Source: EURLEX
Language: es
Format: md

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| 24.3.2022 | ES | Diario Oficial de la Unión Europea | L 97/1 |

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Índice

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| 1. | Procedimiento | 5 |

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| 2. | Contexto y descripción de las medidas objeto de investigación | 7 |

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| 2.1. | Cuadro general | 7 |

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| 2.1.1. | Convenios iniciales | 7 |

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| 2.1.2. | Prórroga de los convenios iniciales | 7 |

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| 2.1.3. | Privatización de Siremar y celebración del nuevo convenio | 8 |

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| 2.2. | Medidas incluidas en el campo de aplicación de las Decisiones de 2011 y 2012 | 9 |

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| 2.3. | Descripción detallada de las medidas a que se refiere la presente Decisión | 9 |

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| 2.3.1. | Prórroga del convenio inicial entre el Estado y Siremar | 9 |

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| 2.3.2. | Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar | 12 |

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| 2.3.3. | Privatización de Siremar, contragarantía y aumento del capital de CdI | 13 |

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| 2.3.4. | Nuevo convenio | 20 |

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| 2.3.5. | Prioridad en la asignación de los puntos de amarre | 22 |

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| 2.3.6. | Las medidas establecidas en la Ley de 2010 | 22 |

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| 2.4. | Procedimiento de infracción n.o 2007/4609 | 22 |

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| 3. | Motivos para iniciar y ampliar el procedimiento | 25 |

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| 3.1. | Prórroga del convenio inicial entre el Estado y Siremar | 25 |

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| 3.1.1. | Cumplimiento de la sentencia Altmark y ayudas | 25 |

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| 3.1.2. | Compatibilidad | 26 |

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| 3.2. | Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar | 26 |

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| 3.3. | Privatización de Siremar, contragarantía y aumento del capital de CdI | 26 |

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| 3.3.1. | Privatización de Siremar | 26 |

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| 3.3.2. | Contragarantía | 27 |

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| 3.3.3. | Aumento del capital de CdI | 27 |

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| 3.3.4. | Compatibilidad | 27 |

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| 3.4. | Nuevo convenio entre el Estado italiano y CdI | 27 |

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| 3.5. | Prioridad en la asignación de los puntos de amarre | 28 |

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| 3.6. | Medidas establecidas por la Ley de 2010 | 28 |

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| 4. | Observaciones de Italia | 28 |

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| 4.1. | Acerca de las obligaciones de servicio público y el entorno competitivo | 28 |

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| 4.2. | Acerca de la posible prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar | 29 |

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| 4.3. | Acerca de la privatización del sector de empresa de Siremar | 30 |

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| 4.3.1. | Acerca del carácter transparente y no discriminatorio del procedimiento | 30 |

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| 4.3.2. | Acerca de la venta de los activos no incluidos en el sector de empresa de Siremar | 30 |

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| 4.3.3. | Acerca de la asociación de los activos del sector de empresa de Siremar en virtud de un nuevo convenio | 31 |

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| 4.3.4. | Acerca del nombramiento de un experto independiente | 31 |

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| 4.3.5. | Acerca de la transparencia del procedimiento | 31 |

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| 4.3.6. | Acerca del primer y segundo informe Ecorys | 31 |

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| 4.3.7. | Acerca de los litigios nacionales y la adjudicación final a SNS | 32 |

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| 4.4. | Acerca de la conformidad del nuevo convenio con los criterios Altmark | 33 |

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| 4.5. | Acerca de la prima de riesgo del 6,5 % establecida por la resolución del CIPE a partir de 2010 | 33 |

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| 4.6. | Acerca de la conformidad del nuevo convenio con la Decisión SIEG de 2011 | 34 |

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| 4.7. | Contragarantía | 34 |

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| 4.8. | Acerca de la prioridad en la asignación de los puntos de amarre | 35 |

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| 4.9. | Acerca de las medidas recogidas en la Ley de 2010 | 35 |

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| 4.10. | Acerca de la ausencia de continuidad económica entre Siremar en AS y CdI | 36 |

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| 5. | Observaciones presentadas por los interesados | 37 |

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| 5.1. | Observaciones presentadas por Siremar en régimen de administración extraordinaria | 37 |

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| 5.1.1. | Acerca del procedimiento de infracción n.o 2007/4609 | 37 |

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| 5.1.2. | Acerca de la prórroga del convenio inicial | 37 |

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| 5.1.3. | Acerca de la posible prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar | 38 |

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| 5.1.4. | Acerca del nuevo convenio | 39 |

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| 5.1.5. | Acerca de la privatización de Siremar y de la contragarantía | 39 |

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| 5.1.6. | Acerca de la ausencia de continuidad económica entre Siremar en AS y CdI | 40 |

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| 5.1.7. | Presentación ulterior de la decisión del Consejo de Estado sobre la contragarantía | 41 |

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| 5.2. | Observaciones de SNS | 41 |

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| 5.2.1. | Primera presentación de observaciones | 41 |

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| 5.2.2. | Segunda presentación de observaciones | 41 |

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| 5.2.3. | Tercera presentación de observaciones | 42 |

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| 5.3. | Observaciones de Pan Med | 43 |

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| 5.4. | Observaciones de Grandi Navi Veloci | 44 |

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| 5.5. | Carta del alcalde de Lipari | 45 |

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| 6. | Observaciones de Compagnia delle Isole | 45 |

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| 6.1. | Primera presentación de observaciones | 45 |

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| 6.2. | Segunda presentación de observaciones | 46 |

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| 6.3. | Tercera presentación de observaciones | 46 |

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| 7. | Observaciones de Italia sobre las observaciones y contribuciones de las partes interesadas | 47 |

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| 8. | Valoración | 47 |

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| 8.1. | Subsistencia de una ayuda en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE | 47 |

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| 8.1.1. | Prórroga del convenio inicial entre Siremar e Italia | 48 |

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| 8.1.2. | Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar | 50 |

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| 8.1.3. | La adjudicación a SNS del nuevo convenio asociado al sector de empresa de Siremar y su prioridad en la asignación de puntos de amarre, el aumento de capital de CdI y la contragarantía | 51 |

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| 8.1.4. | Medidas establecidas en la Ley de 2010 | 71 |

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| 8.1.5. | Conclusión sobre la existencia de la ayuda | 73 |

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| 8.2. | Legalidad de la ayuda | 74 |

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| 8.3. | Compatibilidad de la ayuda | 74 |

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| 8.3.1. | Prórroga del convenio inicial entre el Estado y Siremar | 74 |

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| 8.3.2. | Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar | 83 |

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| 8.3.3. | Exenciones fiscales relativas al proceso de privatización | 84 |

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| 8.3.4. | Conclusión sobre la compatibilidad de la ayuda | 84 |

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| 8.4. | Respuesta a las observaciones de CdI | 85 |

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| 9. | Conclusión | 85 |

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| 10. | Recuperación | 86 |

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| 11. | Continuidad económica | 87 |

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| 11.1. | Alcance de la transferencia | 87 |

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| 11.2. | Precio de la transferencia | 88 |

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| 11.3. | Identidad de los propietarios | 89 |

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| 11.4. | Cronología de la transferencia | 89 |

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| 11.5. | Lógica económica de la operación | 89 |

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| 11.6. | Conclusión sobre la continuidad económica entre Siremar en AS y SNS | 90 |

DECISIÓN (UE) 2022/448 DE LA COMISIÓN

de 17 de junio de 2021

relativa a las medidas SA.32014, SA.32015, SA.32016 (2011/C) (ex 2011/NN) que Italia ha adoptado en favor de Siremar y de su comprador Società Navigazione Siciliana

[notificada con el número C(2022) 4268]

(El texto en lengua italiana es el único auténtico)

(Texto pertinente a efectos del EEE)

LA COMISIÓN EUROPEA,

Visto el Tratado de Funcionamiento de la Unión Europea, y en particular su artículo 108, apartado 2, párrafo primero,

Visto el acuerdo sobre el Espacio Económico Europeo, y en particular su artículo 62, apartado 1, letra a),

Después de haber invitado a los interesados a presentar sus observaciones, de conformidad con las citadas disposiciones [(1)](#ntr1-L_2022097ES.01000101-E0001), y teniendo en cuenta dichas observaciones,

Considerando lo siguiente:

1.   PROCEDIMIENTO

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| (1) | El 6 de agosto de 1999, la Comisión decidió iniciar el procedimiento previsto en el artículo 108, apartado 2, del Tratado de Funcionamiento de la Unión Europea (en lo sucesivo «TFUE») en relación con las ayudas abonadas en virtud de los contratos iniciales de servicio público (en lo sucesivo «convenios iniciales») a las seis empresas que constituían el grupo Tirrenia en aquel momento [(2)](#ntr2-L_2022097ES.01000101-E0002). |

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| (2) | Durante la fase de investigación, las autoridades italianas solicitaron que se escindiera el examen del expediente del Grupo Tirrenia para llegar, con carácter prioritario, a una decisión final sobre la empresa Tirrenia di Navigazione (en lo sucesivo «Tirrenia»). Esta solicitud estaba motivada por la voluntad de las autoridades italianas para privatizar el grupo, comenzando con Tirrenia, y su intención de acelerar el proceso en relación con dicha empresa. |

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| (3) | La Comisión accedió a la solicitud de las autoridades italianas y por medio de la Decisión 2001/851/CE de la Comisión [(3)](#ntr3-L_2022097ES.01000101-E0003) cerró el procedimiento iniciado con respecto a la ayuda concedida a Tirrenia (en lo sucesivo «Decisión de 2001»). La ayuda se declaró compatible, sin perjuicio del cumplimiento de determinados compromisos por parte de las autoridades italianas. |

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| (4) | Mediante la Decisión 2005/163/CE de la Comisión [(4)](#ntr4-L_2022097ES.01000101-E0004) (en lo sucesivo, «Decisión de 2004»), la Comisión declaró que la compensación concedida a las sociedades del grupo Tirrenia distintas de Tirrenia [(5)](#ntr5-L_2022097ES.01000101-E0005) era en parte compatible con el mercado interior, parcialmente compatible a condición de que las autoridades italianas cumplieran una serie de compromisos y en parte incompatible con el mercado interior. La decisión se basó en los datos contables del período 1992-2001 y contenía condiciones destinadas a garantizar la compatibilidad de la compensación durante toda la vigencia de los convenios iniciales (es decir, hasta 2008). |

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| (5) | Mediante sentencia de 4 de marzo de 2009 en los asuntos T-265/04, T-292/04 y T-504/04 [(6)](#ntr6-L_2022097ES.01000101-E0006) (en lo sucesivo «sentencia de 2009»), el Tribunal anuló la Decisión de 2004. |

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| (6) | El 5 de octubre de 2011, la Comisión inició un nuevo procedimiento de investigación formal contra varias medidas adicionales adoptadas por Italia en favor de las empresas del antiguo grupo Tirrenia (en lo sucesivo, «Decisión de 2011»). La investigación abarcó, entre otras cosas, las compensaciones concedidas a Siremar – Sicilia Regionale Marittima (en lo sucesivo, «Siremar») por la explotación de varias rutas marítimas a partir del 1 de enero de 2009 y el proceso de privatización del sector de empresa de Siremar (véase la sección 2.3.3). |

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| (7) | La Decisión de 2011 fue publicada en el Diario Oficial de la Unión Europea [(7)](#ntr7-L_2022097ES.01000101-E0007). La Comisión invitó a los interesados a presentar sus observaciones sobre las medidas objeto de investigación. |

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| (8) | Italia respondió a la Decisión de 2011 por carta de 15 de noviembre de 2011. En lo que respecta a las medidas objeto de la presente Decisión, también se recibieron observaciones de la Società Navigazione Siciliana S.p.A. (en lo sucesivo «SNS»), Pan Med Lines S.r.l. (en lo sucesivo «Pan Med») y Grandi Navi Veloci S.p.A. (en lo sucesivo «GNV») (véase la sección 5). Estas observaciones se remitieron a Italia, que tuvo oportunidad de comentarlas. |

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| (9) | El 10 de enero de 2012, las autoridades italianas notificaron formalmente a la Comisión, supuestamente por razones de seguridad jurídica, los proyectos de contratos de servicio público (en lo sucesivo «convenios») que cualquier futuro comprador de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar estaría obligado a firmar y sobre cuya base se pagaría una compensación por la prestación del servicio público. |

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| (10) | El 7 de noviembre de 2012, la Comisión amplió el procedimiento de investigación, entre otras cosas, en relación con: i) la prórroga ilegal de la ayuda de salvamento concedida a Siremar, ii) la supuesta ayuda a Compagnia delle Isole (en lo sucesivo, «CdI»), primer comprador del sector de empresa de Siremar, en el contexto de la privatización de Siremar, y iii) la compensación por las obligaciones de servicio público que debe abonarse a CdI en virtud del nuevo acuerdo celebrado con el Estado italiano. El 19 de diciembre de 2012, la Comisión adoptó una versión modificada [(8)](#ntr8-L_2022097ES.01000101-E0008) de dicha Decisión (en lo sucesivo, «Decisión de 2012»; si se cita junto con la Decisión de 2011, las «decisiones de 2011 y 2012»). |

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| (11) | La Decisión de 2012 fue publicada en el Diario Oficial de la Unión Europea [(9)](#ntr9-L_2022097ES.01000101-E0009). La Comisión invitó a los interesados a presentar sus observaciones sobre las medidas objeto de investigación. |

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| (12) | Italia respondió a la Decisión de 2012 mediante cartas de 7 y de 13 de diciembre de 2012. En lo que respecta a las medidas objeto de la presente decisión, la Comisión recibió observaciones de Pan Med Lines S.r.l. (en lo sucesivo «Pan Med»), Siremar, SNS y CdI (véanse las secciones 5 y 6). Estas observaciones se remitieron a Italia, que tuvo oportunidad de comentarlas. |

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| (13) | El 5 de octubre de 2012, la Comisión encargó a Ecorys Netherlands BV (en lo sucesivo, «Ecorys») que le facilitara una estimación, basada en dos hipótesis alternativas, del valor de mercado de los activos de Siremar pertinentes ofrecidos para la venta (véase la sección 2.3.3.7). Ecorys presentó su informe final el 4 de septiembre de 2013 (en lo sucesivo, «primer informe Ecorys»). El 27 de septiembre de 2013, la Comisión remitió a Italia el informe. El 18 de noviembre de 2013, a petición de las autoridades italianas, la Comisión facilitó una traducción italiana del informe Ecorys. Italia presentó sus observaciones el 17 de diciembre de 2013, así como una contraevaluación elaborada por su experto independiente, Banca Profilo S.p.A. |

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| (14) | El 24 de junio de 2013, la Comisión envió una carta a varias compañías que operaban en el sector marítimo pidiéndoles que presentaran voluntariamente información detallada sobre las rutas operadas por Siremar en el período 2009-2012 y sobre las condiciones para su privatización. Solo se recibió una respuesta de CdI, que en aquel momento prestaba el servicio con arreglo al nuevo acuerdo. |

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| (15) | Mediante la Decisión (UE) 2018/261 de la Comisión [(10)](#ntr10-L_2022097ES.01000101-E0010) (en lo sucesivo, «Decisión de 2014»), la Comisión archivó el procedimiento de investigación formal relativo a determinadas medidas adoptadas por la Región de Cerdeña en favor de Saremar (véase el considerando 36). |

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| (16) | El 15 de octubre de 2014, los servicios de la Comisión se reunieron con representantes de Siremar y las autoridades italianas. Además, el 23 de octubre de 2014, los servicios de la Comisión también se reunieron con representantes de CdI y las autoridades italianas. Tras esta última reunión, CdI facilitó información adicional a la Comisión el 30 de octubre de 2014. |

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| (17) | Por lo que se refiere a Siremar, la Comisión solicitó información adicional a Italia mediante cartas de 30 de enero de 2012, 16 de marzo de 2012, 1 de agosto de 2012, 22 de noviembre de 2012, 12 de abril de 2013, 12 de junio de 2013, 27 de junio de 2013, 11 de julio de 2013, 29 de julio de 2014, 6 de noviembre de 2014, 16 de octubre de 2015, 25 de enero de 2018, 29 de marzo de 2018, 31 de agosto de 2018, 18 de marzo de 2019, 16 de octubre de 2019, 31 de julio de 2020 y 29 de octubre de 2020. |

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| (18) | En lo que respecta a Siremar, Italia presentó información adicional mediante cartas de 28 de marzo de 2012, 5 de octubre de 2012, 23 de octubre de 2012, 13 de mayo de 2013, 8 de agosto de 2013, 19 de septiembre de 2014, 20 de noviembre de 2014, 12 de diciembre de 2014, 12 de febrero de 2015, 13 de noviembre de 2015, 18 de abril de 2016, 2 de agosto de 2017, 26 de abril de 2018, 31 de mayo de 2018, 29 de mayo de 2019, 26 de julio de 2019, 3 de enero de 2020, 24 de enero de 2020, 8 de febrero de 2021 y 11 de marzo de 2021 [(11)](#ntr11-L_2022097ES.01000101-E0011). |

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| (19) | Mediante la Decisión (UE) 2020/1411 de la Comisión [(12)](#ntr12-L_2022097ES.01000101-E0012), la Comisión concluyó su investigación sobre las empresas del grupo Tirrenia distintas de Tirrenia, incluida Siremar, para el período 1992-2008 (en lo sucesivo, «Decisión del Grupo Tirrenia de 2020»). La Comisión concluyó que las ayudas concedidas para la prestación de servicios de cabotaje marítimo constituían ayudas existentes, mientras que aquellas concedidas para la prestación de servicios de transporte marítimo internacional eran compatibles con el marco de los servicios de interés económico general (en lo sucesivo «SIEG») de 2011 (en lo sucesivo «Marco SIEG de 2011») [(13)](#ntr13-L_2022097ES.01000101-E0013). |

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| (20) | Mediante la Decisión (UE) 2020/1412 de la Comisión [(14)](#ntr14-L_2022097ES.01000101-E0014), la Comisión archivó el procedimiento de investigación formal en relación con las medidas concedidas a Tirrenia y a su comprador CIN para el período 2009-2020 (en lo sucesivo, «Decisión Tirrenia/CIN de 2020»). |

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| (21) | La presente Decisión abarca todas las posibles medidas de ayuda en favor de Siremar, CdI y SNS mencionadas en los considerandos 36 y 37 y en las Decisiones de 2011 y 2012, así como la supuesta ayuda concedida a Unicredit a través de la contragarantía (véanse las secciones 2.3.3.5 y 3.3.2). La Comisión tratará todas las medidas restantes cubiertas por estas Decisiones en los asuntos SA.32014, SA.32015 y SA.32016 con arreglo a Decisiones separadas. En particular, las medidas restantes afectan a otras empresas del antiguo Grupo Tirrenia (por ejemplo, Caremar, Laziomar, Saremar y Toremar). |

2.   CONTEXTO Y DESCRIPCIÓN DE LAS MEDIDAS OBJETO DE INVESTIGACIÓN

2.1.   Cuadro general

2.1.1.   Convenios iniciales

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| (22) | El grupo Tirrenia pertenecía al Estado italiano a través de la sociedad Finanziaria per i Settori Industriale e dei Servizi S.p.A. (en lo sucesivo, «Fintecna») [(15)](#ntr15-L_2022097ES.01000101-E0015) y comprendía seis empresas, a saber, Tirrenia, Adriatica, Caremar, Saremar, Siremar y Toremar. Dichas empresas prestaban servicios de transporte marítimo con arreglo a diferentes contratos de servicio público celebrados con el Estado italiano en 1991 con una vigencia de veinte años, de enero de 1989 a diciembre de 2008 (en lo sucesivo, «los convenios iniciales»). Fintecna poseía el 100 % del capital social de Tirrenia. Tirrenia poseía todas las acciones de Adriatica, Caremar, Siremar, Saremar y Toremar (en lo sucesivo, conjuntamente, «sociedades regionales»). Adriatica, que operaba en varias rutas entre Italia y Albania, Croacia, Grecia y Montenegro, fusionó con Tirrenia en 2004. |

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| (23) | El objetivo de estos contratos de servicio público era garantizar la regularidad y fiabilidad de muchos servicios de transporte marítimo que, en su mayor parte, comunicaban Italia continental con Sicilia, Cerdeña y otras islas italianas más pequeñas. A tal fin, el Estado italiano concedió ayuda financiera en forma de subvenciones pagadas directamente a cada una de las empresas del grupo Tirrenia. |

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| (24) | Siremar, propiedad exclusiva de Tirrenia, explotaba varias rutas de cabotaje marítimo, tanto entre Sicilia y varias islas menores vecinas, como entre Milazzo y Nápoles. En el considerando 41 se ofrece una descripción de las rutas concretas en cuestión. |

2.1.2.   Prórroga de los convenios iniciales

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| (25) | Los convenios iniciales, incluido el aplicable a Siremar, se han prorrogado tres veces. |

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| (26) | En primer lugar, el artículo 26 del Decreto-Ley n.o 207, de 30 de diciembre de 2008 (en lo sucesivo, «Decreto-Ley n.o 207/2008»), convertido en Ley n.o 14, de 27 de febrero de 2009, preveía la prórroga hasta el 31 de diciembre de 2009 de los convenios iniciales, que debían expirar inicialmente el 31 de diciembre de 2008. |

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| (27) | En segundo lugar, habida cuenta de la privatización de las sociedades del grupo Tirrenia, el artículo 19 ter del Decreto-Ley n.o 135, de 25 de septiembre de 2009 (en lo sucesivo, «Decreto-Ley n.o 135/2009»), convertido en la Ley n.o 166, de 20 de noviembre de 2009 (en lo sucesivo, «Ley de 2009»), preveía la transferencia de la participación de las sociedades regionales (excepto Siremar) de la sociedad matriz Tirrenia de la siguiente manera:   |  |  | | --- | --- | | a) | Caremar a la Región de Campania. Posteriormente, la Región de Campania transfirió a la Región de Lacio la empresa que explotaba los enlaces de transporte con el Archipiélago Pontino (creando así Laziomar) [(16)](#ntr16-L_2022097ES.01000101-E0016); |  |  |  | | --- | --- | | b) | Saremar a la Región de Cerdeña; |  |  |  | | --- | --- | | c) | Toremar a la Región de Toscana. | |

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| (28) | La Ley de 2009 también especificaba que se celebrarían nuevos convenios entre el Estado italiano y Tirrenia y Siremar a más tardar el 31 de diciembre de 2009. Del mismo modo, los servicios regionales estarían regulados por nuevos «contratos de servicio público» que se acordarían entre Saremar, Toremar y Caremar y las respectivas autoridades regionales a más tardar el 31 de diciembre de 2009 (Cerdeña y Toscana) y el 28 de febrero de 2010 (Campania y Lacio). Los nuevos convenios o contratos de servicio público deberían haber sido objeto de licitación, junto con las propias empresas. Los nuevos propietarios de cada una de estas empresas habrían firmado entonces el respectivo convenio o contrato de servicio público [(17)](#ntr17-L_2022097ES.01000101-E0017). |

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| (29) | A tal fin, la Ley de 2009 prorrogó los convenios iniciales, incluso aquel aplicable a Siremar, del 1 de enero de 2010 al 30 de septiembre de 2010. |

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| (30) | La Ley de 2009 también fijó los límites máximos de la compensación anual por la prestación de servicios a partir de 2010 (en virtud de la prórroga de los convenios iniciales, así como de los nuevos convenios y nuevos contratos de servicio público) en un importe total de 184 942 251 EUR, desglosados así:   |  |  | | --- | --- | | Empresa | Compensación máxima anual | | Tirrenia | 72 685 642  EUR | | Siremar | 55 694 895  EUR | | Saremar | 13 686 441  EUR | | Toremar | 13 005 441  EUR | | Caremar | 29 869 832  EUR[(18)](#ntr18-L_2022097ES.01000101-E0018) |   Cuadro 1 – Máximos de compensación desde 2010 |

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| (31) | Por último, la Ley n.o 163, de 1 de octubre de 2010 (en lo sucesivo, «Ley de 2010»), que convirtió el Decreto-Ley n.o 125, de 5 de agosto de 2010 (en lo sucesivo, «Decreto-Ley n.o 125/2010»), dispuso una nueva prórroga de los convenios iniciales, incluido el aplicable a Siremar, desde el 1 de octubre de 2010 hasta la conclusión de los procedimientos de privatización de Tirrenia y Siremar. |

2.1.3.   Privatización de Siremar y celebración del nuevo convenio

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| (32) | En octubre de 2010 se puso en marcha un procedimiento de licitación para encontrar un comprador para el sector de empresa de Siremar (véase la sección 2.3.3). En este contexto, se hace referencia a la división de empresa de Siremar en lugar de a Siremar, ya que el procedimiento de licitación se refería únicamente a los activos y contratos necesarios para el cumplimiento de las obligaciones de servicio público [(19)](#ntr19-L_2022097ES.01000101-E0019) especificadas en el nuevo convenio que debía celebrarse con el comprador. Por consiguiente, se hace referencia a la «división de empresa de Siremar» en lugar de simplemente a «Siremar». Los restantes activos de Siremar, como el buque rápido Guizzo, utilizado para otros fines, debían venderse mediante procedimientos separados. Además, la venta no dio lugar a la transferencia al comprador de las deudas acumuladas por Siremar hasta la fecha de la venta. Hasta la fecha, Siremar bajo administración extraordinaria («Siremar in AS») sigue existiendo, aunque como entidad separada, con el objetivo principal de ser liquidada después de haber reembolsado a sus acreedores. |

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| (33) | Una vez que su oferta fue seleccionada tras el procedimiento de licitación, el 20 de octubre de 2011, CdI firmó el contrato de adquisición de la división de empresa de Siremar. Posteriormente, el 30 de julio de 2012, las autoridades italianas y CdI firmaron el nuevo convenio para la prestación de servicios marítimos. Sobre esta base, el 31 de julio de 2012, se transfirió la propiedad de la división de empresa de Siremar del Estado italiano a CdI. |

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| (34) | Sin embargo, SNS, la otra empresa que había presentado una oferta para el sector de empresa de Siremar, impugnó la transferencia ante los tribunales administrativos italianos, que finalmente determinaron que el procedimiento de licitación debía repetirse parcialmente, excluyendo a CdI de la presentación de nuevas ofertas (véanse los considerandos 93 a 100). Tras la confirmación de su anterior licitación, SNS ganó el nuevo procedimiento de licitación, asumiendo el sector de empresa de Siremar y firmando el nuevo convenio con Italia el 11 de abril de 2016. |

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| (35) | Desde esa fecha, SNS ha explotado las rutas con arreglo al nuevo convenio, mientras que Siremar en administración extraordinaria (en lo sucesivo, «Siremar en AS») y CdI están en liquidación. |

2.2.   Medidas incluidas en el campo de aplicación de las Decisiones de 2011 y 2012

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| (36) | En el contexto del procedimiento de investigación formal relativo a las Decisiones de 2011 y 2012 (véase también la sección 3), se evaluaron las siguientes medidas:   |  |  | | --- | --- | | 1) | compensación por la prestación de servicios de interés económico general (SIEG) en virtud de la prórroga de los convenios iniciales (medida 1); |  |  |  | | --- | --- | | 2) | prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Tirrenia y Siremar (medida 2); |  |  |  | | --- | --- | | 3) | privatización de las empresas del antiguo grupo Tirrenia [(20)](#ntr20-L_2022097ES.01000101-E0020) (medida 3); |  |  |  | | --- | --- | | 4) | compensación pagada por la prestación del SIEG en virtud de los futuros convenios/contratos de servicio público (medida 4); |  |  |  | | --- | --- | | 5) | prioridad en la asignación de los puntos de amarre (medida 5); |  |  |  | | --- | --- | | 6) | medidas previstas por la Ley de 2010 (medida 6); |  |  |  | | --- | --- | | 7) | las cinco medidas adicionales adoptadas por la Región de Cerdeña en favor de Saremar (medida 7) [(21)](#ntr21-L_2022097ES.01000101-E0021). | |

2.3.   Descripción detallada de las medidas a que se refiere la presente Decisión

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| (37) | La presente Decisión se refiere únicamente a las medidas 1 a 6 mencionadas en el considerando 36, en cuanto se refieren a Siremar, CdI o SNS. Estas medidas están descritas con mayor detalle en las secciones siguientes. |

2.3.1.   Prórroga del convenio inicial entre el Estado y Siremar

2.3.1.1.   Obligaciones de servicio público

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| (38) | El artículo 1 del convenio inicial con Siremar establecía que los planes quinquenales debían definir detalladamente los puertos a los que se debía prestar servicio, el tipo de buques que debían utilizarse y la frecuencia requerida para el servicio. El convenio inicial con Siremar se modificó en 1994 y 1995. |

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| (39) | El primer plan quinquenal (1990-1994) fue aprobado mediante Decreto Ministerial de 29 de mayo de 1990 y se aplicó retroactivamente a partir del 1 de enero de 1990. El segundo plan, que abarca el período 1995-1999 y que fue aprobado mediante Decreto Ministerial de 14 de mayo de 1996, dejó sustancialmente inalteradas las rutas y frecuencias. |

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| (40) | Por lo que se refiere a los períodos 2000-2004 y 2005-2008, no se adoptó formalmente ningún plan quinquenal para Siremar y la red de rutas y frecuencias siguió siendo sustancialmente la misma entre 1999 y 2008. De hecho, el Decreto interministerial de 9 de marzo de 2004 (en lo sucesivo, «Decreto de 2004») introdujo modificaciones limitadas con respecto a Siremar sobre el reemplazo de los buques viejos y el aumento de la capacidad, manteniendo las mismas frecuencias [(22)](#ntr22-L_2022097ES.01000101-E0022). |

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| (41) | Sobre la base del convenio inicial, ampliado y modificado (para algunas rutas), Siremar explotó cinco grupos de rutas a lo largo del año entre el 1 de enero de 2009 y el 30 de julio de 2012, con frecuencias y horarios variables según la ruta, el tipo de servicio (transbordador o alta velocidad) y la temporada del año, como sigue:   |  |  | | --- | --- | | — | en el grupo Milazzo – Islas Eolias – Nápoles que incluye las islas de Vulcano, Lipari, Salina, Filicudi, Alicudi, Panarea y Stromboli (en lo sucesivo, «Islas Eolias») y las ciudades de Milazzo en Sicilia y Nápoles en Campania, Siremar presta servicios de transbordador y alta velocidad en diez rutas individuales [(23)](#ntr23-L_2022097ES.01000101-E0023); |  |  |  | | --- | --- | | — | de 17.6.2021 |  |  |  | | --- | --- | | — | en el grupo Palermo – Ustica, Siremar prestó servicios de transbordador y de alta velocidad en dos rutas individuales [(24)](#ntr24-L_2022097ES.01000101-E0024); |  |  |  | | --- | --- | | — | en el grupo Porto Empedocle – Islas Pelagias, que incluye las islas de Linosa y Lampedusa («Islas Pelagias»), Siremar prestó servicios de transbordador en una sola ruta; |  |  |  | | --- | --- | | — | en el grupo Trapani – Pantelleria, Siremar prestó servicios de transbordador en una sola ruta. | |

2.3.1.2.   Presupuesto y duración

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| (42) | El cuadro que figura a continuación muestra la compensación anual pagada a Siremar por el período comprendido entre 2009 y julio de 2012.   |  |  | | --- | --- | | Año | Compensación | | 2009 | 67 009 405  EUR | | 2010 | 55 694 895  EUR | | 2011 | 55 694 895  EUR | | 2012 | 32 348 816  EUR  (enero – julio)[(25)](#ntr25-L_2022097ES.01000101-E0025) |   Cuadro 2 – Compensación 2009-2012 (EUR) |

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| (43) | El convenio inicial (modificado en 1994) establece que la compensación anual por servicio público se abonará del siguiente modo: a más tardar el 1 de marzo de cada año, un anticipo inicial igual al 70 % de la compensación pagada el año anterior; a más tardar el 30 de junio, un segundo pago que cubra un 20 % adicional; a más tardar el 30 de noviembre, un pago final del saldo de la compensación para el año de referencia, sobre la base de una estimación de los futuros ingresos y pérdidas [(26)](#ntr26-L_2022097ES.01000101-E0026). Por lo tanto, los resultados finales se verifican cuando la empresa elabora el estado financiero anual. Si Siremar recibía un importe superior al coste neto de los servicios prestados (ingresos menos pérdidas), estaba obligada a reembolsar la diferencia en un plazo de 15 días a partir de la aprobación del estado contable. Desde el 25 de noviembre de 2010, mediante decisión de la Conferencia Interministerial sobre la creación de la subvención anual en virtud del artículo 11 de la Ley n.o 856/1986 entre el Ministerio de Infraestructuras y Transportes (en lo sucesivo, «Ministerio de Transportes»), el Ministerio de Economía y el Ministerio de Desarrollo Económico (en lo sucesivo, «Conferencia interministerial»), los importes de las compensaciones excesivas se deducen de los futuros anticipos de las subvenciones. |

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| (44) | La compensación se calculó de forma diferente en 2009, en comparación con 2010, 2011 y 2012, como se describe a continuación.   |  |  | | --- | --- | | — | Compensación concedida en 2009 | |

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| (45) | El Decreto del Presidente de la República de 1ode junio de 1979, n.o 501 («D.P.R. 501/79»), precisa los distintos elementos (ingresos y costes) que entran en el cálculo de la subvención abonada a los operadores de servicios públicos marítimos. Asimismo, la Ley n.o 856 de 5 de diciembre de 1986 (en lo sucesivo «Ley n.o 856/86») introdujo modificaciones en el sistema de obligaciones de servicio público marítimo en Italia. Por lo que se refiere a los enlaces con las islas mayores y menores, el artículo 11 de dicha Ley modificó los criterios de cálculo de la compensación por las obligaciones de servicio público. En efecto, se debía calcular la subvención basándose en la diferencia entre los ingresos y los costes del servicio, determinada en función de parámetros medios y objetivos, e incluir un rendimiento razonable del capital. El mismo artículo precisa asimismo que los contratos de servicio público debían incluir la lista de rutas subvencionadas, así como la frecuencia y los tipos de buques que debían utilizarse. Las subvenciones debían ser aprobadas por los ministros competentes. Los convenios iniciales tenían en cuenta los principios establecidos en el D.P.R. 501/79 y en la Ley n.o 856/86. |

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| (46) | De hecho, para 2009, se calculó la compensación por SIEG con arreglo a la metodología establecida por los convenios iniciales en vigor desde 1991 y se prorrogó después de su fecha de expiración inicial, el 31 de diciembre de 2008. En particular, la compensación correspondía a las pérdidas netas acumuladas en los servicios gestionados en el contexto del régimen de servicio público, a las cuales se añadió un importe variable correspondiente al rendimiento del capital invertido. |

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| (47) | Los diferentes elementos que constituyen el coste, tomados en cuenta para el cálculo de la compensación definida por las autoridades públicas, fueron los siguientes: gastos de adquisición, publicidad y alojamiento, carga, descarga y maniobra, costes de personal, mantenimiento de buques, costes administrativos, seguros, costes de alquiler y combustible, impuestos y costes de amortización.   |  |  | | --- | --- | | — | Compensación concedida en 2010, 2011 y 2012 | |

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| (48) | Desde 2010, se ha determinado la compensación por cumplimiento del SIEG empleando la nueva metodología establecida por la resolución del CIPE [(27)](#ntr27-L_2022097ES.01000101-E0027) de 9 de noviembre de 2007, denominada «Criterios para la definición de las obligaciones de servicio público y las dinámicas tarifarias en el sector del cabotaje marítimo de interés público» (en lo sucesivo «resolución del CIPE») [(28)](#ntr28-L_2022097ES.01000101-E0028). Según su preámbulo, la resolución del CIPE fue adoptada para la inminente privatización de las empresas públicas que explotan los enlaces marítimos en régimen de servicio público [(29)](#ntr29-L_2022097ES.01000101-E0029) Las disposiciones de la resolución del CIPE se aplican a los servicios prestados por las empresas del grupo Tirrenia desde 2010. |

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| (49) | El método estipulado en la decisión del CIPE permite a las empresas que prestan los servicios públicos marítimos obtener un rendimiento adecuado. La tasa de rentabilidad del capital se calcularía sobre la base del coste medio ponderado del capital («CMPC»). El rendimiento del capital propio exigido [(30)](#ntr30-L_2022097ES.01000101-E0030) debe ser calculado utilizando el modelo de evaluación de los activos financieros. |

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| (50) | Sobre la base de este modelo, el coste de las acciones se calcula sobre la base de: i) la tasa sin riesgo, ii) el valor beta (una estimación del perfil de riesgo de la empresa en relación con el mercado bursátil) y iii) la prima de riesgo de renta variable asignada al mercado bursátil. |

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| (51) | En particular, el coste del capital se calcularía aplicando una prima por riesgo adicional a la tasa de rentabilidad de las actividades sin riesgo. Dicha prima debe calcularse como la prima de riesgo del mercado multiplicado por su valor beta, que determina el riesgo que conlleva una actividad con respecto al mercado. |

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| (52) | Con arreglo a la resolución del CIPE, la tasa de rentabilidad de actividades sin riesgo corresponde al rendimiento bruto medio de las obligaciones de referencia a diez años con respecto a los doce meses anteriores para los cuales se disponga de datos. |

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| (53) | La resolución del CIPE establece una prima de riesgo de mercado del 4 %. Además, en el caso de un servicio prestado de forma no exclusiva, el riesgo supuestamente más elevado soportado por el operador se remunera añadiendo un 2,5 % adicional a la prima de riesgo del mercado. |

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| (54) | Sin embargo, en la práctica, el importe de la compensación abonada a Siremar según lo establecido en la Ley de 2009 no puede superar los 55 694 895 EUR anuales (véase el considerando 30). Si bien la Ley de 2009 establece un límite máximo para la compensación anual abonada a todas las sociedades de Tirrenia por la gestión de sus obligaciones de servicio público, la resolución del CIPE contiene algunas medidas de salvaguardia que permiten a dichos operadores cubrir suficientemente sus costes de explotación. |

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| (55) | En particular, según la resolución del CIPE, el alcance de los servicios, las tarifas máximas y la compensación deben definirse de forma que se garantice que el prestador de servicios cubra íntegramente todos los costes subvencionables, utilizando la ecuación siguiente:  VA(RSP) + VA(AI(X)) = VA(CA)  siendo:   |  |  | | --- | --- | | — | VA(RSP) es el valor actualizado de la compensación por la ejecución de las obligaciones de servicio público; |  |  |  | | --- | --- | | — | VA(AI(X)) es el valor actualizado de otros ingresos (ingresos por tarifas y otros); |  |  |  | | --- | --- | | — | VA (CA) es el valor actualizado de los costes de explotación subvencionables, del reembolso de la deuda y del rendimiento del capital invertido. | |

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| (56) | En caso de que la ecuación anterior no sea válida, podrá reducirse el perímetro de las actividades subvencionadas; otra posibilidad es revisar la organización de los servicios (por ejemplo, el tipo de buques) o modificar los límites máximos arancelarios. |

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| (57) | Además, el límite máximo aplicable a cada servicio, sin impuestos ni tasas portuarias, se ajustará anualmente sobre la base de la siguiente fórmula de cálculo del precio máximo:  DT = DR – C  siendo:   |  |  | | --- | --- | | — | DT es la variación porcentual anual en el límite máximo tarifario; |  |  |  | | --- | --- | | — | DR es la tasa de inflación para el año de referencia; |  |  |  | | --- | --- | | — | C es una tasa anual real de adaptación del límite máximo tarifario, fijado en el convenio o en los contratos de servicio público, que permanece constante durante todo el período de vigencia del convenio o de los contratos de servicio público. | |

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| (58) | La resolución del CIPE también especifica que puede ajustarse el límite máximo tarifario para reflejar las variaciones de los costes del combustible, tomando como referencia los precios estándar a disposición del público. |

2.3.2.   Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar

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| (59) | El 16 de noviembre de 2010, la Comisión aprobó una ayuda de salvamento en favor de Tirrenia y Siremar (en lo sucesivo, «Decisión de 2010») [(31)](#ntr31-L_2022097ES.01000101-E0031). La ayuda consistía en una garantía sobre líneas de crédito concedidas por bancos privados de hasta 95 000 000 EUR. Italia se comprometió a comunicar a la Comisión, a más tardar seis meses después de la autorización de la ayuda de salvamento, un plan de reestructuración o una prueba del reembolso total del préstamo o del retiro de la garantía. |

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| (60) | Posteriormente, las entidades bancarias privadas Banca Infrastrutture Innovazione e Sviluppo (en lo sucesivo, «BIIS») y Unicredit autorizaron una línea de crédito de 40 000 000 EUR en favor de Tirrenia y Siremar (25 000 000 EUR para Tirrenia y 15 000 000 EUR para Siremar), cuya fecha de expiración era el 30 de junio de 2011. El Estado garantizó esta línea de crédito el 15 de febrero de 2011. |

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| (61) | Por lo tanto, se concedió la financiación de la siguiente manera:   |  |  | | --- | --- | | a) | el primer tramo se desembolsó el 28 de febrero de 2011 (20 000 000 EUR para Tirrenia y 12 000 000 EUR para Siremar); |  |  |  | | --- | --- | | b) | el segundo tramo se desembolsó el 23 de marzo de 2011 (5 000 000 EUR para Tirrenia y 3 000 000 EUR para Siremar). | |

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| (62) | Italia informó a la Comisión de que, dado que el primer pago del préstamo garantizado se había desembolsado solo el 28 de febrero de 2011, con arreglo al apartado 25, letra a), de las Directrices comunitarias sobre ayudas estatales de salvamento y reestructuración de empresas en crisis (en lo sucesivo, «Directrices de salvamento y reestructuración de 2004») [(32)](#ntr32-L_2022097ES.01000101-E0032) y a los considerandos 32 y 47 de la Decisión de 2010, la expiración del plazo semestral para el reembolso era el 28 de agosto de 2011. |

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| (63) | Antes de esta fecha, Tirrenia y Siremar no habían reembolsado el préstamo y, en consecuencia, BIIS invocó la garantía estatal el 11 de julio de 2011. En esa fecha, Siremar pasó a estar en deuda con el Estado por un importe de 15 121 838,33 EUR, incluida la cuota principal de los préstamos correspondientes y los intereses aún adeudados al banco. |

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| (64) | El Tribunal concursal autorizó la inclusión del Ministerio de Economía y Hacienda entre los acreedores preferentes (prededucibili) de Tirrenia y Siremar. Según las autoridades italianas, el comisario especial encargado de la gestión de la empresa consideró entonces que Siremar podía reembolsar la financiación antes del 28 de agosto de 2011 con cargo a los ingresos de la privatización prevista de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar. |

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| (65) | El contrato de compraventa del sector de empresa de Tirrenia a CIN se firmó el 25 de julio de 2011. Sin embargo, se retardó la transferencia de los activos y, por consiguiente, también del pago, principalmente debido a las dificultades encontradas para obtener las autorizaciones necesarias para la concentración (inicialmente por la Comisión y, posteriormente, por la Autorità Garante della Concorrenza e del Mercato [en lo sucesivo, («AGCM»)]. El 21 de junio de 2012, la AGCM aprobó finalmente la operación Tirrenia – CIN y la venta finalizó el 19 de julio de 2012. El contrato de compraventa del sector de empresa de Siremar a CdI se firmó el 20 de octubre de 2011. Sin embargo, la transferencia de estos activos también se pospuso, en este caso hasta el 1 de agosto de 2012 (véanse los considerandos 93 a 95). El 18 de septiembre de 2012, Siremar reembolsó su deuda con el Estado, incluidos los intereses, por un importe total de 15 511 529,35 EUR. |

2.3.3.   Privatización de Siremar, contragarantía y aumento del capital de CdI

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| (66) | El 23 de diciembre de 2009, Fintecna publicó los primeros anuncios de licitación para la venta de la totalidad del capital social de Tirrenia, incluida su filial Siremar. El 19 de febrero de 2010, se recibieron dieciséis manifestaciones de interés de diecinueve entidades. El 4 de agosto de 2010, tras el fracaso de las negociaciones con el único licitador que había presentado una oferta vinculante, Fintecna declaró el procedimiento cerrado. Según Italia, las negociaciones fracasaron debido a problemas relacionados con los aspectos financieros de la oferta. |

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| (67) | Tras el fracaso del primer intento de privatización, Tirrenia y Siremar, que se enfrentaban a serias dificultades financieras, fueron admitidas en el procedimiento colectivo de insolvencia previsto por la legislación italiana para empresas grandes, es decir, el «procedimiento de administración extraordinaria» y poco después fueron declaradas insolventes. Más concretamente, Siremar fue admitida al procedimiento de administración extraordinaria el 17 de septiembre de 2010. El 5 de octubre de 2010, el Tribunal de Roma dictó la sentencia n.o 381/2010 por la que declaraba Siremar insolvente. |

2.3.3.1.   Las normas relativas al procedimiento de administración extraordinaria

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| (68) | A diferencia de los procedimientos de quiebra ordinarios, cuyo objeto principal es la liquidación de la sociedad insolvente para satisfacer los créditos de los acreedores, el procedimiento de administración extraordinaria, previsto por el Decreto Legislativo n.o 270, de 8 de julio de 1999 (en lo sucesivo, «Decreto Legislativo n.o 270/1999»), es un procedimiento de insolvencia específico para las empresas grandes, cuyo objetivo es salvaguardar los activos y garantizar la continuidad de la actividad. |

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| --- | --- |
| (69) | En el marco de este procedimiento, la gestión de la empresa insolvente se transfiere a un comisario especial nombrado por el ministerio competente. El comisario especial propone un plan de recuperación de la actividad en cuestión, mediante reestructuración o venta de los activos de la empresa insolvente. Este plan está sujeto a la previa autorización del ministerio competente, teniendo en cuenta el dictamen de un consejo de supervisión (compuesto por expertos nombrados por el ministerio). |

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| (70) | El Decreto-Ley n.o 347, de 23 de diciembre de 2003, por el que se adoptan medidas urgentes para la reestructuración de las grandes empresas insolventes (en lo sucesivo, «Decreto-Ley n.o 347/2003»), convertido con modificaciones en la Ley n.o 39, de 18 de febrero de 2004 (en lo sucesivo, «Ley Marzano»), rige el procedimiento de administración extraordinaria aplicable a las grandes empresas insolventes que deseen participar en este procedimiento de reestructuración. Estas empresas también deben cumplir acumulativamente determinados criterios relativos al número de empleados durante el año precedente y al nivel de endeudamiento. |

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| (71) | El procedimiento exige que la empresa insolvente presente una solicitud al Ministerio italiano de Desarrollo Económico y una petición al Tribunal concursal competente. El Ministerio decide entonces sobre la admisión de la empresa insolvente al procedimiento y nombra al comisario especial bajo la supervisión del consejo de supervisión, mientras que el Tribunal concursal determina el estado de insolvencia de la empresa. |

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| (72) | En los 180 días que siguen su nombramiento, el comisario especial debe presentar un plan de reestructuración al Ministerio. El procedimiento ordinario de quiebra se activa únicamente si el Ministerio no aprueba el plan de reestructuración y el procedimiento alternativo de venta de activos no es viable. |

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| (73) | El artículo 4, apartado 4 quater, del Decreto-Ley n.o 134, de 28 de agosto de 2008 (en lo sucesivo, «Decreto-Ley n.o 134/2008»), convertido en Ley n.o 166, de 27 de octubre de 2008, por la que se establecen disposiciones urgentes sobre la reestructuración de las grandes empresas en crisis, introdujo varias modificaciones en la Ley Marzano. Estas modificaciones se aplican a las empresas que prestan servicios públicos esenciales y se refieren, entre otras cosas, a la posibilidad de que el comisario especial identifique a un comprador de los activos de la empresa insolvente a través de un procedimiento de negociación con las partes que garanticen tanto la continuidad del servicio público a medio plazo como una intervención rápida. El Decreto-Ley n.o 134/2008 precisa que el precio de venta no podrá ser inferior al valor de mercado de los activos, establecido por un perito independiente designado por decreto ministerial. |

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| (74) | El Decreto-Ley n.o 134/2008 introdujo también la posibilidad de aplicar inmediatamente un plan de cesión de activos, a diferencia del régimen anterior, que exigía, en primer lugar, la presentación de un plan de reestructuración al Ministerio. Por último, el Decreto-Ley n.o 134/2008 establece que si el Ministerio no puede aplicar ni aprobar un plan de venta de activos ni un plan de reestructuración, la empresa estará sujeta al procedimiento normal de quiebra. |

2.3.3.2.   El procedimiento de venta

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| (75) | El 4 de octubre de 2010 se publicó el anuncio de licitación para la venta del sector de empresa de Siremar [(33)](#ntr33-L_2022097ES.01000101-E0033) junto con el nuevo convenio de doce años. El objeto de esta convocatoria era comprobar si había entidades nacionales o internacionales interesadas en la adquisición del sector de empresa de Siremar que pudieran garantizar la continuidad de los servicios de transporte. Este anuncio fue publicado en el sitio web de Siremar, en numerosos periódicos [(34)](#ntr34-L_2022097ES.01000101-E0034) y en varios sitios web especializados [(35)](#ntr35-L_2022097ES.01000101-E0035). La fecha límite para la presentación de manifestaciones de interés en la adquisición del sector de empresa de Siremar era el 20 de octubre de 2010. |

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| (76) | A expiración del plazo, seis partes (de las cuales dos conjuntamente) habían presentado cinco manifestaciones de interés por participar en la licitación de Siremar. Todas las partes han demostrado que cumplen los requisitos establecidos en la licitación. En consecuencia, el comisario especial invitó a las parte a realizar una comprobación de la debida diligencia en relación con el sector de empresa de Siremar. Se concedió el acceso a la documentación pertinente con la condición de que las partes interesadas firmaran acuerdos de confidencialidad. |

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| (77) | Una de las seis partes decidió no participar en la fase de diligencia debida [(36)](#ntr36-L_2022097ES.01000101-E0036). Durante esta fase, las cinco partes restantes (dos de las cuales presentaron una oferta conjunta) pudieron acceder a salas virtuales de datos (data room), que contenían:   |  |  | | --- | --- | | a) | información técnica, jurídica y financiera detallada relativa al sector de empresa ofrecido a la venta; |  |  |  | | --- | --- | | b) | el plan industrial del sector de empresa de Siremar preparado por el comisario especial; |  |  |  | | --- | --- | | c) | el informe de diligencia debida del vendedor y las cuentas de la empresa en la fecha de admisión al procedimiento de administración extraordinaria; |  |  |  | | --- | --- | | d) | el proyecto del nuevo convenio de doce años que deberá firmarse entre el adjudicatario y el Estado; |  |  |  | | --- | --- | | e) | información adicional necesaria para que los compradores potenciales pudieran evaluar adecuadamente el objeto de la venta. | |

