्थानन पं रहके नई नई लीलान की उद्भावना करते रहे । |
1BRA | मन क्रम बचकरि सखसो जीवे । |
3BHO | ओह लोग के पूरा छूट बा कि ऊ सड़क, रेल लाइन, मैदान जहें मन करे तहें आपन चादर बिछा सकेला नमाज अदा करे खातिर। |
3BHO | ओहू लोग के जइसे परिस्थिति आ समय के पूरा ज्ञान रहे केहू कुछ ना बोलल बाकि ओ लोगन का संगे उतरल ऊ तेजवान अधेड़ औरत गंगाजल उठाइ के हाथ जोड़त बिनती कइली माई तोहार दया आ ममता हमरा लड़िकन पर बनल रहे रउरा कृपा से ई फरत फुलात रहें सऽ । |
3BHO | बबलू भकुअईला लेखां छन आजी के लगे छन बाबा के कोरा चढ़ के इहे बार बार पूछ रहल बा "काहें उहाँ जायेके बा इहे त आपन घर ह? |
2MAG | हम ओकरा फाँसी पर लटका देबइ । |
2MAG | परिषद् के निर्णय के आद करते हमरा पूर्वाभास हो गेलइ कि ओरेनबुर्ग के देवाल के अंदर दीर्घ अवधि तक बंद होके रहे पड़तइ आउ निराशा से हमरा लगभग रोवाय आवऽ हलइ । |
3BHO | काहे नइख संहार 'फेरत' एह अत्याचार प। |
2MAG | हुऑ से गंगा के किनारे पहूचलन तो बासमन साव सोकाड़ा से भेट गेल । |
1BRA | ताके नीचे पूतना खार हैं। |
3BHO | गरीबी, भस्टाचार हर जगहि बेयाप्त बा। |
3BHO | आपुस में कुछ तय भइल आ ऊ लोग दहिनी ओर सघन बन में घुसि के दू भाग में बँट गइल । |
3BHO | अगर कुछुवो बोलब त फँस जाएब. |
1BRA | कहूँ कहूँ उर्दू के शब्द जरूर आय गये हैं , परि वे ब्रज की शब्द सम्पदा में एकमेक है गये हैं । |
0AWA | मीरा के साथ अब याक मेहेरुआ और जुड़गै रहै । |
2MAG | ओकरा साथे राजकुमार के फिनो बिआह हो गेल आउ दुनो परानी बढ़िया से मिल - चुल के रहे लगलन । |
0AWA | कबहूँ चिरैया,कबहूँ परयेउना,कबहूँ कुछ नवा-नवा नाम लइके ऊ हमका बोलावै करती हैं मानौ उमर भर का लाड़ प्यार अपने दुलारे पोता पर निछावर कै देना चाहती हैं । |
2MAG | एगो दरबारी कहलक कि चोर तो अप्पन काम बना लेलक । |
3BHO | एह बीच एक हवलदार टेबल पर सबकरा खातिर चाय राख गइल। |
4HIN | जिसका संचालन प्रभारी प्राचार्य आमोद कुमार ने किया । |
2MAG | तूँ चल काहे नयँ रहलहीं हँ ? |
1BRA | कोने में जाय के असुआ पोछे । |
1BRA | ग्रन्थ के चौथे रचनाकार हे भरतपुर वासी स्व. डा. रामानन्द तिवारी ' भारतीनन्दन ' । |
3BHO | केंवाड़ी के पाला पकड़ले एगो खूब सुन्नर मेहरारू। |
3BHO | हम अंग्रेजी में लिखल शुरु कर देहनी जे अभी पूरा नइखे भइल ओही के हम भोजपुरी में फिर से लिख के आखर टीम के निहोरा पर हम आखर' e-magazine पर शुभकामना आ बधाई के साथ साझा कर रहल बानी । |
4HIN | लोग ये क्यूँ नहीं समझ पाते . |
4HIN | इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए । |
1BRA | सन् 1978 में इन्नै सरकारी पद ते अवकास ग्रहण कीनौ । |
2MAG | सब्भे पंच पहुँच चुकल हे, खाली भुमंडल बाबू के पहुँचे के देरी हे । |