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| (78) | Mediante Decreto Ministerial de 4 de febrero de 2011, el Ministro de Desarrollo Económico nombró a Banca Profilo S.p.A. como perito independiente para que llevara a cabo una evaluación del sector de empresa de Tirrenia y de Siremar con arreglo al artículo 4, apartado 4 quater, del Decreto-Ley n.o 347/2003. El 8 de marzo de 2011, Banca Profilo S.p.A. estimó que el valor del sector de empresa de Siremar era de 55 millones EUR. Esta información se incluyó en la sala de datos puesta a disposición de todos los licitadores potenciales antes de la fecha límite para la presentación de las ofertas vinculantes. |

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| (79) | El 15 de marzo de 2011, al final del plazo inicial para la presentación de ofertas vinculantes, el administrador especial de Siremar constató que no había recibido ninguna oferta conforme con las disposiciones del anuncio de licitación. Por consiguiente, se reabrió el procedimiento con un nuevo plazo de 5 de abril de 2011. En esa fecha, CdI presentó una oferta de 60,1 millones EUR, mientras que Ustica Lines solicitó una prórroga del plazo para obtener la financiación necesaria y presentar su oferta. El comisario especial incluyó la oferta de CdI en la sala de datos e invitó a los demás participantes a mejorarla antes del 23 de mayo de 2011. En esa fecha, se recibieron las siguientes ofertas:   |  |  | | --- | --- | | a) | oferta de 69 millones EUR de CdI, de los cuales 20 millones EUR pueden pagarse por adelantado y el resto aplazado en diez años (con un tipo de interés del 1,5 %); |  |  |  | | --- | --- | | b) | oferta de 55,1 millones EUR de SNS, de los cuales 30,1 millones EUR pueden pagarse por adelantado y el resto aplazado en ocho años (con un tipo de interés del 1,5 %). | |

|  |  |
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| (80) | CdI fue creada por Mediterranea Holding di Navigazione S.p.A. (en lo sucesivo, «Mediterranea»), Davimar Eolia Navigazione S.r.l. (en lo sucesivo, «Davimar»), Navigazione Generale Italiana S.p.A. [(37)](#ntr37-L_2022097ES.01000101-E0037) (en lo sucesivo, «NGI»), Lauro.it S.p.A., Isolemar S.r.l. y Riccardo Sanges & C. S.r.l. [(38)](#ntr38-L_2022097ES.01000101-E0038) para presentar una oferta en el marco del procedimiento de licitación. Mediterranea tenía una participación del 60 % en CdI [(39)](#ntr39-L_2022097ES.01000101-E0039). Los demás accionistas que poseían el 40 % restante del capital de CdI eran privados. Mediterranea había participado en el procedimiento relativo al primer intento de privatizar Tirrenia (véase el considerando 66) y era propiedad de la Región de Sicilia (en lo sucesivo, «Sicilia») (43,02 %), de Lauro.it S.p.A. (34,36 %), de Isolemar S.r.l. (14,61 %) y de Acies S.r.l. (8,11 %). |

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| --- | --- |
| (81) | SNS fue constituida por Ustica Lines S.p.A. [(40)](#ntr40-L_2022097ES.01000101-E0040) y Caronte & Tourist S.p.A. [(41)](#ntr41-L_2022097ES.01000101-E0041) (con una participación de cada uno del 50 %) para presentar una oferta en el marco del procedimiento de licitación. |

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| (82) | El 26 de julio de 2011, a raíz de nuevas solicitudes de información a los dos licitadores, que expiraban el 18 de julio de 2011, el asesor financiero del procedimiento formuló las siguientes observaciones:   |  |  | | --- | --- | | a) | la oferta de CdI era más elevada en términos absolutos que la de SNS, pero el perfil de riesgo de esta última era inferior al de la primera; |  |  |  | | --- | --- | | b) | la parte del precio de venta ofrecido con pago anticipado por SNS, es decir, 30,1 millones EUR, estaba totalmente cubierta por garantías, mientras que la parte del precio de venta ofrecido por CdI, es decir, 20 millones EUR, lo estaba solo parcialmente por garantías; |  |  |  | | --- | --- | | c) | SNS ya había aprobado y ejecutado un aumento de capital de 25 millones EUR, con respecto al aumento de capital de 12 millones EUR aprobado, pero ejecutado solo parcialmente por CdI. | |

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| --- | --- |
| (83) | El 3 de agosto de 2011, Sicilia concedió a Unicredit una contragarantía incondicional e irrevocable, sin pago de contraprestación, de 40 millones EUR. Esta contragarantía muestra que Unicredit había supeditado la concesión de una garantía de 39 millones EUR a CdI a la concesión de una contragarantía de 40 millones EUR por parte de Sicilia. |

|  |  |
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| (84) | El 5 de agosto de 2011, CdI envió al comisario especial una carta de garantía, emitida el mismo día por Unicredit, en la que el banco se comprometía a garantizar los plazos aplazados del precio de venta ofrecido por CdI por un importe máximo de 39 millones EUR [(42)](#ntr42-L_2022097ES.01000101-E0042). La carta de garantía de Unicredit declara que la garantía estaba supeditada a las siguientes condiciones: 1) la firma por parte de CdI del contrato de venta del sector de empresa de Siremar antes de la fecha de vencimiento del 31 de diciembre de 2011 y 2) la verificación de las competencias del contable general de la Región de Sicilia para emitir la contragarantía. |

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| --- | --- |
| (85) | El asesor financiero y los demás consultores implicados en el procedimiento confirmaron que los documentos habían sido presentados por CdI después de la fecha límite del 18 de julio de 2011 para la presentación de nuevas aclaraciones y pruebas documentales, por lo que no podían tenerse en cuenta. Por consiguiente, el 29 de agosto de 2011, el consejo de supervisión de Siremar en AS aprobó la adjudicación del sector de empresa a SNS y el 1 de septiembre de 2011 el comisario especial solicitó al ministerio competente que autorizara dicha adjudicación. |

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| (86) | Los días 2, 6 y 7 de septiembre de 2011, Sicilia escribió a dicho Ministerio subrayando que CdI había ofrecido el precio más elevado y que era propiedad en parte de Sicilia, lo que debía considerarse una garantía suficiente de la estabilidad financiera. Sicilia también envió directamente al Ministerio: la carta de garantía de UniCredit, su contragarantía y las conclusiones de asesoramiento jurídico que confirman las competencias del contable general para emitir dicha contragarantía. El 8 de septiembre de 2011, el Ministerio solicitó al comisario especial que facilitara más información y aclaraciones sobre la presentación de CdI, independientemente del retraso en la presentación de los documentos. El 22 de septiembre de 2011, el asesor financiero informó al Comisario Especial de que, a pesar del incumplimiento por CdI de los plazos establecidos en el procedimiento, la nueva documentación reducía significativamente el perfil de riesgo de CdI, lo que significa que el valor actual de la oferta de SNS ya no podía considerarse más ventajoso que el ofrecido por CdI. |

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| (87) | El 26 de septiembre de 2011, el Ministerio preguntó a la Presidencia del Consejo de ministros si la contragarantía sobre las obligaciones financieras de CdI proporcionada por Sicilia podía plantear problemas de ayuda estatal. La Presidencia del Consejo de ministros confirmó que, dado que Unicredit había supeditado su decisión de constituir una garantía a que Sicilia aportara una contragarantía, esta debía evaluarse con arreglo a la Comunicación de la Comisión relativa a la aplicación de los artículos 87 y 88 del Tratado CE sobre las ayudas estatales otorgadas en forma de garantía (en lo sucesivo, «Comunicación sobre las garantías») [(43)](#ntr43-L_2022097ES.01000101-E0043). |

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| (88) | El 27 de septiembre de 2011, el comisario especial solicitó autorización al Ministerio para iniciar una nueva fase del procedimiento. Tras recibir esta autorización, el 29 de septiembre de 2011 el asesor financiero invitó a CdI y SNS a presentar ofertas vinculantes nuevas y mejoradas a más tardar el 13 de octubre de 2011. |

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| (89) | CdI presentó una oferta nueva y mejorada, estructurada del siguiente modo:   |  |  | | --- | --- | | a) | 69,15 millones EUR en precio de venta, de los cuales 34,65 millones EUR pueden pagarse por adelantado y el resto aplazado (13,8 millones EUR al final del tercer año, 10,35 millones EUR al final del sexto año, 10,35 millones EUR al final del octavo año, con un tipo de interés del 1,5 %); |  |  |  | | --- | --- | | b) | como garantía del precio de venta: carta de garantía del 12 de octubre de 2011, enviada por Unicredit (compromiso de garantizar el importe de los pagos diferidos del nuevo precio de venta ofrecido por CdI, es decir, 34,5 millones EUR); autenticación notarial de la resolución conjunta de un aumento de capital de hasta 21,48 millones EUR (véase la sección 2.3.3.4); dos cartas de MPS Capital Services, en las que este último se compromete a financiar el primer tramo del precio de venta (hasta 20 millones EUR) y a prorrogar la garantía anterior de 5 millones EUR relativa a la oferta de 23 de mayo de 2011. | |

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| (90) | SNS confirmó la oferta que había presentado el 23 de mayo de 2011. |

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| (91) | El 13 de octubre de 2011, la administración extraordinaria y sus asesores constataron que la oferta de CdI era coherente con el valor del sector de empresa estimado por Banca Profilo y era económicamente más ventajosa que la presentada por SNS. Además, el plan de negocio adjunto a la oferta de CdI cumplía los requisitos y había pruebas suficientes de que CdI era capaz de garantizar la continuidad del servicio público marítimo. Como consecuencia de ello, el comisario especial pidió al Ministerio que adjudicara la licitación a CdI. |

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| (92) | El 14 de octubre de 2011, el consejo de supervisión emitió un dictamen favorable y el Ministerio autorizó la adjudicación de la licitación a CdI. |

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| (93) | El 20 de octubre de 2011, el comisario especial de Siremar y CdI firmaron el contrato de compraventa del sector de empresa de Siremar. Sin embargo, el 22 de noviembre de 2011, SNS impugnó ante el Tribunal Administrativo Regional (en lo sucesivo, «TAR») de Lacio la decisión del comisario especial de atribuir el sector de empresa a CdI. |

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| (94) | El 7 de junio de 2012, el TAR de Lacio declaró que la contragarantía emitida por Sicilia en favor de Unicredit, que cubría una parte del precio de venta ofrecido por CdI, constituía una ayuda estatal, independientemente de que se hubiera invocado o revocado (en lo sucesivo, «Decisión 5172/2012»). El TAR anuló parcialmente el procedimiento de venta del sector de empresa de Siremar [(44)](#ntr44-L_2022097ES.01000101-E0044). |

|  |  |
| --- | --- |
| (95) | Mediterranea impugnó esta decisión ante el Consejo de Estado (en lo sucesivo, «CdS»). Mediante auto de medidas provisionales de 18 de julio de 2012, dicho órgano jurisdiccional suspendió la ejecución de la Decisión 5172/2012 (sin pronunciarse sobre el fondo del asunto). Como consecuencia de ello, CdI firmó el nuevo convenio de gestión de servicio público el 30 de julio de 2012 y el comisario especial transfirió el sector de empresa de Siremar a CdI el 1 de agosto de 2012. |

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| (96) | El 7 de febrero de 2014, el CdS se pronunció sobre el fondo del recurso interpuesto por Mediterranea y concluyó que la contragarantía concedida por Sicilia no había respetado los principios de transparencia y no discriminación establecidos en la legislación nacional (en lo sucesivo, «Decisión 592/14»). En su decisión, el CdS consideró que la contragarantía había menoscabado la plena eficacia del principio de no discriminación entre los dos participantes en la licitación y, por lo tanto, declaró la anulación parcial del procedimiento de adjudicación del sector de empresa de Siremar (al anular el acto de adjudicación de la licitación a CdI). En particular, la garantía concedida por Unicredit estaba condicionada de facto a la concesión de la contragarantía por Sicilia, aunque la primera no mencionaba de forma explícita la segunda (véase la sección 2.3.3.5). |

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| (97) | El contrato de compraventa firmado por CdI con el Estado italiano a raíz de la licitación no fue anulado por la sentencia del CdS. Este último anuló la adjudicación, como acto administrativo, pero no anuló ni el contrato de compraventa, ni el nuevo convenio, que eran contratos de derecho civil. Por lo tanto, CdI siguió gestionando el servicio público, tal como lo establece el nuevo convenio [(45)](#ntr45-L_2022097ES.01000101-E0045). |

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| (98) | El 9 de febrero de 2015, a solicitud de las autoridades italianas y de SNS, el TAR de Lacio se pronunció sobre la interpretación de su anterior decisión de junio de 2012, así como sobre la decisión de febrero de 2014 emitida por el CdS (en lo sucesivo, «Decisión 2351/15»). En su resolución, el TAR de Lacio decidió que se debía efectuar nuevamente la última fase de la venta de Siremar a partir del 29 de septiembre de 2011 [(46)](#ntr46-L_2022097ES.01000101-E0046). El TAR de Lacio confirmó que CdI debía quedar excluida de esta nueva fase del procedimiento. El TAR de Lacio también decidió que el Ministerio de Economía debía adoptar las medidas necesarias para permitir una nueva ejecución del procedimiento en un plazo de 120 días a partir de la fecha de la sentencia. |

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| (99) | A efectos de la aplicación de la sentencia del TAR de Lacio, Siremar in AS:   |  |  | | --- | --- | | — | excluyó del procedimiento la oferta de CdI; |  |  |  | | --- | --- | | — | verificó que la oferta de SNS del 23 de mayo de 2011, de 55,1 millones EUR, seguía siendo válida (lo que confirmó SNS el 19 de enero de 2016); |  |  |  | | --- | --- | | — | verificó que la oferta de SNS cumplía los requisitos necesarios en términos de prestación de servicios públicos, así como la normativa aplicable; |  |  |  | | --- | --- | | — | verificó el valor de los activos a través de un nuevo informe encomendado a Ecorys (en lo sucesivo, «segundo informe Ecorys»), que estimaba un valor entre 34,4 y 39,9 millones EUR (véase el considerando 122); |  |  |  | | --- | --- | | — | rescindió el contrato de compraventa del sector de empresa celebrado con CdI y transfirió la deuda de 37,1 millones EUR ya pagada por CdI a SNS [(47)](#ntr47-L_2022097ES.01000101-E0047); |  |  |  | | --- | --- | | — | después de recibir la autorización del Ministerio el 6 de abril de 2016, adjudicó el sector de empresa a SNS el 11 de abril de 2016. | |

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| (100) | En la misma fecha, SNS y el Ministerio de Transportes firmaron el nuevo convenio. |

2.3.3.3.   Contrato de compraventa con SNS

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| (101) | El contrato de compraventa entre Siremar en AS y SNS define el sector de empresa de Siremar transferido como sector de empresa dedicado a la prestación de servicios de transporte marítimo en el contexto de las obligaciones de servicio público existentes [(48)](#ntr48-L_2022097ES.01000101-E0048). En particular, el artículo 4 especifica que los activos del sector de empresa se enumerarán en un anexo y abarcarán todos los activos intangibles [(49)](#ntr49-L_2022097ES.01000101-E0049) y materiales [(50)](#ntr50-L_2022097ES.01000101-E0050) utilizados por la empresa en el cumplimiento de sus obligaciones de servicio público. |

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| (102) | En virtud del artículo 5 del contrato de compraventa el precio de venta de 55,1 millones EUR será pagado de la siguiente manera:   |  |  | | --- | --- | | a) | 37,1 millones EUR a partir de la firma del contrato de compraventa (mediante transferencia de la obligación de reembolso con respecto a CdI); |  |  |  | | --- | --- | | b) | el importe restante será diferido como sigue, con un tipo de interés del 1,5 %: 9 millones EUR después de 72 meses; 9 millones EUR después de 96 meses. | |

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| (103) | El artículo 7, apartado 6, letra d), del contrato de compraventa establece que, en virtud del artículo 4, apartado 4 quater, del Decreto-Ley n.o 347/2003, el comprador puede garantizar la continuidad del servicio a medio plazo. |

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| (104) | El artículo 7, apartado 9, del contrato de compraventa especifica que el comprador presentará nuevas ofertas de empleo a todo el personal administrativo y de a bordo empleado para cumplir las obligaciones de servicio público, teniendo en cuenta las cualificaciones adquiridas o la equivalencia de las descripciones de puestos de trabajo, así como los posibles acuerdos con los sindicatos. Este artículo también establece que, como exige el artículo 63, apartado 2, del Decreto Legislativo 270/1999, el comprador también debe abstenerse de despidos no disciplinarios durante un período de dos años (en lo sucesivo, «requisito de mano de obra»). En virtud del artículo 7, apartados 11 y 12 del contrato de compraventa, el comprador está obligado a informar regularmente al vendedor del cumplimiento de dichas obligaciones, fijando sanciones económicas por un importe significativo en caso de incumplimiento. |

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| (105) | El artículo 8, apartado 12, del contrato de compraventa precisa que, de conformidad con el artículo 63, apartado 5, del Decreto Legislativo 270/1999, el nuevo propietario no estará obligado a reembolsar las deudas contraídas por Siremar antes de la transferencia del sector de empresa. |

2.3.3.4.   Aumento del capital

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| (106) | El 13 de octubre de 2011, los accionistas de CdI se comprometieron a aumentar su capital a 21 480 236 EUR. El 3 de febrero de 2012, Mediterranea, accionista mayoritario con más del 60 % de las acciones de CdI, también hizo un aumento de capital, por lo que Sicilia ya no era accionista mayoritario, ya que su participación se redujo a alrededor del 43 %. |

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| (107) | El aumento de capital de CdI tuvo lugar mientras Sicilia era accionista mayoritario de Mediterranea, que a su vez era (y sigue siendo) accionista mayoritario de CdI. El objetivo del aumento de capital era adquirir el sector de empresa de Siremar y la gestión del nuevo convenio. |

2.3.3.5.   Contragarantía

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| (108) | Durante la privatización, Sicilia emitió una contragarantía en favor de Unicredit. |

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| (109) | En primer lugar, el 3 de agosto de 2011, como se describe en el considerando 83, Sicilia emitió una contragarantía en favor de Unicredit, que permitió a Unicredit presentar una primera carta de garantía dos días más tarde comprometiéndose a garantizar los plazos diferidos del precio de venta ofrecido por CdI (es decir, 39 millones EUR). Este escrito supeditaba expresamente la validez de tal garantía a la validez de la contragarantía de Sicilia. |

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| (110) | En segundo lugar, el 7 de octubre de 2011, en una fase posterior del procedimiento, Sicilia confirmó su disposición a proporcionar una contragarantía para los pagos diferidos del nuevo precio de venta hasta un importe de 34,6 millones EUR. El 12 de octubre de 2011, Sicilia modificó la contragarantía del 3 de agosto de 2011, garantizando pagos de hasta 36 millones EUR. En la misma fecha, Unicredit envió la segunda carta de garantía mencionada en el considerando 89, sin indicar que la contragarantía de Sicilia todavía era vigente. |

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| (111) | El 20 de noviembre de 2011, la contragarantía de Sicilia fue sustituida por una contragarantía de todos los accionistas de CdI. El 31 de enero de 2012, Sicilia envió una carta a Siremar en AS en la que afirmaba que la contragarantía del 12 de octubre de 2011 debía considerarse como revocada. El 3 de febrero de 2012, Unicredit emitió una nota en la que confirmaba que su garantía relativa a los plazos diferidos del precio de venta no estaba supeditada a una contragarantía emitida por Sicilia. |

2.3.3.6.   Estudio de Banca Profilo

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| (112) | Como se ha descrito anteriormente (véase el considerando 78), el Ministro de Desarrollo Económico nombró a Banca Profilo como experto independiente para llevar a cabo la valoración del sector de empresa de Siremar con arreglo al artículo 4, apartado 4 quater, de la Ley Marzano. El 8 de marzo de 2011, Banca Profilo presentó un informe en el que se describían las metodologías de valoración y los datos utilizados, entre ellos incluso el plan industrial de Siremar para el período 2011-2022. Dicho informe incluía un intervalo estimado de valores para el sector de empresa de Siremar. |

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| (113) | Las valoraciones de Banca Profilo se basan en diversos supuestos y, en particular, en la hipótesis de que el nuevo contrato de servicio se aplicará hasta su expiración y que, por consiguiente, el sector de empresa de Siremar recibe una compensación por las obligaciones de servicio público para operar los enlaces de transporte marítimo mencionados en el contrato. En su informe de valoración, Banca Profilo utiliza como métodos principales los «flujos de caja actualizado» y el «valor añadido económico», así como los «múltiplos de mercado» y el «método de ajuste contable» como métodos secundarios para control. |

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| (114) | En el contexto de la metodología del flujo de caja actualizado, Banca Profilo tiene en cuenta los siguientes aspectos: i) los flujos financieros generados hasta la fecha de expiración del nuevo convenio; ii) el valor de liquidación del sector de empresa de Siremar en el momento de la expiración del nuevo convenio, suponiendo que no sea posible continuar la actividad después de esa fecha. Según la metodología del valor añadido económico, Banca Profilo evalúa: i) el valor contable ajustado; ii) el fondo de comercio negativo/fondo de comercio; iii) el valor de liquidación del sector de empresa de Siremar en la fecha de vencimiento del nuevo convenio. Esta valoración se basa en los datos del plan industrial de la empresa y en cálculos propios realizados por Banca Profilo. |

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| (115) | En cuanto a las metodologías secundarias, estas implicaron lo siguiente. El análisis de los múltiplos de mercado se basa en cálculos de Banca Profilo utilizando datos de Bloomberg para nueve empresas de transporte marítimo comparables. El método de ajuste contable consiste en una estimación del valor neto de los activos registrados en el balance, pero con determinados ajustes en los activos y pasivos y sumando el valor estimado de los activos intangibles. |

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| (116) | Banca Profilo llegó a la conclusión de que el valor del sector de empresa de Siremar en el momento de su valoración se situaba entre 55 y 61 millones EUR. Por consiguiente, el precio mínimo para esa empresa debía fijarse en 55 millones EUR. |

2.3.3.7.   Primer informe Ecorys y segundo informe Ecorys

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| (117) | Durante la investigación, la Comisión encargó a Ecorys que determinara el valor de mercado del sector de empresa de Siremar. Se pidió al asesor: i) determinar el valor de mercado del sector de empresa de Siremar asociado al nuevo convenio, ii) determinar el valor de mercado del sector de empresa sin condiciones previas y iii) determinar si la necesidad de mano de obra no incluía el precio de venta. |

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| (118) | A efectos de determinar el valor del sector de empresa de Siremar asociado al nuevo convenio, el primer informe Ecorys también aplicó las principales metodologías utilizadas por Banca Profilo. En particular, Ecorys aplicó las metodologías del flujo de caja actualizado y del valor añadido económico. |

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| (119) | En primer lugar, Ecorys concluyó que si se hubiera vendido el sector de empresa de Siremar sin condiciones y, en particular, en ausencia del nuevo contrato de servicio público, la empresa habría sido vendida por su valor de liquidación [(51)](#ntr51-L_2022097ES.01000101-E0051), es decir, 0,3 millones EUR. Ecorys señaló que este valor de liquidación era negativo y, por lo tanto, indicó que la liquidación inmediata (en la práctica, la venta de los buques) no era una alternativa viable para un operador en una economía de mercado. Ecorys basó esta conclusión en la consideración de que el sector de empresa de Siremar no habría podido ejercer su actividad de forma rentable sin compensación por las obligaciones de servicio público. Ecorys especificó que las actividades en las rutas de servicio público explotadas por Tirrenia y Siremar «sufren graves pérdidas, que se caracterizan por un bajo volumen de pasajeros y dependen enteramente de la financiación de los convenios». Además, según Ecorys, «la posibilidad de cambiar la calidad de los servicios y un mayor margen para fijar los precios de los billetes no son condiciones suficientes para hacer que estas rutas sean económicamente rentables desde un punto de vista comercial». |

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| (120) | En segundo lugar, para evaluar el sector de empresa de Siremar, asociado al nuevo convenio, Ecorys supuso que no se prorrogaría el nuevo convenio no se prorrogaría en la fecha de expiración y que, por lo tanto, se liquidaría Siremar [(52)](#ntr52-L_2022097ES.01000101-E0052). Sobre esta base, Ecorys estableció que el valor mínimo de mercado del sector de empresa de Siremar era de 57 millones EUR (es decir, un precio que es casi un 5 % superior a aquel estimado por Banca Profilo). |

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| (121) | En tercer lugar, Ecorys comparó el personal del sector de empresa de Tirrenia y Siremar con el de muchas empresas de transbordadores comparables y llegó a la conclusión de que los efectivos y las estructuras de coste del personal de Siremar «no son diferentes de aquellas de empresas comparables, en cuanto a la parte del coste de la mano de obra con respecto a los ingresos totales [(53)](#ntr53-L_2022097ES.01000101-E0053) y a la relación coste de la mano de obra/personal» [(54)](#ntr54-L_2022097ES.01000101-E0054). Sobre esta base, Ecorys concluyó que no hay elementos que sugieran que la condición relativa a la mano de obra tuviera un impacto significativo en el valor del sector de empresa de Siremar. |

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| (122) | Como se explica en el considerando 99, Italia también encargó el segundo informe Ecorys antes de concluir el procedimiento de venta con SNS, para comprobar si la nueva oferta de esta última reflejaba el valor de mercado del sector de empresa, asociado al contrato de servicio público, el 31 de agosto de 2015. El segundo informe Ecorys, de 28 de octubre de 2015, aplicó el método del flujo de caja actualizado como principal instrumento de valoración y el método de ajuste contable para verificar la fiabilidad de las conclusiones. La nueva estimación de Ecorys basada en el método del flujo de caja actualizado fue de 34,4 millones EUR, suponiendo que el nuevo convenio permanecería en vigor hasta el 31 de julio de 2024. Si se prorrogara el nuevo convenio hasta el 31 de julio de 2026, el valor estimado del sector de empresa de Siremar habría sido de 35,7 millones EUR. El método de valoración del ajuste contable produjo una estimación de 39,9 millones EUR. |

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| (123) | Por último, este informe se completó con una comparación entre los dos planes industriales elaborados por SNS: un primer plan que abarca el período 2011-2022 y elaborado en mayo de 2011, y un segundo plan para el período 2016-2027, elaborado en febrero de 2016. Ecorys concluyó que los dos planes no eran idénticos en sus hipótesis y no cubrían el mismo nivel de detalle (por ejemplo, el segundo plan no incluía la lista de rutas y frecuencias). En particular, las principales diferencias entre los planes fueron las siguientes: las hipótesis sobre el uso de la flota, la depreciación, los costes de personal y el uso de datos anteriores facilitados por CdI, que no estaban disponibles en el primer plan. Ecorys también preparó una valoración de una página confirmando a las autoridades italianas la coherencia interna del segundo plan de SNS para el período 2016-2027. |

2.3.4.   Nuevo convenio

2.3.4.1.   Beneficiario

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| (124) | CdI ganó inicialmente el sector de empresa de Siremar y firmó el nuevo convenio para la explotación de las rutas marítimas el 30 de julio de 2012. Posteriormente, el 11 de abril de 2016, SNS sustituyó a CdI y comenzó a explotar las mismas rutas. |

2.3.4.2.   Rutas

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| (125) | En virtud del nuevo convenio, CdI y posteriormente SNS debían prestar servicios de pasajeros y mercancías en veinte rutas de cabotaje divididas en cinco agrupaciones, a veces con frecuencias o rutas diferentes entre temporada alta y baja [(55)](#ntr55-L_2022097ES.01000101-E0055) (véase el cuadro 3).   |  |  | | --- | --- | | Enlaces con transbordador (mixtos) | Enlaces de pasajeros (buques rápidos) | | Grupo Milazzo – Islas Eolias – Nápoles | | | C/1: Milazzo – Vulcano – Lipari – Rinella – Panarea – Ginostra – Stromboli – Nápoles y regreso (todo el año, dos conexiones semanales)  C/2: Milazzo – Vulcano – Lipari – Rinella – Sala y regreso (todo el año, una conexión diaria, sin servicio el domingo en temporada baja)  C/3: Milazzo – Vulcano – Lipari – Salina – Panarea – Ginostra – Stromboli y regreso (todo el año, dos conexiones semanales)  C/4: Milazzo – Vulcano – Lipari – Salina – Rinella – Filicudi – Alicudi y regreso (todo el año, cinco conexiones semanales en temporada alta y cuatro conexiones semanales en temporada baja)  C/6: Lipari –Vulcano – Milazzo y regreso (todo el año, una conexión diaria) | ALC/2: Milazzo – Vulcano – Lipari – Rinella – Salina y regreso (todo el año, al menos una conexión diaria)  ALC/3: Milazzo – Vulcano – Lipari – Salina – Panarea – Ginostra – Stromboli y regreso (tudo el año, al menos una conexión diaria)  ALC/4: Milazzo – Vulcano – Lipari – Salina – Rinella – Filicudi – Alicudi y regreso (todo el año, al menos una conexión diaria)  ALC/6: Lipari –Vulcano – Milazzo y regreso (todo el año, una conexión diaria)  ALC/2 BIS: Lipari – Rinella – Salina – Lipari (todo el año, cuatro conexiones semanales en temporada alta, tres semanales y una diaria hasta Salina en temporada baja) | | Grupo Palermo – Ustica | | | D/1: Palermo - Ustica y regreso (todo el año, una conexión diaria) | ALD/1: Ustica – Palermo y regreso (todo el año, al menos una conexión diaria) | | Grupo Trapani - Islas Egadas | | | D/2: Trapani – Favignana – Levanzo – Marettimo y regreso (todo el año, al menos una conexión diaria)  D/3: Trapani – Favignana – Levanzo – Trapani (todo el año, dos conexiones diarias en temporada alta, 12 conexiones semanales y menor frecuencia hacia Levanzo en temporada baja) | ALD/2: Trapani – Favignana – Levanzo – Marettimo y regreso (todo el año, dos conexiones diarias)  ALD/3: Trapani – Favignana – Levanzo – Trapani (todo el año, al menos una conexión diaria)  ALD/2 BIS: Marettimo – Levanzo – Favignana – Trapani y regreso (todo el año, al menos una conexión diaria)  ALD/3 BIS: Trapani – Favignana – Levanzo – Trapani (todo el año, al menos dos conexiones diarias) | | Grupo Trapani – Pantelleria | | | D/4: Trapani – Pantelleria y regreso (todo el año, una conexión diaria en temporada alta, seis conexiones semanales en temporada baja) |  | | Grupo Porto Empedocle – Islas Pelagias | | | D/5: Porto Empedocle – Linosa – Lampedusa y regreso (todo el año, seis conexiones semanales) |  |   Cuadro 3 – Rutas explotadas por CdI, y posteriormente por SNS en el marco del nuevo convenio |

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| (126) | El anexo A del nuevo convenio establece detalladamente las disposiciones de gestión para cada ruta en el cuadro 3 (por ejemplo, tipo de buque y frecuencia estacional). Además, las tarifas aplicadas a los usuarios no podrán superar los límites establecidos en el artículo 6 del nuevo convenio y especificados en el anexo A. |

2.3.4.3.   Duración

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| (127) | Tanto el nuevo convenio firmado entre Sicilia y CdI como aquel celebrado entre Sicilia y SNS tienen una duración de doce años. El contrato con SNS entró en vigor el 12 de abril de 2016 y expirará el 11 de abril de 2028. |

2.3.4.4.   Obligaciones de servicio público

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| (128) | Las obligaciones de servicio público impuestas conciernen a los enlaces marítimos por explotar (véase el considerando 125), el tipo y la capacidad de los buques asignados a las rutas marítimas respectivas, la disponibilidad de un buque de reserva para garantizar la continuidad del servicio, la periodicidad del servicio y las tarifas máximas aplicadas a los usuarios del servicio en cada una de las rutas en cuestión. |

2.3.4.5.   La compensación

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| (129) | La compensación anual que debe recibir la empresa encargada de las obligaciones de servicio público mencionadas en el nuevo convenio está limitada por ley a 55 694 895 EUR. El importe de la compensación debe determinarse con arreglo al procedimiento establecido en la resolución del CIPE (véanse los considerandos 48 a 58). La compensación se abonó a las dos empresas del siguiente modo:   |  |  |  | | --- | --- | --- | |  | Compensación pagada a CdI | Compensación pagada a SNS | | 2012 | 23 346 079  EUR  (agosto-diciembre) | — | | 2013 | 55 694 895  EUR | — | | 2014 | 55 694 895  EUR | — | | 2015 | 55 694 895  EUR | — | | 2016 | 15 397 836  EUR | 40 297 059  EUR | | 2017 | — | 55 694 895  EUR | | 2018 | — | 55 694 895  EUR | | 2019 | — | 55 694 895  EUR |   Cuadro 4 – Compensación 2012-2019 |

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| (130) | El artículo 8 del nuevo convenio prevé una revisión trienal periódica del alcance de las actividades subvencionadas para comprobar que no existen desequilibrios financieros. Además, el artículo 9 del nuevo convenio establece que, en circunstancias muy específicas de variaciones imprevistas y estructurales de los ingresos o costes y, en cualquier caso, solo después del primer año de cada período de tres años, las partes podrán proceder a tal revisión con antelación. |

2.3.5.   Prioridad en la asignación de los puntos de amarre

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| (131) | El artículo 19 ter, apartado 21, del Decreto-Ley n.o 135/2009 establece que, para garantizar la continuidad territorial con las islas y las obligaciones de servicio público, se concederá a las empresas del antiguo Grupo Tirrenia, incluida Siremar, el mantenimiento de puntos de amarre ya asignados y la prioridad en la asignación de nuevos puntos de amarre, de conformidad con los procedimientos de los que son responsables las autoridades portuarias y marítimas italianas en virtud de la Ley n.o 84, de 28 de enero de 1994, y del Código de navegación italiano. |

2.3.6.   Las medidas establecidas en la Ley de 2010

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| (132) | La ley de 2010 preveía la posibilidad de que las empresas del antiguo grupo Tirrenia, incluida Siremar, utilizaran los recursos financieros ya utilizados para la modernización y adaptación de la flota [(56)](#ntr56-L_2022097ES.01000101-E0056) para cubrir necesidades urgentes de liquidez. En particular, al utilizar dos líneas de crédito [(57)](#ntr57-L_2022097ES.01000101-E0057), ya se habían reservado 23 750 000 EUR para financiar las mejoras de todo el grupo Tirrenia, de los que se asignó 7 215 800 EUR a Siremar. Las empresas del antiguo grupo Tirrenia que utilizaron estos fondos para liquidez se vieron obligadas a devolverlos en una fase ulterior, a fin de permitir la realización de las renovaciones necesarias en los buques. Estas mejoras eran necesarias para cumplir determinadas normas internacionales de seguridad introducidas a raíz del Acuerdo de Estocolmo de 1996 [(58)](#ntr58-L_2022097ES.01000101-E0058). |

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| (133) | Además, la Ley de 2010 preveía también lo siguiente:   |  |  | | --- | --- | | a) | los convenios iniciales se prorrogan a partir del 1 de octubre de 2010 hasta el final de los procesos de privatización de Tirrenia y Siremar (véase también el considerando 31); |  |  |  | | --- | --- | | b) | el artículo 19ter del Decreto-Ley n.o 135/2009, convertido, con modificaciones, en la Ley de 2009, queda modificado mediante la introducción del apartado 24 bis, según el que todos los actos y operaciones oficiales en el sentido del artículo 19ter, apartados 1 a 15, del Decreto-Ley n.o 135/2009 se benefician de la exención fiscal. Estos apartados se refieren a la liberalización del sector del cabotaje marítimo mediante la privatización del Grupo Tirrenia; |  |  |  | | --- | --- | | c) | para garantizar la continuidad del servicio público y apoyar el proceso de privatización de las empresas del antiguo grupo Tirrenia, las regiones pertinentes podrán utilizar los recursos del Fondo para las zonas infrautilizadas («FAS») [(59)](#ntr59-L_2022097ES.01000101-E0059) a que se refiere la Decisión n.o 1/2009 del CIPE, de 6 de marzo de 2009 [(60)](#ntr60-L_2022097ES.01000101-E0060). | |

2.4.   Procedimiento de infracción n.o 2007/4609

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| (134) | A raíz de anteriores intercambios entre los servicios de la Comisión y las autoridades italianas, el director general de la Comisión responsable de Energía y Transportes envió una solicitud de información a Italia el 19 de diciembre de 2008. Dicha solicitud se refería, entre otras cosas, a la descripción de las rutas de servicio público existentes en ese momento y a la misión de servicio público que Italia preveía con arreglo a los nuevos convenios propuestos. Además, se invitó a Italia a facilitar más detalles sobre los planes de privatización del grupo Tirrenia. |

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| (135) | Mediante carta de 28 de abril de 2009, las autoridades italianas enviaron una respuesta detallada:   |  |  | | --- | --- | | — | observando que la prórroga de los convenios iniciales hasta el 31 de diciembre de 2009 era necesaria para lograr la liberalización del sector del cabotaje marítimo en Italia mediante la privatización del grupo Tirrenia; |  |  |  | | --- | --- | | — | reiterando que la compensación por las obligaciones de servicio público concedida al grupo Tirrenia era necesaria para garantizar la continuidad territorial con las islas a través de enlaces marítimos no proporcionados por los operadores privados presentes en el mercado; |  |  |  | | --- | --- | | — | subrayando que el 10 de marzo de 2009 se había completado un proceso exhaustivo de racionalización de las rutas, teniendo en cuenta los importantes aspectos sociales, laborales y económicos implicados, así como la necesidad de salvaguardar los enlaces esenciales para la continuidad territorial mediante la participación de las seis regiones implicadas en un proceso de consulta. El proceso de racionalización habría dado lugar a una reducción del coste neto del servicio público de aproximadamente 66 millones EUR y al despido de unos 600 marineros empleados en los buques de las empresas del grupo Tirrenia. Italia recordó también que la racionalización de 2009 completó los esfuerzos realizados anteriormente (en 2004, 2006 y 2008) por reducir los servicios operados por el grupo Tirrenia; |  |  |  | | --- | --- | | — | explicando que los objetivos del proceso de racionalización son: i) el mantenimiento de los enlaces necesarios para garantizar la continuidad territorial de las islas con las regiones y la protección del derecho a la salud, a los estudios y a la movilidad; ii) la racionalización de los enlaces en presencia de operadores privados que ofrezcan las mismas rutas durante el mismo período, con garantías similares de calidad y continuidad; y iii) la racionalización de los enlaces en temporada alta y el transporte rápido de pasajeros; |  |  |  | | --- | --- | | — | facilitando una perspectiva general de las rutas en las que operaban las empresas del grupo Tirrenia durante 2008 y del número reducido de rutas en las que operaría el grupo Tirrenia durante 2009. Según las autoridades italianas, estas últimas rutas constituirían la base de los nuevos convenios que debían celebrarse con los nuevos propietarios de las empresas del grupo Tirrenia. | |

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| (136) | El 21 de diciembre de 2009, el director general de la Comisión responsable de Energía y Transportes envió una carta a las autoridades italianas señalando, entre otras cosas, que:   |  |  | | --- | --- | | — | en el contexto de la reestructuración radical del sector del cabotaje marítimo en Italia y habida cuenta del impacto social que, según las autoridades italianas, habría tenido las licitaciones sobre la base de un simple contrato de servicio público, la organización de un procedimiento de licitación para adjudicar tales contratos a las compañías navieras era aceptable, en principio y con carácter excepcional, para garantizar el respeto del principio de no discriminación entre armadores europeos establecido en el Reglamento (CEE) n.o 3577/92 del Consejo [(61)](#ntr61-L_2022097ES.01000101-E0061) («Reglamento sobre el cabotaje marítimo»); |  |  |  | | --- | --- | | — | La compensación por las obligaciones de servicio público debía limitarse a las rutas para las que la presencia continua de otros operadores a lo largo del año era limitada. A este respecto, se solicitaron aclaraciones sobre la deficiencia del mercado en determinadas rutas explotadas por Tirrenia y Caremar. La carta también indicaba que solo la inclusión de rutas nacionales (y no internacionales) en un contrato de servicio público podía justificarse sobre la base del objetivo de continuidad territorial; |  |  |  | | --- | --- | | — | los contratos de servicio público del grupo Tirrenia expiraron el 31 de diciembre de 2008 y existía la posibilidad de que la privatización prevista por Italia tardara más de lo previsto. Por lo tanto, la carta señalaba la posibilidad de enviar un requerimiento por la aplicación incorrecta del Reglamento sobre el cabotaje marítimo. | |

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| (137) | El 22 de enero de 2010, las autoridades italianas respondieron a la carta de los servicios de la Comisión de 21 de diciembre de 2009:   |  |  | | --- | --- | | — | observando que, en principio, la Comisión ha respaldado el enfoque propuesto para la privatización del grupo Tirrenia y los nuevos contratos de servicio público; |  |  |  | | --- | --- | | — | ofreciendo explicaciones sobre las rutas para las que la Comisión ha planteado una serie de preguntas; |  |  |  | | --- | --- | | — | mencionando que la convocatoria de manifestaciones de interés para la venta de Tirrenia (incluida Siremar) se publicó el 23 de diciembre de 2009. Italia indicó que tenía previsto finalizar la privatización de todo el grupo Tirrenia antes del 30 de septiembre de 2010; |  |  |  | | --- | --- | | — | pidiendo a la Comisión que confirmara expresamente si los argumentos proporcionados con respecto a la deficiencia del mercado eran suficientes. | |

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| (138) | El 29 de enero de 2010, [(62)](#ntr62-L_2022097ES.01000101-E0062) la Comisión envió una carta de emplazamiento relativa a la infracción del Reglamento sobre el cabotaje marítimo. En esta carta, la Comisión recordó que dicho Reglamento establece que, cuando un Estado miembro celebre contratos de servicio público o imponga obligaciones de servicio público, lo hará de forma no discriminatoria para todos los armadores comunitarios. De conformidad con el artículo 4, apartado 3, del Reglamento sobre el cabotaje marítimo, los contratos de servicio público vigentes permanecerán en vigor hasta sus respectivas fechas de expiración. No obstante, la Comisión observó que las empresas del grupo Tirrenia siguieron prestando servicios de transporte marítimo después de la expiración de los respectivos contratos de servicio público («convenios iniciales»). En particular, dichos convenios debían expirar a finales de 2008 pero Italia los prorrogó repetidas veces. Por ello, la Comisión invitó a las autoridades italianas a presentar sus observaciones al respecto. |

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| (139) | También el 29 de enero de 2010, el Director General de la Comisión responsable de Energía y Transportes respondió a la carta de las autoridades italianas de 22 de enero de 2010. El Director General declaró que las justificaciones presentadas para las rutas explotadas por Tirrenia bastaban para disipar las reservas expresadas anteriormente. Además, el Director General observó con satisfacción que, a raíz de su solicitud anterior, Italia había suprimido un enlace internacional desde el proyecto del nuevo convenio en lo que respecta a Tirrenia. Con respecto a las preguntas formuladas en relación a las rutas atendidas por Caremar, únicamente se consideraron suficientes las justificaciones correspondientes a algunas de estas rutas. Por consiguiente, se invitó a Italia a aportar más aclaraciones sobre determinadas rutas Caremar. El Director General recordó que los contratos de servicio público solo pueden cubrir aquellas líneas en las que existe una deficiencia del mercado. El Director General también subrayó que su respuesta solo se refería al cumplimiento del Reglamento sobre el cabotaje marítimo y no a cuestiones relacionadas con las ayudas estatales. |

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| (140) | El 29 de marzo de 2010, las autoridades italianas respondieron a la carta de emplazamiento de la Comisión de 29 de enero de 2010:   |  |  | | --- | --- | | — | recordando que los servicios de la Comisión, mediante carta de 21 de diciembre de 2009 (véase el considerando 136), se habían mostrado en principio de acuerdo con la privatización del grupo Tirrenia por medio de una vinculación de las empresas con los nuevos contratos de servicio público; |  |  |  | | --- | --- | | — | observando que la prórroga de los convenios iniciales se debió únicamente a la necesidad de garantizar la continuidad en el funcionamiento del sector del transporte marítimo público hasta la conclusión de los respectivos procesos de privatización; |  |  |  | | --- | --- | | — | confirmando su intención de concluir el proceso de privatización antes del 30 de septiembre de 2010, para liberalizar el sector del cabotaje marítimo antes de esa fecha; |  |  |  | | --- | --- | | — | proporcionando una visión general del proceso de privatización de Tirrenia (incluida Siremar). En particular, Italia indicó que, tras la publicación de la convocatoria de manifestaciones de interés, el 19 de febrero de 2010, se habían presentado dieciséis manifestaciones de interés correspondientes a diecinueve entidades. Como parte de la fase de diligencia debida, el 22 de marzo de 2010 se había abierto una sala de datos, que permanecería abierta hasta finales de mayo de 2010. En aquel momento, las autoridades italianas esperaban que el contrato de compraventa pudiera firmarse en la primera mitad de julio de 2010 y que la transferencia fuera efectiva en septiembre de 2010; |  |  |  | | --- | --- | | — | precisando que, por lo que se refiere a Toremar, once operadores del sector habían manifestado su interés en participar en las fases siguientes del procedimiento; |  |  |  | | --- | --- | | — | subrayando que la permanente incertidumbre que provocaría la continuación del procedimiento de infracción podría poner en peligro los procesos de privatización y provocar también una depreciación del valor de las empresas licitadas; |  |  |  | | --- | --- | | — | ofreciendo a la Comisión plena cooperación a fin de aclarar cualquier duda pendiente con respecto al procedimiento de infracción y a las cuestiones de posible ayuda estatal. | |

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| (141) | El 10 de septiembre de 2010, las autoridades italianas informaron a la Comisión, durante una reunión ad hoc, de que el procedimiento para la privatización de Tirrenia y Siremar se había cancelado en su fase final y que, en consecuencia, no se respetaría la fecha límite del 30 de septiembre. Asimismo, las autoridades italianas informaron de que los procedimientos de licitación para los contratos de Caremar, Saremar, Siremar y Toremar también se habían retrasado. Posteriormente, la Ley de 2010 prorrogó aún más los convenios iniciales hasta la conclusión de los procesos de privatización de Tirrenia y Siremar. |

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| (142) | A raíz de esta evolución, la Comisión envió una carta de emplazamiento adicional el 24 de noviembre de 2010. En dicho escrito, la Comisión:   |  |  | | --- | --- | | — | señaló que los convenios iniciales de Tirrenia, Siremar, Caremar, Saremar y Toremar se prorrogaron automáticamente y sin ningún procedimiento de licitación; |  |  |  | | --- | --- | | — | destacó que, aunque los contratos de servicio público en cuestión seguían aplicándose, no se había completado ningún procedimiento de licitación; |  |  |  | | --- | --- | | — | indicó que se había reservado el derecho a emitir, en su caso, un dictamen motivado (tras tomar nota de las observaciones formuladas por Italia). | |

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| (143) | El 21 de junio de 2012, la Comisión adoptó un dictamen motivado relativo al retraso en la privatización de tres empresas (Caremar, Laziomar y Saremar) del antiguo grupo Tirrenia. Dado que los procedimientos de licitación de las otras tres empresas (Tirrenia, Toremar y Siremar) se habían completado durante el año 2011 [(63)](#ntr63-L_2022097ES.01000101-E0063), estas no estaban incluidas en el dictamen motivado. La Comisión observó que, más de tres años después de la expiración normal de los respectivos convenios iniciales, Italia no había establecido procedimientos competitivos para la adjudicación de contratos de servicio público para las rutas de cabotaje marítimo explotadas por Caremar, Laziomar y Saremar. Al contrario, dichos acuerdos fueron prorrogados automáticamente por tiempo indefinido, impidiendo así que otros armadores comunitarios compitieran por los contratos. |

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| (144) | El 8 de agosto de 2012, las autoridades italianas respondieron al dictamen motivado indicando que las convocatorias para la selección de las empresas encargadas de la ejecución de los nuevos contratos de servicio público estaban publicadas o se publicarían próximamente en el Diario Oficial de la Unión Europea. En particular, por lo que se refiere a Caremar, se publicó la convocatoria el 20 de julio de 2012 y a Laziomar el 1 de agosto de 2012. Finalmente, en el caso de Saremar, el 2 de agosto de 2012 se aprobó una ley que requería la publicación de dicho anuncio antes del 2 de octubre de 2012. |

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| (145) | El 13 de enero de 2014, la Compagnia Laziale di Navigazione se convirtió en la nueva propietaria de Laziomar y firmó un contrato de servicio público de diez años para los enlaces con las Islas Pontinas. El 16 de julio de 2015, ATI SNAV-Rifim pasó a ser propietaria de Caremar y firmó un contrato de servicio público de nueve años. Finalmente, tras la Decisión de 2014, Saremar entró en proceso de liquidación y el contrato de servicio público para las rutas entre Cerdeña y otras islas más pequeñas se adjudicó a Delcomar en marzo de 2016. |

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| (146) | Mediante carta de 15 de julio de 2016, las autoridades italianas informaron a la Comisión de que se había completado la privatización de todas las empresas del antiguo grupo Tirrenia. El 8 de diciembre de 2016, la Comisión decidió cerrar el procedimiento de infracción. |

3.   MOTIVOS PARA INICIAR Y AMPLIAR EL PROCEDIMIENTO

3.1.   Prórroga del convenio inicial entre el Estado y Siremar

3.1.1.   Cumplimiento de la sentencia Altmark y ayudas

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| (147) | En su Decisión de 2011, la Comisión consideró, de forma preliminar, que la definición de las obligaciones de servicio público no había sido suficientemente clara y, por lo tanto, no le permitía concluir definitivamente si contenía o no un error manifiesto. En particular, aunque las autoridades italianas alegaron que los competidores de Siremar en las rutas incluidas en el ámbito de aplicación de la misión SIEG eran operadores que también prestaban servicios marítimos a cambio de una remuneración pública, sin una definición previa del nivel de los servicios requeridos, la Comisión no pudo llegar a una conclusión sobre la existencia de una necesidad real de servicio público en esas rutas. |

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| (148) | La Comisión consideró en un primer momento que el segundo criterio de la sentencia Altmark [(64)](#ntr64-L_2022097ES.01000101-E0064) se cumplía, ya que los parámetros que constituían la base del cálculo de la compensación se habían establecido de antemano y cumplían los requisitos de transparencia. En particular, la Comisión señaló que dichos parámetros se describen en el convenio inicial (para la compensación correspondiente a 2009) y en la resolución del CIPE (para la compensación concedida a partir de 2010). |

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| (149) | Sin embargo, la Comisión consideró que no se cumplía el tercer criterio Altmark y que los operadores podrían haber recibido una compensación excesiva por el desempeño de las misiones de servicio público. En particular, la Comisión expresó sus dudas sobre si la prima de riesgo del 6,5 %, que se aplica a partir de 2010, refleja un nivel de riesgo adecuado, ya que, a primera vista, Siremar no parecía asumir los riesgos que normalmente afectan al funcionamiento de estos servicios. |

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| (150) | La Comisión también concluyó de forma preliminar que no se cumplía el cuarto criterio Altmark porque la prórroga de los convenios iniciales no había sido objeto de un procedimiento de licitación. Además, la Comisión observó que ninguna de las informaciones recopiladas permitía argumentar que Siremar prestaba efectivamente los servicios en cuestión al menor coste para la colectividad. |

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| (151) | Por consiguiente, la Comisión llegó a la conclusión preliminar de que la compensación por servicio público abonada a Siremar durante el período 2009-2011 constituye ayuda estatal a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE. Además, la Comisión estimó que dicha ayuda debía considerarse como ayuda nueva. |

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| (152) | En la Decisión de 2012, la Comisión consideró que, en la medida en que todas las condiciones se habían mantenido inalteradas en 2012 y hasta la entrada en vigor del nuevo convenio, la compensación concedida a Siremar desde el 1 de enero de 2012 en virtud de la prórroga del convenio inicial constituía también una ayuda estatal. |

3.1.2.   Compatibilidad

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| (153) | En la Decisión de 2011, la Comisión consideró que, en principio, la compensación por las obligaciones de servicio público correspondiente a los años 2009-2011 quedaba fuera del ámbito de aplicación de la Decisión SIEG de 2005 [(65)](#ntr65-L_2022097ES.01000101-E0065) y del Marco SIEG de 2005 [(66)](#ntr66-L_2022097ES.01000101-E0066). Por consiguiente, la Comisión evaluó esta medida directamente con arreglo al artículo 106, apartado 2, del TFUE y expresó dudas sobre si se cumplían las condiciones de compatibilidad aplicables. |

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| (154) | En la Decisión de 2012, la Comisión observó que el 31 de enero de 2012 había entrado en vigor un nuevo paquete SIEG consistente en la Decisión SIEG de 2011 [(67)](#ntr67-L_2022097ES.01000101-E0067) y en el Marco SIEG de 2011. Sin embargo, la Comisión concluyó de forma preliminar que la compensación por las obligaciones de servicio público concedida en virtud de la prórroga del convenio inicial no podía considerarse compatible con el mercado interior y exenta del requisito de notificación con arreglo a la Decisión SIEG de 2011. |

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| (155) | La Ley de 2010 establecía la prórroga del convenio inicial desde el 30 de septiembre de 2010 hasta el final del proceso de privatización. Siremar se encontraba en crisis en el momento de la adopción de la Ley de 2010 (véase el considerando 67). Por consiguiente, la compensación recibida por la empresa desde el 1 de octubre de 2010 hasta su privatización no pudo ser evaluada sobre la base del Marco SIEG de 2011. Más bien, con arreglo al punto 9 del Marco SIEG de 2011, la Comisión llegó a la conclusión preliminar de que dicha ayuda debía evaluarse sobre la base de las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004. |

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| (156) | La Comisión constató que los criterios de compatibilidad establecidos en las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004 no se cumplían en este caso y concluyó, por lo tanto, de forma preliminar, que la compensación abonada a Siremar en situación de crisis constituía una ayuda de reestructuración incompatible. |

3.2.   Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar

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| (157) | En la Decisión de 2012, la Comisión concluyó de forma preliminar que la ayuda de salvamento se había prorrogado ilegalmente del 28 de agosto de 2011 al 18 de septiembre de 2012, y que la prórroga de la ayuda de salvamento durante este período constituía una ayuda incompatible concedida a Tirrenia y Siremar y posiblemente también a sus respectivos compradores. En particular, la Comisión señaló que Italia no había presentado un plan de reestructuración o liquidación en los seis meses siguientes al pago del primer tramo de la ayuda de salvamento a estas empresas, tal como exigen las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004. La Comisión consideró que tampoco se cumplían las condiciones para la prórroga de la ayuda de salvamento establecidas en las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004. |

3.3.   Privatización de Siremar, contragarantía y aumento del capital de CdI

3.3.1.   Privatización de Siremar

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| (158) | En la Decisión de 2011, la Comisión expresó sus dudas sobre si el procedimiento de licitación para la venta de las actividades de Siremar había sido suficientemente transparente e incondicional para garantizar que la venta se realizara a precio de mercado. |

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| (159) | En primer lugar, la Comisión señaló que, si bien la convocatoria de manifestaciones de interés se publicó en varios periódicos y sitios web, no parecía aclarar el alcance de la venta ni dar a los licitadores instrucciones claras sobre las siguientes fases del procedimiento. Además, la convocatoria no parecía incluir ningún criterio de preselección o de selección, ni otras condiciones que los licitadores tuvieran que cumplir además de la condición obligatoria de seguir prestando el servicio público. Asimismo, toda la información pertinente sobre los activos objeto del procedimiento de venta no se puso a disposición de los licitadores hasta la fase de diligencia debida. |

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| (160) | En segundo lugar, la Comisión también consideró que determinados requisitos impuestos por la privatización podían limitar el número de licitadores o influir en el precio de venta. La Comisión reiteró su práctica establecida con respecto a las ventas de activos de empresas públicas por parte del Estado o imputables a este último: consideraciones no económicas que un vendedor privado no haría, como preocupaciones relacionadas con el orden público, el empleo o el desarrollo regional, sugieren la existencia de ayuda estatal si imponen obligaciones onerosas al comprador potencial y, por lo tanto, es probable que reduzcan el precio de venta. |

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| (161) | Los procedimientos de venta de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar se basaban en el procedimiento establecido en la Ley Marzano (véase el considerando 70). Por lo tanto, la Comisión evaluó los dos procedimientos de forma conjunta. Consideró que la venta de los sectores de empresa encargados de la ejecución de los nuevos contratos obligaba a los compradores a prestar el servicio público de conformidad con las obligaciones establecidas en términos de calidad, frecuencia y tarifas establecidas en los nuevos convenios. Al imponer dichas obligaciones, la Comisión consideró que el Estado no buscaba obtener el precio más alto, sino, más bien, lograr objetivos de interés público. La Comisión consideró que era muy poco probable que un vendedor privado hubiera otorgado la misma importancia al funcionamiento ininterrumpido del servicio público. |

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| (162) | Del mismo modo, la Comisión consideró que un vendedor privado que operase en condiciones normales de mercado no habría impuesto la obligación de mantener los niveles de empleo durante dos años. |

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| (163) | Por las razones expuestas, la Comisión concluyó de forma preliminar que el proceso de privatización del sector de empresa de Siremar no era transparente ni estaba exento de condiciones que garantizaran por sí mismo que la venta se realizara a precios de mercado. Por consiguiente, la Comisión no pudo descartar que se hubiera concedido una ventaja económica a la actividad económica o al comprador. |

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| (164) | La Comisión concluyó asimismo, sobre la base de la información disponible, que cualquier ayuda que pudiera haberse concedido en el transcurso del proceso de privatización sería incompatible. |

3.3.2.   Contragarantía

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| (165) | En la Decisión de 2012, la Comisión concluyó de forma preliminar que la contragarantía concedida por Sicilia para los pagos diferidos del precio de venta del sector de empresa de Siremar podría haber constituido una ayuda concedida a CdI como prestatario y a Unicredit como primer garante. |

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| (166) | La contragarantía parecía haber permitido al CdI beneficiarse de una garantía que de otro modo no le habría sido concedida o que se habría concedido en condiciones diferentes y menos favorables. La Comisión observó que, sobre la base de la información disponible, la contragarantía no parecía haber sido remunerada. |

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| (167) | Además, la Comisión observó que la posición del contable general parecía influir en el proceso de toma de decisiones en Sicilia. Dada su participación en la gestión cotidiana de Mediterranea y su importante participación en el capital de CdI, la Comisión consideró probable que la contragarantía se concediera para favorecer a CdI en el proceso de venta, en lugar de hacerlo en condiciones de mercado. |

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| (168) | La Comisión también señaló que los documentos presentados por Italia para demostrar que la contragarantía no había producido ningún efecto no eran anteriores a la adjudicación de la licitación a CdI. Por el contrario, ambos documentos fueron emitidos después de que SNS hubiera presentado una denuncia ante la Comisión. |

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| (169) | Por último, la Comisión consideró que la contragarantía también podía conceder una ventaja económica a Unicredit, como primer garante, reduciendo los riesgos asociados a la garantía emitida por Unicredit, a menos que la contragarantía fuera remunerada mediante una prima adecuada. |

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| (170) | Sobre la base de las consideraciones anteriores, la Comisión concluyó de forma preliminar que la contragarantía podía constituir ayuda a Unicredit y CdI. |

3.3.3.   Aumento del capital de CdI

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| (171) | En la Decisión de 2012, la Comisión consideró que el aumento de capital en Mediterranea habría podido conferir una ventaja a CdI, en la medida en que Sicilia no se comportó como un inversor privado que operaba en el mercado. Además, la Comisión consideró que el aumento de capital de Mediterranea se financiaba con recursos estatales y era imputable al Estado. |

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| (172) | Por consiguiente, la Comisión consideró de forma preliminar que el aumento de capital podría haber constituido una ayuda a CdI. |

3.3.4.   Compatibilidad

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| (173) | En la Decisión de 2011, la Comisión también concluyó, sobre la base de la información disponible, que cualquier ayuda que pudiere haberse concedido durante el proceso de privatización sería incompatible. |

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| (174) | En la Decisión de 2012, la Comisión consideró, sobre la base de la información disponible, que tanto la contragarantía como el aumento de capital de CdI podrían haber constituido una ayuda de funcionamiento, que en principio es incompatible con el mercado interior. |

3.4.   Nuevo convenio entre el Estado italiano y CdI

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| (175) | En la Decisión de 2012, la Comisión concluyó de forma preliminar que la compensación concedida al comprador del sector de empresa de Siremar (CdI en ese momento) no cumplía los criterios Altmark y, por lo tanto, constituía ayuda a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE. |

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| (176) | La Comisión llegó a esta conclusión sobre la base de las siguientes consideraciones:   |  |  | | --- | --- | | a) | al menos en determinadas rutas explotadas por CdI, los competidores parecían ofrecer servicios similares; |  |  |  | | --- | --- | | b) | el cálculo de la compensación con arreglo a la resolución del CIPE parecía haber dado lugar a una compensación excesiva del operador por la prestación del servicio público por las mismas razones expuestas en la Decisión de 2011; |  |  |  | | --- | --- | | c) | aparentemente, no se había respetado el cuarto criterio de la sentencia Altmark, [(68)](#ntr68-L_2022097ES.01000101-E0068) porque el sector de empresa de Siremar con un nuevo convenio, en lugar del propio contrato de servicio público, había sido objeto de un procedimiento de licitación y no se había demostrado que este procedimiento permitiera seleccionar al licitador capaz de prestar los servicios al menor coste para la colectividad. | |

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| (177) | Por lo que se refiere a la compatibilidad de la compensación concedida a CdI, la Comisión la evaluó inicialmente con arreglo a la Decisión SIEG de 2011. Sin embargo, dado que la duración del contrato parecía superior a diez años y que la Comisión albergaba dudas sobre la proporcionalidad de la compensación, esta última concluyó de forma preliminar que la compensación no se podía considerar compatible sobre la base de la Decisión SIEG de 2011. Por consiguiente, la Comisión evaluó la compatibilidad de la ayuda con arreglo al Marco SIEG de 2011 y concluyó que existían dudas en cuanto al cumplimiento de todas las condiciones de compatibilidad establecidas en ese marco. |

3.5.   Prioridad en la asignación de los puntos de amarre

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| (178) | En la Decisión de 2011 la Comisión concluyó de forma preliminar que, en la medida en que la prioridad en la asignación de puntos de amarre no comporta remuneración, la medida constituye una ventaja normativa que no implica ninguna transferencia de recursos estatales y, por lo tanto, no puede considerarse como una ayuda estatal. Si se remuneraba la prioridad en la asignación de los puntos de amarre, la Comisión consideró que, en la medida en que Siremar presta un verdadero servicio de interés económico general y solo se concedía la prioridad para las rutas cubiertas por dicho SIEG, dicha asignación no implicaría una ventaja económica adicional, ya que sería inherente a la prestación del SIEG. |

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| (179) | Puesto que había planteado dudas sobre la legitimidad de la misión SIEG, la Comisión no pudo llegar a una conclusión sobre la compatibilidad de la medida en caso de que se considerara esta como una ayuda. |

3.6.   Medidas establecidas por la Ley de 2010

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| (180) | En la Decisión de 2011, la Comisión concluyó de forma preliminar que las medidas previstas en la Ley de 2010 constituían ayuda estatal en favor de las empresas del antiguo grupo Tirrenia, entre ellas Siremar. Eran las siguientes: 1) la posibilidad de utilizar con fines de liquidez los fondos previstos para la modernización de los buques, 2) las exenciones fiscales relacionadas con el procedimiento de privatización, 3) la posibilidad de utilizar los recursos del FAS. De hecho, la Comisión señaló que todas las medidas anteriormente mencionadas permitían a las empresas del antiguo Grupo Tirrenia evitar costes que normalmente tendrían que contraerse con sus propios recursos financieros. Como consecuencia de ello, estas empresas han podido mejorar su situación financiera general. |

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| (181) | La Comisión también concluyó de forma preliminar que estas medidas podían constituir ayudas al funcionamiento que redujeran los costes que Siremar y las demás empresas del antiguo grupo Tirrenia tendrían que soportar de forma autónoma y que, por lo tanto, dichas medidas debían considerarse incompatibles con el mercado interior. |

4.   OBSERVACIONES DE ITALIA

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| (182) | A raíz de las decisiones de 2011 y 2012, Italia envió varias cartas y documentos relativos a todas las medidas evaluadas en la presente Decisión. En esta sección se resumen los principales argumentos y contribuciones presentados [(69)](#ntr69-L_2022097ES.01000101-E0069). |

4.1.   Acerca de las obligaciones de servicio público y el entorno competitivo

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| (183) | Italia facilitó una lista de las rutas explotadas por Siremar sujetas a obligaciones de servicio público, incluidas las frecuencias estacionales y horarias, el entorno competitivo y las razones que llevaron a la imposición de obligaciones de servicio público. |

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| (184) | Por lo que se refiere a la existencia de un verdadero servicio de interés económico general, Italia señaló que las obligaciones de servicio público que impuso a Siremar y posteriormente a CdI garantizan, en términos de regularidad, continuidad y calidad, un servicio satisfactorio que comunica Sicilia con sus islas menores. Este servicio contribuye al desarrollo económico de estas islas, garantizando al mismo tiempo que se satisfagan las necesidades esenciales de movilidad de las comunidades insulares y que se respete el derecho constitucional a la continuidad territorial. En este contexto, Italia señaló que las obligaciones de servicio público están plenamente en consonancia con los objetivos de los artículos 174 y siguientes del TFUE y de la Declaración n.o 30 sobre las regiones insulares (aneja al Acta final del Tratado de Ámsterdam). Italia hace referencia también a la jurisprudencia del Tribunal de Justicia de la Unión Europea (en lo sucesivo, «Tribunal de Justicia») que confirma que el objetivo de garantizar la suficiencia de servicios regulares de transporte marítimo con destino u origen en islas y entre islas, responde a un interés público legítimo [(70)](#ntr70-L_2022097ES.01000101-E0070). |

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| (185) | En particular, Italia subrayó que las condiciones estructurales en todas estas rutas requieren la imposición de obligaciones de servicio público para garantizar la continuidad territorial. Las cinco agrupaciones de rutas mencionadas en el considerando 41 se consideran «zonas marítimas metropolitanas»: la población de todas las islas afectadas depende de la principal isla de Sicilia para la prestación de servicios esenciales y el empleo. Al mismo tiempo, la actividad turística solo es pertinente en la temporada alta. Como consecuencia de ello, las compañías navieras solo tienen interés comercial en explotar estas rutas en temporada alta. En la temporada baja, la demanda de turistas casi desaparece, en la medida en que es imposible gestionar eficazmente cualquiera de estas rutas con la regularidad y frecuencia necesarias para satisfacer la demanda de los usuarios. |

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| (186) | En este contexto, tanto Siremar como otros operadores, seleccionados por Sicilia mediante licitaciones públicas, recibieron obligaciones de servicio público para garantizar enlaces fiables y estables entre estas islas y entre ellas y Sicilia. Los operadores no subvencionados no podrían garantizar la continuidad territorial, ya que solo operarían estas rutas en temporada alta. Italia también señaló que los buques explotados por CdI y posteriormente por SNS atracan con frecuencia a las islas por la noche, con costes más elevados, con el fin de proporcionar la primera conexión por la mañana a los residentes que viajan por motivos educativos o laborales, así como de proporcionar enlaces en caso de emergencia médica. |

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| (187) | Italia también alegó que los servicios prestados por empresas sujetas a obligaciones de servicio público y aquellos prestados por empresas con carácter comercial no serían plenamente comparables. En particular, solo los primeros garantizan la regularidad, la continuidad y la calidad de los servicios prestados en virtud de las obligaciones claras establecidas en los convenios, mientras que los operadores privados dependen únicamente del cálculo de la rentabilidad de la inversión. A este respecto, Italia facilitó el ejemplo de la ruta La Maddalena – Palau, explotada por Enermar con carácter comercial, cuya explotación se interrumpió sin previo aviso. Al contrario, Saremar, que explotaba dicha ruta en virtud de un contrato de servicio público, estaba obligada a continuar el servicio y a garantizar efectivamente la continuidad territorial de manera efectiva. |

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| (188) | Por último, Italia señaló que, en la Decisión de 2004 [(71)](#ntr71-L_2022097ES.01000101-E0071), la Comisión ya había establecido que, de los cinco grupos de rutas explotados por Siremar, ningún otro operador privado podía satisfacer las necesidades de servicio público, en particular en términos de continuidad del servicio a lo largo del año y del tipo de buques que debían utilizarse. Por lo tanto, la compensación pública era necesaria para hacer frente a una clara deficiencia del mercado. A continuación, Italia explicó que esta situación no cambió en los años siguientes. |

4.2.   Acerca de la posible prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar

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| (189) | Las autoridades italianas recuerdan que, mediante carta de 16 de mayo de 2011, informaron a la Comisión de que Tirrenia y Siremar en AS reembolsarían los préstamos garantizados por el Estado después de la venta de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar, utilizando los ingresos de ambas ventas, ya que había una administración extraordinaria y un comisario especial encargado de ambas empresas. Teniendo en cuenta que ambos procedimientos de venta estaban en curso en la primavera de 2011 y que CIN firmó el contrato de venta del sector de empresa de Tirrenia el 25 de julio de 2011, tanto las autoridades italianas como Siremar en AS confiaron en que la ayuda pudiera reembolsarse antes del 28 de agosto de 2011. |

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| (190) | Sin embargo, acontecimientos posteriores han retrasado inesperadamente la finalización de la venta de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar. En particular, la cesión del sector de empresa de Tirrenia se retrasó debido a la necesidad de obtener la aprobación de la concentración por parte de la Comisión (véase el considerando 65), mientras que la venta del sector de empresa de Siremar se retrasó debido a las repeticiones del procedimiento y a los correspondientes litigios descritos en la sección 2.3.3.2. Por consiguiente, Siremar en AS tuvo que seguir operando sus servicios durante un período considerablemente más largo del previsto, asumiendo los costes correspondientes. Según las autoridades italianas, el plan de liquidación de Siremar estaba disponible en el sitio web de la administración extraordinaria antes de que expirara el plazo de seis meses establecido en las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004. Italia añade que la Comisión siempre estuvo al día en cuanto al avance del proceso de privatización. El importe total adeudado por Tirrenia y Siremar, incluidos los intereses, solo fue reembolsado al Estado 48 días después de la recepción por la administración extraordinaria del primer pago resultante de la venta de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar. |

4.3.   Acerca de la privatización del sector de empresa de Siremar

4.3.1.   Acerca del carácter transparente y no discriminatorio del procedimiento

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| (191) | Italia subrayó que la privatización del sector de empresa de Siremar se llevó a cabo de conformidad con la Ley Marzano. Si bien la ley en cuestión se refiere a la posibilidad de identificar al comprador mediante negociación privada, no excluye el cumplimiento de los principios de apertura, transparencia y no discriminación. Además, en este caso, existen otras disposiciones legales que exigen explícitamente la organización de procedimientos competitivos transparentes y no discriminatorios. En particular, el artículo 1, apartado 5 bis, letra b), de la Ley de 2010 obliga al comisario especial a incluir, «en el plazo mínimo previsto por el procedimiento de administración extraordinaria y, en todo caso, de conformidad con este, el procedimiento competitivo, transparente y no discriminatorio exigido para las cesiones (...)». |

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| (192) | Según Italia, el procedimiento establecido en el artículo 4, apartado 4 quater, del Decreto-Ley n.o 347/2003 ofrecía garantías adicionales en términos de transparencia y no discriminación, en particular teniendo en cuenta la evaluación por un experto independiente del precio de mercado del sector de empresa en venta y la selección de la oferta más ventajosa en términos de precio. |

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| (193) | Italia alegó que todas las partes tenían las mismas condiciones de acceso a toda la información necesaria para identificar claramente los activos ofrecidos a la venta y preparar una oferta. En efecto, la venta concernía los activos y las relaciones contractuales inherentes a la prestación del servicio público, como sigue:   |  |  | | --- | --- | | a) | buques y equipos auxiliares necesarios para el cumplimiento de las obligaciones de servicio público; |  |  |  | | --- | --- | | b) | contratos con proveedores estratégicos para los servicios necesarios para la normal realización de la actividad; |  |  |  | | --- | --- | | c) | la obligación legal de presentar una propuesta de redistribución del personal necesario para la gestión de la actividad sobre la base de las tablas de tripulación de la flota (véase el considerando 195 para más detalles). | |

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| (194) | Italia aclaró también que uno de los buques de Siremar, no necesario para la prestación del servicio público, fue vendido en el marco de un procedimiento de venta separado. Por lo tanto, este buque no estaba incluido en la licitación para el sector de empresa de Siremar (véase también la sección 4.3.2). |

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| (195) | Por lo que se refiere específicamente a la obligación de mantener los niveles de empleo, Italia señaló que la venta de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar no entraba en el ámbito de aplicación del artículo 2112 del Código Civil y, por lo tanto, no hubo transferencia automática de personal (y de sus contratos) a los adjudicatarios. La única obligación legal para los adjudicatarios consistía en contratar nuevamente al personal del vendedor (sobre la base de nuevos contratos) y mantener los niveles de empleo durante dos años, como exige el artículo 63, apartado 2, del Decreto Legislativo 270/1999. Sin embargo, esto no implicaba una transferencia automática de los empleados de Siremar al comprador. Además, esta obligación se limitaba al personal que, sobre la base del primer plan industrial y de las tablas de tripulación de los buques del sector de empresa, se consideraba esencial para la continuidad del servicio público. |

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| (196) | Italia alegó que esta obligación, impuesta por el Derecho nacional general y destinada a garantizar la continuidad de las actividades y la gestión del servicio público, sería impuesta en las mismas condiciones por un vendedor privado. |

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| (197) | Después de la publicación de la convocatoria de manifestaciones de interés en italiano e inglés en el sitio web de la administración extraordinaria y en numerosos periódicos nacionales e internacionales y sitios web especializados, se recibieron cinco manifestaciones de interés (véanse los considerandos 76 y 77). Italia considera que esto demuestra que el contenido de esta convocatoria permitió identificar claramente el objeto de la venta y la naturaleza del procedimiento que debe seguirse, salvaguardando al mismo tiempo la información comercialmente sensible (principalmente para proteger los intereses de los compradores potenciales). Durante la fase de diligencia debida, se facilitó a las entidades información detallada sobre, entre otras cosas, los activos específicos en venta, el plan industrial y el proyecto del nuevo convenio (véase el considerando 77). |

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| (198) | Por consiguiente, Italia alegó que las partes interesadas en la adquisición del sector de empresa de Siremar recibieron, de manera transparente y no discriminatoria, la información necesaria para presentar una oferta de adquisición con pleno conocimiento de causa. |

4.3.2.   Acerca de la venta de los activos no incluidos en el sector de empresa de Siremar

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| (199) | Italia explicó que el comisario especial inició un procedimiento de licitación independiente, transparente y no discriminatorio para la venta de los siete buques [(72)](#ntr72-L_2022097ES.01000101-E0072) que Tirrenia y Siremar no necesitaban para prestar el servicio público. El 10 de diciembre de 2010, se publicaron convocatorias de manifestaciones de interés a este propósito en periódicos y en algunas publicaciones especializadas, nacionales e internacionales. Al término del plazo, que se prorrogó dos veces, solo se habían recibido ofertas de desguace de los seis transbordadores rápidos, entre ellos el de Siremar. Los intentos de obtener ofertas más elevadas fueron infructuosos. Los días 12 y 14 de julio de 2011, previa autorización del Ministerio de Desarrollo Económico, el comisario especial vendió los buques al licitador que había presentado la oferta más elevada. |

4.3.3.   Acerca de la asociación de los activos del sector de empresa de Siremar en virtud de un nuevo convenio

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| (200) | En primer lugar, Italia alegó que la decisión de privatizar los activos junto con la atribución de las obligaciones de servicio público se tomó para facilitar la liberalización del sector del cabotaje marítimo. Italia alega que esta estrategia se debatió previamente con la Comisión (véase la sección 2.4) y que, en principio, se consideró que estaba en consonancia con el Reglamento sobre el cabotaje marítimo. |

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| (201) | Además, Italia consideró que, debido a las condiciones que había en el mercado en ese momento, era adecuado asociar los activos de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar a los nuevos convenios. En un momento de recesión y de disminución significativa de la demanda en el sector del transporte marítimo, la posibilidad de utilizar la flota de estos sectores de empresa para explotar las rutas de servicio público previstas en los nuevos convenios era una oportunidad comercial rentable en lugar de un factor que hubiera reducido el valor de mercado de dichos sectores de empresa. Por lo tanto, Italia consideró que esto no podía haber tenido un impacto negativo en el proceso de licitación y en el precio resultante. |

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| (202) | A este respecto, Italia recordó que, de los siete buques no incluidos en el ámbito del sector de empresa de Tirrenia y Siremar (véase el considerando 199), fue necesario vender seis para desguace. Italia considera que, a la luz de la complejidad del mercado del transporte marítimo y de la recesión económica del momento, era imposible obtener un precio mejor para los activos de la empresa, aunque se hubiese repetido el proceso de licitación o aunque los activos no se hubiesen vinculado con el nuevo convenio. |

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| (203) | Por último, Italia señaló que ni SNS ni otros operadores del sector disponían de flota y tripulación en consonancia con el tamaño y las especificaciones requeridas para la prestación de los servicios previstos en el nuevo convenio [(73)](#ntr73-L_2022097ES.01000101-E0073). Por lo tanto, la única manera de encomendar con éxito estos servicios era asociarlos a los activos del sector de empresa de Siremar, de modo que el operador estuviera equipado adecuadamente para cumplir sus obligaciones de servicio público. |

4.3.4.   Acerca del nombramiento de un experto independiente

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| (204) | Italia declaró que, el 16 de diciembre de 2010, se invitó a cinco grandes entidades financieras sin exposición al grupo Tirrenia a presentar ofertas para evaluar el sector de empresa de Siremar. Ninguna de las entidades invitadas presentó una oferta en el plazo establecido. |

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| (205) | Posteriormente, Banca Profilo expresó su interés por asumir la tarea de asesor independiente en las mismas condiciones que en el procedimiento de selección. Mediante Decreto de 4 de febrero de 2011, el ministro designó a Banca Profilo como experto independiente encargado de estimar el valor de mercado de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar. |

4.3.5.   Acerca de la transparencia del procedimiento

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| (206) | Italia describió el procedimiento de venta del sector de empresa de Siremar y las sentencias de los tribunales administrativos italianos (véase la sección 2.3.3.2) que confirmaron el cumplimiento de los principios generales de competitividad, transparencia y no discriminación. El procedimiento seguido fue aquel previsto en el artículo 4, apartado 4 quater, del Decreto-Ley n.o 347/2003, que permitió alcanzar plenamente los objetivos de la administración extraordinaria, incluida la obtención del precio más elevado posible. Esto se debió a determinadas medidas de salvaguardia previstas en el procedimiento, incluida, en particular, la existencia de un precio mínimo fijado por un experto independiente. Además, todas las partes interesadas recibieron rápidamente toda la información pertinente que les hubiera permitido presentar una oferta. |

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| (207) | Italia también confirmó que el criterio de adjudicación en caso de ofertas múltiples era el precio más elevado, tal como se establece en las normas específicas aplicables al procedimiento. |

4.3.6.   Acerca del primer y segundo informe Ecorys

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| (208) | Durante la investigación, se invitó a Italia a presentar observaciones (véase el considerando 13) sobre el primer informe Ecorys. Italia está de acuerdo con la conclusión de Ecorys de que ni la asociación de la privatización con la adjudicación del nuevo convenio ni las condiciones laborales habrían reducido el valor de mercado del sector de empresa de Siremar. |

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| (209) | En relación con la asociación mencionada, Italia se refirió en particular a la declaración de Ecorys de que, en el momento de la venta, la única alternativa a la venta de activos sujetos al régimen de servicio público era la liquidación del sector de empresa de Siremar. Italia reiteró también que, en un momento de crisis en el sector de los transbordadores, caracterizado por una disminución significativa de la demanda, la posibilidad de utilizar la flota de Siremar para las rutas de servicio público indicadas en el convenio era una oportunidad comercial válida y no un factor que pudiera reducir el valor de los activos. |

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| (210) | Con respecto a la condición relativa a la mano de obra, Italia destacó la conclusión de Ecorys de que no hay elementos que muestren que dicha condición tuviera un efecto significativo en el valor del sector de empresa de Siremar. Italia recordó, además, que esta condición procedía del artículo 63, apartado 2, del Decreto-Ley n.o 270/1999 y concernía únicamente a aquellos empleados necesarios para garantizar las operaciones de la actividad en cuestión de conformidad con los cuadros de dotación de personal de la flota. Los cuadros de dotación de personal de la flota: i) establecen la composición cualitativa y cuantitativa de la tripulación requerida para mantener el buque en servicio de acuerdo con las leyes de seguridad marítima; ii) se establecen mediante decreto ministerial; y iii) son elaborados por un comité que incluye, a título consultivo, a organizaciones que representan a los trabajadores y a los armadores. Además, Italia añadió que, si bien el comprador del sector de empresa de Siremar tenía que ofrecer empleo a todos los empleados necesarios para garantizar el funcionamiento del servicio público, esto se basaba en contratos de empleo diferentes de los que habían estado vigentes con anterioridad. |

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| (211) | En términos más generales, el informe Ecorys concluyó que el valor estimado del sector de empresa de Siremar podía ser aproximadamente del 4,6 % superior al valor propuesto por el experto designado por las autoridades italianas, Banca Profilo. Sin embargo, Italia consideró que esta diferencia podría explicarse porque ambos expertos debían basarse en previsiones para definir algunos parámetros técnicos y que, dada la propia naturaleza de estos, existe la posibilidad de obtener resultados diferentes. Además, Italia señaló que, debido a la presencia de dos ofertas de SNS y CdI, el precio logrado en la primera transferencia a CdI (69,15 millones EUR) era superior en 14 millones EUR al precio mínimo fijado por Banca Profilo. Las autoridades italianas también presentaron una contraevaluación, elaborada por Banca Profilo, en la que se explicaba detalladamente las diferencias con el informe Ecorys y se alegaba que las hipótesis de su experto independiente reflejaban mejor la situación en cuestión [(74)](#ntr74-L_2022097ES.01000101-E0074). |

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| (212) | Italia también señaló que la transferencia de la propiedad del sector de empresa de Siremar tuvo lugar más de dos años después de la fecha de referencia utilizada tanto por Banca Profilo como por Ecorys para su valoración. Durante ese período, el valor del sector de empresa de Siremar se depreció y las perspectivas económicas se deterioraron considerablemente. Por esta razón, Italia concluyó que no cabía duda de que, en la fecha de finalización de la venta del sector de empresa de Siremar a CdI, las condiciones de precio convenidas por las partes reflejaban plenamente el valor de mercado de los activos. |

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| (213) | Por último, para las fases posteriores del proceso de privatización, Italia también presentó el segundo informe Ecorys, que confirmó que la oferta de SNS se ajustaba al valor de mercado del sector de empresa de Siremar, actualizado más de cuatro años después de su primera evaluación (véase la sección 2.3.3.7). Por consiguiente, Italia considera que, aunque la venta final a SNS en 2016 tuviera lugar a un precio inferior al precio previsto en el primer informe Ecorys que, debido a algunas normas de procedimiento, la administración extraordinaria tuvo que ignorar, el precio acordado por las partes reflejaba plenamente el valor de mercado de los activos vendidos. |

4.3.7.   Acerca de los litigios nacionales y la adjudicación final a SNS

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| (214) | Italia envió varias cartas en las que informaba a la Comisión de las distintas fases del litigio nacional ante los tribunales administrativos y de la adjudicación final del sector de empresa de Siremar a SNS (véanse los considerandos 93 a 100). |

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| (215) | Las autoridades italianas afirmaron que esta evolución no pone en tela de juicio el carácter abierto, transparente y no discriminatorio del procedimiento de venta del sector de empresa de Siremar (véase la sección 4.3.5). De hecho, Italia señaló que las sentencias de los tribunales administrativos italianos no identificaban ninguna deficiencia en el diseño y la ejecución del procedimiento de venta, sino que se centraban más bien en un elemento de la oferta de CdI, a saber, la contragarantía que Siremar en AS no conocía en el momento de la adjudicación inicial de la licitación a CdI [(75)](#ntr75-L_2022097ES.01000101-E0075). Por consiguiente, Italia concluyó que, en aplicación de la Decisión 592/14, tal como se describe en los considerandos 96 a 100, el procedimiento había concluido correctamente con la adjudicación del sector de empresa a SNS. |

4.4.   Acerca de la conformidad del nuevo convenio con los criterios Altmark

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| (216) | Italia reiteró que había notificado compensaciones por servicio público con arreglo al nuevo convenio únicamente por razones de seguridad jurídica, ya que consideraba que esta medida no constituía ayuda estatal (véase el considerando 9). En particular, las autoridades italianas alegaron que se cumplían los cuatro criterios Altmark por las siguientes razones:   |  |  | | --- | --- | | a) | los servicios de transporte marítimo, tal como los definen las autoridades italianas en el nuevo convenio, son esenciales para el desarrollo económico de las islas menores de Sicilia y, al mismo tiempo, satisfacen las necesidades esenciales de transporte de las comunidades de estas islas, garantizando el respeto del derecho a la continuidad territorial consagrado en la Constitución italiana. El nuevo convenio define claramente los servicios, los buques, los horarios y los vínculos tarifarios. Por consiguiente, Italia alegó que las obligaciones de servicio público estaban claramente definidas y que se cumplía el primer criterio Altmark; |  |  |  | | --- | --- | | b) | los parámetros sobre cuya base se calculó la compensación se explican detalladamente en la resolución del CIPE y se aplican en el nuevo convenio (y en sus anexos correspondientes), mientras que los importes máximos de compensación se fijaron en la Ley de 2009. Por lo tanto, Italia alegó que estos parámetros se han establecido previamente de manera objetiva y transparente y que se cumple el segundo criterio Altmark; |  |  |  | | --- | --- | | c) | el operador del servicio público asume todos los riesgos de la actividad (véase también la sección 4.5) en vista de una subvención de importe fijo, que no garantiza la plena cobertura de sus costes. Por este motivo, Italia alegó que la prima de riesgo del 6,5 % está en consonancia con el tipo de actividad y no da lugar a una compensación excesiva del servicio público. Por ello, se considera que se cumple también el tercer criterio Altmark; |  |  |  | | --- | --- | | d) | el sector de empresa de Siremar se privatizó mediante un procedimiento de licitación abierto, que cubría los activos necesarios para prestar el servicio público asociado al nuevo convenio por un período de doce años para la gestión de dicho servicio. Dado que el procedimiento de licitación respetaba los principios de competencia, transparencia y no discriminación y que el criterio de adjudicación era el precio más elevado, Italia alegó que también se cumplía el cuarto criterio Altmark. | |

4.5.   Acerca de la prima de riesgo del 6,5 % establecida por la resolución del CIPE a partir de 2010

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| (217) | Italia señaló que, independientemente de la prima de riesgo del 6,5 % establecida por ley en 2009, la compensación abonada a Siremar fue de 67 009 405 EUR. A partir de 2010, el importe máximo de la compensación se fijó en 55 694 895 EUR, lo que, como señaló Italia, corresponde a una disminución del 25 %. Esto habría obligado al comprador del sector de empresa de Siremar a operar mucho más eficientemente con miras a llevar los costes a los límites del importe de la subvención, fijado para todo el período del nuevo convenio y compensar la inflación en el futuro durante un largo período. |

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| (218) | Italia señaló que la resolución del CIPE prevé la aplicación de una prima de riesgo del 6,5 % para determinar el rendimiento del capital sobre la base del coste medio ponderado del capital (CMPC) (véanse los considerandos 49 a 58). Sin embargo, dado que la Ley de 2009 prevé un límite máximo para el importe de la compensación, se ha simplificado el cálculo aplicando el 6,5 % como tasa a tanto alzado de rendimiento del capital para comprobar cualquier compensación excesiva. Se utilizó este enfoque también en el nuevo convenio. Las autoridades italianas también han demostrado que la aplicación de toda la metodología establecida en la resolución del CIPE podría haber dado lugar a un rendimiento del capital que, al menos en algunos años, habría superado el 6,5 % (resultó ser del 8,87 %). Por este motivo, Italia considera que su enfoque simplificado es prudente y no da lugar a una compensación en favor de Siremar, CdI o SNS superior a la prevista en la resolución del CIPE. |

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| (219) | Italia también declaró que un rendimiento del capital del 6,5 % refleja el riesgo inherente a las actividades encomendadas a Siremar, CdI o SNS, y que no hubo compensación excesiva del servicio público, por las siguientes razones:   |  |  | | --- | --- | | a) | algunos estudios macroeconómicos conceden una prima de riesgo a determinados países o zonas geográficas. Según la IESE Business School, el 6,4 % es un riesgo país adecuado para Italia. Por consiguiente, una prima de riesgo del 6,5 % constituiría un rendimiento razonable; |  |  |  | | --- | --- | | b) | el nuevo convenio prevé que el nivel de compensación se calcule sobre la base de la evolución prevista de los ingresos y costes. A diferencia de los convenios iniciales, el nuevo no prevé ninguna compensación completa y automática por el aumento de los costes de explotación (mano de obra, combustible, alquiler, etc.). Los riesgos asociados a posibles aumentos de los costes, así como aquellos asociados a los volúmenes de tráfico, correrán enteramente a cargo del operador. En particular, el operador asume todos los riesgos asociados al servicio y no tiene garantía alguna de que sea compensado a un nivel suficiente para cubrir los costes incurridos. Esto seguiría siendo así incluso teniendo en cuenta los artículos 8 y 9 del nuevo convenio, ya que el operador sigue estando expuesto al riesgo de retrasos entre el momento de la aparición de tales desequilibrios y el momento en que pueden realizarse ajustes. Italia presentó las cuentas anuales de cada ruta de CdI y SNS correspondientes al período comprendido entre agosto de 2012 y diciembre de 2019 para demostrar que no había casos de compensación excesiva con arreglo al nuevo convenio [(76)](#ntr76-L_2022097ES.01000101-E0076); |  |  |  | | --- | --- | | c) | durante el primer año de prórroga del convenio inicial, es decir, en 2009, se aplicó la metodología de cálculo de la compensación prevista en el convenio inicial, que no preveía una prima de riesgo del 6,5 %. Para ese año, Italia facilitó el cálculo detallado de la compensación en virtud del convenio inicial, así como las cuentas de cada ruta. Para los años siguientes a la prórroga, es decir, 2010, 2011 y el período comprendido entre enero y julio de 2012, se utilizó la metodología del CIPE de una prima de riesgo del 6,5 % para calcular la compensación. Sin embargo, Italia señaló que, además de la metodología del CIPE, el límite máximo de 55,7 millones EUR fijado por la Ley de 2009 también se aplica desde 2010. Este importe sería insuficiente para apoyar las obligaciones de servicio público de Siremar debido al aumento de los costes de combustible, a la evolución del tipo de cambio EUR/USD, así como a la crisis en el sector del transporte marítimo de mercancías y pasajeros en Italia. En apoyo de esta alegación, Italia facilitó los informes trimestrales de la administración extraordinaria, las cuentas de cada ruta de 2010 y las cartas enviadas por Tirrenia y Siremar en AS en abril y junio de 2010 al Ministerio de Transportes [(77)](#ntr77-L_2022097ES.01000101-E0077). | |

4.6.   Acerca de la conformidad del nuevo convenio con la Decisión SIEG de 2011

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| (220) | Aunque Italia consideraba que la compensación por servicio público abonada en virtud del nuevo convenio no constituía ayuda estatal, explicó por qué esta medida estaría en consonancia con la Decisión SIEG de 2011, si se tratara de una ayuda. |

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| (221) | Italia recordó que la valoración de la Comisión sobre la verdadera naturaleza de un SIEG se limita a la comprobación de si el Estado miembro ha cometido un error manifiesto a la hora de definir un servicio como SIEG. En este contexto, Italia describió las rutas especificadas en el nuevo convenio y subrayó que todas las rutas requieren la imposición de obligaciones de servicio público a Siremar, así como a otros operadores. |

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| (222) | Para justificar la alegación de que el umbral de 300 000 pasajeros establecido en el artículo 2, apartado 1, letra d), de la Decisión SIEG de 2011 no se incumplió en las rutas explotadas por Siremar, Italia también facilitó datos anuales sobre el tráfico de pasajeros correspondientes a los dos ejercicios económicos anteriores a aquellos en los que se asignó el SIEG (es decir, 2010 y 2011). Además, Italia alegó que se cumple el artículo 2, apartado 4, de la Decisión SIEG de 2011, ya que se cumple plenamente los requisitos del Reglamento sobre el cabotaje marítimo mediante la venta del sector de empresa de Siremar a través de un procedimiento de licitación competitivo, transparente y no discriminatorio. |

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| (223) | Italia declaró que el nuevo convenio cumple todas las condiciones aplicables a los actos de atribución, tal como se especifica en los artículos 4 a 9 de la Decisión SIEG de 2011. En particular, este convenio establece detalladamente las obligaciones de servicio público, su duración, el mecanismo de compensación (sobre la base de la resolución del CIPE y la Ley de 2009) y los mecanismos para evitar y recuperar cualquier compensación excesiva. Por último, Italia indicó las medidas adoptadas para garantizar el estricto cumplimiento de los términos del nuevo convenio, que incluyen un sistema de recursos y sanciones pecuniarias. |

4.7.   Contragarantía

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| (224) | Italia alegó que los documentos presentados por los licitadores potenciales durante el procedimiento de licitación no habían aportado ninguna indicación de la existencia de una contragarantía en apoyo de la carta de garantía de Unicredit adjunta a la oferta ganadora de CdI. En efecto, dicha carta no mencionaba, ni explícita ni implícitamente, la existencia de una contragarantía emitida por Sicilia. Según las autoridades italianas, la licitación se adjudicó a CdI porque su oferta cumplía todos los requisitos necesarios y era más ventajosa que aquella presentada por SNS. Italia también alegó que la ausencia de vínculo entre la carta de garantía y la contragarantía de Sicilia se ve confirmada por el hecho de que, incluso después de que Sicilia retirara esta contragarantía [(78)](#ntr78-L_2022097ES.01000101-E0078), Unicredit confirmó su compromiso con CdI y emitió posteriormente una garantía bancaria en favor de Siremar en AS para cubrir los plazos adeudados por CdI [(79)](#ntr79-L_2022097ES.01000101-E0079). |

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| (225) | Italia también presentó determinados documentos que demostraban que la contragarantía no confería una ventaja selectiva a CdI y, por lo tanto, no podía considerarse como ayuda estatal. En particular, Italia presentó: un acuerdo de garantía firmado el 20 de noviembre de 2011 por los accionistas de CdI (Sicilia, Mediterranea, Isolemar S.r.l., Lauro.it S.p.A. y Davimar), mediante el cual acordaron dar una contragarantía conjuntamente a la oferta ganadora de CdI de hasta 35 millones EUR, y una carta de Unicredit de 10 de mayo de 2012 en la que informaba a CdI de las condiciones aplicables a su garantía, en particular una prima de al menos 250 puntos básicos por año Según Italia, la contragarantía no pone de relieve la presencia de ningún elemento de ayuda estatal, ya que su ulterior retiro no tuvo ningún efecto en los derechos y obligaciones del beneficiario. Estos documentos demostrarían, por lo tanto, que en este caso no se cumplen las condiciones que llevan a concluir que una garantía contiene elementos de ayuda (previstos por la jurisprudencia consolidada de la Unión). |

4.8.   Acerca de la prioridad en la asignación de los puntos de amarre

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| (226) | Las autoridades italianas alegaron que las prioridades en la asignación de puntos de amarre no implicaban ninguna pérdida de recursos estatales. De hecho, todos los operadores de transbordadores pagan tasas ordinarias a las autoridades portuarias responsables de los atraques, independientemente de que presten o no servicios públicos. Esta prioridad en la asignación de los puntos de amarre solo es aplicable a las rutas de servicio público y fue aceptada por la Comisión mediante escrito de 24 de enero de 2011, enviado en el marco del procedimiento de infracción n.o 2007/4609 (véase la sección 2.4), en la medida en que solo se aplicaba a dichas rutas. Italia también aclaró que Siremar y sus sucesores no han pagado, ni pagan, ninguna tasa adicional por la prioridad en la asignación de puntos de amarre. |

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| (227) | Dado que no se adeuda ningún alquiler por la prioridad en la asignación de puntos de amarre, la ventaja monetaria concedida a Siremar y a sus sucesores, según el caso, no puede cuantificarse. Sin embargo, Italia señaló que, en la práctica, la prioridad en la asignación de puntos de amarre solo se aplicaría en circunstancias limitadas, debido al tamaño de la mayoría de los puertos y a la planificación previa de las llegadas y salidas. |

4.9.   Acerca de las medidas recogidas en la Ley de 2010

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| (228) | Italia no ha negado que Siremar hubiera recibido alrededor de 7 215 800 EUR para realizar las mejoras necesarias en los buques a fin de cumplir con las normas internacionales de seguridad (denominado también «fondos de Estocolmo»). Sin embargo, las autoridades italianas confirmaron que estos fondos se utilizaban exclusivamente para cubrir los costes de renovación de los buques. De hecho, cuando se firmó el contrato de compraventa con CdI el 21 de octubre de 2011, solo quedaban 580 600 EUR. Siremar en AS gastó los fondos restantes en enero de 2012, antes de la transferencia del sector de empresa a CdI, para llevar a cabo algunas obras obligatorias en el buque Martini que estaban pendientes. |

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| (229) | Por lo que se refiere a las exenciones fiscales sobre actos y transacciones relacionadas con la privatización del sector de empresa de Siremar previstas en la Ley de 2010, las autoridades italianas señalaron en primer lugar que, para las empresas que participan en procedimientos de insolvencia, los ingresos se determinan con arreglo a las normas establecidas en el artículo 183 del Texto único de los impuestos sobre la renta (TUIR). Según esa disposición, las ganancias de una empresa desde que se inician hasta que concluyen los procedimientos concursales están constituidas por la diferencia entre los activos de la empresa al comienzo de los procedimientos y los activos residuales al final. Por lo tanto, antes de que finalice el procedimiento, no es posible predecir si habrá obligaciones fiscales, y menos aún su posible volumen. |

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| (230) | Por lo que se refiere a los impuestos indirectos, las autoridades italianas subrayaron que las exenciones previstas se concibieron para lograr una simplificación administrativa. Desde el punto de vista fiscal, sus efectos pueden considerarse insignificantes y de poca repercusión con respecto a los impuestos recaudados sobre documentos sujetos a tipos fijos. Más concretamente, se refiere a la tasa de registro (168 EUR por documento), los derechos de inscripción en el registro de propiedades e hipotecas (168 EUR cada una) y derecho de timbre (14,62 EUR por cuatro páginas). Las autoridades italianas también señalaron que, de conformidad con el artículo 9 de los contratos de compraventa del sector de empresa de Siremar en AS a CdI y SNS, todos los gastos y tasas corren a cargo del comprador. En el caso de la trasferencia a SNS, las autoridades italianas aclararon que se aplicaba una tasa fija de registro de 245 EUR de conformidad con el artículo 19 ter, apartado 24 bis, del Decreto-Ley n.o 135/2009. |

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| (231) | Por último, las autoridades italianas aclararon que los recursos del FAS no se utilizaron para proporcionar una compensación adicional a las empresas del antiguo grupo Tirrenia, incluida Siremar. Por el contrario, dichos recursos se ofrecieron para complementar los créditos presupuestarios previstos para el pago de las compensaciones por servicio público del antiguo grupo Tirrenia en caso de que resultaran insuficientes. Italia observa que el artículo 1, apartado 5 ter, del Decreto-Ley n.o 125/2010 permitió a las regiones hacer uso de los recursos del FAS para financiar en parte la compensación periódica por servicio público y, de ese modo, garantizar la continuidad de los servicios públicos marítimos. Además, las autoridades italianas aclararon que, de conformidad con el artículo 26 del Decreto-Ley n.o 185/2008, para cada uno de los años 2009, 2010 y 2011, se asignaron 65 millones EUR al grupo Tirrenia y que posteriormente se retiraron 195 millones EUR de los recursos del FAS. Estos fondos se transfirieron después a la cuenta del Ministerio de Transportes para el pago de compensaciones por servicio público a las empresas del antiguo grupo Tirrenia (Tirrenia, Siremar, Caremar, Toremar y Saremar). Por consiguiente, dicha medida solo se refiere a una asignación de recursos en el presupuesto del Estado italiano para el pago de compensaciones por servicio público. |