4HIN | सदा सुहागिन रात हो गईहोंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई राधा कुंज भवन में जैसे सीता खड़ी हुई उपवन में खड़ी हुई थी सदियों से मैं थाल सजाकर मन-आंगन में जाने कितनी सुबहें आईं, शाम हुई फिर रात हो गई होंठ हिले तक नहीं, लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई तड़प रही थी मन की मीरा महा मिलन के जल की प्यासीप्रीतम तुम ही म... |
1BRA | मौति दुम दबाय कें नौ दो ग्यारह है जाय । |
0AWA | यू तौ बहुत अशुभ होइगा मुखिया । |
2MAG | रानी से अगड़िए आन के ऊ पलां पर पड़ रहल । |
1BRA | मैं तिबारी जी के साहित्य सृजन कौ साच्छी हूं । |
2MAG | तोरा से भेंट करके दिल खुस हो गेल । |
0AWA | सामने भीखू केरी लाश वही के अंगौछे से फांसी लगाये झूल रही रहै । |
3BHO | श्री महाबीर प्रसाद मुजफ्फरपुर में मुंसिफ रहनीं। |
2MAG | ओकर इअरवा उहंई मर जतवऽ । |
3BHO | अब इम पक्का रही। |
2MAG | सिपाही कहलक कि ठीक उपाय बतौले रे नउवा । |
3BHO | कुछ उकरी सीना के चिर के अनाज बना लेता, केहु ओकरा में खोद के किला बना लेता वर्तमान के तनी ताना-बाना देखी, राजनीत अर्थशास्त्र, वाणिज्य, तकनीक, भुगोल, इतिहास, विज्ञान सभे एक दुसरा के बिना अधुरा बा। |
3BHO | त हमरा आश्चर्य बाकी सोचनी तनी त बुझाइल कि बाती खेसारी के नइखे। |
4HIN | पढ़ना-लिखना सीखिए, वो काम देगा आगे । |
4HIN | सुख सज्जा के स्वप्न ह्रदय ने मिलन रात्रि में खूब सँवारे , हुई विरह की भोर, नयन के मोती ही गलहार बन . |
3BHO | लगभग तेरह पीढ़ी ले इ मठ के महातम योग्य सरभंगी होत गइले। |
3BHO | कहल जाला की भगवान् संत के अपमान करे वाला के कबो ना माफ़ करेलें। |
3BHO | कइगो असाध्य जोग किरिया के उहां का साधि ले ले रहनीं। |
3BHO | ऊ डेरासु त इहे सोचि के, कि पनवा बियुहती ह . |
1BRA | बु फिरि देवता की नाई पुजिवे लग्यौ । |
4HIN | चींटी की कोशिश चींटी चढ़ी पहाड़ पर फ़िसलती गिरती बार-बार जितना ही वो कोशिश करती आ गिरती नीचे धाड़-धाड़ । |
4HIN | इसकी फार्मिंग (खेती ) खारे (नमकीन ) पानी में भी की जा सकती है . |
1BRA | राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी हमारे प्रान्त की भौत बड़ी विजय है । |
3BHO | आरे भइया के चिट्ठी पढ़के त तहरा छव फीट धरती से ऊपर कूद जाये के चाहीं. |
2MAG | रात भर सुत नयँ पावे के चलते हम पलंग पर पड़ गेलिअइ आउ गहरा नीन सुत गेलिअइ । |
1BRA | जग उपवन सौं प्रसून जो बटोरे ऐसे, अखरा बढ़ाय देत नखरा कवीन के । |
2MAG | ” बेंग राजा कहलक कि तूं हमनी ही काम करबऽ तो खाय ला कहाँ जयवऽ ? |
1BRA | तीर तरवार वीर ऐसी ही उपाधि करें । |
1BRA | कहावत या भाषा के बहु प्रयोग ते जनमे भये हैं । |
1BRA | यहाँ तक कै हाथी हू मिले । |
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