4.10.   Acerca de la ausencia de continuidad económica entre Siremar en AS y CdI

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| (232) | Italia alegó que no había continuidad económica entre Siremar en AS y CdI, por las siguientes razones:   |  |  | | --- | --- | | a) | alcance de la venta: Italia subrayó que Siremar debía venderse inicialmente como parte de Tirrenia (de la que era filial). Tras el fracaso de este intento de privatización, se organizaron licitaciones separadas para una parte de los activos de la empresa respectiva (es decir, Tirrenia y Siremar, respectivamente). La venta también cubría un número limitado de activos de Siremar en AS que anteriormente carecían de autonomía funcional; Los activos accesorios para el servicio público, incluido un transbordador rápido, se vendieron por separado. Además, las deudas contraídas por Siremar en AS antes de la transferencia no fueron asumidas por CIN; |  |  |  | | --- | --- | | b) | actividad económica: las condiciones para el cumplimiento de las obligaciones de servicio público establecidas por el nuevo convenio para CdI difieren sustancialmente de las contenidas en el convenio inicial para Siremar. En particular, el nuevo convenio contiene diferentes criterios para el cálculo de la compensación por servicio público (que prevé un importe máximo, en lugar de cubrir íntegramente las pérdidas vinculadas a dicho servicio) e introduce una mayor flexibilidad en las tarifas ofrecidas a los pasajeros (con límites de precios en lugar de precios fijos). Italia consideró que el cambio sustancial en el método de compensación obligaba necesariamente al comprador a aumentar la eficiencia organizativa del sector de empresa de Siremar. Por último, Italia declaró que la transferencia de un propietario público a un propietario privado implica un cambio drástico en la organización y gestión del sector de empresa; |  |  |  | | --- | --- | | c) | discontinuidad de la mano de obra: Italia señaló que no se había producido una transferencia automática del personal al comprador. Siremar en AS habría despedido a sus empleados y sería plenamente responsable de cualquier coste residual relacionado con los antiguos contratos. El comprador habría hecho entonces nuevas ofertas de empleo a los antiguos empleados, cuando se consideraran necesarias para el ejercicio de la actividad transferida (es decir, para el servicio público). Los antiguos empleados que aceptaron la oferta fueron contratados con un contrato nuevo y diferente; |  |  |  | | --- | --- | | d) | precios de transferencia: Italia explicó que un experto independiente había estimado el valor del sector de empresa de Siremar y que el procedimiento de licitación para la venta de Siremar incluía el precio más elevado como único criterio para la selección de las ofertas; |  |  |  | | --- | --- | | e) | diferente participación del vendedor y del comprador: Italia señaló que el comprador fue identificado mediante un procedimiento de licitación abierto al mayor número posible de licitadores potenciales. Este procedimiento se basó en los principios de competencia, transparencia y no discriminación, y la adjudicación se realizó utilizando el criterio del precio más elevado. Además, Italia hizo referencia a la Decisión n.o 23023 de la AGCM, de 23 de noviembre de 2011 [(80)](#ntr80-L_2022097ES.01000101-E0080), según la cual ningún accionista único de Mediterranea podría haber ejercido un control exclusivo o conjunto sobre el sector de empresa de Siremar. De hecho, el licitador seleccionado, CdI, era propiedad al 65,32 % de Mediterranea. Sicilia poseía el 43,02 % de las acciones de Mediterranea, mientras que las restantes eran propiedad conjunta de tres entidades privadas. Estas entidades poseían acciones ordinarias o «acciones de tipo A», mientras que Sicilia poseía «acciones de tipo B», con ciertas limitaciones. Por ejemplo, Sicilia no podía nombrar a ninguno de sus funcionarios o administradores en el consejo de administración de la empresa. Por estas razones, Italia alegó que la identidad del vendedor era diferente de aquella del comprador y que el vendedor no estaba en condiciones de ejercer ningún tipo de control ni siquiera una mera implicación en la gestión del sector de empresa de Siremar después de su transferencia a CdI; |  |  |  | | --- | --- | | f) | lógica económica de la operación: la operación tenía por objeto liberalizar las actividades de transporte marítimo gestionadas por Siremar con el fin de respetar el Reglamento sobre el cabotaje marítimo. Además, la primera convocatoria de manifestaciones de interés se publicó el 4 de octubre de 2010, mientras que el procedimiento de investigación formal de la Comisión se inició mediante Decisión de 5 de octubre de 2011. Por consiguiente, Italia alegó que la operación no tenía por objeto eludir las normas sobre ayudas estatales, sino que se planificó y llevó a cabo con la intención de llevar a cabo un gran proyecto industrial. | |

5.   OBSERVACIONES PRESENTADAS POR LOS INTERESADOS

5.1.   Observaciones presentadas por Siremar en régimen de administración extraordinaria

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| (233) | Siremar en AS presentó un conjunto principal de observaciones y, posteriormente, una carta. Posteriormente, también tuvieron lugar intercambios informales, con pleno conocimiento de las autoridades italianas, para aclarar algunas cuestiones pendientes u obtener información específica. Además, en la mayoría de las medidas de ayuda, Siremar en AS presentó argumentos muy similares a los aducidos por Italia. |

5.1.1.   Acerca del procedimiento de infracción n.o 2007/4609

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| (234) | En su respuesta a la Decisión de 2012, recibida el 19 de abril de 2013, Siremar en AS hizo referencia por primera vez al procedimiento de infracción n.o 2007/4609 de la Comisión relativo a la aplicación incorrecta del Reglamento sobre el cabotaje marítimo (véase también la sección 2.4). En este contexto, Siremar en AS se refirió a la carta de 21 de diciembre de 2009 (véase el considerando 136) relativa a la intención de Italia de organizar procedimientos de licitación no relativos a los contratos de servicio público, sino a la venta de las compañías navieras titulares de tales contratos. Dicha carta precisa que, habida cuenta de la profunda y prevista revisión del sector y teniendo en cuenta el impacto social de las ofertas, si no se incluían las empresas, los procedimientos elegidos eran aceptables, en principio y con carácter excepcional, para garantizar el respeto del principio de no discriminación entre armadores comunitarios. |

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| (235) | El 21 de junio de 2012 (véase el considerando 143), la Comisión envió a Italia un dictamen motivado sobre los retrasos en la aplicación de los procedimientos de licitación para la adjudicación de los servicios públicos de cabotaje marítimo explotados por Caremar, Laziomar y Saremar, más de tres años después de la expiración normal de los contratos pertinentes. Dado que las autoridades italianas habían concluido los procedimientos de licitación para la adjudicación de los servicios públicos de cabotaje marítimo explotados por Tirrenia, Siremar y Toremar, el dictamen motivado no se refería a estas empresas. Sobre la base de los intercambios anteriores entre las autoridades italianas y los servicios de la Comisión, Siremar en AS declaró que la Comisión había llegado a la conclusión de que la privatización del sector de empresa de Siremar se ajustaba al artículo 4 del Reglamento sobre el cabotaje marítimo. |

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| (236) | Sobre la base de la jurisprudencia de los tribunales de la UE [(81)](#ntr81-L_2022097ES.01000101-E0081), Siremar en AS ha alegado que, si se establece que las obligaciones de servicio público se ajustan al Reglamento sobre el cabotaje marítimo, debe considerarse que cumplen la ley sin más examen con arreglo al artículo 106, apartado 2, del TFUE. Según Siremar en AS, dado que en el procedimiento de infracción se concluyó que las obligaciones de servicio público impuestas en las rutas explotadas por el sector de empresa de Siremar antes de la privatización estaban justificadas a la luz del Reglamento sobre el cabotaje marítimo, esta conclusión no puede cuestionarse en el marco del procedimiento de investigación formal de la Comisión con arreglo al artículo 108, apartado 2, del TFUE [(82)](#ntr82-L_2022097ES.01000101-E0082). Por consiguiente, cualquier acción adicional en virtud del artículo 108, apartado 2, del TFUE debe limitarse a medidas distintas de la compensación por los costes adicionales causados por las obligaciones de servicio público legalmente asignadas y explotadas en virtud del Reglamento sobre el cabotaje marítimo. |

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| (237) | Por último, Siremar en AS se refirió a la sentencia de 2009 por la que se anulaba la Decisión de 2004 y a la posibilidad de que la compensación por servicio público evaluada en dicha Decisión pudiera considerarse ayuda existente. Si la ayuda concedida al antiguo grupo Tirrenia se clasificara efectivamente como ayuda existente, era probable que esta calificación se aplicara también a la compensación pagada por las obligaciones de servicio público gestionadas por el sector de empresa de Siremar hasta la privatización por las siguientes razones:   |  |  | | --- | --- | | a) | la prórroga del convenio inicial era estrictamente necesaria para garantizar la prestación del servicio público en espera de la adjudicación del nuevo acuerdo en el contexto de la privatización del sector de empresa de Siremar. Por lo tanto, la empresa consideró que esto estaba justificado a la luz del resultado del procedimiento de infracción de la Comisión; |  |  |  | | --- | --- | | b) | los únicos cambios sustanciales introducidos desde el 1 de enero de 2009 tuvieron el efecto de reducir el importe global de la compensación por servicio público. | |

5.1.2.   Acerca de la prórroga del convenio inicial

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| (238) | Por lo que se refiere a la existencia de un SIEG efectivo en las rutas explotadas por el sector de empresa de Siremar en virtud del convenio inicial, Siremar en AS enumeró inicialmente las rutas en las que operaba un servicio público durante el período de prórroga. Durante algunos períodos del año, algunas rutas se explotaron en competencia con otros operadores. Sin embargo, estos operadores también prestaban un servicio público y fueron compensados en consecuencia. Por consiguiente, Siremar en AS señaló que la presencia de estos operadores no cuestionaba la existencia de un real SIEG. Además, Siremar en AS facilitó datos de pasajeros sobre las rutas operadas en 2010 y 2011, lo que mostraba que, en todas las rutas, el tráfico medio anual de pasajeros era inferior a 300 000 [(83)](#ntr83-L_2022097ES.01000101-E0083). Sobre esta base, se cumplirían las condiciones del artículo 2, apartado 1, letra d), y letra e), de la Decisión SIEG de 2011. Además, dado que la compensación abonada sobre la base de la prórroga de los convenios iniciales se ha liquidado en el contexto del procedimiento de infracción, también se cumple la condición establecida en el artículo 2, apartado 4, de la Decisión SIEG de 2011 y en el artículo 2, apartado 2, de la Decisión SIEG de 2005, respectivamente. |

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| (239) | Además, Siremar en AS declaró que no había recibido ninguna compensación excesiva de Italia. En primer lugar, la sociedad se remitió a un informe del Tribunal de Cuentas que aprobaba la metodología establecida en el artículo 3 del convenio inicial para determinar el importe de la indemnización de las sociedades del antiguo grupo Tirrenia. En segundo lugar, Siremar en AS señaló que durante el período en el que estuvo bajo administración extraordinaria (septiembre de 2010 a julio de 2012), el importe de la subvención fue aproximadamente 16 millones EUR inferior en términos absolutos y aproximadamente un 25 % inferior en términos relativos al importe medio de las subvenciones recibidas por la empresa en los dos años anteriores (2008-2009). Siremar en AS señaló que la compensación por servicio público abonada hasta finales de 2009 le permitió alcanzar un equilibrio entre costes e ingresos y seguir operando a pesar del deterioro gradual de su situación económica y financiera. Sin embargo, a lo largo del tiempo Siremar pasó a depender más de subvenciones, cuya cuota de volumen de negocios aumentó del 64 % al 77 % entre 1999 y 2008. Posteriormente, desde 2010, la Ley de 2009 fijó un límite máximo del importe de la compensación a un nivel significativamente inferior al de años anteriores. Siremar en AS alegó que la subvención pública no podría cubrir sus costes de funcionamiento. Por consiguiente, Siremar en AS concluyó que, en los años en que se prorrogó el convenio inicial, no podría haberse producido una compensación excesiva y que la nueva metodología de cálculo de la compensación obligaba al nuevo propietario de la empresa a reorganizar sus operaciones con el fin de aumentar su eficiencia. |

5.1.3.   Acerca de la posible prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar

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| (240) | Siremar en AS recordó que el 16 de mayo de 2011 las autoridades italianas informaron a la Comisión de que las administraciones extraordinarias de Tirrenia y Siremar reembolsarían la ayuda de salvamento aprobada por la Decisión de 2010 una vez finalizada la venta de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar, utilizando el producto de la venta. Sin embargo, Siremar en AS señaló que la finalización de la venta de la actividad de Siremar se había retrasado debido a acontecimientos imprevistos y que, por lo tanto, Siremar en AS tuvo que explotar sus servicios durante un período mucho más largo de lo previsto, asumiendo los costes asociados. En cualquier caso, el importe de la ayuda de salvamento se reembolsó íntegramente al Estado mediante un pago único efectuado el 18 de septiembre de 2012, es decir, solo 48 días después de la transferencia del sector de empresa de Siremar el 1 de agosto de 2012. |

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| (241) | En relación con la condición establecida en el punto 25, letra c), de las Directrices de salvamento y reestructuración, Siremar en AS señaló que el plan de liquidación de Tirrenia y Siremar se había publicado en el sitio web de la administración extraordinaria [(84)](#ntr84-L_2022097ES.01000101-E0084) mucho antes de que expirara el plazo de seis meses. Siremar en AS añadió que, en el contexto del procedimiento de ayuda estatal y el procedimiento de autorización de concentraciones, se había facilitado regularmente a la Comisión toda información pertinente sobre la evolución posterior del proceso de privatización, que supuestamente era esencial en un plan de reestructuración, tal como se define en las Directrices de salvamento y reestructuración. Siremar en AS alegó, por lo tanto, que la Comisión estaba plenamente informada y que este plan era realista, coherente y de amplio alcance, así como capaz de restablecer la viabilidad de Siremar, tal como lo exigen las Directrices de salvamento y reestructuración. |

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| (242) | Siremar en AS también alegó que Siremar dejó de ser una empresa en crisis tan pronto como recibió la ayuda de salvamento que le permitió prestar el servicio público de forma regular, al tiempo que gestionaba debidamente el proceso de liquidación. En su opinión, durante el período de que se trata, dichas actividades se desarrollaron de manera regular y sin ninguna perturbación que caracterizara normalmente a una empresa en crisis. Siremar en AS añadió que la finalización de la privatización coincidía con la plena aplicación del plan de reestructuración. El plan preveía cambios estructurales en términos de organización y gestión de Siremar que garantizaban su retorno a la viabilidad a largo plazo. Por último, Siremar en AS subrayó que la Decisión de 2010 confirmó que el principio de una «ayuda única» también se había respetado en el pasado, en relación con posibles ayudas de salvamento y reestructuración o posibles ayudas ilegales, como las compensaciones por servicio público. Por consiguiente, Siremar en AS alegó que las autoridades italianas podían haber tenido confianza legítima en que dicha compensación no implicaba elementos de ayuda estatal. |

5.1.4.   Acerca del nuevo convenio

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| (243) | Por lo que se refiere al procedimiento seguido, Siremar en AS alegó que Italia había notificado el nuevo convenio a la Comisión el 10 de enero de 2012 únicamente por razones de seguridad jurídica. De hecho, Siremar en AS no estaba de acuerdo con la Decisión de la Comisión de 2012, según la cual dicha medida podía constituir ayuda ilegal, concedida infringiendo la obligación de suspensión establecida en el artículo 108, apartado 3, del TFUE. |

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| (244) | En esencia, Siremar en AS invocó los cuatro criterios Altmark, explicando por qué consideraba que se había cumplido cada criterio, excluyendo así la presencia de cualquier elemento de ayuda estatal en el nuevo Convenio. |

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| (245) | En primer lugar, se encomendó a la empresa la prestación de un SIEG (primer criterio Altmark): El artículo 3 del nuevo convenio define claramente los servicios que deben prestarse, mientras que el anexo A establece detalladamente los tipos de buques que se utilizarán y las franjas horarias que deben cubrirse, especificando los requisitos para el servicio vespertino y nocturno y los vínculos tarifarios. En segundo lugar, los parámetros para el cálculo de la compensación se definieron previamente de manera transparente y objetiva (segundo criterio Altmark): el nuevo convenio, sus anexos y la resolución del CIPE contenían una descripción detallada de la metodología de cálculo. En tercer lugar, solo se compensaron los costes netos de la prestación del servicio público (tercer criterio Altmark): el nuevo convenio establece que solo se compensarán los servicios prestados como misión de servicio público. Los elementos que deben tenerse en cuenta para el cálculo de los costes y el beneficio razonable, es decir, un rendimiento del capital riesgo del 6,5 %, se establecieron en la resolución del CIPE y en los anexos B y C del nuevo convenio. En cuarto lugar, la compensación debe fijarse en el nivel mínimo (cuarto criterio Altmark): Siremar en AS alegó que la licitación para la privatización del sector de empresa de Siremar era transparente, abierta y no discriminatoria y que el método de cálculo de la compensación requería una mayor eficiencia por parte del operador del servicio. |

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| (246) | Sin perjuicio del razonamiento sobre los criterios Altmark, Siremar en AS también abordó las dudas de la Comisión sobre la conformidad del nuevo convenio con las condiciones establecidas en la Decisión SIEG de 2011. |

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| (247) | En particular, Siremar en AS alegó que, a la luz de los datos relativos a los pasajeros de 2010 y 2011, no se había infringido el umbral de pasajeros establecido en el artículo 2, apartado 1, letra d), y letra e), de la Decisión SIEG de 2011. Además, Siremar en AS declaró que, a la luz del resultado del procedimiento de infracción (véase también la sección 5.1.1) y tras la privatización del sector de empresa de Siremar, también se cumplía la condición establecida en el artículo 2, apartado 4, de la Decisión SIEG de 2011. |

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| (248) | Siremar en AS se refirió a los argumentos presentados en relación con los criterios Altmark para demostrar que se cumplían las condiciones exigidas por el artículo 4, letra a), y letra b), de la Decisión SIEG de 2011. Además, el nuevo Convenio establece los parámetros para calcular, controlar y revisar la compensación, así como disposiciones para evitar y recuperar cualquier compensación excesiva, así como requisitos vinculantes que cubran aspectos esenciales (precio, calidad y cantidad) de los servicios prestados [artículo 4, letra d), y letra e), de la Decisión del SIEG de 2011]. Además, para cada ruta, las tarifas máximas aplicables por persona o vehículo figuran en el anexo A del nuevo convenio, que distingue entre tarifas estándar y tarifas reducidas para residentes insulares. La compensación anual por las obligaciones de servicio público se ha fijado para toda la duración del convenio. No obstante, existe un mecanismo que prevé una revisión de los índices de referencia económicos cada tres años, así como una cláusula de salvaguardia para ambas partes en caso de cambios imprevistos y estructurales, por encima de un umbral fijo, para determinados parámetros económicos. Además, con el fin de garantizar el pleno cumplimiento de estos requisitos, el nuevo Convenio introdujo un sistema estricto y exhaustivo de sanciones para el operador del servicio, con una función disuasoria. Los ministerios competentes también están facultados para llevar a cabo inspecciones y controles y obtener información para evaluar el cumplimiento de las obligaciones derivadas del convenio (artículo 5 de la Decisión SIEG de 2011). Por último, Siremar en AS alegó que cumplía las demás disposiciones aplicables de la Decisión SIEG de 2011 (artículos 6 a 9) al cumplir las disposiciones generales que rigen el desarrollo de procedimientos de licitación abiertos, transparentes y no discriminatorios, como el utilizado para la venta del sector de empresa de Siremar. |

5.1.5.   Acerca de la privatización de Siremar y de la contragarantía

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| (249) | Siremar AE recordó las principales etapas del procedimiento de licitación y la evolución posterior, señalando que el comisario especial había diseñado y llevado a cabo el procedimiento de licitación de la manera más adecuada para garantizar el mayor valor posible y que estaba obligado por ley a adoptar salvaguardias que garantizaran la transparencia, la imparcialidad y la equidad del procedimiento de licitación. En particular, un experto independiente había fijado el precio mínimo y la selección de la oferta seleccionada se basó en el criterio del precio más elevado. Además, Siremar en AS subrayó que, al examinar la posible presencia de ayuda concedida en el contexto de una privatización, la Comisión debería haber seguido la jurisprudencia de la sentencia GRAWE [(85)](#ntr85-L_2022097ES.01000101-E0085), según la cual, cuando se privatiza una empresa estatal, puede presumirse que el precio de mercado corresponde a la oferta más elevada recibida, cuando dicha oferta sea creíble y tenga un valor económico. |

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| (250) | Siremar en AS también alegó que el proceso de licitación no estaba sujeto a condiciones que, en sí mismas, darían lugar a una reducción del valor de los activos ofrecidos a la venta o a la reducción del número de compradores potenciales. Esto se aplica, en particular, a las condiciones mencionadas en la Decisión de 2011 relativas a: i) el mantenimiento de los niveles de empleo y ii) la asociación de buques con obligaciones de servicio público en un único procedimiento de licitación. Sobre el primer punto, Siremar en AS subrayó que se trata de una disposición obligatoria establecida por un acto legislativo de carácter general y aplicable sin excepción por un período limitado de dos años. Por lo que se refiere al segundo punto, Siremar en AS señaló que la posibilidad de utilizar la flota de la compañía para explotar las rutas de servicio público establecidas en el convenio parecía ser una oportunidad comercial rentable en lugar de un aspecto negativo que podría haber afectado al valor del sector de empresa ofrecido a la venta, en particular en un momento de recesión para el sector del transporte marítimo. |

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| (251) | En cuanto a la cuestión específica de la contragarantía de Sicilia, Siremar en AS alegó que no había indicios de contragarantía en los documentos presentados por los licitadores durante el procedimiento de licitación. En particular, la carta de garantía de Unicredit de 12 de octubre de 2011 no contenía ninguna referencia explícita o implícita a una contragarantía emitida por Sicilia. UniCredit también mantuvo su compromiso de garantizar pagos diferidos de parte del precio de venta incluso después de que Sicilia retirara su contragarantía. En efecto, el hecho de que la venta se completara mucho después de que Sicilia retirara su contragarantía basta para concluir que no existía ningún vínculo material entre la carta de garantía de Unicredit y la contragarantía de Sicilia. |

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| (252) | Por estas razones, Siremar en AS concluyó que las dudas de la Comisión sobre la presencia de ayudas en el proceso de privatización del sector de empresa de Siremar, incluida la contragarantía emitida por Sicilia, no estaban justificadas. |

5.1.6.   Acerca de la ausencia de continuidad económica entre Siremar en AS y CdI

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| (253) | Siremar en AS describió las siguientes características relacionadas con la privatización del sector de empresa de Siremar: el alcance de la transferencia (activo y pasivo); la actividad económica, la mano de obra y la identidad de las partes; el precio de venta; la lógica y el calendario de la operación. Siremar en AS alegó que, en el caso que nos ocupa, todos estos aspectos apuntan hacia la discontinuidad económica entre la administración extraordinaria que vendía el sector de empresa de Siremar y el comprador. |

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| (254) | En particular, Siremar en AS señaló que:   |  |  | | --- | --- | | a) | el alcance de la transferencia a CdI era inferior al previsto inicialmente, ya que solo se ofreció a la venta el sector de empresa de Siremar y no Tirrenia en su totalidad (incluida Siremar). Además, una vez concluida la venta, se cancelaron todos los pasivos pendientes vinculados a los activos del sector de empresa de Siremar; |  |  |  | | --- | --- | | b) | la propia naturaleza de la operación, es decir, la realización de la privatización, implicaba una clara discontinuidad de la actividad económica en términos de estructura organizativa, procesos de toma de decisiones, criterios de gestión y estrategias empresariales; |  |  |  | | --- | --- | | c) | conforme a lo dispuesto en el artículo 56, apartado 3 bis, del Decreto Legislativo 270/1999, el artículo 2112 del Código Civil no se aplica a la venta de empresas que prestan servicios públicos esenciales, garantizando así que no haya continuidad en la mano de obra. |  |  |  | | --- | --- | | d) | el precio mínimo de venta había sido fijado por un experto independiente; el procedimiento de venta era transparente y no discriminatorio y establecía como único criterio de adjudicación el precio más elevado; |  |  |  | | --- | --- | | e) | las dos partes eran independientes entre sí, ya que las acciones de Sicilia en el Mediterráneo no le permitían ejercer influencia alguna en sus actividades [véase el considerando 232, letra e)]; |  |  |  | | --- | --- | | f) | el procedimiento de licitación para el sector de empresa de Siremar se inició el 4 de octubre de 2010, mientras que la Comisión solo inició el procedimiento de investigación formal mediante decisión de 5 de octubre de 2011. Por consiguiente, la operación no podía tener por objeto eludir las normas sobre ayudas estatales. Por el contrario, la operación tenía por objeto liberalizar el sector del transporte marítimo, tal como exige el Reglamento sobre el cabotaje marítimo, mediante la privatización. | |

5.1.7.   Presentación ulterior de la decisión del Consejo de Estado sobre la contragarantía

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| (255) | El 12 de febrero de 2014, Siremar en AS presentó la Decisión 592/14 sobre la cuestión de la contragarantía concedida por Sicilia (véase el considerando 96), así como su evaluación preliminar. En particular, la Decisión 592/14:   |  |  | | --- | --- | | a) | se basaba en la legislación nacional, reconociendo que la competencia exclusiva para evaluar la compatibilidad con el mercado interior de cualquier ayuda estatal notificada o ilegal corresponde a la Comisión; |  |  |  | | --- | --- | | b) | suponía que la contragarantía había socavado la plena eficacia del principio de no discriminación entre los dos licitadores; |  |  |  | | --- | --- | | c) | por consiguiente, declaró parcialmente nulo y sin efecto el procedimiento de venta del sector de empresa de Siremar. | |

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| (256) | Por lo que se refiere al último punto, la administración extraordinaria ya señaló en esa fase que no podía excluirse que volviera a ser invitada a llevar a cabo las actividades exigidas por la ley para concluir el proceso de privatización de Siremar. |

5.2.   Observaciones de SNS

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| (257) | SNS envió cuatro cartas durante la investigación: tres observaciones que contenían información y una solicitud formal a la Comisión para que diera prioridad a la parte de Siremar de la investigación del grupo Tirrenia. Posteriormente, también tuvieron lugar intercambios informales, con pleno conocimiento de las autoridades italianas, para aclarar algunas cuestiones pendientes u obtener información específica. En esta sección solo se resumen las observaciones contenidas en las tres comunicaciones [(86)](#ntr86-L_2022097ES.01000101-E0086). |

5.2.1.   Primera presentación de observaciones

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| (258) | En sus primeras observaciones enviadas el 22 de febrero de 2012 tras la adopción de la Decisión de 2011, la empresa envió una actualización del proceso de privatización de Siremar y aclaraciones sobre la contragarantía emitida por Sicilia el 12 de octubre de 2011, tras la última solicitud de ofertas de mejora, el 29 de septiembre de 2011. En particular, SNS subrayó que esta contragarantía: 1) no era proporcional a las cuotas de Sicilia en el Mediterranea; 2) había sido emitida por Sicilia por iniciativa propia y a falta de contraprestación; 3) fue emitida sin compensación o reducción posterior del riesgo por parte de los accionistas de CdI. SNS envió también una copia de la contragarantía a la Comisión. La empresa alegó también que el texto de esta contragarantía dejaba claro que era una condición para Unicredit emitir la garantía a plazos diferidos del precio de venta. Por lo tanto, SNS concluyó que la contragarantía constituía una ayuda estatal ilegal concedida a CdI y posiblemente también a Unicredit. |

5.2.2.   Segunda presentación de observaciones

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| (259) | En sus observaciones en su segunda comunicación, enviada el 21 de marzo de 2013 tras la adopción de la Decisión de 2012, la empresa reconsideró las diferentes fases del procedimiento de privatización y los correspondientes litigios hasta esa fecha (véase la sección 2.3.3.2). Estas observaciones también hacían referencia a una reclamación presentada por el operador de transbordadores NGI al Ministerio de Transportes contra la adjudicación de un contrato a CdI para la explotación de servicios en las islas Egadas, Pantelleria y Ustica [(87)](#ntr87-L_2022097ES.01000101-E0087). También aclaró la naturaleza de la participación indirecta de Sicilia en CdI y explicó por qué consideraba que tanto la contragarantía como el aumento de capital constituían medidas de ayuda estatal. |

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| (260) | En primer lugar, según SNS, la participación indirecta de Sicilia en CdI no puede considerarse una participación minoritaria sin ninguna influencia en la gestión de la empresa. De hecho, Sicilia intervino en todas las decisiones estratégicas de CdI. En particular, la denunciante resaltó que Vincenzo Emanuele era simultáneamente contable general de Sicilia y presidente del Consejo de supervisión de Mediterranea, por lo que estaba en condiciones de influir en las decisiones de CdI. En virtud del artículo 2409 octies del Código Civil italiano, el Consejo de supervisión ejerce funciones de control. Entre sus competencias figuran también las siguientes: nombramiento y destitución del consejo de administración; aprobación del presupuesto; ejercicio de las funciones atribuidas al Consejo de supervisión con arreglo al artículo 2403 del Código Civil italiano; interposición de recursos por daños y perjuicios contra los miembros del Consejo de administración; presentación de un informe anual de actualización a los accionistas. Además, los estatutos de Mediterranea confieren a su Consejo de supervisión más poderes para votar sobre las operaciones estratégicas y los planes financieros e industriales elaborados por el Consejo de administración. SNS también señaló que, en el momento de la creación de Mediterranea, Sicilia nombró a dos de los tres miembros del Consejo de administración de la empresa. Por último, SNS señaló que los accionistas minoritarios de Mediterranea y CdI eran parcialmente los mismos, lo que aumentó la influencia de Sicilia. En particular, Lauro.it S.p.A. y Isolemar S.r.l. eran accionistas minoritarios tanto de Mediterranea como de CdI. |

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| (261) | En segundo lugar, por lo que respecta a la contragarantía, SNS indicó que, cuando el procedimiento de licitación estaba a punto de adjudicarse a SNS y tras la expiración del plazo fijado en el procedimiento, CdI modificó su oferta proponiendo sustituir la garantía previamente presentada, emitida por Commercial Fidi, por una garantía emitida por Unicredit, respaldada por una contragarantía de Sicilia. Posteriormente, el 12 de octubre de 2011, tras la última solicitud de ofertas de mejora, Unicredit emitió una nueva carta de garantía a favor de CdI, sin mencionar contragarantías. Sin embargo, ese mismo día, Sicilia confirmó su contragarantía a Unicredit, modificando los importes correspondientes a los importes indicados en la carta de Unicredit. SNS también señaló que, además de su participación indirecta en CdI, Sicilia también poseía una participación minoritaria en Unicredit (0,62 %) y mantenía una estrecha relación con esta última [(88)](#ntr88-L_2022097ES.01000101-E0088). |

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| (262) | SNS considera que la administración extraordinaria habría concedido el sector de empresa de Siremar a SNS si Unicredit no hubiera concedido la garantía a CdI. A la luz de lo anterior, SNS alegó que, sobre la base de la jurisprudencia sobre ayudas estatales y la Comunicación sobre las garantías, la contragarantía estaba comprendida en la definición de ayuda estatal, ya que había conferido una ventaja económica selectiva a CdI, permitiéndole ganar la licitación para el sector de empresa de Siremar utilizando recursos estatales y falseando la competencia y los intercambios. De hecho, SNS alegó que la medida también podría implicar la concesión de una ayuda a Unicredit, ya que se mitigaría el perfil de riesgo de su garantía en favor de CdI. |

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| (263) | En tercer lugar, SNS describió el aumento del capital de CdI y los cambios que tuvieron lugar en el curso de los años en las estructuras accionariales de CdI y Mediterranea. En primer lugar, SNS señaló que, tras el aumento de capital en dos fases, de 1 millón EUR a 21 480 263 EUR, Mediterranea siguió siendo titular de la mayoría de las acciones de CdI. SNS también señaló que, en el momento de las dos fases de aumento del capital, Sicilia era el accionista mayoritario de CdI, aunque su participación se diluiría posteriormente, alcanzando el 43,02 %. SNS considera que las decisiones de proceder al aumento del capital y de conceder la contragarantía habrían estado vinculadas, y que ninguna de ellas habría estado destinada en última instancia a obtener beneficios. Ningún inversor privado habría suscrito el aumento del capital y, al mismo tiempo, emitido tal contragarantía, teniendo en cuenta los importes implicados y el calendario de las dos medidas. Por último, SNS señaló que los accionistas privados que participaron en el aumento del capital de CdI poseían participaciones mucho más bajas que Sicilia (alrededor de la mitad), y nunca habrían participado en esta ampliación de capital si Sicilia no hubiera aportado la mayor parte de los fondos, utilizando recursos públicos. Por consiguiente, SNS alegó que el aumento de capital de CdI también cumplía todas las condiciones para ser considerado ayuda estatal. |

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| (264) | Por último, la empresa describió los problemas con la aplicación del nuevo acuerdo por parte de CdI, los importantes retrasos, cancelaciones y aumentos de tarifas a los que se enfrentan los usuarios finales y pidió a la Comisión que concluyera la investigación únicamente en relación con la contragarantía y el aumento del capital. |

5.2.3.   Tercera presentación de observaciones

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| (265) | En su tercera comunicación, enviada el 31 de julio de 2019, el SNS formuló observaciones preliminares sobre las islas menores a las que se aplica el nuevo convenio. En Sicilia hay catorce islas menores, cada una con su propia población y necesidades de enlaces marítimos, que requieren servicios marítimos regulares y frecuentes con el continente, incluido el suministro de productos básicos como alimentos, agua, combustible y correo. Muchas de estas islas no cuentan con hospitales ni escuelas superiores, por lo que los pacientes y estudiantes deben contar con enlaces estables y asequibles para satisfacer las necesidades escolares y sanitarias [(89)](#ntr89-L_2022097ES.01000101-E0089). El SNS también destacó que todos los planes de evacuación de las islas, ya sea en caso de catástrofes naturales o con fines de protección civil, se basan en los enlaces marítimos previstos en el nuevo convenio. |

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| (266) | Por lo tanto, SNS declaró que consideraba que la compensación que se le había abonado en virtud del nuevo convenio no constituía una ayuda estatal, ya que cumplía los criterios Altmark. En particular, SNS comparó su caso con los servicios prestados por Saremar, que fueron evaluados en el contexto de la Decisión de 2014, y destacó varios elementos que se aplican a SNS, pero no a dichos servicios:   |  |  | | --- | --- | | a) | obligaciones de servicio público bien definidas necesarias para corregir una deficiencia histórica del mercado (primer criterio Altmark). Las obligaciones de servicio público encomendadas a SNS están claramente definidas en todas sus características, en términos de rutas, tipo de buque, frecuencia de los servicios, normas, comodidad, seguridad, tarifas máximas, etc., y el régimen de servicio público es necesario para hacer frente a las deficiencias históricas del mercado en los enlaces marítimos entre Sicilia y sus islas menores. A modo de ejemplo, SNS observó que los ingresos anuales procedentes de la venta de billetes representan solo el 30 % de los costes de explotación de las rutas con arreglo al nuevo convenio, lo que indica claramente que tales servicios no podían ser prestados en ningún caso por el mercado y, en efecto, nunca lo fueron. Las excepciones son las rutas ofrecidas por SNAV y Alilauro en la agrupación de las islas Nápoles – Islas Eolias, que se explotan sin compensación pública. Sin embargo, estos servicios solo se prestan en temporada alta, con buques de tipos diferentes a los previstos en el nuevo convenio y que no llegan a Milazzo (en Sicilia). Se dirigen principalmente a turistas procedentes de otras regiones italianas que viajan a las Islas Eolias y regresan al continente en temporada alta y, como tales, no son comparables a los servicios ofrecidos por SNS; |  |  |  | | --- | --- | | b) | un mecanismo de compensación claramente definido en la resolución del CIPE y en el nuevo convenio (segundo criterio Altmark). El nivel de compensación se estableció claramente sobre la base de la resolución del CIPE, que establece el método de cálculo de la compensación, es decir, los elementos de coste que se tuvieron en cuenta y el rendimiento del capital invertido. SNS señaló que esto también está en consonancia con la opinión preliminar de la Comisión en las Decisiones de 2011 y 2012; |  |  |  | | --- | --- | | c) | un importe de compensación proporcional a los costes soportados (incluido un beneficio razonable – tercer criterio Altmark). La compensación concedida a SNS es necesaria y proporcionada para cubrir los costes ocasionados por el cumplimiento de las obligaciones de servicio público y para garantizar un beneficio razonable. La prima de riesgo fijada en el 6,5 % está en consonancia con el análisis macroeconómico de Italia y es necesaria para garantizar no solo la cobertura de los costes derivados de la prestación de servicios marítimos, sino también una rentabilidad adecuada de las inversiones. SNS declaró que, a falta de compensación, ningún operador privado decidiría cumplir las obligaciones de servicio público previstas en el nuevo convenio; |  |  |  | | --- | --- | | d) | adjudicación del sector de empresa y del nuevo convenio tras un procedimiento de licitación abierto y bien concebido (cuarto criterio Altmark). SNS alegó que había sido elegida tras un procedimiento de licitación que permitía seleccionar al licitador capaz de prestar los servicios al menor coste para la colectividad. En particular, entre otros requisitos de licitación, la opción de exigir al operador seleccionado que asumiera el sector de empresa de Siremar fue la única manera posible de garantizar la continuidad territorial, ya que ningún licitador estaba equipado adecuadamente con buques y tripulaciones para prestar los servicios requeridos. | |

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| (267) | Además, y con carácter subsidiario, SNS señaló que la compensación prevista en el nuevo convenio también cumplía las condiciones de compatibilidad establecidas en la Decisión SIEG de 2011. En efecto, las obligaciones de servicio público que debe cumplir SNS están claramente identificadas y definidas en todas sus características. Además, el convenio celebrado con SNS:   |  |  | | --- | --- | | a) | define el contenido y la duración de las obligaciones de servicio público; |  |  |  | | --- | --- | | b) | identifica la empresa en cuestión y el territorio afectado; |  |  |  | | --- | --- | | c) | contiene la descripción del mecanismo de compensación y los parámetros aplicados al cálculo, control y revisión de la compensación; |  |  |  | | --- | --- | | d) | contiene las disposiciones necesarias para evitar y recuperar las posibles compensaciones excesivas. | |

5.3.   Observaciones de Pan Med

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| (268) | En su respuesta a la Decisión de 2011, enviada el 29 de febrero de 2012, Pan Med indicó que estaba de acuerdo con determinadas secciones de dicha Decisión relativas a la apreciación preliminar de la Comisión sobre la existencia de una ayuda en relación con la privatización, la prioridad en la asignación de puntos de amarre y las medidas previstas en la Ley de 2010. |

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| (269) | En su respuesta a la Decisión de 2012, enviada el 19 de abril de 2013, Pan Med señaló que tenía la intención de iniciar nuevas rutas, pero que la competencia se veía obstaculizada por la ayuda incompatible concedida a las empresas del antiguo grupo Tirrenia y a sus compradores. Los siguientes considerandos resumen las observaciones de Pan Med a Siremar. |

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| (270) | Por lo que se refiere a la ayuda de salvamento concedida a Tirrenia y Siremar, Pan Med alegó que desde el 28 de agosto de 2011, fecha en la que debería haberse concluido el período de concesión de dicha ayuda, hasta su reembolso, aproximadamente un año y dos meses después, estas dos empresas se beneficiaron de una ayuda de salvamento ilegal e irregular. En particular, Pan Med alegó que la ayuda de salvamento no cumplía las Directrices de salvamento y reestructuración y no formaba parte de un plan de reestructuración completo. Por lo tanto, en opinión de Pan Med, constituía ayuda de explotación para Tirrenia y Siremar. |

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| (271) | Por lo que se refiere a los nuevos convenios, Pan Med comentó la naturaleza real de los SIEG de los servicios prestados por CIN y CdI, centrando su razonamiento en las rutas operadas por el primero (es decir, los enlaces entre Sicilia y el continente, y no entre Sicilia y las islas menores, explotadas por CdI). Pan Med alegó que, ni las necesidades de movilidad de las comunidades locales, ni los argumentos de desarrollo económico pueden justificar la compensación pública concedida a estos operadores. Pan Med subrayó que el objetivo de garantizar la continuidad territorial no debe abordarse a través de agrupaciones de rutas elegidas arbitrariamente, que no parecen reflejar el interés general y que se habían definido casi 25 años antes. Además de lo anterior, Pan Med alegó que la compensación por la prestación del servicio público permitía a los operadores obtener un beneficio superior al razonable y, por tanto, no cumpliría el tercer criterio Altmark [(90)](#ntr90-L_2022097ES.01000101-E0090). En particular, Pan Med alegó que la prima de riesgo del 6,5 % prevista en la resolución del CIPE no estaba justificada, ya que los operadores no habrían estado sujetos a ningún otro riesgo de empresa. |

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| (272) | En su carta, Pan Med también describía varias nuevas rutas que había decidido explotar y un nuevo servicio cotidiano en la ruta Gaeta – Milazzo, que todavía se estaba evaluando. Pan Med consideró que este servicio era comercialmente rentable. Sin embargo, el proyecto habría estado bloqueado a causa de la burocracia y de la resistencia de CdI y de otros operadores [(91)](#ntr91-L_2022097ES.01000101-E0091). Este servicio habría estado en competencia con los servicios de transbordador explotados por CdI en la ruta Nápoles – Eolias – Milazzo (así como con el servicio prestado por Tirrenia en la ruta Nápoles-Palermo). En cuanto a la situación competitiva en las rutas de cabotaje explotadas por CdI, Pan Med recordó que la Comisión ya había constatado que operadores competidores prestaban servicios mixtos comparables, al menos en las siguientes rutas: Milazzo – Islas Eolias – Nápoles, Trapani – Pantelleria y Palermo – Ustica. Según Pan Med, esto demuestra que el mercado podría cumplir las obligaciones de servicio público objeto de la encomienda arbitraria a CdI. |

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| (273) | Pan Med concluyó que la ayuda concedida sobre la base de la prórroga del convenio inicial, la ayuda de salvamento y aquella concedida en virtud del nuevo convenio eran ilegales e incompatibles y debían recuperarse de los respectivos beneficiarios (es decir, las empresas originales o los nuevos propietarios, dependiendo de la medida en cuestión y de la existencia de continuidad económica). |

5.4.   Observaciones de Grandi Navi Veloci

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| (274) | El 1 de marzo de 2012, en respuesta a la Decisión de 2011, Grandi Navi Veloci presentó observaciones sobre los siguientes aspectos:   |  |  | | --- | --- | | a) | infracción del artículo 4 del Reglamento sobre el cabotaje marítimo, en lo que respecta a Saremar; |  |  |  | | --- | --- | | b) | compensación anual concedida a Saremar por sus obligaciones de servicio público; |  |  |  | | --- | --- | | c) | privatización de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar; |  |  |  | | --- | --- | | d) | prioridad en la asignación de puntos de amarre a Saremar; |  |  |  | | --- | --- | | e) | otras medidas de ayuda concedidas a las empresas del antiguo Grupo Tirrenia en el contexto de privatizaciones; |  |  |  | | --- | --- | | f) | ilegalidad de la ayuda ya concedida a Saremar y necesidad de suspenderla y recuperarla provisionalmente [(92)](#ntr92-L_2022097ES.01000101-E0092). |   Grandi Navi Veloci alegó que las medidas de ayuda mencionadas en las letras b) y e) constituyen una ayuda nueva, ilegal e incompatible con el TFUE. Sin embargo, las observaciones de Grandi Navi Veloci se centran en el caso específico de Saremar, que queda fuera del ámbito de aplicación de la presente Decisión. Estas observaciones, que también son pertinentes para la presente Decisión, se resumen a continuación. |

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| (275) | En cuanto a la supuesta infracción del Reglamento de cabotaje marítimo, Grandi Navi Veloci señaló que, en virtud de dicho Reglamento, los Estados miembros pueden intervenir en caso de que el mercado no preste servicios adecuados concediendo subvenciones relativas a las obligaciones de servicio público en las rutas identificadas por los propios Estados miembros. No obstante, los Estados miembros deben limitar su intervención a los requisitos esenciales establecidos en el Reglamento sobre el cabotaje marítimo y respetar el principio de no discriminación de todos los armadores de la UE interesados en explotar esas rutas. Al adjudicar las rutas a las compañías del antiguo grupo Tirrenia de forma exclusiva sin convocar una licitación pública, Italia infringió el artículo 4, apartado 1, y 2 del Reglamento sobre el cabotaje marítimo. Además, Grandi Navi Veloci señala que, si existieran competidores que ofrecieran los mismos servicios en las rutas de que se trata, no se cumplirían los requisitos establecidos por la jurisprudencia Analir [(93)](#ntr93-L_2022097ES.01000101-E0093). |

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| (276) | Por lo que se refiere a la prioridad en la asignación de puntos de amarre, Grandi Navi Veloci no cuestionó la opinión preliminar de la Comisión de que la medida no constituye ayuda estatal, ya que no hay pérdida de recursos estatales. Sin embargo, la empresa alegó que la transferencia de prioridad en la asignación de puntos de amarre a los nuevos propietarios de las empresas del antiguo grupo Tirrenia, prevista en el artículo 19 ter, apartado 21, del Decreto-Ley n.o 135/2009, constituye en sí una infracción del artículo 4 del Reglamento sobre el cabotaje marítimo. Grandi Navi Veloci también mencionó dos informes relativos a Caremar, adoptados por la AGCM en 1995 y 1997, según los cuales esta prioridad puede tener un impacto negativo en la competencia, en particular si el beneficiario tiene un derecho exclusivo sobre las franjas horarias más valiosas desde el punto de vista económico. |

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| (277) | En cuanto a la privatización de los sectores de empresa de Tirrenia y Siremar, Grandi Navi Veloci se adhirió a la opinión preliminar de la Comisión, expresada en la Decisión de 2011, según la cual los procedimientos no eran suficientemente transparentes e incondicionales para descartar la existencia de ayuda. Además, Grandi Navi Veloci alegó que las autoridades italianas habían retrasado indefinidamente la privatización de las empresas del grupo Tirrenia, incluso en relación con las empresas regionales, a pesar de las garantías concedidas durante años a la Comisión y formalizadas en las Decisiones de 2001 (considerandos 4 y 12) y en la Decisión de 2004 (considerandos 5 y 45). Grandi Navi Veloci alegó que la perspectiva de una futura privatización se había utilizado como moneda de cambio con respecto a la Comisión para permitir el pago de compensaciones por las obligaciones de servicio público a las empresas del grupo Tirrenia hasta finales de 2008. |

5.5.   Carta del alcalde de Lipari

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| (278) | El 2 de diciembre de 2019, el alcalde de Lipari y de las demás islas Eolias, excepto Salina [(94)](#ntr94-L_2022097ES.01000101-E0094), enviaron una carta, después de los plazos procesales para que los terceros interesados presentaran observaciones sobre las decisiones de 2011 y 2012. |

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| (279) | En esta carta, el alcalde destaca la importancia del sector del transporte marítimo para la vida cotidiana de los habitantes de las Islas Eolias. En particular, el alcalde señaló que las islas en cuestión son mucho más pequeñas que Cerdeña o Sicilia, razón por la cual los enlaces de cabotaje marítimo son de vital importancia. El alcalde señaló que estas islas, especialmente las islas más pequeñas, necesitan tales enlaces para recibir alimentos y medicamentos básicos. Sin enlaces fiables y frecuentes, estas islas correrían el riesgo de sufrir una emigración masiva, y quedar deshabitadas. También destaca que el turismo es la actividad económica clave de estas islas y que un transporte eficiente y eficaz es esencial para el turismo, especialmente en temporada alta. A este respecto, el alcalde señaló que la demanda de los usuarios de estos servicios de transporte es relativamente baja, pero estable en temporada baja (se trata principalmente de trabajadores que se desplazan cotidianamente y habitantes de las islas), mientras que es más fuerte en temporada alta, en particular gracias a los turistas. Como consecuencia de ello, los enlaces con las Islas Eolias requieren ayuda estatal y su retiro constituiría una catástrofe en relación con los derechos fundamentales y las necesidades de los habitantes de las islas. |

6.   OBSERVACIONES DE COMPAGNIA DELLE ISOLE

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| (280) | El 23 de octubre de 2014, CdI participó en una reunión con la Comisión y las autoridades italianas. La empresa también presentó tres series de observaciones, todas ellas recibidas después de los plazos de procedimiento establecidos para la presentación de observaciones por los terceros interesados en relación con las Decisiones de 2011 y 2012. Para ninguno de estos comentarios CdI cumplimentó el formulario de denuncia establecido en el artículo 24, apartado 2, del Reglamento (UE) 2015/1589 del Consejo [(95)](#ntr95-L_2022097ES.01000101-E0095). No obstante, la Comisión resumirá estas observaciones en las siguientes secciones y las tendrá en cuenta en su evaluación. |

6.1.   Primera presentación de observaciones

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| (281) | En su primera carta de 8 de agosto de 2013, a petición de la Comisión, CdI facilitó datos detallados sobre las rutas operadas durante el período comprendido entre el 1 de agosto de 2012 y el 31 de diciembre de 2012. La información facilitada incluía, entre otros elementos, una lista de las rutas explotadas junto con los siguientes datos:   |  |  | | --- | --- | | 1) | temporada en la que se explota la ruta [(96)](#ntr96-L_2022097ES.01000101-E0096); |  |  |  | | --- | --- | | 2) | arqueo de los buques utilizados; |  |  |  | | --- | --- | | 3) | número total de viajes; |  |  |  | | --- | --- | | 4) | número medio de pasajeros por viaje; |  |  |  | | --- | --- | | 5) | volumen medio de mercancías (en metros lineales) transportadas por viaje; |  |  |  | | --- | --- | | 6) | total de ingresos por viaje (en EUR); |  |  |  | | --- | --- | | 7) | número medio de empleados y costes (en EUR) por viaje [(97)](#ntr97-L_2022097ES.01000101-E0097); | |

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| (282) | Además, CdI declaró que había adquirido el sector de empresa de Siremar tras una evaluación hecha por un experto independiente y que no había continuidad económica con Siremar en AS. |

6.2.   Segunda presentación de observaciones

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| (283) | En su segunda serie de observaciones, enviadas los días 23 y 30 de octubre de 2014, CdI presentó observaciones sobre la contragarantía. |

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| (284) | En primer lugar, la empresa señaló que Sicilia había decidido establecer Mediterranea con objetivos políticos y económicos claros: apoyar a las comunidades insulares más pequeñas mediante la prestación «interna» de servicios de cabotaje marítimo y la provisión del capital necesario para una participación cualificada y bien definida en la prestación de dichos servicios. A este respecto, para alcanzar su objetivo social, CdI realizó varias ofertas públicas de adquisición en relación con Siremar, siendo las últimas las de 9 de junio, 18 de julio y 13 de octubre de 2011. |

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| (285) | En segundo lugar, la empresa alegó que la adjudicación del sector de empresa era legal y aportó documentación sobre el procedimiento de licitación y el correspondiente contencioso nacional. CdI declaró que Siremar en AS y el Ministerio de Desarrollo Económico conocían la existencia de la contragarantía pero, no obstante, transfirieron el sector de empresa de Siremar a CdI al cabo de diez meses de la adjudicación de la licitación. En particular, CdI remitió a la Comisión una sentencia del Tribunal de Roma de 15 de abril de 2014, que absuelve a los demandantes de todos los cargos penales, ya que el Tribunal concluyó que la administración extraordinaria conocía la contragarantía de Sicilia cuando adjudicó el sector de empresa a CdI. Dado que los hechos establecidos en las sentencias definitivas en los procesos penales no pueden impugnarse en el contexto de procedimientos conexos, CdI alegó que esto demostraba que la contragarantía era totalmente regular y, al mismo tiempo, no decisiva para el resultado de la licitación [(98)](#ntr98-L_2022097ES.01000101-E0098). |

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| (286) | En tercer lugar, CdI señaló que Sicilia ofreció la contragarantía en su condición de inversor que posee una participación en una empresa, no como autoridad pública. Dado que es necesaria una contragarantía para obtener la garantía de Unicredit en relación con los pagos diferidos del precio de venta, todos sus accionistas, incluidas las entidades privadas Lauro.it S.p.A., Davimar e Isolemar S.r.l, emitieron una contragarantía. Para la primera oferta de CdI, lo hicieron incluso antes de que Sicilia emitiera su contragarantía, debido a la duración de los procesos de toma de decisiones característicos de las administraciones públicas. Este retraso dio lugar a que CdI se basara inicialmente en la garantía de Commercial Fidi, que posteriormente sería sustituida por la carta de garantía de Unicredit, que preveía una cláusula suspensiva relativa a la verificación de las competencias del contable general de la Región de Sicilia para emitir la contragarantía (véase el considerando 84). Sin embargo, esto no es pertinente por dos razones: en primer lugar, el comisario especial no tomó esto en cuenta y pidió una nueva serie de ofertas; en segundo lugar, las contragarantías de las demás partes estaban completas. Por consiguiente, CdI concluyó que la contragarantía de Sicilia era una operación comercial normal y no concedía ninguna ventaja a CdI o a Unicredit. |

6.3.   Tercera presentación de observaciones

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| (287) | En su tercera carta, enviada el 15 de julio de 2015, CdI hizo referencia, en primer lugar, a los argumentos presentados por las autoridades italianas sobre el precio del sector de empresa, que cumplía el criterio del vendedor privado, y sobre la discontinuidad económica entre Siremar en AS y CdI. CdI alegó, en particular, que las Decisiones 5172/2012 y 592/14 no modificaban esta conclusión, ya que se centraban únicamente en un elemento del procedimiento de privatización, a saber, la contragarantía de Sicilia. Las decisiones del TAR y del CdS no afectaron a los mecanismos establecidos para garantizar la discontinuidad económica: el alcance de la transferencia y de los servicios públicos con arreglo al nuevo convenio, tal como se definen en la Ley de 2010 y las disposiciones laborales establecidas en el artículo 56, apartado 3 bis, del Decreto Legislativo n.o 270/1999. Además, Sicilia había emitido la contragarantía, mientras que la administración extraordinaria y el Ministerio de Desarrollo Económico supervisaron la transmisión del sector de empresa. Por lo tanto, la existencia de tal contragarantía no puede cuestionar la legitimidad del procedimiento de venta. CdI también informó a la Comisión de que las distintas instituciones y partes interesadas se reunieron el 20 de abril de 2015 para garantizar la correcta aplicación de las Decisiones 5172/2012 y 592/14 [(99)](#ntr99-L_2022097ES.01000101-E0099). |

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| (288) | Además, CdI alegó que las medidas de salvaguardia previstas en el procedimiento garantizaban que el precio pagado por el sector de empresa de Siremar fuera el precio real de mercado tras la concesión de la ayuda, lo que significa que el valor de esta ayuda ya estaba incluido en el precio de venta [(100)](#ntr100-L_2022097ES.01000101-E0100). Sobre la base de esta interpretación, el vendedor habría conservado la ventaja de una posible ayuda estatal, ya que el precio de mercado de sus activos era, en consecuencia, más elevado y, por lo tanto, el comprador no habría tenido que reembolsar dicha ayuda. Por consiguiente, una posible orden de recuperación dirigida a Siremar en AS no debería ampliarse al comprador del sector de empresa de Siremar. |

7.   OBSERVACIONES DE ITALIA SOBRE LAS OBSERVACIONES Y CONTRIBUCIONES DE LAS PARTES INTERESADAS

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| (289) | La Comisión transmitió a Italia las observaciones y contribuciones resumidas en las secciones 5 y 6. Sin embargo, por carta de 13 de mayo de 2015, Italia solo se pronunció sobre la segunda serie de observaciones presentadas por SNS (véase la sección 5.2.2). |

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| (290) | En particular, Italia señaló que, en la última fase del procedimiento de venta, que debía expirar el 13 de octubre de 2011, el comisario especial recomendaba expresamente a los licitadores que no presentaran ofertas respaldadas por garantías que infringieran las normas sobre ayudas estatales. En consecuencia, CdI presentó su oferta en la carta de garantía de Unicredit, que no contenía ninguna referencia a una contragarantía de Sicilia, al tiempo que supeditaba la validez de dicho escrito al cumplimiento de otros requisitos [(101)](#ntr101-L_2022097ES.01000101-E0101). Por lo tanto, la autorización ministerial se concedió partiendo del supuesto de que se habían cumplido plenamente las normas establecidas para el procedimiento. |

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| (291) | Italia también declaró que la ampliación de capital en Mediterranea se llevó a cabo pari passu con los demás accionistas privados de CdI y que, por esta razón, no implicaba ayuda estatal. Italia también reiteró que, según lo dispuesto en los estatutos de la empresa, las acciones de Sicilia eran diferentes de las de los accionistas privados de CdI, limitando así significativamente su influencia en la empresa. |

8.   VALORACIÓN

8.1.   Subsistencia de una ayuda en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE

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| (292) | A tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE «son incompatibles con el mercado interior, en la medida en que afecten a los intercambios comerciales entre Estados miembros, las ayudas otorgadas por los Estados o mediante fondos estatales, bajo cualquier forma, que falseen o amenacen falsear la competencia favoreciendo a determinadas empresas o producciones». |

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| (293) | Los criterios establecidos en el artículo 107, apartado 1, del TFUE son acumulativos. Por tanto, a fin de determinar si las medidas objeto de la presente Decisión constituyen ayuda estatal en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE, deben cumplirse todas las condiciones mencionadas. El apoyo financiero tendrá que:   |  |  | | --- | --- | | a) | ser otorgado por un Estado miembro o mediante fondos estatales; |  |  |  | | --- | --- | | b) | favorecer a determinadas empresas o producciones, |  |  |  | | --- | --- | | c) | falsear o amenazar falsear la competencia, |  |  |  | | --- | --- | | d) | afecte a los intercambios entre Estados miembros. | |

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| (294) | En primer lugar, la Comisión señala que el nuevo convenio debe evaluarse conjuntamente con la privatización del sector de empresa de Siremar. Esta evaluación conjunta es adecuada porque, en esencia, Italia organizó una licitación para la adjudicación de un contrato de servicio público (es decir, el nuevo convenio), tras lo cual el adjudicatario tendría que adquirir de Siremar una serie de activos (principalmente buques) necesarios para el cumplimiento de las obligaciones de servicio público establecidas en dicho contrato de servicio público. |

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| (295) | En segundo lugar, la Comisión observa que, en el momento de la adopción de la presente Decisión, las autoridades italianas y CdI ya habían resuelto tanto el contrato de compraventa como el nuevo convenio que habían celebrado. Este última, asociado al sector de empresa de Siremar, fue transferido posteriormente a SNS. De hecho, como se describe en los considerandos 99 y 100, la adjudicación inicial del nuevo convenio y del sector de empresa de Siremar a CdI se canceló en su totalidad y ambos se adjudicaron a SNS el 11 de abril de 2016. Además, dado que la adjudicación del nuevo convenio y la venta del sector de empresa están intrínsecamente vinculadas, ninguna de las dos medidas puede estimarse por separado, ni siquiera durante un período de tiempo limitado. En este contexto, la conclusión de la investigación sobre la adjudicación inicial del nuevo convenio, asociado al sector de empresa de Siremar, en favor de CdI, en el período comprendido entre el 1 de agosto de 2012 y el 10 de abril de 2016, sería lógicamente imposible, ya que equivaldría a evaluar el mismo procedimiento dos veces (uno para la concesión provisional a CdI y otro para la adjudicación definitiva a SNS) [(102)](#ntr102-L_2022097ES.01000101-E0102). Por lo tanto, la presente Decisión solo evaluará la adjudicación del nuevo convenio, asociado al sector de empresa de Siremar, realizado por Siremar en AS en favor de SNS. Dado que el nuevo convenio, que entró en vigor el 11 de abril de 2016, tenía esencialmente las mismas condiciones que en el período comprendido entre el 1 de agosto de 2012 y el 10 de abril de 2016, y dado que el sector de empresa era esencialmente el mismo, la Comisión incluyó toda la información pertinente recabada durante el período de investigación formal (entre el 1 de agosto de 2012 y el 10 de abril de 2016) en su evaluación de la adjudicación a SNS del nuevo convenio asociado al sector de empresa de Siremar. |

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| (296) | Por último, la Comisión señala que la prioridad en la asignación de los puntos de amarre, que únicamente se aplica a las rutas de servicio público, está indisolublemente ligada a la prestación del SIEG por parte de Siremar y su comprador, SNS. Por lo tanto, esta medida se evaluará conjuntamente con la compensación por servicio público concedida a estas empresas (véanse las secciones 8.1.1, 8.1.3 y 8.3.1). |

8.1.1.   Prórroga del convenio inicial entre Siremar e Italia

8.1.1.1.   Fondos estatales

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| (297) | Para poder ser calificada como ayuda estatal, una medida tiene que ser imputable al Estado y haber sido otorgada directa o indirectamente mediante fondos estatales. |

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| (298) | Siremar recibió encomienda del Estado italiano para gestionar las rutas marítimas cubiertas por el convenio inicial, que posteriormente fue prorrogado. El convenio inicial se celebró con el Estado y la compensación por servicio público resultante en favor de Siremar fue abonada por el Estado con cargo a su propio presupuesto. Por consiguiente, la compensación por servicio público abonada a Siremar parece ser imputable al Estado y concedida mediante fondos estatales. |

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| (299) | La Comisión toma nota de que, según las autoridades italianas, todos los operadores de transbordadores pagan tasas ordinarias a las autoridades portuarias competentes por atraque, pero Siremar no ha pagado, ni paga, ninguna tasa adicional por la prioridad en la asignación de puntos de amarre. Sin embargo, la Comisión considera que, en principio, Italia podría haber optado por imponer una tasa adicional por la prioridad en la asignación de puntos de amarre y que, de no hacerlo, ha renunciado a ingresos a favor del Estado. Además, como se concede por ley, la prioridad en la asignación de puntos de amarre es imputable al Estado (véase el considerando 131). |

8.1.1.2.   Selectividad

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| (300) | Para poder ser calificada como ayuda estatal, una medida debe ser selectiva. La compensación por servicio público por la prestación de los servicios de transporte marítimo en cuestión se concede únicamente a Siremar y, por lo tanto, es selectiva. Dado que la prioridad en la asignación de los puntos de amarre se concedió únicamente a las empresas del antiguo grupo Tirrenia (incluida Siremar), también es selectiva. |

8.1.1.3.   Ventaja económica

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| (301) | La Comisión recuerda que la compensación por las obligaciones de servicio público concedida a una empresa puede no constituir una ventaja económica bajo determinadas condiciones estrictamente definidas. |

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| (302) | En particular, en la sentencia Altmark, [(103)](#ntr103-L_2022097ES.01000101-E0103) el Tribunal de Justicia declaró que, si una intervención estatal debe considerarse como compensación directa que constituye la contrapartida de las prestaciones realizadas por las empresas beneficiarias para el cumplimiento de las obligaciones de servicio público, de forma que estas empresas no gozan, en realidad, de una ventaja financiera y que, por lo tanto, dicha intervención no tiene por efecto poner a estas empresas en una posición competitiva más favorable respecto a las empresas competidoras, tal intervención no entra en el ámbito de aplicación del artículo 107, apartado 1 del TFUE. |

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| (303) | Sin embargo, el Tribunal de Justicia también ha aclarado que, para que dicha compensación de servicio público pueda eludir la calificación de ayuda estatal en un caso concreto, deben cumplirse los cuatro criterios acumulativos («criterios Altmark»), que se resume a continuación:   |  |  | | --- | --- | | a) | la empresa beneficiaria ha sido efectivamente encargada de la ejecución de obligaciones de servicio público y estas obligaciones deben estar claramente definidas («primer criterio Altmark»); |  |  |  | | --- | --- | | b) | los parámetros para el cálculo de la compensación deben establecerse previamente de forma objetiva y transparente («segundo criterio Altmark»); |  |  |  | | --- | --- | | c) | la compensación no puede superar el nivel necesario para cubrir total o parcialmente los gastos ocasionados por la ejecución de las obligaciones de servicio público, teniendo en cuenta los ingresos correspondientes y un beneficio razonable por la ejecución de dichas obligaciones («tercer criterio Altmark»); |  |  |  | | --- | --- | | d) | Cuando, en un caso en particular, la elección de la empresa encargada de ejecutar obligaciones de servicio público no se haya realizado en el marco de un procedimiento de licitación pública que permita seleccionar al candidato capaz de prestar estos servicios originando el menor coste para la colectividad, el nivel de la compensación necesaria debe calcularse sobre la base de un análisis de los costes que una empresa media, bien gestionada y adecuadamente equipada con medios de transporte para poder satisfacer las exigencias de servicio público requeridas, habría soportado para ejecutar dichas obligaciones, teniendo en cuenta los ingresos correspondientes y un beneficio razonable por la ejecución de estas obligaciones («cuarto criterio Altmark»). | |

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| (304) | La Comisión precisó cómo aplica los criterios Altmark en su comunicación relativa a la aplicación de las normas en materia de ayudas estatales a las compensaciones concedidas por la prestación de servicios de interés económico general («Comunicación SIEG») [(104)](#ntr104-L_2022097ES.01000101-E0104). |

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| (305) | Dado que deben cumplirse todos los criterios Altmark acumulativamente, la no observancia de cualquiera de estos criterios llevaría a la Comisión a la conclusión de que la medida objeto de análisis proporciona una ventaja económica al beneficiario. La Comisión evaluará en primer lugar el cumplimiento del cuarto criterio Altmark. |

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| (306) | El cuarto criterio Altmark dispone que la compensación debe ser el mínimo necesario para no ser considerada ayuda estatal. Este criterio se considera cumplido cuando el beneficiario de la compensación por servicio público haya sido elegido en el marco de un procedimiento de licitación que permita elegir al licitador capaz de prestar los servicios con el menor coste para la colectividad, o si esto no es posible, cuando la compensación se haya calculado en referencia a los costes de una empresa eficiente. |

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| (307) | Para ninguna de las prórrogas del convenio inicial en el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 31 de julio de 2012 se seleccionó a Siremar en el marco de un procedimiento de licitación pública. Italia simplemente prorrogó el sistema en vigor, autorizando de este modo al operador preestablecido a continuar recibiendo la compensación por la ejecución de las obligaciones de servicio público. |

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| (308) | Asimismo, las autoridades italianas no han facilitado a la Comisión indicación alguna de que el nivel de compensación se haya calculado sobre la base de un análisis de los costes que una empresa media, bien gestionada y adecuadamente equipada con medios de transporte para poder satisfacer las exigencias de servicio público requeridas, habría soportado para ejecutar estas obligaciones, teniendo en cuenta los ingresos correspondientes y un beneficio razonable. Italia únicamente ha argumentado que la compensación por servicio público concedida a Siremar se redujo considerablemente a partir de 2010 tras la introducción del importe máximo de compensación establecido por la Ley de 2009. No obstante, Italia no ha demostrado que los gastos incurridos por Siremar en la prestación de sus obligaciones de servicio público estuvieran en consonancia con los de una empresa media, bien gestionada y adecuadamente equipada con medios de transporte. |

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| (309) | La Comisión concluye, por tanto, que el cuarto criterio Altmark no se ha cumplido en el caso que nos ocupa. |

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| (310) | Dado que en el presente caso no se han respetado los cuatro criterios Altmark de forma acumulativa, la Comisión concluye que la compensación por la explotación de rutas marítimas con arreglo a la prórroga de los convenios iniciales proporcionó a Siremar una ventaja económica. |

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| (311) | En lo que respecta a la prioridad en la asignación de los puntos de amarre, la Comisión recuerda, en primer lugar, que la autoridad italiana de la competencia (AGCM) ha considerado al menos en dos ocasiones que esta medida tiene valor económico (véase el considerando 276). Sin embargo, Siremar no paga tasa alguna por la prioridad en la asignación de los puntos de amarre (véase el considerando 226). Además, la Comisión observa que esta prioridad tiene, al menos en teoría, el potencial para reducir los costes soportados por el operador (por ejemplo, porque el amarre garantizado puede reducir los tiempos de espera en los puertos y, por lo tanto, reducir los costes de combustible) o aumentar los ingresos (por ejemplo, porque los horarios pueden estimular la demanda de los pasajeros). En efecto, en la medida en que la prioridad en la asignación de puntos de amarre permite un procedimiento de atraque más rápido, los usuarios del servicio de transbordador pueden preferir al operador que se beneficia de esta medida. Incluso si estos efectos se produjeran en circunstancias raras o fueran relativamente limitados, la prioridad en la asignación de puntos de amarre podría, no obstante, constituir una ventaja económica para Siremar. |

8.1.1.4.   Efecto sobre la competencia y los intercambios comerciales

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| (312) | Cuando la ayuda concedida por un Estado miembro refuerza la posición de una empresa con respecto a otras que compiten en el mercado comercial de la UE, se considerará que esto afecta a las otras empresas [(105)](#ntr105-L_2022097ES.01000101-E0105). Basta con que el beneficiario de la ayuda compita con otras empresas en mercados abiertos a la competencia [(106)](#ntr106-L_2022097ES.01000101-E0106). |

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| (313) | En el caso que nos ocupa, el beneficiario lleva a cabo su actividad en competencia con otras empresas que prestan servicios de transporte marítimo en la Unión, en particular desde la entrada en vigor del Reglamento (CEE) n.o 4055/86 del Consejo [(107)](#ntr107-L_2022097ES.01000101-E0107) y del Reglamento sobre el cabotaje marítimo, por los que se liberaliza el mercado del transporte marítimo y del cabotaje marítimo respectivamente. Por lo tanto, es probable que la compensación por la explotación de rutas marítimas en el marco de la prórroga del convenio inicial afecte al comercio en la Unión y falsee la competencia en el mercado interior. Por los mismos motivos, esta conclusión se aplica también a la prioridad en la asignación de los puntos de amarre. |

8.1.1.5.   Conclusión

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| (314) | Dado que se cumplen todos los criterios del artículo 107, apartado 1, del TFUE, la Comisión concluye que la compensación por servicio público abonada sobre la base de las sucesivas prórrogas del convenio inicial y la prioridad en la asignación de puntos de amarre constituyen ayuda estatal en favor de Siremar. |

8.1.1.6.   Ayuda nueva o existente

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| (315) | La Comisión recuerda que, de conformidad con el artículo 1, letra c), del Reglamento (UE) n.o 2015/1589, se entenderá por «nueva ayuda»«todas las ayudas, es decir, los regímenes de ayuda y las ayudas individuales, que no sea ayuda existente, incluidas las modificaciones de ayudas existentes». En efecto, el artículo 108, apartado 3, del TFUE establece que los proyectos dirigidos a conceder o modificar ayudas existentes deben notificarse a la Comisión a su debido tiempo y no pueden ejecutarse antes de que en el procedimiento se haya llegado a una decisión definitiva [(108)](#ntr108-L_2022097ES.01000101-E0108). |

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| (316) | Siremar en AS considera que si la compensación por las obligaciones de servicio público concedida a Siremar hasta 2008 es ayuda existente en el sentido del artículo 4, apartado 3, del Reglamento sobre el cabotaje marítimo, esta clasificación también es aplicable a la compensación abonada sobre la base de la prórroga del convenio inicial (véase el considerando 237). La Comisión observa que la compensación abonada a Siremar por la ejecución de las obligaciones de servicio público marítimo hasta 2008 se evaluó en la Decisión del grupo Tirrenia de 2020 y, de hecho, se clasificó como ayuda existente (véase el considerando 19). |

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| (317) | Sin embargo, en consonancia con la posición de los órganos jurisdiccionales de la Unión [(109)](#ntr109-L_2022097ES.01000101-E0109), la Comisión considera que modificar (es decir, prorrogar) la duración de un régimen de ayudas con una fecha de expiración clara (en este caso, el 31 de diciembre de 2008) es suficiente para convertirla en nueva ayuda, independientemente de que se hayan modificado o no otras características de la medida. Sobre esta base, la Comisión concluye que la compensación por servicio público abonada en virtud de las sucesivas prórrogas del convenio inicial debe considerarse ayuda nueva. Por lo tanto, deben rechazarse las alegaciones de Siremar en AS. |

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| (318) | La Comisión observa que, ni las autoridades italianas, ni Siremar en AS, han alegado que la prioridad en la asignación de puntos de amarre constituya una ayuda existente. La Comisión evaluará, por lo tanto, esta medida como ayuda nueva. |

8.1.2.   Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar

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| (319) | La Comisión ya ha establecido en los considerandos 34 a 40 de la Decisión de 2010 que la medida de ayuda de salvamento notificada constituía una ayuda estatal concedida a Siremar en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE. |

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| (320) | En la Decisión de 2010, la Comisión declaró la ayuda de salvamento notificada concedida a Siremar compatible con el mercado interior. De conformidad con las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004, Italia se comprometió a comunicar a la Comisión, en un plazo de seis meses, un plan de reestructuración (o liquidación) o pruebas de que el préstamo había sido reembolsado en su totalidad o de que se había revocado la garantía. |

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| (321) | El primer pago del préstamo garantizado fue abonado a Siremar el 28 de febrero de 2011, por lo que el plazo de seis meses expiró el 28 de agosto de 2011. |

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| (322) | Italia no presentó a la Comisión un plan de reestructuración (o liquidación) antes de dicha fecha. El 11 de julio de 2011, el BIIS hizo valer la garantía y Siremar se convirtió en deudor del Estado (véase el considerando 63). El 18 de septiembre de 2012, Siremar reembolsó al Estado el importe adeudado (véase el considerando 65). Hasta esa fecha, Siremar siguió beneficiándose de la medida de ayuda de salvamento. |

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| (323) | Las autoridades italianas no han alegado ni demostrado que la prórroga de la ayuda de salvamento ya no constituya ayuda estatal, sino que se limitan a exponer argumentos (véase la sección 4.2) sobre la razón por la que la medida habría seguido siendo compatible incluso después de la expiración del plazo de seis meses. |

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| (324) | Por consiguiente, la Comisión considera que la prórroga de la ayuda de salvamento más allá del período de seis meses, es decir, del 28 de agosto de 2011 al 18 de septiembre de 2012, constituye también una ayuda estatal en favor de Siremar en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE. |

8.1.3.   La adjudicación a SNS del nuevo convenio asociado al sector de empresa de Siremar y su prioridad en la asignación de puntos de amarre, el aumento de capital de CdI y la contragarantía

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| (325) | Para determinar si la adjudicación del nuevo convenio asociado al sector de empresa de Siremar y la prioridad en la asignación de puntos de amarre constituyen una ventaja para SNS en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE, la Comisión debe verificar el cumplimiento de los criterios Altmark (véanse los considerandos 301 a 304). |

8.1.3.1.   Primer criterio Altmark

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| (326) | La Comisión recuerda que no hay ninguna definición uniforme y precisa de qué servicios pueden considerarse SIEG en el Derecho de la Unión, ya sea en el sentido del primer criterio Altmark o en el del artículo 106, apartado 2, del TFUE. El apartado 46 de la Comunicación sobre SIEG dice lo siguiente:  «A falta de normas específicas de la Unión que definan el alcance de la existencia de un SIEG, los Estados miembros disponen de un amplio margen de apreciación para definir un servicio determinado como servicio de interés económico general y para compensar al prestador del servicio. Las competencias de la Comisión al respecto se limitan a comprobar si el Estado miembro ha incurrido en error manifiesto al definir el servicio como SIEG y al evaluar la ayuda estatal contenida en la compensación. Además, cuando existan normas específicas de la Unión, la apreciación de los Estados miembros estará sujeta a ellas, sin perjuicio de la obligación de la Comisión de evaluar si el SIEG se ha definido correctamente a efectos del control de las ayudas estatales». |

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| (327) | Por consiguiente, se otorga a las autoridades nacionales la facultad de considerar determinados servicios como servicios de interés general y de estimar que deben llevarse a cabo sobre la base de obligaciones de servicio público a fin de garantizar la protección del interés público cuando las fuerzas del mercado no sean suficientes para garantizar la prestación de dichos servicios en el nivel o condiciones requeridos. |

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| (328) | En el contexto del cabotaje marítimo, el Reglamento sobre el cabotaje marítimo contiene algunas normas detalladas de la UE sobre obligaciones de servicio público y, por lo que se refiere a la verificación de la posible presencia de ayuda estatal a empresas que prestan servicios de transporte marítimo, se pueden consultar las Directrices comunitarias sobre ayudas estatales al transporte marítimo («Directrices marítimas») [(110)](#ntr110-L_2022097ES.01000101-E0110). |

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| (329) | A tenor del artículo 4, apartado 1, del Reglamento sobre el cabotaje marítimo,  «un Estado miembro podrá celebrar contratos de servicio público o imponer obligaciones de servicio público como condición para la prestación de servicios de cabotaje a las compañías navieras que participen en servicios regulares con origen o destino en islas y entre islas. Cada vez que un Estado miembro celebre contratos de servicio público o imponga obligaciones de servicio público, lo hará de forma no discriminatoria con respecto a todos los armadores comunitarios». |

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| (330) | El artículo 2, apartado 3, del Reglamento sobre el cabotaje marítimo establece que un contrato de servicio público puede incluir:   |  |  | | --- | --- | | — | servicios de transporte que cumplan normas establecidas de continuidad, regularidad, capacidad y calidad, |  |  |  | | --- | --- | | — | servicios de transporte complementarios, |  |  |  | | --- | --- | | — | servicios de transporte a determinados precios y condiciones, en particular para determinadas categorías de pasajeros o para determinados enlaces, |  |  |  | | --- | --- | | — | adaptaciones de los servicios a las necesidades reales. | |

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| (331) | La sección 9 de las Directrices de transporte marítimo establece que «podrán imponerse obligaciones de servicio público o celebrarse contratos de servicio público para los servicios a que se refiere el artículo 4 del Reglamento (CEE) n.o 3577/92 del Consejo», o servicios regulares con origen o destino en islas y entre islas. |

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| (332) | De la reiterada jurisprudencia se desprende que las obligaciones de servicio público solo pueden imponerse si están justificadas por la necesidad de garantizar unos adecuados servicios regulares de transporte marítimo que no pueden ser asegurados únicamente por las fuerzas del mercado [(111)](#ntr111-L_2022097ES.01000101-E0111). La Comunicación sobre la interpretación del Reglamento sobre el cabotaje marítimo [(112)](#ntr112-L_2022097ES.01000101-E0112) confirma que «corresponde a los Estados miembros (incluidas, en su caso, las autoridades regionales y locales) determinar en qué rutas se exigen obligaciones de servicio público En particular, podrán establecerse obligaciones de servicio público para los servicios regulares de cabotaje insular (de línea) si el mercado no ofrece servicios adecuados». Además, el artículo 2, apartado 4, del Reglamento sobre el cabotaje marítimo define las obligaciones de servicio público como aquellas que el armador en cuestión, si considerase su interés comercial, no asumiría o no asumiría en la misma medida o en las mismas condiciones. |

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| (333) | De conformidad con la jurisprudencia [(113)](#ntr113-L_2022097ES.01000101-E0113), para verificar si existe una necesidad real de servicio público y si el uso de un contrato de servicio público (es decir, el nuevo convenio) era necesario y proporcional y, por consiguiente, si se cumple el primer criterio Altmark, la Comisión evaluará:   |  |  | | --- | --- | | 1) | la existencia de una demanda de los usuarios; |  |  |  | | --- | --- | | 2) | la incapacidad de los participantes en el mercado para satisfacer esta demanda en ausencia de una obligación impuesta por las autoridades públicas (existencia de una deficiencia del mercado); |  |  |  | | --- | --- | | 3) | si el recurso a simples obligaciones de servicio público no bastaba para paliar tal carencia (el enfoque menos perjudicial). | |

1)   Demanda de los usuarios

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| (334) | En este caso, se encomendó a CdI y posteriormente a SNS la prestación, en varias líneas, de servicios mixtos de pasajeros y mercancías y de servicios de alta velocidad dedicados exclusivamente a los pasajeros. Las obligaciones de servicio público impuestas a CdI y posteriormente a SNS se refieren a los enlaces de transporte marítimo que deben prestarse, al tipo y a la capacidad de los buques asignados a las rutas marítimas respectivas, a la disponibilidad de un buque de reserva para garantizar la continuidad del servicio, a la frecuencia del servicio y a las tarifas máximas aplicadas a los usuarios del servicio en cada ruta correspondiente (es decir, tarifas más bajas para los residentes de las islas menores y tarifas más elevadas para los demás pasajeros). |

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| (335) | Como se explica en el considerando 184, Italia ha impuesto las obligaciones de servicio público establecidas en el nuevo convenio principalmente con el objetivo de: i) garantizar la continuidad territorial entre Sicilia y las islas menores y ii) contribuir al desarrollo económico de las islas afectadas, mediante servicios regulares y fiables de transporte marítimo. La Comisión considera que, sin duda, estos pueden ser objetivos de interés público legítimos. |

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| (336) | Antes de que CdI estuviera inicialmente encargado de la explotación de los enlaces marítimos definidos por el nuevo Convenio, estas rutas eran explotadas por Siremar sobre la base de los convenios iniciales. La Comisión observa que las rutas en cuestión se explotan, sin demasiados cambios, desde hace muchos años, como mínimo desde la entrada en vigor del convenio inicial [(114)](#ntr114-L_2022097ES.01000101-E0114). Al encomendar el nuevo convenio en 2012, las autoridades italianas, y en particular Sicilia, consideraron que estos servicios seguían siendo necesarios para satisfacer la demanda de los usuarios. |

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| (337) | Para ilustrar la demanda real del servicio por parte de los usuarios, Italia facilitó estadísticas que mostraban que en 2010, Siremar transportó 1 342 402 pasajeros y 311 114,50 metros lineales de carga en los cinco grupos de rutas combinadas, y en 2011, 1 332 400 pasajeros y 290 704,70 metros lineales de carga. Esto demuestra que, en los dos años anteriores a la atribución de la obligación de servicio público a CdI, existía una fuerte demanda agregada de servicios de transporte marítimo en las rutas en cuestión. |

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| (338) | Sin embargo, para demostrar la existencia de una demanda real de los usuarios en cada una de las veinte rutas afectadas, reunidas en cinco grupos, es necesaria una evaluación más detallada. A tal fin, Italia ha facilitado estadísticas sobre rutas individuales para el período 2007-2019 [(115)](#ntr115-L_2022097ES.01000101-E0115), que muestran el número total de pasajeros y metros lineales de mercancías transportadas cada año, lo que permite calcular las medias por itinerario. Como ejemplo, en el cuadro 5 se presentan los datos de estos dos parámetros correspondientes a los años 2010 y 2019. Las cifras muestran que, en ambos años, la mayoría de los viajes de ida y regreso en las rutas en cuestión transportaron más de cien pasajeros. En 2010, en solo cuatro rutas, se transportaron menos de cien pasajeros por término medio, mientras que en 2019 solo en tres rutas. La Comisión observa que el bajo número de pasajeros en estas rutas individuales puede explicarse por la reducida población y el pequeño tamaño de las islas afectadas, así como por los trayectos relativamente cortos y frecuentes necesarios para satisfacer las necesidades de movilidad de los habitantes de dichas islas. La Comisión también ha analizado las estadísticas de cada ruta para cada año hasta finales de 2019 [(116)](#ntr116-L_2022097ES.01000101-E0116) y ha constatado que ha habido fluctuaciones a lo largo de los años en el número de viajes y pasajeros registrados en las distintas rutas. Sin embargo, esto se debe al hecho de que son islas muy pequeñas con una infraestructura portuaria limitada relativamente cercana entre sí. Esto requiere un ajuste frecuente de los horarios para satisfacer las necesidades locales (por ejemplo, modelos de desplazamientos diarios por motivos escolares o laborales) y mitigar los posibles problemas de conexión (por ejemplo, si un muelle está en mantenimiento y solo puede acoger buques más pequeños o menos buques al mismo tiempo, es posible que no se realice un enlace de agrupaciones durante un determinado período de tiempo, mientras que otras rutas de la agrupación pueden operar con mayor frecuencia). Sin embargo, los datos de que dispone la Comisión no indican que la demanda de los usuarios de ninguna ruta o agrupación de rutas haya desaparecido.   |  |  |  |  |  |  | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | |  | | Número medio de pasajeros/travesía [(117)](#ntr117-L_2022097ES.01000101-E0117) | | Carga media/travesía [(118)](#ntr118-L_2022097ES.01000101-E0118) | | | Rutas de servicios mixtos | | 2010 | 2019 | 2010 | 2019 | | Grupo Milazzo – Islas Eolias – Nápoles | C/1 | […] | […] | […] | […] | | C/2 | […] | […] | […] | […] | | C/3 | […] | […] | […] | […] | | C/4 | […] | […] | […] | […] | | C/6 | […] | […] | […] | […] | | Grupo Palermo – Ustica | D/1 | […] | […] | […] | […] | | Grupo Trapani – Islas Egadas | D/2 | […] | […] | […] | […] | | D/3 | […] | […] | […] | […] | | Grupo Trapani – Pantelleria | D/4 | […] | […] | […] | […] | | Grupo Trapani – Islas Pelagias | D/5 | […] | […] | […] | […] | |  | | Número medio de pasajeros/travesía | | | | | Rutas de transporte de pasajeros | | 2010 | | 2019 | | | Grupo Milazzo – Islas Eolias (– Nápoles) | ALC/2. | […] | | […] | | | ALC/2 bis | […] | | […] | | | ALC/3. | […] | | […] | | | ALC/4. | […] | | […] | | | ALC/6. | […] | | No aplicable[(119)](#ntr119-L_2022097ES.01000101-E0119) | | | Grupo Palermo – Ustica | ALD/1. | […] | | […] | | | Grupo Trapani – Islas Egadas | ALD 2/3 | […] | | […] | | | ALD 2/3 bis | […] | | […] | |   Cuadro 5 – Estadísticas de demanda de los usuarios en 2010 (gestión de Siremar) y 2019 (gestión de SNS) |

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| (339) | Para demostrar que la demanda de los usuarios seguía estando presente cuando CdI, y posteriormente SNS, comenzaron a operar las rutas con arreglo al nuevo convenio, Italia facilitó estadísticas adicionales. Los datos del cuadro 6 muestran que, desde 2013, CdI, y posteriormente SNS, han transportado a más pasajeros y mercancías que Siremar en 2010 y 2011 (véase el considerando 337). Aunque ha habido algunas fluctuaciones a lo largo del tiempo, estos datos confirman que la demanda de los usuarios se ha mantenido e incluso ha aumentado en los últimos años.   |  |  |  | | --- | --- | --- | |  | Número de pasajeros transportados | Mercancías transportadas (en metros lineales) | | 2012 (agosto – diciembre) | […] | […] | | 2013 | […] | […] | | 2014 | […] | […] | | 2015 [(120)](#ntr120-L_2022097ES.01000101-E0120) | […] | […] | | 2016 (abril – diciembre) [(121)](#ntr121-L_2022097ES.01000101-E0121) | […] | […] | | 2017 | […] | […] | | 2018 | […] | […] | | 2019 | […] | […] |   Cuadro 6 – Estadísticas para los años 2012-2019 (rutas mixtas y solo de pasajeros explotadas por CdI y SNS) |

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| (340) | La Comisión considera que las estadísticas anteriores (véanse los considerandos 337, 338 y 339) demuestran claramente que existe una demanda efectiva de servicios de transporte de pasajeros y mercancías en cada una de las veinte rutas de servicio público en cuestión, que se dividen en cinco grupos. Por consiguiente, puede concluirse que estos servicios responden a la demanda real de los usuarios, correspondiendo así a las necesidades reales de servicio público. |

2)   Presencia de una deficiencia del mercado

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| (341) | Según el apartado 48 de la Comunicación SIEG, «no sería adecuado vincular obligaciones específicas de servicio público a una actividad que ya efectúan, o pueden efectuar satisfactoriamente y en condiciones, tales como el precio, las características de calidad objetivas, la continuidad y el acceso al servicio acordes con el interés público, definido por el Estado, empresas que operan en condiciones normales de mercado» [(122)](#ntr122-L_2022097ES.01000101-E0122). Por consiguiente, la Comisión debe examinar si el servicio sería inadecuado, a la luz de las obligaciones de servicio público impuestas por el Estado miembro mediante el nuevo acuerdo, si se encomendara únicamente a las fuerzas del mercado. El apartado 48 de la Comunicación SIEG señala a este respecto que «la evaluación de la Comisión se limita a comprobar si el Estado miembro ha cometido errores manifiestos». |

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| (342) | La Comisión ya ha analizado, en el contexto de decisiones anteriores, si existía una deficiencia de mercado en estas agrupaciones de rutas. En particular, en la Decisión de 2004, la Comisión señaló que, por lo que se refiere a Siremar, ninguno de los operadores privados italianos de las agrupaciones de rutas explotadas por el operador público (entonces) ofrecía servicios comparables durante todo el año que pudieran cumplir plenamente las exigencias de servicio público establecidas en los planes quinquenales [(123)](#ntr123-L_2022097ES.01000101-E0123). Esta conclusión se refiere al período 1992-2008 y no queda desvirtuada por la sentencia de 2009 por la que se anula la Decisión de 2004, ni por la Decisión del Grupo Tirrenia de 2020, que concluyó que la compensación por servicio público concedida a Siremar era una ayuda existente. |

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| (343) | Sin embargo, en la Decisión de 2012, la Comisión señaló que, durante el período anterior a la primera adjudicación del nuevo acuerdo, otros operadores prestaban servicios regulares en las rutas en cuestión [(124)](#ntr124-L_2022097ES.01000101-E0124). En aquel momento, Italia alegó que Sicilia, a través de distintos procedimientos de licitación, había seleccionado a estos otros operadores para prestar servicios públicos adicionales en el marco de contratos diferentes. Antes de llevar a cabo la evaluación, la Comisión observa lo siguiente. |

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| (344) | En primer lugar, esta evaluación se limita a la situación competitiva del mercado en los años anteriores a julio de 2012, ya que es el período que las autoridades italianas tuvieron en cuenta a la hora de definir las obligaciones de servicio público. Aunque el nuevo convenio impone obligaciones específicas de servicio público en cuanto a las tarifas que deben aplicarse (incluidas las tarifas reducidas para los residentes de islas menores), Italia no ha justificado la necesidad del servicio público alegando que CdI y, posteriormente SNS, tenían que mantener tarifas inferiores a aquella aplicadas por los demás operadores. En el curso de la investigación, Italia alegó más bien que, aunque otros operadores prestaban servicios de transbordador en las rutas explotadas por CdI, y posteriormente por SNS, estos servicios competidores eran diferentes en términos de continuidad y frecuencia a lo largo del año, no eran equivalentes (en términos de puertos o tipo de servicio, por ejemplo, prestando transporte exclusivo de pasajeros en lugar de transporte mixto), no ofrecían el mismo nivel de calidad o también estaban subvencionados en virtud de contratos diferentes. Por ello, la Comisión no ha realizado un análisis comparativo de las tarifas cobradas por todos los operadores en las rutas en cuestión. Por el contrario, la Comisión se centró en las posibles diferencias en la continuidad, la regularidad, la capacidad y la calidad (véase el considerando 330), así como en si los operadores competidores también estaban subvencionados en virtud de diferentes contratos. |

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| (345) | En segundo lugar, la Comisión observa que los servicios comparables ofrecidos por otros operadores en las agrupaciones de rutas definidas en el nuevo convenio también se prestaron en el marco de sistemas de compensación pública, como SIEG complementarios definidos por Sicilia [(125)](#ntr125-L_2022097ES.01000101-E0125). En principio, la presencia de otros prestadores de SIEG en las agrupaciones de rutas cubiertas por el nuevo convenio no pone en tela de juicio la validez del SIEG para tales agrupaciones, sino que la refuerza, ya que sugiere que la necesidad de tales rutas era tan fuerte o variada que solo varios operadores podrían satisfacerla. En efecto, el hecho de que otros operadores estén presentes en un determinado grupo de rutas no puede indicar que solo las fuerzas del mercado puedan atender adecuadamente a esta agrupación, aunque esos otros operadores reciban una compensación pública en virtud de diferentes contratos para ofrecer sus servicios. |

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| (346) | En tercer lugar, Italia ha identificado veinte rutas, divididas en cinco grupos o redes de enlaces, que deben incluirse en el nuevo convenio [(126)](#ntr126-L_2022097ES.01000101-E0126). La Comisión observa que, según la sección 5.5.3 de la Comunicación sobre la interpretación del Reglamento sobre el cabotaje marítimo [(127)](#ntr127-L_2022097ES.01000101-E0127), «los Estados miembros están a menudo en favor de reagrupar las rutas que conectan diferentes islas en régimen de servicio público en un único paquete con el fin de lograr economías de escala y atraer operadores. Los paquetes como tales no son contrarios al Derecho de la Unión, siempre que la venta asociada no dé lugar a discriminación ni a falseamientos indebidos del mercado. El tamaño más los paquetes debe decidirse en función de la mejor sinergia para responder a las necesidades esenciales de transporte». |

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| (347) | En este caso, las rutas se fusionaron en agrupaciones geográficas por motivos de planificación, para identificar posibles lagunas o solapamientos y para garantizar un conjunto coherente y completo de enlaces para los habitantes de las islas, tanto con Sicilia como con las demás islas, en particular las relativamente grandes. De hecho, el cuadro 3 muestra que las rutas dentro de cada grupo se solapan y se complementan a menudo [(128)](#ntr128-L_2022097ES.01000101-E0128). Dada la presencia de algunos servicios esenciales, como escuelas, grandes almacenes de alimentos y servicios médicos especializados, solo en Sicilia o en las islas relativamente grandes, Italia ha optado por confiar agrupaciones de líneas en lugar de líneas individuales. De hecho, aunque si los operadores privados ofrecen algunos enlaces entre las islas relativamente grandes (por ejemplo, Lipari y Pantelleria) y Sicilia, no ofrecen conexiones con y entre todas las islas a lo largo del año. Dada la necesidad de garantizar los enlaces entre numerosas islas pequeñas situadas en zonas diferentes y a veces relativamente remotas, la Comisión considera que Italia no ha cometido un error manifiesto al identificar los cinco grupos que abarcan una o más rutas, en función de las características de la isla o del archipiélago en cuestión. Por estas razones, dadas las circunstancias particulares del caso, la Comisión no evaluó cada vínculo individual, sino que se centró en cada agrupación, que trató como un conjunto coherente de enlaces hacia y desde una isla y hacia y desde un archipiélago. |

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| (348) | A la luz de lo anterior, sobre la base de la situación competitiva existente en el período anterior a la primera atribución, el 30 de julio de 2012, y sobre la base de las observaciones formuladas por las partes interesadas (véase la sección 5), la Comisión analizó cada grupo de rutas para comprobar que Italia no había cometido un error manifiesto al establecer la existencia de una deficiencia del mercado:   |  |  | | --- | --- | | — | Milazzo – Islas Eolias – Nápoles. CdI explotaba y SNS explota cinco rutas con transbordadores y cinco rutas con buques rápidos que establecen enlaces entre las Islas Eolias con Sicilia y el continente [(129)](#ntr129-L_2022097ES.01000101-E0129). En el contexto de esta agrupación, durante el período 2009-2012, los competidores fueron Ustica Lines, NGI, SNAV y Alilauro. Ustica Lines y NGI operaban durante todo el año entre Milazzo y las Islas Eolias, en régimen de compensación pública concedida en virtud de contratos separados: Ustica Lines prestó servicios de alta velocidad en dos rutas, mientras que NGI operó un servicio mixto en una ruta. SNAV y Alilauro solo prestaban un servicio marítimo rápido en temporada alta en las rutas entre Nápoles y las islas Eolias, sin recibir ninguna compensación pública. La Comisión observa, en primer lugar, que los competidores no ofrecían servicios comparables a CdI y, posteriormente, a SNS, en lo que respecta a las rutas operadas, la frecuencia y la capacidad. Por el contrario, solo operaban en una o dos rutas, prestando un servicio mucho más limitado en términos de capacidad y horarios. En particular, NGI prestaba servicios de transbordador utilizando buques sujetos a diferentes requisitos de capacidad. En cuanto a SNAV y Alilauro, sus servicios no incluían un enlace con Milazzo, ya que sus rutas comunicaban Nápoles con las islas Eolias y ofrecían enlaces en el archipiélago. Además, estos operadores privados no prestaban servicio en estas rutas en la temporada baja. Por consiguiente, estos servicios no son comparables a los operados inicialmente por CdI y posteriormente por SNS en virtud del nuevo convenio. Pan Med alegó que los competidores ofrecían servicios similares en este grupo (véase el considerando 272), pero no especificaron quiénes eran esos competidores, ni demostró por qué consideraban que sus servicios eran similares o comparables a los prestados por CdI y, posteriormente, por SNS. En este contexto, la Comisión observa que todos los operadores que prestaban servicios durante todo el año en estas rutas lo hicieron a cambio de una compensación pública. Esto, junto con el contexto geográfico y demográfico de las islas en cuestión (con una población de aproximadamente 100 habitantes en Alicudi y alrededor de 10 700 en Lipari), demuestra que las fuerzas del mercado por sí solas no eran suficientes para proporcionar el nivel de enlaces necesario para garantizar la continuidad territorial. De hecho, la Comisión concluye que ningún otro operador, teniendo en cuenta únicamente su propio interés comercial, habría prestado servicios al nivel exigido por el nuevo convenio. Por consiguiente, Italia no incurrió en error manifiesto al considerar que existía una deficiencia del mercado en este grupo de rutas; |  |  |  | | --- | --- | | — | Trapani – Islas Egadas. CdI explotaba y SNS explota dos rutas con transbordadores y cuatro con buques de alta velocidad [(130)](#ntr130-L_2022097ES.01000101-E0130). Ustica Lines y Traghetti delle Isole [(131)](#ntr131-L_2022097ES.01000101-E0131) también operaban rutas a lo largo del año entre las islas Egadas y Sicilia, ofreciendo servicios de alta velocidad y de transbordadores, respectivamente. La Comisión observa, en primer lugar, que Ustica Lines y Traghetti delle Isole recibieron de Sicilia una compensación por la prestación de estos servicios en virtud de otros contratos. Además, para Traghetti delle Isole, la frecuencia solicitada era diferente de la proporcionada por CdI y, posteriormente, por SNS, ya que Traghetti delle Isole no estaba obligada a proporcionar enlaces diarios como CdI y, posteriormente, SNS. Además, Traghetti delle Isole prestaba servicios de transbordador a través de buques sujetos a diferentes requisitos de capacidad, que incluían, por ejemplo, el transporte de mercancías peligrosas. Para Ustica Lines, la frecuencia solicitada era similar a la proporcionada por CdI y después por SNS (varios enlaces diarios). Sin embargo, Ustica Lines prestaba sus servicios a través de buques sujetos a diferentes requisitos de capacidad. En este contexto, la Comisión observa que todos los operadores que prestan servicios durante todo el año en estas rutas lo hicieron a cambio de una compensación pública. Esto, junto con el contexto geográfico y demográfico de las islas en cuestión (la población total de Favignana, Levanzo y Marettimo es de 4 300 habitantes), demuestra que las fuerzas del mercado por sí solas no eran suficientes para proporcionar el nivel de enlaces necesario para garantizar la continuidad territorial. De hecho, la Comisión concluye que ningún otro operador, teniendo en cuenta únicamente su propio interés comercial, habría prestado servicios al nivel exigido por el nuevo convenio. Por consiguiente, Italia no incurrió en error manifiesto al considerar que existía una deficiencia del mercado en este grupo de rutas; |  |  |  | | --- | --- | | — | Port Empedocle – Islas Pelagias. CdI operaba y SNS explota tanto servicios de transbordador como de alta velocidad a lo largo del año. Ustica Lines fue el único operador que prestó servicios de alta velocidad durante todo el año en esa ruta, con un servicio adicional de alta velocidad en temporada alta. La Comisión observa, en primer lugar, que Ustica Lines recibió una compensación de Sicilia por la prestación de dichos servicios en virtud de otro contrato. Además, Ustica Lines prestaba un servicio dedicado exclusivamente a los pasajeros, sin transporte de mercancías y con una frecuencia diferente. Por consiguiente, sus servicios no son comparables a los prestados por CdI y, posteriormente, por SNS en el marco del nuevo convenio. En este contexto, la Comisión observa que el único operador que presta servicios durante todo el año en esa agrupación de rutas recibió una compensación pública. Esto, junto con el contexto geográfico y demográfico de las islas en cuestión (la población total de Linosa y Lampedusa es de 6 500 habitantes), demuestra que las fuerzas del mercado por sí solas no eran suficientes para proporcionar el nivel de enlaces necesario para garantizar la continuidad territorial. De hecho, la Comisión concluye que ningún otro operador, teniendo en cuenta únicamente su propio interés comercial, habría prestado servicios al nivel exigido por el nuevo convenio. Por consiguiente, Italia no incurrió en error manifiesto al considerar que existía una deficiencia del mercado en este grupo de rutas; |  |  |  | | --- | --- | | — | Trapani – Pantelleria. CdI explotaba y SNS presta servicios de transbordador durante todo el año. Traghetti delle Isole fue el único operador que prestaba servicios de transbordador durante todo el año en esta ruta. La Comisión observa, en primer lugar, que Traghetti delle Isole también recibió una compensación de Sicilia por la prestación de dichos servicios en virtud de contratos separados. Además, Traghetti delle Isole prestaba servicios de transbordador con una frecuencia similar a la ofrecida por CdI y, posteriormente, por SNS, a través de buques sujetos a diferentes requisitos de capacidad, que incluían, por ejemplo, el transporte de mercancías peligrosas. Pan Med alegó que los competidores ofrecían servicios similares en este grupo (véase el considerando 272), pero no especificaron quiénes eran esos competidores, ni demostró por qué consideraban que sus servicios eran similares o comparables a los prestados por CdI y, posteriormente, por SNS. En este contexto, la Comisión observa que el único operador que prestó servicios durante todo el año en estas rutas lo hizo a cambio de una compensación pública. Esto, junto con el contexto geográfico y demográfico de Pantelleria (una pequeña isla de unos 7 800 habitantes), demuestra que las fuerzas del mercado por sí solas no eran suficientes para proporcionar el nivel de conexiones necesario para garantizar la continuidad territorial. De hecho, la Comisión concluye que ningún otro operador, teniendo en cuenta únicamente su propio interés comercial, habría prestado servicios al nivel exigido por el nuevo convenio. Por consiguiente, Italia no incurrió en error manifiesto al considerar que existía una deficiencia del mercado en este grupo de rutas; |  |  |  | | --- | --- | | — | Palermo – Ustica. CdI operaba y SNS explota tanto servicios de transbordador como de alta velocidad a lo largo del año. Ustica Lines y NGI estuvieron presentes en la ruta a lo largo del año: El primero prestaba un servicio de alta velocidad y el segundo un servicio de transbordador. La Comisión observa, en primer lugar, que Ustica Lines y NGI también recibieron una compensación de Sicilia por la prestación de dichos servicios en virtud de otros contratos. Además, ambos operadores prestaban servicios de transbordador a través de buques sujetos a diferentes requisitos de capacidad que, para NGI, incluían el transporte de mercancías peligrosas. La frecuencia solicitada también era diferente de la proporcionada por CdI y, posteriormente, por SNS, ya que los demás operadores no estaban obligados a ofrecer conexiones diarias, como CdI y, posteriormente, SNS. Pan Med alegó que los competidores ofrecían servicios similares en este grupo (véase el considerando 272), pero no especificaron quiénes eran esos competidores, ni demostró por qué consideraban que sus servicios eran similares o comparables a los prestados por CdI y, posteriormente, por SNS. En este contexto, la Comisión observa que todos los operadores que prestan servicios durante todo el año en este grupo de rutas recibieron una compensación pública. Esto, junto con el contexto geográfico y demográfico de Ustica (una isla muy pequeña con unos 1 300 habitantes), demuestra que las fuerzas del mercado por sí solas no eran suficientes para proporcionar el nivel de conexiones necesario para garantizar la continuidad territorial. De hecho, la Comisión concluye que ningún otro operador, teniendo en cuenta únicamente su propio interés comercial, habría prestado servicios al nivel exigido por el nuevo convenio. Por lo tanto, Italia no cometió un error manifiesto al considerar que existía una deficiencia del mercado en este grupo de rutas. | |

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| (349) | Habida cuenta de lo anterior, la Comisión concluye que, en el momento de la atribución del servicio, las fuerzas del mercado no eran suficientes para responder a las necesidades de servicio público. A este respecto, la Comisión observa también que en todos los grupos de rutas que explota actualmente SNS en virtud del nuevo Convenio, los servicios prestados en cierta medida por otros operadores también estaban subvencionados y, en cualquier caso, no eran plenamente equivalentes en términos de continuidad, regularidad, capacidad y calidad, por lo que no respondían plenamente a las necesidades de servicio público identificadas por Italia en el nuevo convenio. |

3)   Enfoque menos nocivo

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| (350) | La Comisión observa que las autoridades italianas optaron por celebrar un contrato de servicio público con un operador (CdI y, posteriormente, SNS) en lugar de imponer obligaciones de servicio público a varios operadores. Sobre la base de la información facilitada por Italia, la Comisión toma nota de que la demanda de los usuarios (como se ha descrito anteriormente, véanse los considerandos 334 a 340) no habría podido satisfacerse a menos que se impusieran obligaciones de servicio público. En todas las agrupaciones de rutas, la prestación de servicios regulares durante todo el año requiere una compensación por servicio público. Cuando hay operadores privados que no reciben compensación por servicio público, la oferta solo está prevista para la temporada alta (véase el considerando 348). Además, un análisis detallado de la contabilidad de ruta en el marco del nuevo convenio muestra que la explotación de todas las rutas por SNS en 2017, 2018 y 2019 es estructuralmente deficitaria. De ello se deduce que, a falta de compensación por la obligación de servicio público, dichos servicios no se explotarían con la frecuencia, la capacidad y la calidad deseadas [(132)](#ntr132-L_2022097ES.01000101-E0132). Ecorys llegó a una conclusión similar en su informe para la Comisión (véase el considerando 119). Además, la Comisión toma nota del argumento de Italia de que la elección de un contrato de servicio público también era necesaria con vistas a la privatización de Siremar. Más concretamente, Italia alegó que la organización de una licitación para los activos de Siremar asociados a un nuevo contrato de servicio público había permitido: i) garantizar la continuidad del servicio público marítimo; ii) maximizar el valor para el Estado y iii) proteger el empleo. Por estas razones, la Comisión aceptó que Italia organizara un procedimiento de licitación para el sector de empresa de Siremar junto con el nuevo convenio (véase el considerando 136). De este modo, la Comisión también ha reconocido, y reitera en la presente Decisión, que Italia no habría considerado las obligaciones de servicio público aplicables a todos los operadores, sino que habría celebrado un único contrato de servicio público con CdI y después con SNS. |

Conclusión

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| (351) | Sobre la base de la evaluación anterior, la Comisión concluye que Italia no ha cometido un error manifiesto al definir los servicios confiados a CdI y, posteriormente, a SNS como SIEG. Las dudas expresadas por la Comisión en la Decisión de 2012 quedan, por tanto, disipadas. |

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| (352) | Para concluir que se cumple el primer criterio Altmark, la Comisión debe verificar, no obstante, si se ha encomendado a CdI y, posteriormente, a SNS obligaciones de servicio público claramente definidas. A este respecto, la Comisión observa que las obligaciones de servicio público se describen claramente en el nuevo convenio y sus anexos (que incluyen, por ejemplo, las especificaciones de los buques para cada ruta). Del mismo modo, las normas que rigen la compensación se describen detalladamente en el convenio, en la Ley de 2009 y en la Decisión del CIPE. El nuevo acuerdo también tiene una duración claramente establecida (doce años), identifica a CdI y después a SNS como el operador de servicio público y contiene disposiciones para evitar una compensación excesiva y su posible recuperación (véase también la sección 2.3.4). Por consiguiente, la Comisión concluye que se cumple el primer criterio Altmark. |

Prioridad en la asignación de los puntos de amarre

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| (353) | El artículo 19 ter, apartado 21, de la Ley n.o 135/2009 especifica claramente que la prioridad en la asignación de puntos de amarre es necesaria para garantizar la continuidad territorial con las islas y a la luz de las obligaciones de servicio público de las empresas del antiguo grupo Tirrenia (incluida Siremar). En efecto, a falta de tal prioridad en favor de las empresas a las que se han encomendado obligaciones de servicio público, en ocasiones estas empresas podrían tener que esperar su turno para atracar y, por tanto, sufrir retrasos que frustrarían el objetivo de ofrecer a los ciudadanos enlaces fiables y asequibles. Para satisfacer las necesidades de movilidad de la población de las islas menores y contribuir a su desarrollo económico, es necesario disponer de horarios regulares. Además, dado que el nuevo convenio contiene determinados requisitos en cuanto a los horarios, como la obligación de tener en cuenta los horarios de otros medios de transporte (por ejemplo, autobuses), es necesario dar prioridad a la asignación de puntos de amarre para garantizar que los puertos asignen los puntos de amarre y los tiempos de atraque de manera que el operador de servicio público pueda cumplir sus obligaciones de servicio público. Esta prioridad en la asignación de puntos de amarre se transfirió a CdI y, posteriormente, a SNS tras la adquisición del sector de empresa de Siremar. En este contexto, la Comisión considera que la medida en cuestión se concedió con el objetivo de permitir a CdI y, posteriormente, s SNS cumplir sus obligaciones de servicio público, que constituyen un auténtico servicio de interés económico general (véase el considerando 351). Por consiguiente, la prioridad en la asignación de los puntos de amarre también cumple el primer criterio Altmark. |

8.1.3.2.   Segundo criterio Altmark

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| (354) | La Comisión recuerda que en la Decisión de 2012 (véase el considerando 205) había considerado de forma preliminar que se cumple el segundo criterio de la sentencia Altmark. |

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| (355) | En este contexto, la Comisión observa que los parámetros sobre cuya base se calculó la compensación se definieron de antemano y se ajustaron a los requisitos de transparencia en consonancia con el segundo criterio Altmark. |

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| (356) | En concreto, los parámetros en base a los cuales se calculó la compensación se explican con detalle en la resolución del CIPE y se han aplicado en el nuevo convenio (y sus anexos), mientras que los importes máximos de la compensación se recogen en la Ley de 2009. El método de cálculo de la compensación, incluidos, por ejemplo, los elementos de coste tenidos en cuenta, se detallan en la resolución del CIPE. Dado que la prioridad en la asignación de puntos de amarre no incluye ninguna transferencia financiera al operador del servicio, la Comisión considera que esta medida cumple el segundo criterio Altmark. |

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| (357) | Por consiguiente, la Comisión concluye que se cumple la segunda condición de la sentencia Altmark. |

8.1.3.3.   Tercer criterio Altmark

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| (358) | Según el tercer requisito de la sentencia Altmark, la compensación recibida no puede exceder de lo necesario para cubrir total o parcialmente los costes ocasionados por la ejecución de las obligaciones de servicio público, teniendo en cuenta los ingresos correspondientes y un beneficio razonable. |

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| (359) | No obstante, la sentencia Altmark no ofrece una definición precisa de beneficio razonable. De acuerdo con la Comunicación sobre SIEG, se debe entender «por beneficio razonable» la tasa de rendimiento del capital que requeriría una empresa media que estuviera considerando si prestar o no el servicio de interés económico general a lo largo de toda la duración del período de atribución, teniendo en cuenta el nivel de riesgo. El nivel de riesgo depende del sector en cuestión, del tipo de servicio y de las características del mecanismo de compensación. |

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| (360) | En la Decisión de 2012, la Comisión expresó sus dudas en cuanto a la proporcionalidad de la compensación abonada a CdI. En particular, la Comisión llegó a la conclusión preliminar de que la prima de riesgo del 6,5 % no refleja un nivel de riesgo adecuado, ya que, a primera vista, CdI no parecía asumir los riesgos normalmente asumidos en la gestión de estos servicios. En concreto, los elementos de coste tenidos en cuenta para calcular la compensación incluyen todos los costes que conlleva la prestación del servicio y, por ejemplo, se han considerado las variaciones en los precios del combustible. Por consiguiente, en esta fase, la Comisión consideró que CdI podría haber recibido una compensación excesiva. |

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| (361) | La Comisión observa que determinados aspectos del método de compensación con arreglo al nuevo convenio parecen efectivamente reducir el riesgo comercial asumido por CdI y, posteriormente, por SNS. En particular, las tarifas máximas que el titular puede aplicar se ajustarán anualmente para tener en cuenta la inflación y la evolución del coste del combustible. Además, el nuevo Convenio contiene una serie de cláusulas destinadas a mantener el equilibrio económico y financiero del servicio público (véase el considerando 130). En particular, en caso de que la compensación por servicio público no sea suficiente para cubrir el coste de los servicios encomendados en virtud del nuevo acuerdo, estas cláusulas permiten revisar: i) el alcance de tales servicios, ii) la forma en que se prestan dichos servicios (por ejemplo, el tipo de buques), o iii) las tarifas máximas. |

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| (362) | No obstante, estas cláusulas están sujetas a una serie de restricciones. En particular, en virtud del artículo 8 del nuevo convenio, el equilibrio económico-financiero del servicio público solo se revisa cada tres años. Si la revisión muestra que la compensación no basta para cubrir el coste del servicio público, el operador y las autoridades italianas solo pueden convenir cambios para el siguiente período de tres años. En caso de que los ingresos o costes del servicio público muestren diferencias estructurales imprevisibles que sean un 3 % superiores o inferiores a los valores establecidos en el nuevo convenio, el artículo 9 permite a las partes solicitar (con sujeción a una serie de condiciones) una revisión del equilibrio económico y financiero. Con arreglo a ambos artículos, estas (posibles) modificaciones se adoptan al término de un proceso de negociación y, hasta que se alcance un acuerdo, el operador debe seguir explotando el servicio público sin modificaciones. Como consecuencia de ello, el operador sigue estando parcialmente expuesto al riesgo de que la compensación sea insuficiente para cubrir los costes de explotación del servicio. Aunque los artículos 8 y 9 del nuevo convenio pueden utilizarse para restablecer el equilibrio económico y financiero, las modificaciones solo se refieren a períodos posteriores y no pueden hacerse correcciones retroactivas. |

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| (363) | Como se explica en los considerandos 49 a 58, la resolución del CIPE establece que se utiliza una prima de riesgo del 6,5 % para determinar el rendimiento del capital sobre la base de la fórmula del coste medio ponderado del capital (CMPC). En particular, en el caso de Siremar, Italia consideró inicialmente un índice beta de 0,56. El índice beta expresa el riesgo de la actividad del operador y su nivel demuestra que, al calcular la rentabilidad del capital, Italia tuvo en cuenta el hecho de que el riesgo de la actividad del operador es sustancialmente inferior al del mercado. No obstante, en el curso de la investigación formal (véase el considerando 218), Italia ha aclarado que, dado que el importe de la compensación está limitado por la Ley de 2009, la decisión se adoptó para simplificar el cálculo aplicando el 6,5 % como tasa fija de rendimiento del capital. Las autoridades italianas también demostraron que la aplicación de toda la metodología establecida en la resolución del CIPE daría lugar a un rendimiento del capital superior al 6,5 % (es decir, del 8,87 %). Por este motivo, Italia considera que su enfoque simplificado es prudente y no da lugar a una compensación a favor del operador superior a la establecida en la Decisión del CIPE. |

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| (364) | En este contexto, en el considerando 363 de la Decisión sobre Tirrenia/CIN de 2020, la Comisión comparó el rendimiento del capital del 6,5 %, que también se aplicó en el cálculo de la compensación para la empresa objeto de dicha investigación (CIN) con la rentabilidad media del capital generado por un grupo de referencia en 2011 (el año anterior a la primera atribución a CdI). El grupo de referencia consiste en operadores seleccionados de transbordadores que ofrecían enlaces marítimos en el territorio italiano o entre Italia y otros Estados miembros [(133)](#ntr133-L_2022097ES.01000101-E0133). La Comisión observa que Siremar es un operador de un tamaño comparable a CIN. Sin embargo, las rutas en cuestión son diferentes de las operadas por CIN, ya que son más cortas y comunican islas menores. La Comisión considera que, aunque el grupo destinatario sigue siendo pertinente para Siremar, las actividades de Siremar pueden considerarse más arriesgadas, lo que significa que una prima de riesgo más elevada no sería irrazonable. El análisis mostró que el rendimiento de las inversiones logrado por CdI y posteriormente por SNS se sitúa justo por debajo de la rentabilidad media generada por el grupo destinatario. Esta comparación muestra que un rendimiento del capital del 6,5 % para el sector marítimo no era irrazonable en el año anterior a la atribución a CdI. |

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| (365) | La Comisión destaca el aspecto esencial de que, independientemente del importe al que habría tenido derecho el operador sobre la base de la metodología antes mencionada (que incluye la rentabilidad del capital), en la práctica, SNS nunca podrá recibir posteriormente un importe superior al umbral máximo fijado por la Ley de 2009 (es decir, 55 694 895 EUR). Lo mismo sucedió con CdI durante el período en el que prestaba los servicios públicos con arreglo al nuevo convenio. Este importe, que se fijó en 2009 y nunca se ajustó a la inflación, fue probablemente conservador, ya que era casi un 17 % inferior a la cantidad que Siremar necesitaba para operar el servicio en ese mismo año [(134)](#ntr134-L_2022097ES.01000101-E0134). Independientemente de que se haya encomendado obligaciones de servicio público a CdI o SNS, los datos reales del período 2012-2019 del cuadro 7 muestran que, en todos los años, la compensación por servicio público era insuficiente para cubrir el coste neto del servicio, incluido el rendimiento del capital del 6,5 % [(135)](#ntr135-L_2022097ES.01000101-E0135). En 2012, CdI recibió una pequeña compensación excesiva, que se compensó con creces con pérdidas en 2013 y 2014. Sin embargo, CdI solo prestó el servicio en los meses de agosto a diciembre. Este período incluye el mes más rentable, cuando la demanda turística alcanza su nivel más alto (agosto), y excluye los primeros meses del año, donde la demanda es muy baja. Una consideración similar se aplica a la compensación recibida por SNS en 2016. La compensación excesiva percibida por SNS en ese año, que también fue compensada con creces en los años siguientes, se debió al hecho de que la empresa solo prestó el servicio en el período comprendido entre el 11 de abril y el 31 de diciembre de 2016, que no cubre los tres primeros meses de dicho año. En línea con el apartado 47 del Marco SIEG de 2011, la Comisión analiza si hubo una compensación excesiva para toda la vigencia del contrato. Para el período 2012-2019, SNS y Cdl recibieron un nivel combinado de aproximadamente 30,3 millones EUR menos que el importe calculado utilizando la metodología que incluye un rendimiento del 6,5 %. Esto confirma que las cláusulas de revisión del nuevo convenio no protegen al operador de todos los riesgos relacionados con la prestación del servicio público. A pesar de algunas fluctuaciones entre años, el rendimiento del capital invertido logrado por el sector de empresa de Siremar durante todo el período (hasta 2019) fue de hecho de aproximadamente el 4,7 %, en lugar del 6,5 % inicialmente previsto por Italia. De hecho, el importe total de la compensación recibida por CdI y SNS durante el período 2012-2019 es inferior al coste neto soportado por la prestación del servicio público, incluso suponiendo un rendimiento del capital del 0 %. Como se muestra en el cuadro 7, CdI y SNS necesitarían una compensación adicional de unos 12,7 millones EUR solo para cubrir sus costes netos. La conclusión de que las cláusulas de revisión del nuevo Convenio no protegen al operador de todos los riesgos en sí se aplica también a SNS (período 2016-2019): SNS recibió aproximadamente 23,3 millones EUR menos que el importe calculado utilizando la metodología que incluye un rendimiento del 6,5 %;. El rendimiento del capital obtenido por SNS se sitúa en torno al 11,8 %, en lugar del 6,5 % inicialmente previsto por Italia; y SNS habría solicitado una compensación adicional de unos 15 millones EUR exclusivamente para cubrir sus costes netos.   |  |  |  |  |  |  |  |  |  |  | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | Rutas de servicio público | 1/8/2012 - 31/12/2012 (CdI) | 2013 (CdI) | 2014 (CdI) | 2015 (CdI) | 11/4/2016 - 31/12/2016 (SNS) | 2017 (SNS) | 2018 (SNS) | 2019 (SNS) | Gran total | | Ingresos | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | | – Costes | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | | – Amortizaciones | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | | = Coste neto del servicio públic | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | | + Beneficio razonable (6,5 %) | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | | = Eligible para compensación | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | | + Compensación real | 23,346,079 € | 55,694,895 € | 55,694,895 € | 55,694,895 € | 40,297,059 € | 55,694,895 € | 55,694,895 € | 55,694,895 € | 397,812,508 € | | = Compensación excesiva/insuficiente | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | […] | – 30,340,068 € |   Cuadro 7 – Coste neto del servicio público operado por CdI y SNS en el período 2012-2019 |

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| (366) | La Comisión también acoge con satisfacción el hecho de que el artículo 5 del nuevo acuerdo obligue al operador a enviar anualmente cuentas de gestión (desglosadas por rutas y certificadas por un auditor independiente) a Sicilia para que esta pueda comprobar si existe una compensación excesiva. Esto constituye una garantía adicional para garantizar que el operador no pueda beneficiarse de ninguna compensación excesiva. Las autoridades italianas enviaron también estas cuentas de gestión para el período 2012-2019, lo que permitió a la Comisión realizar los cálculos que figuran en el cuadro 7 [(136)](#ntr136-L_2022097ES.01000101-E0136). |

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| (367) | Habida cuenta de lo anterior, la Comisión concluye que la compensación por servicio público concedida al operador no excede de lo necesario para cubrir los costes ocasionados por la ejecución de las obligaciones de servicio público, teniendo en cuenta los ingresos correspondientes y un beneficio razonable. Más concretamente, la Comisión considera que la prima de riesgo del 6,5 % prevista por la Directiva CIPE debe evaluarse en combinación con el importe máximo de la compensación estipulado en la Ley de 2009. Desde este punto de vista, la rentabilidad del capital que CdI y posteriormente SNS podían esperar desde una perspectiva ex ante está en consonancia con los riesgos en los que incurre en la prestación de servicios públicos con arreglo al nuevo convenio. Las dudas de la Comisión sobre el cumplimiento de la tercera condición de la sentencia Altmark quedan, por tanto, disipadas. |

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| (368) | Por lo que se refiere a la prioridad del atraque y a cualquier posible compensación excesiva que pudiera derivarse de ello, Italia declaró que no era posible cuantificar ninguna ventaja monetaria derivada de esta prioridad (véase el considerando 227). En cualquier caso, la Comisión señala que, en caso de que tal medida redujera los costes de funcionamiento o incrementara los ingresos del operador de servicio público, estos efectos aparecerían íntegramente en la contabilidad interna del operador. El análisis de la Comisión en el considerando 365 confirmó que CdI y SNS, considerados conjuntamente, no recibieron ninguna compensación excesiva durante el período 2012-2019. Esto también se aplica a SNS considerados individualmente, en los años en los que aplicó el nuevo convenio (período 2016-2019). Por consiguiente, la Comisión concluye que la prioridad de atraque cumple también el tercer criterio Altmark. |

8.1.3.4.   Cuarto criterio Altmark

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| (369) | El cuarto criterio Altmark se considera cumplido si el beneficiario de la compensación por la prestación del servicio de interés económico general se selecciona mediante un procedimiento de contratación pública que permite seleccionar al licitador capaz de prestar el SIEG en cuestión al menor coste para la colectividad o si la compensación se calcula en función de los costes de una empresa eficiente. |

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| (370) | De conformidad con el apartado 63 de la Comunicación SIEG, la manera más sencilla de que las autoridades públicas cumplan el cuarto criterio Altmark es llevar a cabo un procedimiento de licitación de manera abierta, transparente y no discriminatoria, de conformidad con la Directiva 2004/17/CE del Parlamento Europeo y del Consejo [(137)](#ntr137-L_2022097ES.01000101-E0137) y la Directiva 2004/18/CE del Parlamento Europeo y del Consejo [(138)](#ntr138-L_2022097ES.01000101-E0138). |

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| (371) | Además, según el punto 65 de la Comunicación SIEG, sobre la base de la jurisprudencia del Tribunal de Justicia, un procedimiento de contratación pública solo excluye la existencia de ayuda estatal si permite seleccionar al licitador capaz de prestar el servicio «con el menor coste para la colectividad». |

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| (372) | La Comisión observa que, en el presente caso, el procedimiento de licitación tuvo lugar antes de la entrada en vigor de la Directiva 2014/24/UE del Parlamento Europeo y del Consejo [(139)](#ntr139-L_2022097ES.01000101-E0139) (que se aplica a los contratos públicos adjudicados para la explotación de servicios de transporte marítimo) y de la Directiva 2014/25/UE del Parlamento Europeo y del Consejo [(140)](#ntr140-L_2022097ES.01000101-E0140). En ese momento eran aplicables la Directiva 2004/17/CE y la Directiva 2004/18/CE. Sin embargo, la Directiva 2004/17/CE no se aplica a los servicios de transporte marítimo, como los prestados por Siremar [(141)](#ntr141-L_2022097ES.01000101-E0141). |

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| (373) | Por otra parte, los contratos públicos de transporte marítimo, costero o fluvial entran en el ámbito de aplicación de la Directiva 2004/18/CE, sobre la base de su considerando 20. Sin embargo, los servicios de transporte marítimo figuran en el anexo II B de dicha Directiva, lo que implica [(142)](#ntr142-L_2022097ES.01000101-E0142) que solo están sujetos a lo dispuesto en su artículo 23 y en su artículo 35, apartado 4. Esto significa que, de conformidad con la Directiva 2004/18/CE, un contrato público de servicios de transporte marítimo solo está sujeto a las obligaciones relativas a las especificaciones técnicas (artículo 23) y a la obligación de publicar un anuncio de adjudicación del contrato (tras la adjudicación del contrato y, por tanto, al final y no al inicio del procedimiento de adjudicación: artículo 35, apartado 4) Todas las demás normas establecidas en la Directiva 2004/18/CE, incluida la forma en que se publican los anuncios (artículo 36, apartado 1) y las disposiciones sobre los criterios de selección (artículos 45 a 52), no se aplican a los contratos públicos de servicios de transporte marítimo. |

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| (374) | Asimismo, la Directiva 2004/18/CE en ningún caso se aplicará a las concesiones de servicios definidas en el artículo 1, apartado 4, de dicha Directiva [(143)](#ntr143-L_2022097ES.01000101-E0143). La Comisión observa que las concesiones de servicios que presentan un interés transfronterizo cierto siguen estando sujetas a los principios generales de transparencia e igualdad de trato del TFUE. |

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| (375) | Sobre la base de lo anterior, la Comisión concluye que la Directiva 2004/18/CE únicamente puede aplicarse en el caso de un contrato público, pero no de una concesión de servicios. Además, dado que el presente asunto se refiere a los servicios de transporte por vía navegable, solo son aplicables algunas de las disposiciones de dicha Directiva. En este contexto, la Comisión considera que no puede recurrir solo al cumplimiento de las Directivas sobre contratación pública para demostrar que se ha cumplido el cuarto criterio Altmark. Por este motivo, la Comisión evalúa a continuación si el procedimiento de licitación utilizado por Italia ha sido competitivo, transparente y no discriminatorio. Para llevar a cabo esta evaluación, la Comisión se basará en las directrices establecidas en la Comunicación relativa al concepto de ayuda estatal [(144)](#ntr144-L_2022097ES.01000101-E0144) (en particular en los puntos 89 y siguientes). |

Carácter competitivo y transparente de la licitación

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| (376) | El apartado 90 de la Comunicación relativa al concepto de ayuda especifica que un procedimiento de licitación debe ser competitivo [(145)](#ntr145-L_2022097ES.01000101-E0145) para que puedan participar en él todos los licitadores interesados y cualificados. Asimismo, con arreglo al apartado 91 de dicha Comunicación, el procedimiento ha de ser transparente para permitir a todos los licitadores interesados estar igual y debidamente informados en cada fase del procedimiento de licitación. Este punto subraya asimismo que la accesibilidad de la información, el suministro de tiempo suficiente a los licitadores afectados y la claridad de los criterios de selección y adjudicación son elementos esenciales de un procedimiento de selección transparente e indican que una licitación debe ser objeto de una publicidad suficiente para que todos los licitadores potenciales tengan conocimiento de ello. |

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| (377) | Con carácter preliminar, la Comisión señala que, si bien el Derecho italiano [(146)](#ntr146-L_2022097ES.01000101-E0146) dio al comisario especial la oportunidad de entablar negociaciones privadas con potenciales compradores, no hizo uso de esta posibilidad en el presente asunto, salvo en la segunda fase del procedimiento, tras la publicación y publicación de la convocatoria de manifestaciones de interés, y para obtener una mejor oferta de CdI y SNS. De hecho, se prefirió un procedimiento de licitación abierto para garantizar la venta del sector de empresa de Siremar a precio de mercado y, de este modo, maximizar el producto de la venta. Dado que no se llevó a cabo ninguna negociación privada sin licitación pública, se disipan las dudas expresadas por la Comisión en la Decisión de 2011 en relación con esta posibilidad. |

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| (378) | En el presente caso, el procedimiento de licitación se inició mediante la publicación de una convocatoria de manifestaciones de interés para la adquisición del sector de empresa de Siremar en un periódico internacional y en numerosos periódicos nacionales, así como en determinados sitios web especializados (véase el considerando 75). Dicha convocatoria invitaba a todo aquel que pudiera garantizar la continuidad del servicio de transporte marítimo a manifestar su interés y no imponía ninguna otra condición. También se concedió a las partes interesadas potenciales tiempo suficiente (es decir, 16 días) para manifestar su interés. En la fase de diligencia debida posterior, se concedió a los licitadores cualificados casi cuatro meses para evaluar toda la información pertinente a fin de poder decidir si presentar una oferta para el sector de empresa de Siremar y, en caso afirmativo, qué entidad. |

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| (379) | La Comisión observa que la convocatoria de manifestaciones de interés indicaba claramente que el sector de empresa de Siremar se vendería de conformidad con las normas específicas establecidas en el procedimiento de la Ley de Marzano, con el objetivo expreso de garantizar la continuidad del servicio de transporte marítimo en régimen de servicio público. Además, la convocatoria se refería al artículo 19 del Decreto-ley n.o 135/2009, que especificaba que, al término del procedimiento de licitación, se celebraría un nuevo convenio con el comprador del sector de empresa de Siremar. Dicho artículo precisaba asimismo que la duración de este nuevo convenio no excedería de doce años y describía su contenido. Además, el mismo artículo fijó el importe máximo de la compensación para Siremar en 55 694 895 EUR anuales durante todo el período de vigencia del nuevo contrato. Por último, el artículo 19 ter también especificaba que el comprador de Siremar seguiría teniendo prioridad en la asignación de puntos de amarre en las rutas de servicio público. |

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| (380) | Como se indica en la Decisión de 2011, la convocatoria de manifestaciones de interés no contenía detalles específicos sobre los activos concretos ofrecidos a la venta, el criterio de adjudicación y el calendario de las fases posteriores del procedimiento de licitación. La Comisión considera, no obstante, que el proceso de licitación en su conjunto fue lo suficientemente transparente por los motivos que se exponen en los siguientes considerandos. |

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| (381) | En primer lugar, la convocatoria de manifestaciones de interés mencionaba que los licitadores debían «garantizar la continuidad del servicio de transporte marítimo». Este era el único criterio de selección que Italia aplicó para determinar si las partes interesadas podían o no participar en el procedimiento de licitación. Si bien la convocatoria no especificaba cómo debían demostrar los licitadores que cumplían este requisito, por defecto esto significa que podía utilizarse cualquier medio adecuado de prueba [(147)](#ntr147-L_2022097ES.01000101-E0147) La Comisión observa que ninguna de las cinco partes interesadas fue excluida, lo que indica que cada una de ellas había aportado pruebas suficientes de que disponían de medios económicos suficientes para garantizar la continuidad del servicio. La Comisión considera que este criterio de selección era claro para todos los licitadores afectados y estaba justificado a la luz del objetivo perseguido. |

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| (382) | En segundo lugar, como se explica en el considerando 379, la referencia al Decreto-Ley n.o 135/2009 ya había dejado claro a las partes interesadas que se celebraría un nuevo acuerdo (con una duración máxima de 12 años) al término del procedimiento de licitación y que el importe anual de la compensación por servicio público se había fijado en un nivel máximo de 55 694 895 EUR. Además, la convocatoria de manifestaciones de interés indicaba que el objetivo era vender la parte de la empresa dedicada a la prestación del servicio público. Como confirmó Italia, toda la información pertinente relativa al perímetro de la venta, incluido el proyecto de acuerdo que debía celebrarse entre el comprador y el Estado, también se puso a disposición de las cinco partes que participaron en la fase de diligencia debida. Esto permitió a estas partes decidir si presentaban una oferta y, en caso afirmativo, qué importe debía indicarse. La Comisión señala que es práctica habitual en los procedimientos de venta entre operadores privados que la información empresarial delicada solo se ponga a disposición de los interesados en la fase de diligencia debida. Por la misma razón, las partes interesadas tuvieron que firmar acuerdos de confidencialidad antes de tener acceso a la documentación pertinente (véase el considerando 76). Sobre esta base, la Comisión considera que de la convocatoria de manifestaciones de interés [(148)](#ntr148-L_2022097ES.01000101-E0148) se desprendía con suficiente claridad que la venta se refería al sector de empresa de Siremar asociada a un nuevo acuerdo. Una vez manifestado su interés, las partes recibieron acceso a toda la información necesaria para que pudieran decidir si presentar una oferta. |

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| (383) | En tercer lugar, con respecto a la cronología de las fases posteriores del procedimiento de licitación, la Comisión observa lo siguiente. Mediante escrito de 24 de noviembre de 2010, se invitó a los licitadores interesados a participar en la fase de diligencia debida. Los detalles pertinentes de las fases posteriores del procedimiento, en particular el calendario del procedimiento y los criterios de admisión a la segunda fase de la diligencia debida, fueron comunicados a los licitadores afectados en un escrito enviado por el Comisario especial el 2 de febrero de 2011. Según la Comisión, es poco probable que la falta de tal información en la convocatoria de manifestaciones de interés [(149)](#ntr149-L_2022097ES.01000101-E0149) haya disuadido a los licitadores potenciales de manifestar su interés. |

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| (384) | En cuarto lugar, la Comisión observa que, sobre la base de la invitación, seis partes expresaron su interés en adquirir las actividades de Siremar (véanse los considerandos 76 y 77). Entre ellos figuran algunos de los operadores más importantes de transbordadores y buques locales: Caronte & Tourist S.p.A. y Ustica Lines S.p.A. (Oferta conjunta), Riccardo Sanges & C. S.r.l., Traghetti delle Isole S.p.A. y Mediterranea Holding S.p.A. (entre los accionistas figuraban algunos operadores locales expertos y que se asoció con otros operadores para constituir CdI). La Comisión considera que esto confirma que todos los licitadores potenciales se han beneficiado de una oportunidad adecuada para manifestar su interés en participar en el procedimiento de licitación. En este contexto, la Comisión subraya que las partes interesadas no tuvieron que seguir procedimientos onerosos y no habrían incurrido en costes significativos para expresar su interés, ya que eran suficientes para demostrar la capacidad de garantizar la continuidad del servicio de transporte marítimo. Las seis partes interesadas cumplían este criterio de selección y, por tanto, fueron invitadas a participar en la fase de diligencia debida. Cinco de ellos decidieron participar. Las partes no tuvieron que decidir hasta después de esta fase si tenían intención de presentar una oferta y, en su caso, el tamaño de la misma. |

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| (385) | Sobre la base de lo anterior, la Comisión considera que, en su conjunto, el procedimiento de licitación fue competitivo y transparente. En particular, la intención de Siremar de ceder el negocio de servicio público (es decir, el sector de empresa de Siremar) era ampliamente conocida para llegar a todos los posibles licitadores en el mercado regional o internacional pertinente. Asimismo, la Comisión tiene en cuenta que los posibles licitadores pudieron manifestar fácilmente su interés y no tuvieron que comprometerse a nada en ese momento. Siempre que pudieran demostrar que cumplían el único criterio de selección, las partes recibieron toda la información y se les dio tiempo suficiente para decidir si presentaban una oferta y cuánto ofrecerían para el sector de empresa de Siremar. Por estas razones, la Comisión considera que se han disipado sus dudas sobre si el procedimiento de licitación no fue lo suficientemente transparente debido a posibles deficiencias en la convocatoria de manifestaciones de interés. |

Carácter no discriminatorio de la licitación y el precio más elevado como criterio

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| (386) | El apartado 92 de la Comunicación relativa al concepto de ayuda estatal subraya que entre los requisitos indispensables para garantizar que la operación en cuestión sea conforme con las condiciones de mercado figura el tratamiento justo y no discriminatorio de todos los licitadores en cada una de las fases del procedimiento y la indicación previa de criterios de selección y adjudicación objetivos. Además, este punto precisa que, para garantizar la igualdad de trato, los criterios de adjudicación deben permitir comparar las ofertas y evaluarlas objetivamente. Según el punto 95 de la Comunicación relativa al concepto de ayuda, cuando los organismos públicos venden activos, el único criterio pertinente para seleccionar al comprador debe ser el precio más elevado [(150)](#ntr150-L_2022097ES.01000101-E0150), teniendo también en cuenta las condiciones contractuales exigidas (por ejemplo, la garantía del vendedor sobre las ventas). |

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| (387) | Como se ha mencionado anteriormente (véase el considerando 378), la convocatoria de manifestaciones de interés solo contenía una condición de selección, a saber, que los licitadores debían poder «garantizar la continuidad del servicio de transporte marítimo». Las seis partes que presentaron las cinco manifestaciones de interés en el marco del procedimiento cumplían el requisito de selección y, por tanto, fueron invitadas a la fase de diligencia debida. La Comisión considera que el único criterio de selección aplicable era objetivo y que se aclaró suficientemente a todas las partes interesadas en la convocatoria de manifestaciones de interés. |

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| (388) | De los seis posibles licitadores, cinco decidieron participar en la fase de diligencia debida. Durante esta fase, que tuvo lugar entre noviembre de 2010 y marzo de 2011, los cinco posibles licitadores tuvieron acceso a una sala de datos que contenía toda la información pertinente que permitiría evaluar el sector de empresa ofrecida a la venta (véase el considerando 77). El 2 de febrero de 2011, el Comisario Especial envió una carta en la que especificaba el procedimiento y los requisitos para presentar una oferta (véase el considerando 383). En particular, esta carta exponía claramente las condiciones de venta: elaborar un plan de negocio para la ejecución de las obligaciones de servicio público definidas en el borrador del convenio y proporcionar las garantías necesarias para demostrar la solidez financiera del licitador. Italia confirmó que, si se recibiera más de una oferta, el único criterio de adjudicación sería el precio más elevado. De hecho, precisamente con el fin de obtener el precio más elevado posible entre dos ofertas válidas y comparables, Italia reanudó el procedimiento varias veces, adjudicando finalmente el sector de empresa a CdI en octubre de 2011 (transacción para julio de 2012) y posteriormente a SNS en abril de 2016 (véase la sección 2.3.3.2). |

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| (389) | Por lo tanto, se despejan las dudas de la Comisión en la Decisión de 2011 de que el Decreto 134/2008 permitía adjudicar el procedimiento de licitación sobre la base de criterios diferentes. Se informó de forma adecuada e igual a todas las partes a lo largo de las distintas fases del procedimiento de licitación, lo que les permitió presentar una oferta con conocimiento pleno del procedimiento y de los requisitos. La Comisión considera también que el criterio de adjudicación hace posible una comparación y evaluación objetivas de las ofertas. |

Garantizar que los servicios se prestan con el menor coste para la colectividad

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| (390) | En el caso de autos, Italia organizó una licitación para el nuevo contrato relativo a la adquisición del sector de empresa de Siremar y sujeta a determinadas condiciones en términos de mano de obra, y no solo para el contrato. En la Decisión de 2012, la Comisión llegó a la conclusión preliminar de que, si los licitadores ya estuvieran adecuadamente equipados con buques y tripulaciones, tendrían menos costes si no se les exigiera hacerse cargo de una parte de los activos y empleados de Siremar. Por consiguiente, la Comisión había llegado a la conclusión preliminar de que la organización de un procedimiento de licitación para el nuevo acuerdo se disociaba de la obligación de hacerse cargo de los buques y las tripulaciones de Siremar necesarios para la prestación del servicio público, lo que daría lugar a un menor coste para la colectividad. |

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| (391) | Dado que Siremar era una gran empresa sujeta a administración extraordinaria, la legislación italiana general [(151)](#ntr151-L_2022097ES.01000101-E0151) obligaba a su comprador a mantener el mismo nivel de personal durante un período de dos años. En este contexto, el contrato de cesión del sector de empresa obliga a CdI y, posteriormente, a SNS a contratar (sobre la base de nuevos contratos) a los antiguos empleados de Siremar y a abstenerse de despidos [(152)](#ntr152-L_2022097ES.01000101-E0152) durante un período de dos años. La Comisión observa, en primer lugar, que esta obligación se basa en una obligación legal que las autoridades italianas no podían ignorar al diseñar la transferencia del sector de empresa y que esta obligación está limitada en el tiempo, es decir, dos años. La Comisión también observa que el sector de empresa de Siremar siguió prestando el servicio público sobre la base de las obligaciones de servicio público definidas en el nuevo convenio. En este sentido, Italia alegó que CdI y, posteriormente, SNS solo contrataron al personal de a bordo y administrativo necesario para desempeñar el servicio público [(153)](#ntr153-L_2022097ES.01000101-E0153) Dado que los costes laborales están cubiertos por la compensación abonada a los SNS en virtud del nuevo convenio, la Comisión considera que la obligación de mantener los niveles de empleo no es en la práctica gravosa para CdI y, posteriormente, para SNS. Por lo tanto, es poco probable que esta obligación haya comprimido el precio de venta del sector de empresa y es imposible que confiera una ventaja a CdI y posteriormente a SNS. Además, esta solución también fue beneficiosa para Siremar (y, por tanto, para Italia como su propietaria), ya que la empresa no tendría que soportar los costes de despido del personal absorbido por CdI y, posteriormente, por SNS. La Comisión observa que Ecorys calculó que el coste total del despido de todos los miembros del personal de Siremar habría sido de al menos 34 millones de EUR. |

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| (392) | Dado que la venta de los activos comerciales de Siremar estaba asociada a un nuevo contrato de servicio público [(154)](#ntr154-L_2022097ES.01000101-E0154), el comprador de la empresa está automáticamente sujeto a la obligación de garantizar la continuidad del servicio público y se le da prioridad en la asignación de puntos de amarre. En primer lugar, la Comisión observa que solo los activos necesarios para la ejecución de las obligaciones de servicio público estaban asociados al contrato de servicio público. De hecho, el único transbordador rápido que no se consideró necesario para este fin se vendió en el marco de un procedimiento de licitación separado. En segundo lugar, la Comisión considera que la asociación de activos comerciales de Siremar en el marco del nuevo contrato de servicio público no da lugar a un precio inferior al que se obtendría vendiendo los activos por separado y dicho contrato por las siguientes razones:   |  |  | | --- | --- | | — | como se ha mencionado anteriormente, el comisario especial de Tirrenia y Siremar organizó procedimientos de licitación separados para la venta de siete buques que no pertenecían a las sucursales de Tirrenia y Siremar. De estos siete buques, solo uno podía venderse a un licitador que deseara seguir utilizándolo para el transporte marítimo. Los otros seis buques solo podían venderse para desguace. Además, en marzo de 2011, los agentes navieros [(155)](#ntr155-L_2022097ES.01000101-E0155) pidieron que se determinara el valor de los buques Siremar indicando que los buques de Siremar eran relativamente antiguos y adecuados únicamente para las rutas locales en las que operaban y, por lo tanto, tenían un valor de mercado limitado en los mercados internacionales, ya que solo podían utilizarse en un pequeño número de rutas en el Mediterráneo. Por estas razones, y teniendo en cuenta el difícil contexto económico en aquel momento, parece poco probable que todos los buques Siremar de 18 se hubieran vendido con fines de transporte marítimo (es decir, a un precio superior a su valor de desguace) [(156)](#ntr156-L_2022097ES.01000101-E0156). La Comisión considera que la asociación de la venta de estos buques al contrato de servicio público ha permitido obtener un precio más elevado [(157)](#ntr157-L_2022097ES.01000101-E0157) para los buques de Siremar, dado que, a cambio de la utilización de los buques en rutas de servicio público, el comprador habría recibido una compensación por servicio público durante un período de doce años; |  |  |  | | --- | --- | | — | en la Decisión de 2012, la Comisión mencionó la posibilidad de que los licitadores ya equipados con suficientes buques y tripulación preferirían no adquirir buques de Siremar y contratar empleados. Sin embargo, la Comisión observa que en 2010 Siremar contaba con una plantilla total de alrededor de 500 personas y 18 buques. La Comisión considera poco probable que los posibles licitadores hayan podido disponer fácilmente de recursos y activos significativos para su utilización o reutilización a fin de cumplir las obligaciones de servicio público establecidas en el nuevo convenio. Esta afirmación es tanto más fiable cuanto que el nuevo convenio contiene requisitos específicos, como las obligaciones en materia de capacidad y velocidad, para los buques que vayan a operar en rutas de servicio público. Es probable que cualquier operador que dispusiera de los recursos necesarios ya los utilizara en otras rutas y que su reasignación a las tareas previstas en el nuevo acuerdo produjera necesariamente la pérdida de ingresos por su utilización anterior. A este respecto, la Comisión subraya que ni SNS ni CdI han indicado a la Comisión que preferirían no adquirir buques de Siremar. | |

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| (393) | Para verificar que la combinación de la asignación del nuevo acuerdo con la venta del sector de empresa de Siremar y las condiciones laborales no suponía una carga para CdI y, posteriormente, para SNS, la Comisión encargó un estudio durante la investigación formal a un experto independiente, Ecorys (véanse los considerandos 117 a 121). Ecorys recibió el mandato de determinar el valor de mercado del sector de empresa de Siremar en un supuesto en el que Siremar no estaba sujeto a ninguna condición. Ecorys concluyó que si la actividad de Siremar se hubiera vendido incondicionalmente y, en particular, independientemente del nuevo contrato de servicio público (y, por tanto, sin la obligación de garantizar la continuidad del servicio público), la empresa habría sido vendida por un valor de liquidación estimado de – 0,3 millones de EUR. Ecorys basó esta conclusión en la consideración de que el sector de empresa de Siremar no podría continuar sus actividades de manera rentable sin compensación por servicio público. Ecorys, señalando que este valor de liquidación es inferior al resultante del procedimiento de licitación, concluyó que la liquidación inmediata (esencialmente la venta de los buques) no era una alternativa viable para un operador privado en una economía de mercado. Además, Ecorys comparó el impacto de los costes laborales en los ingresos totales y la relación coste/personal de la empresa Siremar con datos de una serie de empresas de transbordadores comparables, concluyendo que no había ninguna diferencia sustancial en cuanto al número de empleados o estructuras de costes de personal que demostrara que la mano de obra era demasiado grande o que los costes laborales eran excesivos. Un posible comprador habría tenido, pues, poco margen de maniobra en lo referente a despidos o sustitución de parte del personal. Sobre esta base, Ecorys concluyó que no hay pruebas de que el mantenimiento del requisito de mano de obra haya tenido un impacto significativo en el valor del sector de empresa de Siremar. Por consiguiente, la Comisión concluye que ni la asociación del nuevo acuerdo con la venta del sector de empresa de Siremar ni las condiciones laborales han reducido el precio de venta del sector de empresa. |

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| (394) | En resumen, la condición de mantener el nivel de empleo viene impuesta por la legislación nacional general y no por el vendedor. Además, esta condición no es gravosa para el comprador del sector de empresa de Siremar, como confirmó el experto independiente de la Comisión, Ecorys. No puede considerarse que el requisito relativo a la necesidad de garantizar la continuidad del servicio público, que es consecuencia directa de la asociación de activos y de obligaciones de servicio público, dé lugar a una reducción del precio. Por el contrario, como se ha explicado anteriormente, la venta separada de los activos habría dado lugar a un precio más bajo. Por otra parte, dado el gran número de buques y tripulación necesarios para prestar el servicio público, es muy improbable que haya posibles licitadores interesados en adquirir el contrato de servicio público sin hacerse cargo de los activos. Por consiguiente, la Comisión concluye que cualquier vendedor en una economía de mercado habría decidido vender los activos comerciales de Siremar al mismo tiempo que el nuevo contrato de servicio público con el fin de obtener el precio más elevado. Sobre esta base, la Comisión concluye que Italia no ha impuesto condiciones que puedan reducir el precio o que un vendedor privado no habría impuesto. Sobre la base de lo anterior, la Comisión concluye que ha retirado sus reservas de que la organización de un procedimiento de licitación para el nuevo acuerdo asociado a la venta del sector de empresa y las condiciones laborales de Siremar no habría supuesto el menor coste para la colectividad. |

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| (395) | Sobre la base de la evaluación anterior (véanse los considerandos 376 a 394), la Comisión concluye que el procedimiento de licitación fue abierto, transparente y no discriminatorio, como exigen las normas de licitación pública. |

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| (396) | Sin embargo, el punto 68 de la Comunicación SIEG precisa que «para los procedimientos en los que solo se presenta una oferta, tal oferta no puede considerarse suficiente para garantizar que el procedimiento tenga el menor coste para la colectividad». |

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| (397) | A este respecto, la Comisión observa, en primer lugar, que, en el marco del procedimiento de licitación para el sector de empresa de Siremar asociado al nuevo convenio, se recibieron inicialmente dos ofertas. El sector de empresa comercial se adjudicó originalmente a uno de estos licitadores, CdI. En la fase final del procedimiento, después de que las sentencias de los tribunales administrativos italianos condujeran a la exclusión de CdI, SNS confirmó la oferta anterior que, en última instancia, podía interpretarse como la única oferta válida presentada. |

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| (398) | Sin embargo, la Comisión considera que, en las circunstancias de hecho específicas del procedimiento en cuestión, el momento pertinente para determinar la presentación de más de una oferta y, por tanto, para evaluar la posibilidad de que la oferta haya determinado el coste más bajo para la colectividad debe ser el momento en que se formuló inicialmente la oferta ganadora de SNS, es decir, en mayo de 2011. Este es el momento en que SNS evaluaba el valor del sector de empresa asociado al nuevo acuerdo, y en ese momento había dos partes competidoras en el marco del procedimiento: CDI y SNS. Además, la Comisión observa que, de hecho, CdI ganó temporalmente la licitación, se hizo cargo del sector de empresa y explotó el servicio entre 2012 y 2016, antes de que las resoluciones de los tribunales administrativos implicaran la reanudación del procedimiento y la adjudicación definitiva del sector de empresa a SNS. En este contexto, a efectos de evaluar el cumplimiento del cuarto criterio Altmark, debe tenerse en cuenta el hecho de que CdI también presentó una oferta en el marco del procedimiento, que puede considerarse suficiente para garantizar que el procedimiento diera lugar al menor coste para la colectividad. |

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| (399) | Por consiguiente, sobre la base de lo anterior, la Comisión concluye que en el presente caso se cumple el cuarto criterio Altmark. |

Presencia de medidas de salvaguardia especialmente eficaces en el procedimiento

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| (400) | Con carácter subsidiario, la Comisión señala que, si el momento pertinente para determinar la consecución de un precio de mercado por la oferta es el momento de la confirmación definitiva de la última oferta presentada por SNS, a saber, enero de 2016, extremo que la Comisión niega, procede concluir que solo se presentó efectivamente una oferta, ya que SNS era el único participante en el procedimiento en esa fase. Por consiguiente, esta licitación no bastaba, en circunstancias normales, para garantizar la inexistencia de una ventaja en favor del adjudicatario. |

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| (401) | Sin embargo, la Comisión ha articulado la posición expresada en el apartado 68 de la Comunicación SIEG en la Guía de los SIEG [(158)](#ntr158-L_2022097ES.01000101-E0158) afirmando que «esto no excluye la posibilidad de que, debido a la presencia en el procedimiento de medidas de salvaguardia especialmente eficaces, un procedimiento en el que solo se haya presentado una oferta pueda garantizar la prestación del servicio con el menor coste para la colectividad». |

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| (402) | La Comisión considera que, en el presente caso, al igual que en el caso de la privatización del sector de empresa de Tirrenia, tal como se evaluó en la Decisión Tirrenia/CIN de 2020, estas medidas de salvaguardia estaban presentes. Más concretamente:   |  |  | | --- | --- | | — | el procedimiento de licitación se organizó de tal manera que se maximizara el interés de los licitadores potenciales. Además, los licitadores potenciales no tenían que seguir procedimientos onerosos y no habrían incurrido en costes significativos para manifestar su interés. Por lo tanto, se recibieron cinco manifestaciones de interés de seis entidades italianas, todas ellas invitadas a la fase de diligencia debida (véase el considerando 388); |  |  |  | | --- | --- | | — | todo el proceso de licitación se caracterizó por una competencia efectiva. En particular, se invitó a seis licitadores potenciales a la fase de diligencia debida. Dos de ellos (Ustica Lines S.p.A. y Caronte & Tourist S.p.A.) crearon una empresa en participación y presentaron una oferta vinculante con el nombre de SNS. Mediterranea, que también aunó fuerzas con operadores privados locales para formar CdI, presentó otra oferta. La Comisión considera que, según su perfil, las otras dos partes que participaron en la fase de diligencia debida tenían razones para tener un interés real en hacer una oferta (por ejemplo, porque ya estaban activas en el sector o en Italia); |  |  |  | | --- | --- | | — | se estableció de antemano un precio mínimo sobre la base de la valoración efectuada por el experto independiente designado por Italia (véase el considerando 78). Este precio mínimo se puso a disposición de los posibles licitadores en la sala de datos y supuso un punto de partida relativamente alto para las ofertas iniciales. De hecho, como se explica en el considerando 79, al final del primer plazo no se recibieron ofertas vinculantes, lo que indica que el precio mínimo para el sector de empresa de Siremar se fijó en un nivel bastante elevado. En efecto, aunque este elevado precio mínimo contribuyó a garantizar que el procedimiento tuviera el menor coste para la colectividad, también podría haber disuadido a otros dos licitadores potenciales de presentar una oferta; |  |  |  | | --- | --- | | — | La primera oferta válida de CdI estaba disponible en la sala de datos y se invitó explícitamente a los demás licitadores a hacer una mejor oferta. A petición de SNS, el comisario especial amplió el plazo de presentación de ofertas de mejora. Después de que SNS también presentara su oferta, dado que las dos ofertas vinculantes recibidas no eran fácilmente comparables, el procedimiento se reanudó varias veces y cada vez que se invitó a las partes a presentar mejores ofertas. La invitación a presentar ofertas de mejora es una salvaguardia especialmente fiable para garantizar que se obtiene la oferta más alta posible (y, por tanto, el menor coste para la comunidad). En el contexto de este procedimiento, la existencia de dos licitadores serios y la correspondencia entre Siremar en AS y CdI y SNS sugieren que hubo competencia efectiva. El hecho de que esta competencia fuera temporalmente falseada por la contragarantía, que permitió a CdI obtener inicialmente la licitación, no desvirtúa esta conclusión. Por el contrario, es otro indicio de que la competencia entre licitadores ha sido efectiva, aunque en esas circunstancias particulares no se hayan respetado las normas de procedimiento. | |

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| (403) | La Comisión considera que, habida cuenta de las medidas de salvaguardia antes mencionadas, entre ellas, en particular, la presencia de un precio mínimo y la invitación a presentar ofertas más elevadas, el procedimiento de licitación ha podido garantizar la prestación del servicio al menor coste para la colectividad, aunque solo se haya presentado una oferta válida en la última fase del procedimiento. En aras de la exhaustividad, la Comisión observa que el presente asunto difiere de los siguientes casos en los que solo se presentó una oferta:   |  |  | | --- | --- | | — | en el procedimiento de licitación para la explotación de un enlace marítimo rápido de pasajeros entre Mesina y Reggio Calabria, solo Ustica Lines presentó una oferta. Sin embargo, esta empresa también fue la única que expresó su interés y, por lo tanto, nunca hubo competencia efectiva. En ese caso, la Comisión concluyó necesariamente que no se cumplía la cuarta condición Altmark y que la compensación por servicio público constituía ayuda estatal [(159)](#ntr159-L_2022097ES.01000101-E0159). La Comisión recuerda que, en el presente caso, seis partes expresaron su interés y cinco participaron en la última parte de la licitación; |  |  |  | | --- | --- | | — | en el procedimiento de licitación para la adjudicación de concesiones de distribución de prensa en Bélgica, solo bpost (operador histórico de dicho SIEG) presentó una oferta. Aunque inicialmente tres empresas habían manifestado su interés por participar en la licitación, una se retiró antes de la fecha límite de presentación de las ofertas y otra anunció que ya no deseaba presentar una oferta (tres días después de que bpost hubiera presentado su oferta). Sin embargo, las autoridades belgas alegaron que durante el procedimiento de licitación se había producido una competencia efectiva y que existían salvaguardias para garantizar que la licitación diera lugar al menor coste para la colectividad. Sin embargo, en ese asunto, la Comisión consideró que las medidas de salvaguardia eran insuficientes y concluyó, por tanto, que no se cumplía la condición del cuarto criterio Altmark y que la compensación por servicio público constituía ayuda estatal [(160)](#ntr160-L_2022097ES.01000101-E0160). Mientras que las autoridades italianas utilizaron un procedimiento de licitación abierto, las autoridades belgas organizaron un procedimiento negociado [(161)](#ntr161-L_2022097ES.01000101-E0161) y dichos procedimientos, según el apartado 66 de la Comunicación sobre SIEG, solo « [pueden] […] ser considerados suficientes para satisfacer el cuarto criterio Altmark en casos excepcionales ». La Comisión observa que, aparte de esta importante diferencia, las medidas de salvaguardia en el asunto bpost también eran completamente diferentes de las del presente asunto. Por último, cabe señalar que, en el asunto bpost, el operador histórico de SIEG ganó la licitación tras presentar la única oferta recibida, en presencia de un único licitador potencial. En el presente caso, la licitación fue adjudicada por un licitador (SNS) que no tenía ningún vínculo con el operador de SIEG histórico, en presencia de otros licitadores competidores creíbles y con las salvaguardias mencionadas anteriormente. Por estas razones, la Comisión concluye que las circunstancias del asunto bpost no son comparables a las del presente asunto. | |

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| (404) | Además, la Comisión observa que el procedimiento de licitación utilizado para la venta del sector de empresa de Siremar difiere significativamente del procedimiento utilizado para seleccionar al operador de servicios marítimos entre la Francia continental y Córcega [(162)](#ntr162-L_2022097ES.01000101-E0162) (en lo sucesivo, «caso SNCM») de las siguientes maneras:   |  |  | | --- | --- | | — | las autoridades francesas adjudicaron la concesión de servicio público mediante un procedimiento negociado con publicación previa. De conformidad con el apartado 66 de la Comunicación sobre SIEG, tales procedimientos solo «[pueden] […] ser considerados suficientes para satisfacer el cuarto criterio Altmark en casos excepcionales». Por el contrario, las autoridades italianas recurrieron a un procedimiento de licitación abierto, en el que las negociaciones privadas solo tuvieron lugar en la última fase del procedimiento, para comparar y mejorar las ofertas ya recibidas; |  |  |  | | --- | --- | | — | en el caso de la SNCM, se presentaron dos ofertas, pero una fue rechazada sobre la base de un criterio de selección. Por tanto, ni siquiera se compararon los méritos de ambas ofertas a fin de optar por la más ventajosa desde el punto de vista económico. De modo que, aunque se presentaron dos ofertas, no fue suficiente para garantizar una competencia efectiva. En el procedimiento de licitación de Siremar, sin embargo, cinco partes participaron en la fase final y se presentaron dos ofertas (véase el considerando 398). Aunque se considere que, a efectos de la evaluación del cuarto criterio Altmark, solo SNS presentó finalmente una oferta válida, lo que la Comisión niega, la competencia efectiva existía en cualquier caso hasta el final del procedimiento (véase el considerando 402); |  |  |  | | --- | --- | | — | en el caso de la SNCM, el operador histórico, el grupo SNCM/CMN, también había presentado una oferta y disfrutado de una ventaja competitiva significativa al disponer ya de buques que cumplían los requisitos técnicos establecidos en el contrato de delegación de servicio público. Estas condiciones preveían la construcción de buques casi «hechos a medida» similares a varios de los buques de la SNCM. Esto conllevaba un coste elevado para los potenciales licitadores interesados. En el presente caso, el operador histórico Siremar en AS no presentó ni pudo presentar una oferta y SNS no tenía ninguna relación con el operador histórico. Dado que la oferta incluía buques que cumplían los requisitos técnicos para la explotación del servicio público, ninguno de los posibles licitadores tenía una ventaja competitiva con respecto al otro; |  |  |  | | --- | --- | | — | además, en el caso de la SNCM, la Comisión consideró que el breve período de tiempo (menos de un mes) establecido entre la fecha de adjudicación del contrato de concesión de servicio público y la fecha de inicio de los servicios constituiría probablemente un obstáculo significativo para la entrada de nuevos operadores. La Comisión observa que, en el caso de Siremar, transcurrió casi un año entre la primera conclusión del procedimiento de licitación (octubre de 2011) y el inicio de la gestión del servicio público por CdI (agosto de 2012) y que transcurrieron más de cuatro años antes de que SNS asumiera el sector de empresa y la gestión del nuevo acuerdo (abril de 2016). | |

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| (405) | Sobre la base de lo anterior, la Comisión concluye que, también sobre la base de este razonamiento subsidiario, se cumple el cuarto criterio Altmark. |

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| (406) | Habida cuenta de que se cumplen acumulativamente las cuatro condiciones establecidas por el Tribunal de Justicia en el asunto Altmark, la Comisión concluye que la adjudicación del nuevo acuerdo asociado al sector de empresa de Siremar y la prioridad en la asignación de puntos de amarre a SNS no confieren una ventaja económica a SNS. |

8.1.3.5.   Conclusión sobre la adjudicación del nuevo convenio asociado al sector empresarial de Siremar y prioridad en la asignación de puntos de amarre a SNS

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| (407) | Puesto que no se cumplen todos los criterios establecidos en el artículo 107, apartado 1, del TFUE, la Comisión concluye que la concesión del nuevo acuerdo asociado al sector de empresa de Siremar y la prioridad en la asignación de puntos de amarre a SNS no constituye ayuda estatal en favor de SNS. |

8.1.3.6.   El aumento del capital de CdI

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| (408) | La Comisión observa que, en el momento de la adopción de la presente Decisión, CdI no opera y se encuentra en liquidación. Mediante escritura notarial de abril de 2016, la empresa cambió su nombre y forma de Compagnia delle Isole S.p.A. a Compagnia delle Isole S.r.l. en liquidación. También trasladó su domicilio social de Palermo a Nápoles y nombró un liquidador. Desde entonces, la empresa ya no tiene ningún objetivo comercial, no ejerce ninguna actividad empresarial, ha vendido todos sus buques y no tiene empleados (a excepción de los empleados estatutarios de las sociedades en liquidación). Aunque el procedimiento de liquidación aún está en curso, la Comisión considera que ha cesado cualquier posible falseamiento de la competencia cuando CdI puso fin a sus actividades comerciales. Habida cuenta de lo anterior, ya no hay motivos para continuar el procedimiento de investigación formal con respecto a ninguna de las medidas aún pendientes y en fase de evaluación en el contexto del presente asunto de ayuda estatal relativo a esta empresa. Como consecuencia de ello, la investigación sobre la ampliación de capital de CdI ha quedado sin objeto [(163)](#ntr163-L_2022097ES.01000101-E0163). |

8.1.3.7.   Contragarantía

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| (409) | Como se describe en la sección 3.3.2, en la Decisión de 2012 la Comisión adoptó la opinión preliminar de que la contragarantía podría haber implicado ayuda estatal en favor de CdI o Unicredit. Sobre la base de la información recibida durante el procedimiento de investigación formal, la Comisión señala, en primer lugar, que la supuesta ayuda estatal concedida a las dos empresas debe evaluarse por separado, ya que sus funciones en el proceso han sido diferentes. |

Ayuda a Unicredit

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| (410) | Ventaja económica: Para ser considerada ayuda estatal, una medida debe conferir una ventaja económica a su beneficiario. En la Decisión de 2012, la Comisión recordó que, con arreglo a la Comunicación sobre las garantías, la ayuda se concede cuando se concede la garantía, cuando se invoca o cuando se efectúan pagos en virtud de las condiciones de la garantía. El punto 2.3.1. de la Comunicación sobre las garantías también establece que «aunque el beneficiario de la ayuda sea normalmente el prestatario, no puede excluirse que, en determinadas circunstancias, el prestamista también pueda beneficiarse directamente de la ayuda estatal». Además, la Comunicación sobre garantías aclara que las garantías pueden ser proporcionadas directamente por el Estado o pueden prestarse en forma de contragarantías en favor de un garante de primer nivel. Por último, la Comunicación sobre las garantías explica que, en tales circunstancias, «si se otorga una garantía estatal sobre un préstamo u otra obligación financiera a posteriori, sin que se hayan adaptado sus condiciones, o si un préstamo garantizado se utiliza para pagar otro no garantizado a la misma entidad de crédito, puede apreciarse también ayuda al prestamista, ya que la garantía del préstamo aumenta. Cuando la garantía implique ayuda al prestamista, deberá recordarse que dicha ayuda puede constituir, en principio, una ayuda de funcionamiento». |

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| (411) | En este contexto, la Comisión observa que, en el presente caso, Sicilia emitió la contragarantía a favor de CdI indirectamente, es decir, a través de Unicredit, que actuó como garante de primer nivel. Sicilia emitió la contragarantía a Unicredit sobre los pagos aplazados del precio de compra del sector de empresa de Siremar el mismo día en que Unicredit emitió su garantía a CdI (véase la sección 2.3.3.5). La emisión de contragarantía por Sicilia era una condición que debía cumplirse para que Unicredit emitiera su garantía con arreglo a dichas condiciones, tal como establece el CdS en la Decisión 592/14. De conformidad con la Comunicación sobre las garantías, la contragarantía habría conferido una ventaja a Unicredit si la garantía de Sicilia se hubiera emitido a posteriori contra una obligación financiera ya contraída, sin ajustar las condiciones de dicha obligación financiera. Sin embargo, dado que en el presente caso la contragarantía se emitió el mismo día en que Unicredit concedió la garantía a CdI – de hecho, era una condición necesaria para la concesión de dicha garantía – no hay pruebas de que Unicredit, como garante de primer nivel, redujera los riesgos asociados a su garantía. Por consiguiente, la Comisión concluye que la contragarantía no proporcionó ninguna ventaja a Unicredit. |

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| (412) | Conclusión: Dado que no se cumplen todos los criterios establecidos en el artículo 107, apartado 1, del TFUE, la Comisión concluye que la contragarantía concedida por Sicilia en relación con la garantía emitida por Unicredit para pagos diferidos del precio de compra del sector de empresa de Siremar no constituye ayuda en favor de Unicredit. |

Ayuda en favor de CdI

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| (413) | La Comisión observa que, en el momento de la adopción de la presente Decisión, CdI no es operativa y está en liquidación (véase el considerando 408). Aunque el procedimiento de liquidación aún está en curso, la Comisión considera que ha cesado cualquier posible falseamiento de la competencia cuando CdI puso fin a sus actividades comerciales. Habida cuenta de lo anterior, ya no hay motivos para continuar el procedimiento de investigación formal con respecto a ninguna de las medidas aún pendientes y en fase de evaluación en el contexto del presente asunto de ayuda estatal relativo a esta empresa. Por consiguiente, la investigación de una posible ayuda concedida a CdI a través de la contragarantía ha quedado sin objeto. |

8.1.4.   Medidas establecidas en la Ley de 2010

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| (414) | En la Decisión de 2011, la Comisión llegó a la conclusión preliminar de que todas las medidas previstas en la Ley de 2010 constituyen ayuda estatal en favor de las empresas del antiguo grupo Tirrenia, en la medida en que los beneficiarios respectivos pudieron utilizar dichas medidas para cubrir necesidades de liquidez y mejorar así su situación financiera global. |

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| (415) | Sobre la base de la información recibida durante la investigación formal, la Comisión considera que las tres medidas deben evaluarse por separado. |

8.1.4.1.   Posible uso de fondos destinados a la modernización de los buques para obtener liquidez

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| (416) | Dado que los criterios para calificar una medida como ayuda estatal son acumulativos, la Comisión puede iniciar su evaluación examinando cualquiera de ellos. En el presente caso, evaluará en primer lugar si la medida concede efectivamente una ventaja a Siremar. |

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| (417) | Ventaja económica: La Comisión observa que Siremar recibió aproximadamente 7 215 800 EUR para llevar a cabo las reformas de buques requeridas por las normas internacionales de seguridad y que, con arreglo a la Ley de 2010, podía utilizar estos fondos temporalmente con fines de liquidez (véase el considerando 132). Sin embargo, Siremar no utilizó estos fondos con fines de liquidez. Por el contrario, Italia confirmó que estos fondos se gastaron en la modernización de los buques, según lo previsto inicialmente (véase el considerando 228). Por consiguiente, la Comisión observa que Siremar no utilizó esos fondos para fines de liquidez, es decir, para evitar costes que normalmente habría tenido que soportar con sus propios recursos financieros, y que, por lo tanto, no se benefició de ninguna ventaja económica a través de esta medida. |

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| (418) | Dado que en el caso de Siremar no se cumple el criterio de la ventaja económica, la Comisión concluye que la medida no constituye ayuda y que sus dudas expresadas en la Decisión de 2011, por lo que se refiere a Siremar, quedan disipadas. |

8.1.4.2.   Exenciones fiscales relacionadas con el proceso de privatización

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| (419) | Como se describe en el considerando 133, letra b), de conformidad con el artículo 1 de la Ley de 2010, los actos y operaciones realizados para privatizar el grupo Tirrenia y descritos en los apartados 1 a 15 del artículo 19 del Decreto-Ley n.o 135/2009, convertido con modificaciones en la Ley de 2009, están exentos de cualquier impuesto normalmente devengado por tales actos y operaciones. |

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| (420) | La Comisión señala, en primer lugar, que esta exención fiscal, que no está sujeta a condiciones, se refiere a dos conjuntos distintos de transferencias: 1) las transferencias de las antiguas filiales de Tirrenia (Caremar, Saremar y Toremar) de Tirrenia (actualmente bajo administración extraordinaria) a las regiones de Campania, Cerdeña y Toscana y 2) la transferencia del sector de empresa de Siremar de Siremar en AS a CdI y, posteriormente, a SNS. Los derechos a los que se aplica la exención conciernen en particular a la tasa de registro, los derechos de inscripción en el registro de propiedades e hipotecas, el derecho de timbre (en lo sucesivo, conjuntamente: «impuestos indirectos»), el IVA y el impuesto de sociedades. Los beneficiarios de esta medida de ayuda serían el vendedor, el comprador o ambos. En la presente Decisión solo se evaluará la segunda serie de transferencias. |

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| (421) | Con carácter preliminar, la Comisión señala que, en virtud del Decreto n.o 633 del Presidente de la República, de 26 de octubre de 1972, las entregas de empresas o sucursales a otra sociedad no se consideran entregas de bienes y, por tanto, están exentas del IVA. Por consiguiente, operaciones como la venta del sector de empresa de Siremar no están comprendidas en el ámbito de aplicación del IVA y la exención fiscal en cuestión no puede, por tanto, conferir una ventaja a Siremar en relación con el IVA. Además, por lo que se refiere a los impuestos indirectos, la Comisión toma nota del hecho de que el contrato de venta del sector de empresa de Siremar a CdI establece claramente que todos los impuestos, tasas y gastos notariales relacionados con la operación correrán a cargo del comprador. Italia también aportó pruebas de que CdI no había hecho uso de esta exención fiscal en el momento de la inscripción del contrato. Por consiguiente, la Comisión reconoce que CdI no se benefició de esta medida. Sin embargo, el contrato de venta de la transmisión a SNS, que contiene la misma disposición, establece también que el adquirente se beneficiará de un impuesto sobre actos jurídicos documentados, de conformidad con las exenciones fiscales previstas en la Ley de 2010. |

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| (422) | En vista de lo anterior, la Comisión evaluará lo siguiente:   |  |  | | --- | --- | | 1) | si Siremar (en AS) y SNS se beneficiaron de posibles exenciones de la tasa de registro, de los derechos de inscripción en el registro de propiedades e hipotecas y del derecho de timbre (en lo sucesivo, «impuestos indirectos») por la transferencia del sector de empresa de Siremar a SNS, y |  |  |  | | --- | --- | | 2) | si Siremar (en AS) se benefició de posibles exenciones del impuesto de sociedades en relación con los ingresos obtenidos de la transferencia del sector de empresa de Siremar a SNS. | |

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| (423) | Fondos estatales: una exención de impuestos por definición conlleva que el Estado deje de recaudar fondos. Además, dado que estas exenciones se concedieron en virtud de la Ley de 2010 [véase el considerando 133, letra b)], también son imputables al Estado. |

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| (424) | Selectividad: dado que solo se conceden para las operaciones y actos relacionados con la privatización del antiguo grupo Tirrenia, las exenciones fiscales son selectivas. Italia no ha alegado ni demostrado que las exenciones fiscales no sean selectivas. |

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| (425) | Ventaja económica: Por lo que se refiere a los impuestos indirectos, Siremar estaba exenta del pago de impuestos indirectos por transacciones y actos que implicaban la transferencia del sector de empresa de Siremar a SNS y, por lo tanto, se beneficiaba de una ventaja económica igual a los impuestos normalmente adeudados por este tipo de operaciones y operaciones con arreglo a la legislación italiana. |

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| (426) | Por lo que se refiere a los impuestos indirectos, SNS se benefició de un importe fijo para la inscripción del contrato de compraventa del sector de empresa de Siremar, con arreglo a la Ley de 2010, tal como se establece en el artículo 9 de dicho contrato. En consecuencia, SNS se benefició de una ventaja económica igual a la diferencia entre el importe normalmente adeudado por registrar tales actos con arreglo al Derecho nacional y el importe efectivamente pagado. […] |

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| (427) | Por lo que se refiere a la exención del impuesto de sociedades sobre el producto de la transferencia del sector de empresa de Siremar a CdI y posteriormente a SNS, la Comisión señala, con carácter preliminar, que el momento pertinente para evaluar si una medida constituye ayuda estatal es el momento en que se concede la medida, es decir, cuando el beneficiario adquiere el derecho, con arreglo a la legislación nacional, a recibir ayuda en virtud de dicha medida [(164)](#ntr164-L_2022097ES.01000101-E0164). En el caso de autos, esta fecha coincide con la entrada en vigor de la Ley de 2010. Por consiguiente, en su examen de las ayudas ilegales, la Comisión puede tener en cuenta, sobre la base de la información de que dispone, si dichas ayudas ya se han concedido y pueden concederse en el futuro, de conformidad con las normas vigentes en el Derecho nacional. Sobre la base de esta constatación, la Comisión ordenará o no la recuperación de cualquier ayuda considerada incompatible o decidirá si ordena o no a los Estados miembros que no paguen ninguna ayuda considerada incompatible en el futuro, pero no pone en cuestión la existencia de la ayuda en el momento de su concesión. |

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| (428) | En este contexto, la Comisión señala, en primer lugar, que la cesión del sector de empresa de Siremar se realizó a cambio del pago de una contraprestación, inicialmente pagada por CdI y después por SNS. Sin embargo, se canceló la venta del sector de empresa a CdI por 69,15 millones EUR (véase el considerando 99). Por consiguiente, esta exención no tuvo ningún efecto práctico y no se concedió ninguna ventaja a Siremar en el marco de esa primera transferencia. Por el contrario, la venta a SNS de 55,1 millones EUR estaría normalmente sujeta al impuesto de sociedades. La exención de dicho impuesto constituye una ventaja económica, ya que el producto de la venta de determinados activos se tiene normalmente en cuenta en el cálculo del impuesto de sociedades. En efecto, en el caso de un procedimiento de insolvencia como Siremar en AS, el método de cálculo de los ingresos se describe en el artículo 183 del Texto único de los impuestos sobre la renta. Según dicho artículo, los ingresos profesionales correspondientes al período comprendido entre el inicio y el cierre del procedimiento de insolvencia son la diferencia entre el patrimonio de la empresa al inicio del procedimiento y el activo restante al término del mismo. En el momento de la adopción de la presente Decisión, el procedimiento de liquidación aún está en curso, por lo que no es posible predecir si habrá obligaciones fiscales, o su posible magnitud, ya que todavía no está claro si se devengará un impuesto sobre la renta. Sin embargo, por las razones expuestas en el considerando 427, esto no afecta a la conclusión de la existencia de una ventaja económica, ya que la Ley de 2010 establecía un derecho incondicional a la exención fiscal. |

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| (429) | Efecto sobre los intercambios: Por las razones expuestas en los considerandos 312 y 313, la Comisión considera que la exención de determinados impuestos concedida a Siremar y SNS puede afectar al comercio de la Unión y falsear la competencia en el mercado interior. |

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| (430) | Conclusión: La exención del impuesto de sociedades sobre el producto de la venta del sector de empresa de Siremar a SNS, así como la exención de los impuestos indirectos sobre las transferencias del mismo sector de empresa a SNS, concedidas por la Ley de 2010, constituyen una ayuda estatal en favor de Siremar. El pago por SNS de una cantidad fija para el registro del acuerdo de compra del sector de empresa de Siremar con arreglo a la Ley de 2010, en lugar del importe normalmente adeudado con arreglo al Derecho nacional, constituye una ayuda estatal concedida a SNS. |

8.1.4.3.   Posibilidad de utilizar recursos del FAS

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| (431) | En sus decisiones de 2011 y 2012, la Comisión se refirió a la posibilidad de que las empresas del antiguo Grupo Tirrenia utilizaran los recursos de FAS [véase el considerando 133, letra c)] para satisfacer las necesidades de liquidez actuales. Sin embargo, durante el procedimiento de investigación formal, las autoridades italianas aclararon que los recursos del FAS no estaban destinados a compensar adicionalmente a ninguna de las empresas del antiguo grupo Tirrenia (incluida Siremar). Por el contrario, estos recursos se pusieron a disposición para complementar los créditos presupuestarios asignados al pago de compensaciones por servicio público a las empresas del antiguo Grupo Tirrenia, en caso de que estos créditos fueran insuficientes. En efecto, el artículo 1, apartados 5 ter, de la Ley de 2010 permitía a las regiones utilizar los recursos del FAS para financiar total o parcialmente la compensación normal de servicio público y garantizar así la continuidad de los servicios marítimos públicos. En otras palabras, esta medida se refiere únicamente a una asignación de recursos del presupuesto del Estado italiano para el pago de compensaciones por servicio público. |

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| (432) | Habida cuenta de lo anterior, la Comisión concluye que los recursos del FAS son solo una fuente de financiación que permite al Estado pagar una compensación por servicio público (concedida sobre la base del acuerdo ampliado inicial) y no una medida de la que Siremar se habría beneficiado además de estas compensaciones. En otras palabras, el posible uso de recursos del FAS no constituye ayuda estatal en favor de Siremar y, por lo tanto, no se evaluará con más detalle en la presente Decisión. |

8.1.5.   Conclusión sobre la existencia de la ayuda

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| (433) | Sobre la base de la evaluación anterior, la Comisión considera que:   |  |  | | --- | --- | | — | la compensación abonada a Siremar por la explotación de las rutas marítimas durante el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 30 de julio de 2012 y la prioridad de atraque en dichas rutas constituyen una ayuda estatal en favor de Siremar en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE, que puede calificarse de nueva ayuda; |  |  |  | | --- | --- | | — | la prórroga de la ayuda de salvamento desde el 28 de agosto de 2011 hasta el 18 de septiembre de 2012 constituye una ayuda estatal en favor de Siremar a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE; |  |  |  | | --- | --- | | — | la adjudicación del nuevo acuerdo para el período comprendido entre el 1 de agosto de 2012 y el 11 de abril de 2016, asociada a la venta del sector de empresa de Siremar y a la prioridad en la asignación de puntos de amarre a CdI, fue anulada y no pudo evaluarse por separado. La concesión del nuevo acuerdo para el período comprendido entre el 11 de abril de 2016 y el 11 de abril de 2028, combinada con el sector de empresa de Siremar y la prioridad en la asignación de puntos de amarre concedida a SNS, cumple los cuatro criterios Altmark y, por tanto, no constituye ayuda estatal a favor de SNS en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE. La investigación sobre la ampliación de capital de CdI ha quedado sin objeto. La contragarantía no constituye ayuda a Unicredit en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE; la investigación sobre cualquier ayuda concedida a CdI ha quedado sin objeto. |  |  |  | | --- | --- | | — | dado que Siremar no utilizó los fondos destinados a la modernización de buques con fines de liquidez, tal como permite la Ley de 2010, esta medida no constituye ayuda estatal en favor de Siremar en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE; |  |  |  | | --- | --- | | — | las exenciones i) de los impuestos indirectos sobre la transferencia del sector de empresa de Siremar, y ii) del impuesto de sociedades en relación con los ingresos procedentes de la venta del sector de empresa de Siremar, concedidas por la Ley de 2010, constituyen ayuda estatal en favor de Siremar y SNS a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE; y |  |  |  | | --- | --- | | — | la posibilidad de utilizar los recursos del FAS para satisfacer las necesidades de liquidez, tal como prevé la Ley de 2010, no constituye ayuda estatal en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE. | |

8.2.   Legalidad de la ayuda

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| --- | --- |
| (434) | Todas las medidas de ayuda contempladas en la presente Decisión se ejecutaron antes de su aprobación formal por la Comisión. Por consiguiente, en la medida en que no están exentos de la obligación de notificación en virtud de la Decisión SIEG de 2005 o de la Decisión SIEG de 2011, estas medidas de ayuda fueron concedidas por Italia infringiendo el artículo 108, apartado 3, del TFUE [(165)](#ntr165-L_2022097ES.01000101-E0165). |

8.3.   Compatibilidad de la ayuda

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| --- | --- |
| (435) | En la medida en que las medidas en cuestión constituyen ayuda estatal en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE, su compatibilidad debe apreciarse a la luz de las excepciones previstas en los apartados 2 y 3 de dicho artículo y en el artículo 106, apartado 2, del TFUE. |

8.3.1.   Prórroga del convenio inicial entre el Estado y Siremar

8.3.1.1.   Disposiciones aplicables

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| (436) | Como ya se ha mencionado, el Convenio original se prorrogó más allá de finales de 2008 mediante la adopción de una serie de actos jurídicos:   |  |  | | --- | --- | | a) | Decreto-Ley n.o 207/2008, convalidado mediante la Ley n.o 14, de 27 de febrero de 2009, que preveía la prórroga de los convenios iniciales desde el 1 de enero de 2009 hasta el 31 de diciembre de 2009; |  |  |  | | --- | --- | | b) | Decreto-Ley n.o 135/2009, convalidado en la Ley de 2009, que preveía, entre otras cosas, la prórroga de los convenios iniciales desde el 1 de enero de 2010 hasta el 30 de septiembre de 2010; y |  |  |  | | --- | --- | | c) | Decreto-Ley n.o 125/2010, convertido en Ley de 2010, que establece una nueva prórroga de los convenios iniciales desde el 1 de octubre de 2010 hasta el final de los procedimientos de privatización de Tirrenia y Siremar. | |

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| --- | --- |
| (437) | En este contexto, la Comisión observa que la concesión de la compensación por servicio público en virtud de la prórroga del convenio inicial es anterior a la fecha de entrada en vigor de la Decisión SIEG de 2011 y del Marco SIEG de 2011. Sin embargo, el paquete SIEG de 2011, en el artículo 10 de la Decisión SIEG de 2011 y en el apartado 69 del Marco SIEG de 2011, contiene nomas que prevén su aplicación también a las ayudas concedidas antes de su entrada en vigor, el 31 de enero de 2012. En particular, el artículo 10, letra b), de la Decisión SIEG de 2011 dispone lo siguiente:  «toda ayuda que produzca efectos antes de la entrada en vigor de la presente Decisión que no fuera compatible con el mercado interior ni estuviera exenta del requisito de notificación, de conformidad con la Decisión 2005/842/CE, pero cumpla las condiciones establecidas en la presente Decisión será compatible con el mercado interior y estará exenta del requisito de notificación». |

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| (438) | Por lo que se refiere al Marco SIEG de 2011, los apartados 68 y 69 especifican que la Comisión aplicará los principios que en él se establecen a todos los proyectos de ayuda notificados, independientemente de la fecha de notificación, así como a toda ayuda ilegal sobre la que la Comisión adopte una decisión después del 31 de enero de 2012, incluso si dicha ayuda se concedió antes del 31 de enero de 2012. En este último caso, no se aplican las disposiciones de los puntos 14, 19, 20, 24, 39 y 60 del Marco SIEG de 2011. |

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| (439) | Por consiguiente, las normas de aplicación de la Decisión SIEG de 2011 y del Marco SIEG de 2011 implican que la compensación por servicio público concedida a Siremar durante el período de prórroga puede evaluarse a la luz del Paquete SIEG de 2011. Si se cumplen las condiciones pertinentes de la Decisión SIEG de 2011 o del Marco SIEG de 2011, la medida de ayuda en cuestión será compatible con el mercado interior durante todo el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 30 de julio de 2012 [(166)](#ntr166-L_2022097ES.01000101-E0166). |

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| (440) | La Comisión observa que tanto la Decisión SIEG de 2005, que entró en vigor el 19 de diciembre de 2005, como la Decisión SIEG de 2011 solo se aplican a las ayudas estatales en forma de compensación por servicio público por conexiones marítimas con islas en las que el tráfico medio anual durante los dos ejercicios económicos anteriores a aquel en el que se concedió el SIEG no superó los 300 000 pasajeros. Las pruebas aportadas por Italia muestran que, en 2007 y 2008, el número de pasajeros en cuatro rutas marítimas explotadas por Siremar en virtud del Convenio inicial, ampliado, no superó por término medio el umbral de 300 000 pasajeros al año. Se trata de las agrupaciones Trapani-Pantelleria, Porto Empedocle-Isole Pelagie, Palermo-Ustica (por ejemplo, tramos mixtos D1, D4, D5 y solo ALD/1 pasajeros). Todas las demás rutas estaban por encima de este umbral (ALC/6, Lipari-Vulcano-Milazzo) o formaban parte de un grupo de rutas que superaban ampliamente el umbral (los casos de los grupos Milazzo-Aolie-Nápoles y Trapani-Egadi). Por consiguiente, para estas 16 rutas explotadas al amparo del Convenio inicial, en su versión prorrogada, la Comisión no puede evaluar la compatibilidad de la compensación por servicio público abonada a Siremar en virtud de la prórroga del Convenio inicial hasta el 30 de julio de 2012 sobre la base de la Decisión SIEG de 2005 o de la Decisión SIEG de 2011. |

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| (441) | Por lo tanto, el control de compatibilidad de la compensación por servicio público concedida a Siremar desde 2009 hasta la finalización de la privatización entraría normalmente en el ámbito de aplicación del Marco SIEG de 2011. Sin embargo, de conformidad con el apartado 9 del Marco SIEG de 2011, la ayuda concedida a los prestadores de SIEG en crisis debe evaluarse con arreglo a las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004. Siremar fue admitida en el procedimiento de administración extraordinaria el 17 de septiembre de 2010 y fue declarada en quiebra el 5 de octubre de 2010. Por lo tanto, era un prestador de SIEG en crisis en el sentido del apartado 10, letra c), de las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004 o, al menos, lo hizo durante parte del período de prórroga (desde el 5 de octubre de 2010 hasta su venta el 30 de julio de 2012). |

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| (442) | Las Directrices de salvamento y reestructuración de 2014 [(167)](#ntr167-L_2022097ES.01000101-E0167) en vigor desde el 1 de agosto de 2014, se aplican retroactivamente a las ayudas a los prestadores de SIEG. Dichas Directrices establecen que la evaluación de la compatibilidad de las ayudas concedidas antes del 31 de enero de 2012, es decir, antes de la fecha de entrada en vigor del Marco SIEG de 2011, a los prestadores de SIEG en crisis debe realizarse con arreglo al Marco SIEG de 2011, con excepción de las disposiciones establecidas en los apartados 9, 14, 19, 20, 24, 39 y 60 [(168)](#ntr168-L_2022097ES.01000101-E0168). Por consiguiente, para todo el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y la fecha de transferencia del sector de empresa a CdI, el 30 de julio de 2012, se aplican las mismas normas. |

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| (443) | Dado que dieciséis de las rutas de Siremar examinadas quedan fuera del ámbito de aplicación de las Decisiones SIEG de 2005 y 2011, y en aras de la brevedad y la eficiencia,, la Comisión evaluará en primer lugar si la compensación de las obligaciones de servicio público concedida a Siremar por la explotación de las veinte rutas de transporte marítimo en los cinco grupos de rutas durante el período de prórroga cumple las condiciones del Marco SIEG de 2011, con excepción de las condiciones establecidas en los considerandos 9, 14, 19, 20, 24, 39 y 60. Solo después de esta primera fase la Comisión evaluará si la misma compensación (solo para grupos de rutas que no superan el umbral de 300 000 pasajeros) sería compatible con el mercado interior y estaría exenta de la obligación de notificación en virtud de la Decisión SIEG de 2005, ya que se refería a ayudas concedidas entre el 19 de diciembre de 2005 y el 31 de enero de 2012 (véase el considerando 436). |

8.3.1.2.   Verdadero servicio de interés económico general a que se refiere el artículo 106 del TFUE

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| (444) | Según el apartado 12 del Marco SIEG de 2011, «[l]as ayudas deben concederse a un verdadero servicio de interés económico general correctamente definido como establece el artículo 106, apartado 2, del Tratado». En particular, el apartado 13 aclara que «los Estados miembros no podrán asignar obligaciones específicas de servicio público a servicios que ya presten – o puedan prestarse- de manera satisfactoria y en condiciones tales como el precio, las características objetivas de calidad, la continuidad y el acceso al servicio, de conformidad con el interés público definido por el Estado, las empresas que operen en condiciones normales de mercado. Por lo que se refiere a la cuestión de si un servicio puede ser prestado por el mercado, la apreciación de la Comisión se limita a comprobar que la definición de los Estados miembros no adolece de error manifiesto, a menos que la legislación de la Unión contenga disposiciones más restrictivas». Por último, el apartado 56 del Marco SIEG de 2011, se refiere al «margen de apreciación del Estado miembro» en lo que respecta a la naturaleza de los servicios que podrían calificarse como servicios de interés económico general. |

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| (445) | La evaluación de la autenticidad del SIEG también debe llevarse a cabo a la luz de la Comunicación SIEG (véanse los considerandos 326 y 341), el Reglamento de cabotaje marítimo (véanse los considerandos 328 a 330) y la jurisprudencia (véanse los considerandos 332 y 333). Por lo tanto, la Comisión debe analizar, en el caso del período de prórroga:   |  |  | | --- | --- | | 1) | la existencia de una demanda de los usuarios; |  |  |  | | --- | --- | | 2) | la incapacidad de los participantes en el mercado para satisfacer esta demanda en ausencia de obligaciones impuestas por las autoridades públicas (existencia de una deficiencia del mercado); |  |  |  | | --- | --- | | 3) | el hecho de que la mera utilización de obligaciones de servicio público no sea suficiente para subsanar esta deficiencia (enfoque menos perjudicial). | |

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| (446) | La Comisión subraya que las rutas de servicio público explotadas por Siremar durante el período de prórroga son idénticas a las atribuidas a CdI y, posteriormente, a SNS en virtud del nuevo convenio. Además, la Comisión ya ha descrito y evaluado la situación competitiva en estos grupos de rutas durante el período de prórroga. En este contexto, la evaluación que figura a continuación se referirá a las partes pertinentes de la evaluación realizada para el nuevo convenio y se basará en ellas (véase la sección 8.1.3.1). |

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| (447) | En este contexto, la Comisión recuerda en primer lugar (véase el considerando (84) que Italia impuso las obligaciones de servicio público establecidas en el convenio inicial principalmente con el fin de: i) garantizar la continuidad territorial entre Sicilia y sus islas menores, y ii) contribuir al desarrollo económico de las islas menores, mediante servicios regulares y fiables de transporte marítimo. La Comisión ya ha llegado a la conclusión de que se trata efectivamente de objetivos legítimos de interés público (véase el considerando 335). |

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| (448) | Las rutas en cuestión se explotaron, en gran medida sin modificaciones, durante varios años, al menos desde la entrada en vigor del convenio original. Italia confirmó que no se habían introducido cambios en el alcance de los servicios confiados a Siremar durante el período de prórroga. Por lo que se refiere al período anterior a la prórroga, la Comisión observa que durante 2008 se produjo una reducción de las rutas explotadas en régimen de servicio público. En particular, se ha suspendido la ruta Mazara del Vallo-Pantelleria, operada seis días a la semana por Siremar con el transbordador de Guizzo, y se ha reducido la frecuencia en determinadas rutas en períodos de temporada alta para las agrupaciones de rutas que cubren las islas Aolianas y las Islas Egadas. |

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| (449) | Para ilustrar la demanda real de servicios de los usuarios, las autoridades italianas facilitaron datos estadísticos detallados que mostraban que en 2008, último año del convenio inicial antes de la prórroga, Siremar transportó 1 821 387 pasajeros y 397 626,5 metros lineales de carga en las cinco agrupaciones de rutas combinadas. Los datos de 2009 muestran que Siremar transportó 1 513 214 pasajeros y 324 540 metros lineales de carga en estas rutas. |

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| (450) | Estas cifras fueron ligeramente inferiores en 2010 (véase el considerando 337), pero comparables. Esto demuestra que la demanda agregada de los usuarios ha sido significativa y bastante estable a lo largo de los años. Las autoridades italianas también facilitaron estadísticas detalladas a nivel de cada ruta para el período 2007-2019 [(169)](#ntr169-L_2022097ES.01000101-E0169). La Comisión observa que, a lo largo de los años, ha habido fluctuaciones en el número de viajes y pasajeros en las distintas agrupaciones de rutas. Sin embargo, esto puede explicarse por el hecho de que las rutas en cuestión conectan islas muy pequeñas con infraestructuras portuarias limitadas y relativamente cercanas. Esto implica ajustes frecuentes de los horarios para satisfacer la demanda de los usuarios a nivel local. En efecto, la Comisión ya ha demostrado (véase el cuadro 5) que había demanda de los usuarios en cada una de las rutas en cuestión en 2010. El mismo análisis para 2009, 2011 y para el período comprendido entre enero y julio de 2012 [(170)](#ntr170-L_2022097ES.01000101-E0170) no indicaba que la demanda de los usuarios de servicios de transbordador en cualquiera de los grupos de rutas en cuestión hubiera desaparecido. |

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| (451) | La Comisión considera que las estadísticas mencionadas anteriormente muestran claramente la existencia de una demanda real de servicios de transporte de pasajeros y mercancías en cada una de las rutas de servicio público en cuestión durante el período comprendido entre enero de 2009 y julio de 2012. Por consiguiente, puede concluirse que dichos servicios respondían a la demanda real de los usuarios y, por lo tanto, respondían a necesidades reales de servicio público. |

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| (452) | Como se explica en el considerando 341, la Comisión también debe examinar si estos servicios habrían sido insuficientes si hubieran sido prestados únicamente por las fuerzas del mercado, a la luz de las obligaciones impuestas por Italia en virtud de la prórroga del convenio inicial. El apartado 48 de la Comunicación SIEG señala a este respecto que «la evaluación de la Comisión se limita a comprobar si el Estado miembro ha cometido errores manifiestos». |

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| (453) | La Comisión señala, en primer lugar, que no se encontró ningún error manifiesto en la definición del SIEG de Siremar para el período 1992-2008, tal como se refleja en la Decisión de 2004, y que esta conclusión no fue cuestionada por la sentencia de 2009 ni por la Decisión del Grupo Tirrenia de 2020 (véase el considerando 342). Además, es probable que la difícil situación económica de Italia entre 2009 y 2012 haya reducido aún más la rentabilidad de estas rutas. |

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| (454) | La Comisión observa asimismo que, durante el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 30 de julio de 2012, en todas las agrupaciones de rutas que debía explotar Siremar en virtud de la prórroga del convenio inicial, otros operadores también ofrecieron servicios marítimos, aunque no necesariamente durante todo el año, a menudo con una frecuencia o tipo de buque diferente, y a menudo también a cambio de una compensación pública. La Comisión ya ha evaluado (véanse los considerandos 341 a 349), para cada uno de los grupos de rutas afectados, si los servicios prestados por otros operadores que no reciben compensación pública eran equivalentes a los que CdI y posteriormente SNS tenían que prestar en virtud del nuevo Convenio. La Comisión recuerda que dicha evaluación se basó en la situación competitiva en esas rutas entre el 1 de enero de 2009 y el 30 de julio de 2012. Dado que los servicios que debe prestar CdI y posteriormente SNS son muy similares, en términos de rutas y frecuencias, a los que explotará Siremar durante el período de prórroga, la conclusión de la Comisión de que las fuerzas del mercado por sí solas eran insuficientes para satisfacer las necesidades de servicio público también es válida para Siremar durante todo el período de prórroga. En particular, la Comisión observa que, en el momento de la atribución, ningún otro operador prestaba servicios durante todo el año en ninguna de las agrupaciones de rutas explotadas por Siremar sin recibir compensación pública. Los demás operadores, a los que también se habían encomendado obligaciones de servicio público, ofrecían un servicio que no era equivalente en términos de continuidad, regularidad, capacidad y calidad y, por lo tanto, no cumplía plenamente las obligaciones de servicio público de Siremar en virtud del convenio inicial (prorrogado). |

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| (455) | Por último, a la luz de la privatización prevista y con el fin de garantizar la continuidad de los servicios públicos explotados con arreglo al convenio inicial, Italia decidió prorrogar dicho convenio sin enmiendas (salvo la modificación del método de compensación aplicable desde 2010). La Comisión reconoce que la demanda de los usuarios, tal como se describe en los considerandos 449 a 451, no pudo satisfacerse imponiendo obligaciones de servicio público a todos los operadores que operan en las rutas en cuestión. En efecto, en las líneas explotadas por Siremar, todos los servicios comparables prestados por otros operadores fueron subvencionados y, en cualquier caso, la oferta de dichos operadores no cumplía los requisitos de regularidad, continuidad y calidad a lo largo del año. Además, la explotación de estas rutas en temporada baja es una actividad deficitaria, por lo que, a falta de compensación por servicio público, es probable que los servicios en estas rutas solo se ofrezcan en temporada alta. Ecorys extrajo una conclusión similar en su informe, concluyendo que estas rutas no son económicamente viables (véase el considerando 119). Además, la Comisión reconoce que, a la luz del proceso de privatización de Siremar, la prórroga del actual contrato de servicio público fue la única manera de garantizar la continuidad de los servicios públicos hasta que se completara la privatización. |

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| (456) | Por consiguiente, la Comisión concluye que Italia no cometió un error manifiesto al definir el SIEG para los servicios confiados a Siremar durante el período de prórroga. Las dudas expresadas por la Comisión en las Decisiones de 2011 y 2012 quedan, pues, disipadas. |

8.3.1.3.   Necesidad de un acto de atribución que concrete las obligaciones de servicio público y los métodos de cálculo de la compensación

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| (457) | Como se indica en la sección 2.3 del Marco SIEG de 2011, la competencia para explotar un servicio de interés económico general, en el sentido del artículo 106 del TFUE, debe confiarse a la empresa en cuestión mediante uno o varios actos oficiales. |

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| (458) | Estos actos deben especificar, en particular:   |  |  | | --- | --- | | a) | el contenido y la duración de las obligaciones de servicio público; |  |  |  | | --- | --- | | b) | las empresas afectadas y el territorio afectado; |  |  |  | | --- | --- | | c) | la naturaleza de los derechos exclusivos; |  |  |  | | --- | --- | | d) | los parámetros aplicados al cálculo, el control y la revisión de la compensación; |  |  |  | | --- | --- | | e) | las modalidades para evitar y devolver las posibles compensaciones excesivas. | |

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| (459) | En las Decisiones de 2011 y 2012, la Comisión expresó dudas sobre si el acto de atribución contenía una descripción completa de la naturaleza de las obligaciones de servicio público de Siremar durante el período de prórroga. En particular, la Comisión señaló que no se había adoptado ningún plan quinquenal para los períodos 2000-2004 y 2005-2008, como exigía el convenio inicial. No obstante, la Comisión también recordó que varios elementos de la atribución pueden incorporarse en varios actos sin comprometer la adecuación de la definición de obligaciones. Durante el período de prórroga, el acto de atribución de Siremar incluía el Convenio inicial (modificado y prorrogado a lo largo del tiempo), los planes quinquenales validados, algunas decisiones ad hoc adoptadas por las autoridades italianas, la resolución del CIPE y la Ley de 2009. |

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| (460) | En este contexto, la Comisión observa, en primer lugar, que el Convenio inicial, modificado a lo largo del tiempo, representa la parte principal del acto de atribución de Siremar y siguió siendo plenamente aplicable hasta que se completara la privatización, sobre la base de una serie de decretos-ley (véase el considerando 436). Estos documentos especifican que se encomendaron a Siremar las obligaciones de servicio público hasta que se completara la privatización. |

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| (461) | De conformidad con el Convenio inicial, los planes quinquenales especifican las rutas y puertos a los que se debe prestar servicio, el tipo y la capacidad de los buques que van a utilizarse para los enlaces marítimos, las frecuencias de servicio y las tarifas aplicables, incluidas las tarifas preferenciales, en particular las aplicables a los residentes de las islas menores. Sin embargo, Italia declaró que, puesto que la investigación de la Comisión en el asunto SA.15631 aún estaba en curso entre 1999 y 2004 por lo que se refiere a las empresas del grupo Tirrenia (incluida Siremar), Italia no adoptó ningún plan quinquenal para estas empresas para el período 2000-2004 [(171)](#ntr171-L_2022097ES.01000101-E0171). Como consecuencia de ello, el último plan quinquenal aprobado formalmente para Siremar fue el correspondiente al período 1995-1999 y Siremar siguió operando en los años siguientes sobre la base de la red de rutas de 1999. Tras la adopción de la Decisión de 2004, el Ministerio de Transportes elaboró un proyecto de plan para el período 2005-2008, que no dio lugar a cambios significativos en la red o el horario de las rutas. Sin embargo, como las reuniones y los trabajos preparatorios para la próxima privatización ya habían comenzado, Italia decidió no aprobar formalmente el plan. Por consiguiente, las obligaciones de Siremar en virtud del Convenio inicial siguieron aplicándose según lo definido en 1999 y confirmado en el Decreto de 2004 (véase el considerando 40). En otras palabras, a reserva de la adopción de una decisión de modificar determinados elementos específicos (por ejemplo, una ruta, una frecuencia o un tipo de buque) en comparación con 2004, las disposiciones del Convenio inicial siguieron aplicándose plenamente durante el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 30 de julio de 2012. Además, Italia confirmó que durante todo el período de prórroga no se adoptaron decretos interministeriales para modificar las tarifas que debían aplicar las empresas del antiguo Grupo Tirrenia, incluido Siremar. Sobre esta base, la Comisión concluye que, teniendo en cuenta las circunstancias muy específicas de la privatización del Grupo Tirrenia en general y del sector de empresa de Siremar en particular, las obligaciones de servicio público que debía cumplir Siremar durante el período de prórroga se definieron de manera suficientemente clara. |

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| (462) | La Comisión ya ha declarado en los considerandos 239 y 240 de la Decisión de 2011 que los parámetros necesarios para el cálculo del importe de la compensación se han establecido previamente y han sido claramente descritos. En particular, para el año 2009, el convenio inicial contiene una lista exhaustiva y precisa de los elementos de coste que deben tenerse en cuenta, así como la metodología para calcular el rendimiento de la inversión para el operador (véanse los considerandos 45 a 47). Para el período comprendido entre el 1 de enero de 2010 y el 30 de julio de 2012, la metodología pertinente se establece en la Decisión del CIPE (véanse los considerandos 48 a 58). En particular, la Decisión del CIPE especifica detalladamente los elementos de coste y la rentabilidad del capital que deben tenerse en cuenta, mientras que la Ley de 2009 establece que, a partir de 2010, el importe máximo de la compensación que debe abonarse a Siremar es de 55 694 895 EUR. Por último, el convenio inicial garantizaba que la compensación se basaba en los costes e ingresos reales derivados de la prestación del servicio público y estipulaba que la compensación se pagaría a plazos. Esto facilitó la detección y la prevención de cualquier compensación excesiva. En su caso, el Estado podría, por tanto, recuperar la compensación excesiva. |

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| (463) | Sobre esta base, la Comisión considera que, durante el período de prórroga del convenio inicial, los actos de atribución proporcionaron una definición clara de las obligaciones de servicio público, la duración, la empresa y el territorio afectado, los parámetros para calcular, controlar y revisar la compensación, así como las modalidades para evitar y reembolsar cualquier compensación excesiva, tal como se establece en el Marco SIEG de 2011. |

8.3.1.4.   Duración del período de atribución

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| (464) | Como se especifica en el punto 17 del Marco SIEG de 2011, «[l] a duración del período de atribución debe justificarse por referencia a criterios objetivos como la necesidad de amortizar activos fijos no transferibles. En principio, la duración del período de atribución no deberá exceder el período requerido para la amortización de los activos más importantes necesarios para gestionar el SIEG». |

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| (465) | Italia alegó que la duración de la prórroga coincide con el período necesario para la amortización de los activos más importantes utilizados en la prestación del SIEG, es decir, los buques de Siremar. En particular, la duración total del convenio inicial, que se ha prorrogado, es de algo más de 23,5 años. Los buques utilizados por Siremar para prestar el servicio público tendrán una vida útil [(172)](#ntr172-L_2022097ES.01000101-E0172) de 30 años (en el caso de los transbordadores) y 20 años (para los buques de alta velocidad destinados al transporte exclusivo de pasajeros) y se amortizarán durante ese período. Además, el estudio pericial realizado en el contexto de la privatización de la empresa mostró que los buques eran bastante antiguos y estaban destinados a la prestación de servicios locales en el Mediterráneo. Por consiguiente, no eran fácilmente transferibles, lo que justifica, en principio, un largo período de atribución. Además, Italia recordó que la prórroga del 1 de enero de 2009 al 30 de julio de 2012 era necesaria para garantizar la continuidad del servicio público hasta que finalizara la privatización. |

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| (466) | Sobre la base de lo anterior, la Comisión concluye que la duración del período de atribución está suficientemente justificada y que, por lo tanto, se respeta el punto 17 del Marco SIEG de 2011. |

8.3.1.5.   Cumplimiento de la Directiva 2006/111/CE y contabilidad separada

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| (467) | Según el punto 18 del Marco SIEG de 2011, «la ayuda solo se considerará compatible con el mercado interior sobre la base del artículo 106, apartado 2, del Tratado si cumple, en su caso, la Directiva 2006/111/CE» [(173)](#ntr173-L_2022097ES.01000101-E0173) relativa a la transparencia de las relaciones financieras entre los Estados miembros y las empresas públicas, así como a la transparencia financiera de determinadas empresas. |

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| (468) | Además, el apartado 44 del Marco SIEG de 2011 establece que: «Cuando una empresa realice tanto actividades que se hallen dentro como fuera del SIEG, la contabilidad interna deberá reflejar por separado los costes e ingresos asociados al SIEG y los de los otros servicios de acuerdo con los principios expuestos en el apartado 31». |

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| (469) | La Comisión observa que el cumplimiento de ambos puntos del Marco SIEG de 2011 exige que la empresa responsable de la prestación del servicio garantice una separación contable adecuada. A este respecto, Italia recordó que el artículo 2 de la Decisión de 2004 exigía a Siremar que empezara a llevar contabilidades separadas para cada ruta a partir del 1 de enero de 2004. En el marco de las Decisiones de 2001 y 2004 y a petición de la Comisión, PriceWaterhouseCoopers (en lo sucesivo, «PWC») elaboró un estudio sobre la contabilidad analítica de Siremar para el período 1992-1999, que las autoridades italianas completaron con información relativa a los años 2000 y 2001. En ese contexto PWC emitió un dictamen que confirmaba que la metodología utilizada para elaborar dichas contabilidades era adecuada y acorde con las prácticas contables aplicables. Según Italia, Siremar continuó presentando su contabilidad analítica sobre esta base y, por lo tanto, cumplió los requisitos de la Decisión de 2004. Para el período objeto de evaluación, Italia también presentó como prueba las cuentas de cada ruta de Siremar correspondientes a los años 2009 y 2010. |

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| (470) | El Comisario extraordinario no elaboró dichas cuentas para el período comprendido entre el 1 de enero de 2011 y el 30 de julio de 2012. Sin embargo, Italia confirmó que, durante el período de prórroga, Siremar no realizó ninguna actividad al margen de sus obligaciones de servicio público. Por lo tanto, se excluye cualquier posible subvención cruzada. El comisario especial también presentó al Ministerio de Desarrollo Económico todos los estados financieros trimestrales de 2011 y 2012. Estas declaraciones están disponibles en el sitio web de Siremar en AS y muestran que los resultados de explotación entre septiembre de 2010 y junio de 2012 fueron negativos (0,7 millones EUR en pérdidas totales). Además, en septiembre de 2012, estas pérdidas aumentaron a 4,8 millones EUR. La Comisión considera que esto es un claro indicio de que Siremar en AS no recibió ninguna compensación excesiva durante el período comprendido entre el 1 de enero de 2011 y el 30 de julio de 2012, cuando no se elaboró ninguna contabilidad por línea (véase también la sección 8.3.1.6). La Comisión observa que los dos objetivos principales de la separación contable, a saber, evitar la compensación excesiva y las subvenciones cruzadas, también se alcanzan durante este período. |

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| (471) | Sobre la base de lo anterior y teniendo en cuenta las circunstancias muy específicas de la privatización, que fue llevada a cabo por la administración extraordinaria garantizando al mismo tiempo la continuidad de los servicios públicos, la Comisión concluye que se han cumplido las obligaciones establecidas en los puntos 18 y 44 del Marco SIEG de 2011. |

8.3.1.6.   Importe de la compensación

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| (472) | El punto 21 del Marco SIEG de 2011 establece que «el importe de la compensación no debe exceder de lo necesario para cubrir los costes netos ocasionados por el cumplimiento de las obligaciones de servicio público, incluido un beneficio razonable». |

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| (473) | En el caso que nos ocupa, puesto que al menos una parte de la compensación constituye ayuda ilegal concedida antes de su entrada en vigor [(174)](#ntr174-L_2022097ES.01000101-E0174), el apartado 69 del Marco SIEG de 2011 establece específicamente que, a fin de evaluar las ayudas estatales, no es preciso utilizar el método del coste evitado neto. En su lugar, podrán utilizarse métodos alternativos, como la metodología de imputación de costes. Con arreglo a este último, los costes netos pueden calcularse en términos de la diferencia entre los costes e ingresos derivados de la ejecución de las obligaciones de servicio público, según lo especificado y estimado en el acto de atribución. Los apartados 28 a 38 del Marco SIEG de 2011 establecen con más detalle cómo debe aplicarse este método. |

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| (474) | En las Decisiones de 2011 y de 2012, la Comisión no estaba en condiciones de concluir si el importe de la compensación era proporcionado, ya que seguía albergando dudas sobre la calificación de determinados servicios públicos encomendados a Siremar como un verdadero servicio de interés económico general. Estas dudas se han abordado en la sección 8.3.1.2. |

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| (475) | Sin embargo, la Comisión también expresó dudas sobre la prima de riesgo del 6,5 %, que se aplicó a partir de 2010. En particular, la Comisión dudaba de que esta prima reflejara un nivel de riesgo adecuado, teniendo en cuenta que, a primera vista, no se esperaba que Siremar asumiera los riesgos normalmente asumidos en la explotación de estos servicios. De hecho, la Comisión recuerda que, en la Decisión de 2011, concluyó con carácter preliminar que Siremar solo podría haber recibido una compensación excesiva por la prestación de obligaciones de servicio público a partir de 2010. Esto significa que la Comisión no tiene que evaluar ex post si se produjo una compensación excesiva para el año 2009 [(175)](#ntr175-L_2022097ES.01000101-E0175). |

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| (476) | Por consiguiente, la Comisión evaluará si se ha producido una compensación excesiva durante todo el período comprendido entre el 1 de enero de 2010 y el 30 de julio de 2012, de conformidad con el punto 47 del Marco SIEG de 2011. Por lo que se refiere a este período, la Comisión señala lo siguiente:   |  |  | | --- | --- | | — | en primer lugar, el informe sobre los motivos de la insolvencia de Tirrenia y Siremar, elaborado por la administración extraordinaria en mayo de 2011, señala que la compensación pública abonada a Siremar en virtud del convenio inicial, anterior a 2010, ascendía a una media de 70 millones de euros anuales, lo que representa entre el 70 % y el 75 % del volumen de negocios de Siremar durante ese período. Por lo tanto, parece que Siremar dependía casi totalmente de compensaciones por servicio público para llevar a cabo sus actividades. Aunque Siremar se basó cada vez más en compensaciones públicas entre 1999 y 2008, una compensación anual limitada a 55,7 millones EUR habría sido insuficiente para poder cumplir sus obligaciones de servicio público a largo plazo. En particular, el informe muestra que la metodología de cálculo de la compensación pública prevista en el convenio inicial, aplicada hasta 2009 inclusive, siempre había permitido a Siremar recompensar adecuadamente sus factores de producción (capital y mano de obra), obteniendo al mismo tiempo una tasa media de rentabilidad de los fondos propios bastante baja. Sin embargo, esta metodología no se ha aplicado desde 2010. En su lugar, se aplicó la nueva metodología prevista en la resolución del CIPE y en la Ley de 2009, que preveían un límite máximo que se había fijado para Siremar en un importe significativamente inferior a la compensación media recibida en la década anterior; |  |  |  | | --- | --- | | — | en segundo lugar, de los documentos presentados se desprende que Siremar había solicitado unos 66 millones EUR para 2010, pero que Italia solo había aprobado una compensación de 55,7 millones EUR. Además, este importe dio lugar a una reducción del 17 % de la compensación entre 2009 y 2010, cuando entró en vigor el nuevo método de cálculo de la compensación, junto con un límite máximo fijo. Si la comparación se hace entre 2008-2009 y 2010-2011, la diferencia es aún más clara: Durante ese período, la compensación disminuyó un 22 %; |  |  |  | | --- | --- | | — | En tercer lugar, sobre la base de las cuentas de cada ruta preparada por Siremar para 2010, la Comisión observa que Siremar registró un resultado operativo positivo de aproximadamente 5,9 millones EUR en 2010. Italia aclaró que este importe era igual al rendimiento del capital, calculado aplicando un tipo del 7,6 % al capital invertido de 77,5 millones EUR. La Comisión observa que el capital invertido declarado para 2010 corresponde a más del doble del capital invertido por término medio anual comunicado por CdI y después por SNS (véase la nota 135) y que el tipo es mayor que la prima del capital de riesgo del 6,5 %, definida en la Decisión del CIPE, pero inferior al tipo que resulta de la aplicación integral de la metodología del CIPE (es decir, el 8,87 %, véase el considerando 218). Si se hubiera aplicado el tipo del 6,5 %, ello habría dado lugar a un rendimiento del capital de solo 5 millones EUR. Por consiguiente, la Comisión observa que Siremar recibió una compensación excesiva de unos 0,9 millones EUR en 2010; |  |  |  | | --- | --- | | — | en cuarto lugar, después de que Siremar entrara en administración extraordinaria en septiembre de 2010 (se trataba de un procedimiento de liquidación), no se prepararon los presupuestos de 2010, 2011 y 2012. Lo mismo se aplica a las líneas individuales de contabilidad de 2011 y 2012. Por otra parte, la administración extraordinaria ha elaborado y presentado informes trimestrales a las autoridades nacionales de supervisión, es decir, al Ministro de Desarrollo Económico, de conformidad con la legislación vigente. Estos informes muestran que los resultados globales de explotación entre septiembre de 2010 y junio de 2012 fueron negativos, con una pérdida de 0,7 millones EUR en septiembre de 2012, es decir, después de la transferencia del sector de empresa a CdI, estas pérdidas de explotación aumentaron a 4,8 millones EUR como consecuencia de ello, Siremar registró pérdidas al tiempo que seguía gestionando las obligaciones de servicio público y el procedimiento de venta del sector de empresa de Siremar estaba en curso. Aunque la Comisión lamenta que para 2011 y el primer semestre de 2012 no existiera una contabilidad única, Italia confirmó que durante el período de prórroga Siremar no explotó ningún servicio al margen de sus obligaciones de servicio público. Dado que los resultados financieros globales para el período comprendido entre septiembre de 2010 y septiembre de 2012 fueron negativos, estos documentos indican claramente que Siremar no recibió ninguna compensación excesiva en el período posterior a su entrada en administración extraordinaria y que la compensación excesiva limitada recibida en 2010 se ha extendido a lo largo de los años siguientes. | |

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| (477) | En este contexto, teniendo en cuenta las circunstancias muy específicas de la privatización del sector de empresa de Siremar y sobre la base de la información facilitada por las autoridades italianas, la Comisión observa que la limitada compensación excesiva constatada para 2010 se compensó con las pérdidas registradas en el período siguiente. Por consiguiente, la Comisión concluye que Siremar no recibió ninguna compensación excesiva en el período comprendido entre el 1 de enero de 2010 y el 30 de julio de 2012, en su conjunto. Dado que la Comisión había expresado dudas en su Decisión de 2011 sobre la supuesta compensación excesiva concedida a Siremar únicamente para ese período, la Comisión considera que sus dudas sobre este punto se han disipado. |

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| (478) | El apartado 49 del Marco SIEG de 2011 requiere que los Estados miembros garanticen que las empresas no reciban una compensación excesiva (tal y como se define en el apartado 47 de dicho Marco) por la gestión de SIEG. Entre otras cosas, los Estados miembros deben facilitar pruebas a petición de la Comisión. Además, deben realizar o asegurarse de que se llevan a cabo controles periódicos al final del período de atribución y, en cualquier caso, a intervalos que no superen los tres años. A este respecto, la Comisión observa que las autoridades italianas han proporcionado las pruebas necesarias descritas anteriormente (véanse los considerandos 469 y 470). En efecto, en 2009 y 2010 Siremar presentó las cuentas de cada ruta al Ministerio responsable de la supervisión para que este pudiera revisar el importe de la compensación. A partir del 17 de septiembre de 2010, la presencia del Comisario especial, nombrado por el Estado italiano, con arreglo a las modalidades previstas por el Derecho nacional y sujeto a responsabilidad civil y penal, constituyó una garantía adicional contra la sobrecompensación. La Comisión recuerda asimismo que la compensación se paga a plazos, que el pago final se efectúa sobre la base de los costes e ingresos reales del ejercicio y que, después del 25 de noviembre de 2010, mediante decisión de la Conferencia Interministerial, cualquier importe de compensación excesiva se deduce de los futuros pagos anticipados de las subvenciones (véase el considerando 43). En este contexto, aunque Siremar recibió una compensación excesiva en 2010, la Comisión observa que esta compensación excesiva se siguió consumiendo en los años siguientes, ya que Siremar registró pérdidas en AS (véase el considerando 476). Por lo tanto, no se concedió ninguna compensación excesiva para el período comprendido entre el 1 de enero de 2010 y el 30 de julio de 2012 en su conjunto. En este contexto, la Comisión concluye que, teniendo en cuenta las circunstancias muy específicas de la privatización, llevada a cabo por la administración extraordinaria que garantiza la continuidad de los servicios públicos, las medidas descritas anteriormente podrían considerarse suficientes para evitar e identificar cualquier caso de compensación excesiva. |

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| (479) | Sobre la base de los elementos anteriores (véanse los considerandos 472 a 478), la Comisión concluye que se cumplen las condiciones aplicables de la sección 2.8 del Marco SIEG de 2011 (importe de la compensación). |

8.3.1.7.   Prioridad en la asignación de los puntos de amarre

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| (480) | El artículo 19-ter, apartado 21, de la Ley n.o 135/2009 especifica claramente que la prioridad en la asignación de puntos de amarre es necesaria para garantizar la continuidad territorial con las islas y a la luz de las obligaciones de servicio público de las empresas del antiguo grupo Tirrenia (incluida Siremar). En efecto, a falta de tal prioridad en favor de las empresas a las que se han encomendado obligaciones de servicio público, en ocasiones estas empresas podrían tener que esperar a su cambio para atraer y, por tanto, sufrir retrasos que frustrarían el objetivo de ofrecer a los ciudadanos enlaces fiables y asequibles. En el caso de Siremar, para satisfacer las necesidades de movilidad de la población de las islas menores y contribuir a su desarrollo económico, es necesario disponer de horarios de trabajo regulares. Además, dado que Siremar estaba sujeto a obligaciones específicas de programación en virtud del convenio inicial, la prioridad del atraque contribuyó a garantizar que los puertos asignaran puntos de amarre y puntos de amarre de manera que Siremar pudiera cumplir sus obligaciones de servicio público. |

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| (481) | Habida cuenta de lo anterior, la Comisión considera que esta medida se concedió con el objetivo de permitir a Siremar cumplir sus obligaciones de servicio público, que constituyen un auténtico servicio de interés económico general (véase el considerando 456). Las autoridades italianas también confirmaron que la prioridad de atraque solo es aplicable a los servicios prestados en régimen de servicio público y que Siremar no prestó ningún servicio al margen de sus obligaciones de servicio público durante la prórroga del convenio inicial. La Comisión ya ha evaluado en detalle la compatibilidad del SIEG y la compensación correspondiente a Siremar durante la prórroga del Convenio inicial (véanse los considerandos 444 a 479). La Comisión considera, pues, que su análisis de la compatibilidad de la prioridad en la asignación de los puntos de amarre puede limitarse a establecer si esta medida dio lugar o no a una compensación excesiva. |

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| (482) | Italia alega que la posible ventaja monetaria derivada de la priorización de los amarres no puede cuantificarse (véase el considerando 227). En cualquier caso, la Comisión señala que, en caso de que tal medida redujera los costes de funcionamiento o incrementara los ingresos del operador de servicio público, estos efectos aparecerían íntegramente en la contabilidad interna del operador. Por lo tanto, las comprobaciones de la compensación excesiva que se han aplicado a Siremar tal como se describe anteriormente (véase la sección 8.3.1.6) son adecuadas también para detectar cualquier posible compensación excesiva derivada de la prioridad en la asignación de los puntos de amarre. |

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| (483) | Por consiguiente, la Comisión concluye que la prioridad de atraque, que está inextricablemente ligada al SIEG de Siremar, también es compatible con el mercado interior sobre la base del artículo 106, apartado 2, del TFUE y del Marco SIEG de 2011. |

8.3.1.8.   Cumplimiento de la Decisión SIEG de 2005

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| (484) | Como se explica en el considerando 440, el tráfico medio anual durante los dos ejercicios financieros anteriores a la atribución del SIEG no superó los 300 000 pasajeros en las siguientes agrupaciones de rutas:   |  |  | | --- | --- | | — | Trapani – Pantelleria (ruta mixta D4); |  |  |  | | --- | --- | | — | Porto Empedocle – Islas Pelagias (ruta mixta D5); |  |  |  | | --- | --- | | — | Palermo – Ustica (es decir, la ruta mixta D1 y la ruta de pasajeros ALD/1). | |

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| (485) | Por lo tanto, para las rutas D1, D4, D5 y ALD/1, se cumple la condición establecida en el artículo 2, apartado 1, letra c), de la Decisión SIEG de 2005. Asimismo, la Comisión considera que también se cumple lo dispuesto en el artículo 2, apartado 2, de la Decisión SIEG de 2005, que requiere el cumplimiento del Reglamento sobre el cabotaje marítimo [(176)](#ntr176-L_2022097ES.01000101-E0176). Sobre la base de lo anterior, la Comisión concluye que estas cuatro rutas pueden evaluarse a la luz del Marco SIEG de 2005. |

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| (486) | La Comisión ya ha establecido (véase la sección 8.3.1.3) que, durante el período de prórroga del convenio inicial, los actos de atribución especificaban claramente las obligaciones de servicio público, la duración, la empresa y el territorio afectado, los parámetros para calcular, controlar y revisar la compensación, así como cómo evitar y, en su caso, reembolsar cualquier compensación excesiva. Por lo tanto, para las rutas D1, D4, D5, ALD/1, se cumple el artículo 4 (Notificación) de la Decisión SIEG de 2005. |

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| (487) | Además, la Comisión concluyó (véase la sección 8.3.1.6) que: i) Siremar no recibió ninguna compensación excesiva durante el período de prórroga del convenio inicial, en su conjunto, y ii) las autoridades italianas llevaron a cabo controles periódicos para evitar la sobrecompensación de la empresa. Sobre esta base, la Comisión considera que el artículo 5 (Compensación) y el artículo 6 (Control de la compensación excesiva) de la Decisión SIEG de 2005 también se cumplen en las rutas D1, D4, D5, ALD/1. |

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| (488) | Habida cuenta del vínculo indisociable con la prestación del servicio público y teniendo en cuenta la evaluación anterior (véase la sección 8.3.1.7), la prioridad en la asignación de puntos de amarre concedida para la explotación de las rutas D1, D4, D5 y ALD/1 también está en consonancia con la Decisión SIEG de 2005. |

8.3.1.9.   Conclusión

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| (489) | Sobre la base de la evaluación mencionada en los considerandos 436 a 483, la Comisión concluye que la compensación concedida a Siremar por la prestación de servicios marítimos en virtud de la prórroga del Convenio inicial durante el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 1 de agosto de 2012 y la prioridad en la asignación de puntos de amarre inextricablemente vinculados cumplen las condiciones aplicables del Marco SIEG de 2011 y son, por tanto, compatibles con el mercado interior en virtud del artículo 106 del TFUE. |

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| (490) | Además, sobre la base de la evaluación mencionada en los considerandos 484 a 488, la compensación concedida a Siremar y la prioridad de atraque para la explotación de las rutas D1, ALD/1, D4 y D5 durante el período de prórroga también son compatibles con el mercado interior y están exentas de notificación previa con arreglo a la Decisión SIEG de 2005. |

8.3.2.   Prórroga ilegal de la ayuda de salvamento en favor de Siremar

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| (491) | Sobre la base de la Decisión de 2010, la ayuda de salvamento concedida a Siremar solo era compatible con el mercado interior por el período de seis meses que expiró el 28 de agosto de 2011. Sin embargo, según las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004, Italia estaba obligada a notificar a la Comisión en el plazo de seis meses i) pruebas de que el préstamo había sido reembolsado en su totalidad o de que se había puesto fin a la garantía o ii) un plan de reestructuración (o liquidación). |

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| (492) | La garantía se ejecutó el 11 de julio de 2011 y Siremar no devolvió la cantidad íntegra adeudada al Estado hasta el 18 de septiembre de 2012 (véase el considerando 65). Por consiguiente, Italia no pudo demostrar que el préstamo se hubiera reembolsado en su totalidad o que la garantía se hubiera extinguido en el plazo de seis meses que expiró el 28 de agosto de 2011. |

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| (493) | Según la información facilitada por Italia (véase la sección 4.2) durante el procedimiento de investigación formal, se disponía de un plan de liquidación para Siremar en el emplazamiento de Siremar en AS antes de que expirara el plazo de seis meses establecido en las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004. Además, Italia alega que siempre ha mantenido informada a la Comisión sobre el avance del proceso de privatización del sector de empresa de Siremar. |

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| (494) | La información incluida en el expediente de la Comisión confirma que las autoridades italianas han puesto efectivamente al día a la Comisión sobre la privatización en curso del sector de empresa de Siremar. Además, Italia confirmó también la intención de Siremar de reembolsar la ayuda de salvamento antes de la expiración del plazo de seis meses, utilizando los ingresos procedentes de la privatización. Sin embargo, las autoridades italianas no han presentado formalmente a la Comisión un plan de reestructuración o de liquidación. En aquel momento, la Comisión no sabía que el plan de liquidación se hubiera publicado en el sitio web de Siremar en AS. Además, informar a la Comisión del proceso de privatización del sector de empresa de Siremar no puede sustituir al requisito de presentar formalmente un plan de liquidación. Más concretamente, debe darse a la Comisión la oportunidad de evaluar si el plan de liquidación se ajusta a las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004 y, por lo tanto, Italia debería haberlo presentado formalmente. |

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| (495) | Además, la Comisión observa que el 5 de octubre de 2011 envió una carta a Italia para que confirmara que había cumplido los requisitos de las Directrices de salvamento y reestructuración de 2004 y de la Decisión de 2010. La Comisión envió un recordatorio a Italia el 28 de noviembre de 2011 y recibió una respuesta de las autoridades italianas el 12 de diciembre de 2011. Por lo tanto, por lo que respecta a la Comisión, hasta esta última fecha (y, por tanto, después de la expiración del plazo de seis meses), Italia no había presentado ni i) pruebas de que el préstamo había sido reembolsado en su totalidad o de que se había puesto fin a la garantía, ni ii) un plan de reestructuración (o liquidación). |

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| (496) | En su respuesta a la carta de la Comisión de 5 de octubre de 2011, Italia confirmó que su intención era que Siremar reembolsara la ayuda de salvamento antes del 28 de agosto de 2011, después de la venta de la rama de actividad de Tirrenia, pero que el proceso de privatización de Tirrenia se había retrasado debido a la necesidad de obtener la aprobación de la concentración por parte de la Comisión. Dado que el producto de la privatización del sector de empresa de Tirrenia era necesario para reembolsar al Estado, no fue posible efectuar dicho reembolso antes de que expirara el plazo del 28 de agosto de 2011. La Comisión señala que, en su carta de 12 de diciembre de 2011, las autoridades italianas no se refirieron en absoluto al plan de liquidación de Siremar que, según las observaciones presentadas posteriormente por Siremar, se pondría a disposición del público antes del 28 de agosto de 2011. Por el contrario, Italia solo intentó explicar por qué la devolución no podía efectuarse antes de que expirara el plazo de seis meses. No obstante, si las autoridades italianas hubieran presentado un plan de reestructuración o liquidación a la Comisión antes del 28 de agosto de 2011, no habrían tenido que proporcionar dichas explicaciones. La Comisión considera que esto constituye una prueba adicional de que Italia no ha presentado un plan de reestructuración o liquidación en el plazo de seis meses exigido. |

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| (497) | Habida cuenta de lo anterior, aunque la Comisión conocía el proceso de privatización, Italia no respetó su compromiso, tal como se establece en la Decisión de 2010, de comunicar a la Comisión un plan de reestructuración (o de liquidación) en un plazo de seis meses a partir de la autorización de la ayuda de salvamento. Por consiguiente, a partir de la expiración del período de seis meses, es decir, a partir del 28 de agosto de 2011, la ayuda de salvamento debe considerarse ayuda ilegal e incompatible. La Comisión considera que la ayuda de salvamento ilegalmente prorrogada no puede considerarse compatible por otros motivos, ya que no cumple las condiciones pertinentes de las Directrices de salvamento y reestructuración y del Marco SIEG de 2011 [(177)](#ntr177-L_2022097ES.01000101-E0177). |

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| (498) | De hecho, en el presente caso, la Comisión observa que la ayuda de salvamento ilegalmente prorrogada no se concedió para un servicio de interés económico general genuino y debidamente definido, como exige el punto 12 del Marco SIEG de 2011. Siremar ya había recibido una compensación por la prestación de servicios públicos sobre la base del Convenio inicial (prorrogado), mientras que la ayuda de salvamento se notificó y aprobó como medida temporal de ayuda de salvamento y no como compensación por un SIEG. Por lo tanto, no puede declararse compatible sobre la base del Marco SIEG de 2011. |

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| (499) | En este contexto, la Comisión observa que el 18 de septiembre de 2012 Siremar en AS reembolsó un importe de 15 511 529,35 EUR, que supera los 15 121 838,33 EUR [(178)](#ntr178-L_2022097ES.01000101-E0178) ya adeudados al Estado el 11 de julio de 2011. No obstante, dado que la ayuda de salvamento ilegalmente prorrogada se ha considerado incompatible, el reembolso debe incluir como mínimo el importe de los intereses de recuperación. Si los intereses ya pagados por Siremar en AS fueran insuficientes, aún habría que recuperar el importe pendiente de los intereses. |

8.3.3.   Exenciones fiscales relativas al proceso de privatización

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| (500) | La Comisión concluyó (véanse los considerandos 419 a 430) que la exención del impuesto de sociedades sobre el producto de la venta del sector de empresa de Siremar concedida a Siremar, así como la exención de impuestos indirectos sobre las transferencias del mismo sector de empresa concedido a Siremar y SNS en virtud de la Ley de 2010, constituyen ayuda estatal a Siremar y SNS. |

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| (501) | En ambos casos, la ayuda es igual a la diferencia entre el impuesto normalmente adeudado por estos tipos de operaciones y el impuesto efectivamente pagado. Por lo tanto, la compatibilidad de esta ayuda estatal debe evaluarse a la luz de las excepciones previstas en el artículo 107, apartado 2, y 3 y en el artículo 106, apartado 2, del TFUE. |

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| (502) | En primer lugar, la Comisión considera que ninguna de estas exenciones puede considerarse compatible sobre la base de las excepciones previstas en el artículo 107, apartado 2, y 3 del TFUE. |

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| (503) | En segundo lugar, la Comisión observa que estas exenciones fiscales relacionadas con la venta del sector de empresa de Siremar son medidas puntuales relativas a una transferencia de activos que formaba parte del proceso más amplio de reorganización y privatización del grupo Tirrenia. Por lo tanto, la Comisión considera que esta ayuda no está inextricablemente ligada al SIEG prestado por Siremar y posteriormente por SNS y, por lo tanto, no debe evaluarse con arreglo a la misma base de compatibilidad. De hecho, estas exenciones no afectan a la explotación de servicios de interés económico general, tal como se definen en el convenio inicial o en el nuevo convenio [(179)](#ntr179-L_2022097ES.01000101-E0179). Por consiguiente, no pueden invocarse los motivos de compatibilidad mencionados en el artículo 106, apartado 2, del TFUE. |

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| (504) | Por consiguiente, la Comisión concluye que las exenciones fiscales concedidas a Siremar y SNS constituyen ayudas de funcionamiento que reducen los costes que Siremar en AS y SNS habría tenido que soportar utilizando sus propios recursos y, por lo tanto, son incompatibles con el mercado interior [(180)](#ntr180-L_2022097ES.01000101-E0180). |

8.3.4.   Conclusión sobre la compatibilidad de la ayuda

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| (505) | Sobre la base del análisis anterior la Comisión concluye que:   |  |  | | --- | --- | | — | la compensación concedida a Siremar y la prioridad de atraque para la explotación de las rutas marítimas en el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 1 de agosto de 2012 son compatibles con el mercado interior en virtud del artículo 106 del TFUE, del Marco SIEG de 2011 y, para cuatro rutas agrupadas en tres agrupaciones, también en virtud de la Decisión SIEG de 2005; |  |  |  | | --- | --- | | — | la ayuda de salvamento a Siremar se prorrogó ilegalmente del 28 de agosto de 2011 al 18 de septiembre de 2012 (fecha en que fue reembolsada) y es incompatible con el mercado interior; |  |  |  | | --- | --- | | — | la exención de la que Siremar se benefició de impuestos indirectos sobre transacciones y actos relativos a la transferencia del sector de empresa de Siremar a SNS y la exención del impuesto de sociedades sobre el producto de dicha transferencia constituyen ayudas de funcionamiento incompatibles en favor de Siremar; |  |  |  | | --- | --- | | — | el pago por parte de SNS de una cantidad fija para el registro del contrato de compra del sector de empresa de Siremar con arreglo a la Ley de 2010, en lugar del importe normalmente adeudado con arreglo al Derecho nacional, constituye una ayuda de funcionamiento incompatible concedida a SNS. | |

8.4.   Respuesta a las observaciones de CdI

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| (506) | Tal como se ha descrito anteriormente (véase la sección 6), CdI presentó tres series de observaciones a la Comisión. Estas observaciones se presentaron una vez expirado el plazo concedido a los interesados para que presentaran sus observaciones sobre las Decisiones de 2011 y 2012. |

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| (507) | La Comisión señala lo siguiente en relación con los argumentos expuestos por CdI en sus observaciones:   |  |  | | --- | --- | | — | por lo que se refiere a los datos facilitados sobre las rutas operadas durante el período comprendido entre el 1 de agosto de 2012 y el 31 de diciembre de 2012, la Comisión confirma que tuvo en cuenta esta información en su evaluación; |  |  |  | | --- | --- | | — | por lo que se refiere a la venta del sector de empresa de Siremar, incluida la posibilidad de que se produjera a precio de mercado, la Comisión observa que, en el momento de la adopción de la presente Decisión, las autoridades italianas y CdI ya habían resuelto tanto el contrato de venta original como el nuevo acuerdo y que este acuerdo, asociado al sector de empresa de Siremar, se adjudicó finalmente a SNS. Como se indica en el considerando 295, sería lógicamente imposible concluir la investigación sobre la adjudicación inicial a CdI del nuevo acuerdo, asociado con el sector de empresa de Siremar, en el período comprendido entre el 1 de agosto de 2012 y el 10 de abril de 2016. Por consiguiente, la Comisión no se pronunciará sobre las contribuciones de CdI a la privatización del sector de empresa de Siremar. |  |  |  | | --- | --- | | — | por lo que se refiere al argumento implícito en varias cartas de CdI de que las obligaciones de servicio público que le impone el nuevo Convenio para el período comprendido entre el 1 de agosto de 2012 y el 10 de abril de 2016 son verdaderos SIEG, la Comisión concluyó en el considerando 351 que dichas obligaciones de servicio público, en la forma en que se confiaron a SNS, responden a una demanda efectiva de los usuarios, abordan una deficiencia real del mercado y pueden considerarse el enfoque menos perjudicial. Sin embargo, dado que la Comisión observa que, puesto que el nuevo acuerdo entre Italia y CdI fue derogado y las obligaciones de servicio público se adjudicaron finalmente a SNS, por las mismas razones expuestas anteriormente, no es posible evaluar por separado si las obligaciones de servicio público impuestas a CdI por el nuevo acuerdo constituyen un verdadero servicio de interés económico general. Por consiguiente, la Comisión no se pronunciará sobre las contribuciones de CdI en este momento; |  |  |  | | --- | --- | | — | por lo que se refiere a la contragarantía y la ampliación de capital, la Comisión concluyó en los considerandos 408 y 413 que la investigación de estas medidas carece de objeto. Por consiguiente, la Comisión no comentará las contribuciones de CdI relacionadas con estas medidas; |  |  |  | | --- | --- | | — | por lo que se refiere a la discontinuidad económica entre Siremar en AS y CdI, la Comisión observa que, puesto que el sector de empresa de Siremar y el nuevo convenio se concedieron finalmente a SNS, por las mismas razones que antes, no es necesario evaluar por separado la posibilidad de una posible continuidad económica entre Siremar en AS y CdI. Por el contrario, la Comisión evaluará en la sección 11 la existencia de una posible continuidad económica entre Siremar en AS y SNS [(181)](#ntr181-L_2022097ES.01000101-E0181). Además, como argumento adicional, la Comisión observa que CdI está en proceso de liquidación y que no es operativo y que, por lo tanto, en el contexto del presente asunto de ayuda estatal, una investigación sobre una posible ayuda de la que se habría beneficiado carecería de objeto. En este contexto, la Comisión considera que la evaluación de cualquier supuesta continuidad económica entre Siremar en AS y CdI también carecería de objeto. Por lo tanto, la Comisión no comentará las observaciones del CdI sobre la discontinuidad económica entre Siremar en AS y CdI. | |

9.   CONCLUSIÓN

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| (508) | La Comisión concluye que Italia ha ejecutado ilegalmente algunas de las medidas de ayuda objeto de evaluación, infringiendo el artículo 108, apartado 3, del TFUE. Sobre la base de la evaluación anterior, la Comisión ha decidido que la compensación por servicio público concedida a Siremar en virtud de la prórroga del acuerdo inicial es compatible con el mercado interior sobre la base del artículo 106 del TFUE. Además, dado que la prioridad del atraque está inextricablemente ligada a la ejecución del SIEG por Siremar, esta medida también es compatible con el mercado interior en virtud del artículo 106 del TFUE. En cuatro de las veinte rutas de servicio público en cuestión, Italia estaba exenta del requisito de notificación previa del artículo 108, apartado 3, del TFUE, ya que la compensación por servicio público y la prioridad en la asignación de puntos de amarre concedida a Siremar para la explotación de esas cuatro rutas se ajustaban a la Decisión SIEG de 2005. |

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| (509) | Sin embargo, la ayuda de salvamento concedida a Siremar, que se prorrogó ilegalmente del 28 de agosto de 2011 al 18 de septiembre de 2012, es incompatible con el mercado interior. Por último, la exención de los impuestos indirectos sobre transacciones y actos relativos a la transmisión del sector de empresa de Siremar a Siremar y SNS y la exención del impuesto de sociedades sobre el producto de la venta del sector de empresa de Siremar concedido a Siremar constituyen también una ayuda de funcionamiento a favor de Siremar y de SNS incompatible con el mercado interior. |

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| (510) | La presente Decisión no afecta ni prejuzga los demás aspectos cubiertos por las Decisiones de 2011 y 2012 o puestos en conocimiento de la Comisión por las personas afectadas en el curso de la investigación iniciada en virtud de dichas Decisiones. |

10.   RECUPERACIÓN

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| (511) | Con arreglo a lo previsto en el TFUE y en la jurisprudencia reiterada de los órganos jurisdiccionales del Tribunal de Justicia, la Comisión dispone de competencias para decidir que el Estado miembro implicado debe eliminar o modificar una ayuda que se haya declarado incompatible con el mercado interior [(182)](#ntr182-L_2022097ES.01000101-E0182). Los órganos jurisdiccionales de la Unión también han declarado en varias ocasiones que la obligación de los Estados miembros de suprimir una ayuda que la Comisión ha declarado incompatible con el mercado interior tiene por objeto restablecer la situación preexistente [(183)](#ntr183-L_2022097ES.01000101-E0183). |

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| (512) | En este contexto, los órganos jurisdiccionales de la Unión han determinado que este objetivo se logra cuando el beneficiario ha reembolsado los importes concedidos a través de una ayuda ilegal, eliminándose de tal modo la ventaja de que había disfrutado en comparación con sus competidores en el mercado interior, y se ha restablecido la situación existente antes de que se abonara la ayuda [(184)](#ntr184-L_2022097ES.01000101-E0184). |

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| (513) | De acuerdo con la jurisprudencia, el artículo 16, apartado 1, del Reglamento (UE) 2015/1589 del Consejo [(185)](#ntr185-L_2022097ES.01000101-E0185) establece que «cuando se adopten decisiones negativas en casos de ayuda ilegal, la Comisión decidirá que el Estado miembro interesado tome todas las medidas necesarias para obtener del beneficiario la recuperación de la ayuda». |

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| (514) | Por consiguiente, dado que las medidas en cuestión se ejecutaron incumpliendo el artículo 108, apartado 3, del Tratado y deben considerarse ayuda ilegal e incompatible, el importe de la ayuda debe recuperarse con el fin de restablecer la situación que existía en el mercado antes de su concesión. La recuperación abarcará el período comprendido entre la fecha en que la ayuda se puso a disposición del beneficiario y la recuperación efectiva. El importe que debe recuperarse devengará intereses hasta la fecha de la recuperación efectiva. |

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| (515) | En el presente caso, el beneficiario de la ayuda, Siremar in AE, ya está sujeto a un procedimiento de insolvencia. Por lo tanto, la recuperación efectiva puede efectuarse registrando en la lista de créditos el crédito relativo a la recuperación de la ayuda [(186)](#ntr186-L_2022097ES.01000101-E0186). En tal caso, el registro de la deuda debe ir seguido de: i) la recuperación del importe total o, si esto no puede lograrse, ii) la liquidación de la empresa y el cese definitivo de sus actividades. |

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| (516) | Por consiguiente, la ayuda estatal incompatible mencionada en el considerando 505 concedida a Siremar en AS y SNS debe reembolsarse a Italia en la medida en que se haya abonado. En particular, la ayuda que debe recuperarse será la siguiente:   |  |  | | --- | --- | | a) | el importe principal de la ayuda de salvamento, a saber, 15 121 838,33 EUR, más los intereses de recuperación, devengados desde las fechas de pago de las dos cuotas del préstamo y desde la fecha en que el BIIS hizo valer la garantía (es decir, el 28 de febrero de 2011 para el primer plazo de 12 000 000 EUR, el 23 de marzo de 2011 para el segundo tramo de 3 000 000 EUR y el 11 de julio de 2011 para el importe de 121 838,33 EUR) hasta la recuperación total. La Comisión toma nota de que Siremar en AS ya ha reembolsado el capital de la ayuda y parte de los intereses de recuperación; |  |  |  | | --- | --- | | b) | en la medida en que los impuestos indirectos sobre transacciones y actos relacionados con la transmisión de la actividad de Siremar son soportados por el vendedor (es decir, Siremar en AS), el capital de la ayuda es igual a los impuestos normalmente adeudados por estos tipos de transacciones. Italia calculará también la diferencia entre el importe fijo abonado por SNS por la inscripción del contrato de compraventa de la sucursal de Siremar con arreglo a la Ley de 2010 y el importe normalmente adeudado con arreglo a la legislación nacional. […] Italia también proporcionará una lista de todos los documentos para los que se han eximido realmente los impuestos y calculará la diferencia entre los impuestos normalmente adeudados por Siremar y SNS y los impuestos realmente pagados. A estos importes, deben añadirse los intereses devengados desde la fecha o fechas de los documentos oficiales en los que se aplicó la exención fiscal hasta la recuperación íntegra. | |

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| (517) | Además, Italia no eximirá el producto de la venta de la sucursal de Siremar del pago del impuesto de sociedades debido a Siremar en AS. |

11.   CONTINUIDAD ECONÓMICA

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| (518) | En caso de venta o transferencia del beneficiario de una ayuda estatal ilegal e incompatible, la obligación de reembolso podrá ampliarse a otras empresas a las que se hayan transferido las acciones o actividades del beneficiario [(187)](#ntr187-L_2022097ES.01000101-E0187). En el caso de una transacción de transferencia de acciones en la que el beneficiario sigue existiendo y activo en el mercado, pero simplemente ha cambiado su estructura de propiedad, la obligación de reembolsar la ayuda sigue correspondiendo al beneficiario. En el caso de una operación de transmisión de activos en la que una empresa continúa la actividad del beneficiario inicial utilizando una parte o la totalidad de sus activos, la empresa sucesora debe considerarse beneficiaria de una ayuda de Estado, siempre que la transmisión o la estructura de la venta conduzcan a la conclusión de que existe una continuidad económica entre ambas empresas. |

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| (519) | Por el contrario, cuando pueda demostrarse que, a pesar de la transmisión de algunos o de todos los activos, el beneficiario inicial conserva el beneficio de la ayuda ilegal y la empresa adquiriente ejerce una actividad sustancialmente diferente, la obligación de devolución recaerá en el beneficiario inicial de la ayuda. Según la jurisprudencia, para apreciar la existencia de una continuidad económica pueden tenerse en cuenta los siguientes factores: El objeto de la cesión (activos y pasivos, retención de mano de obra, ventas agregadas de activos), el precio de transmisión, la identidad de los propietarios de la empresa adquirente y la empresa original, el momento en que tuvo lugar la transmisión (tras el inicio de la investigación, la incoación del procedimiento o la decisión final) y la lógica económica de la transacción [(188)](#ntr188-L_2022097ES.01000101-E0188). |

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| (520) | De acuerdo con el mismo asunto, estos elementos deben tenerse en cuenta en grados distintos, según las características concretas del caso en cuestión. De ello se deduce que la Comisión no está obligada a examinar todos estos elementos, como demuestra la utilización de la expresión «pueden ser tomados en cuenta» [(189)](#ntr189-L_2022097ES.01000101-E0189) y que dichos factores no están vinculados jerárquicamente entre sí. En particular, en el presente caso, la Comisión considera que la evaluación de la continuidad económica debe tener en cuenta la naturaleza específica de la transacción entre Siremar en AS y SNS, que consistía en la privatización de una empresa pública mediante un procedimiento de licitación para la adjudicación de un contrato de servicio público de doce años, combinado con los activos necesarios para la prestación de los servicios de interés económico general definidos en el contrato. Hasta la fecha Siremar en AS existe como entidad independiente, pero no ejerce ninguna actividad comercial y sigue siendo objeto de un procedimiento de insolvencia cuyo objetivo principal es reembolsar a los acreedores y completar su liquidación. |

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| (521) | Para decidir si existe una continuidad económica entre Siremar en AS y SNS y, por tanto, para determinar si Siremar también debe ser considerada responsable del reembolso de la ayuda incompatible concedida a la primera, la Comisión aplicó los indicadores anteriores a las circunstancias específicas del caso en cuestión. |

11.1.   Alcance de la transferencia

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| (522) | Este indicador abarca el alcance de la transferencia de activos y pasivos existentes, incluidas las relaciones contractuales con empleados y proveedores, de Siremar (más tarde en AS) a SNS. Con carácter preliminar, cabe señalar que no se ha transferido ninguno de los elementos de los pasivos existentes: Siremar en AS seguía siendo responsable y seguía siéndolo en el momento de la adopción de la presente Decisión. La cesión dio lugar a la cancelación total de todos los créditos sobre los activos transferidos, tales como hipotecas, embargos y créditos preferentes. |

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| (523) | Además, por lo que se refiere a los activos, la Comisión señaló, en primer lugar, que el procedimiento de venta del sector de empresa de Siremar siguió a un intento vacío de privatizar Tirrenia di Navigazione en su conjunto, con todos los activos y pasivos, incluida la filial de Siremar en aquel momento. La segunda privatización con éxito del sector de empresa de Siremar se refería a la marca Siremar [(190)](#ntr190-L_2022097ES.01000101-E0190), los activos considerados necesarios para las obligaciones de servicio público de Siremar y las relaciones contractuales con los proveedores, con un perímetro diferente y más reducido en comparación con el primer intento (alrededor del 45 % en número de buques). Los activos pertenecientes a Siremar en AS que no se consideraron necesarios para el cumplimiento de las obligaciones de servicio público, entre el buque rápido Guizzo, se vendieron por separado en procedimientos de licitación diferentes e independientes. |

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| (524) | Por último, la Comisión señala también que, por lo que se refiere a la mano de obra, no hubo transferencia de contratos de trabajo de Siremar en AS a CdI y posteriormente a SNS. El artículo 2112 del Código Civil italiano establece que, en caso de transmisión de empresa, la relación laboral continúa con el cesionario y el trabajador conserva todos los derechos que de ella se derivan. No obstante, con arreglo al Decreto-ley n.o 270/1999, este régimen ordinario no es aplicable a la transferencia de un sector de empresa objeto de un procedimiento de administración extraordinaria y que preste servicios públicos esenciales. Por el contrario, el nuevo propietario está obligado a contratar el personal necesario para la prestación del servicio y a abstenerse de despidos colectivos durante dos años (véase el considerando 195). La Comisión observa que, si bien la norma general habría previsto una clara continuidad de la mano de obra entre Siremar en AS y SNS, pasando por CdI, esta excepción permitió efectivamente a Siremar en AS rescindir todos los contratos con sus empleados. Como consecuencia de ello, CdI y posteriormente SNS ofrecieron nuevos contratos a los empleados que en aquel momento estaban empleados para cumplir las obligaciones de servicio público. |

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| (525) | La obligación de mantener el número de trabajadores estaba prevista en una ley general que las autoridades italianas no podían ignorar en la definición del procedimiento de venta. Sin embargo, incluso con independencia de este requisito legal, la Comisión observa que la actividad de transporte marítimo requiere un número mínimo obligatorio de empleados para la explotación de buques, con una serie de competencias específicas, como se indica en los cuadros sobre las tripulaciones de la flota (véase el considerando 210). En el caso de autos, a raíz de la adjudicación del nuevo contrato, CdI, y posteriormente SNS, habrían tenido que contratar a unos 500 trabajadores en un breve período de tiempo para cumplir sus obligaciones. Por lo tanto, es muy probable que, por motivos de oportunidad y de reducción de los costes de búsqueda y contratación de personal, SNS habría contratado a la mayoría de los empleados de Siremar en AS aunque no hubiera tenido que ofrecerles contratos de trabajo. |

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| (526) | En este contexto, la Comisión concluye que, aunque ha habido una continuidad real en el nivel de la mano de obra, es atribuible a las circunstancias reales del caso (es decir, al perímetro de la transmisión) y, en general, a la legislación laboral aplicable. Por otra parte, casi todos los activos de Siremar en AS y ninguno de sus pasivos se transfirieron a SNS. En general, por lo que se refiere al alcance de la transferencia, la Comisión considera que existen indicios de continuidad económica entre estas empresas. |

11.2.   Precio de la transferencia

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| (527) | Según reiterada jurisprudencia, la transferencia de activos a un precio inferior al precio de mercado es también un indicador de la continuidad económica entre la empresa liquidada, responsable del reembolso de la ayuda al Estado, y la empresa de nueva creación. En este caso, la Comisión observa que los activos se transfirieron tras un procedimiento de licitación suficientemente abierto, transparente y no discriminatorio para obtener un precio de mercado, tal como se describe en la sección 8.1.3.4. No hay pruebas de que la organización de un procedimiento de licitación conjunto para los activos y el contrato de servicio público haya tenido un impacto negativo en el resultado de la licitación. Por el contrario, Italia demostró que, cuando se organizaron licitaciones separadas para algunos de los demás buques de Tirrenia y Siremar, estos buques solo podían venderse por su valor de chatarra. De hecho, las condiciones impuestas al comprador, como el requisito de mantener los niveles de empleo durante dos años, no redujeron el precio, tal como se establece en el informe Ecorys (véase el considerando 121). Además, el precio final pagado por SNS, es decir, 55,1 millones de EUR, era superior al precio mínimo identificado en la tasación de los expertos independientes de Banca Profilo de 55 millones EUR y SNS tiene que pagar un interés anual del 1,5 % sobre los dos tramos aplazados de 9 millones EUR cada uno. Además, como se menciona en el considerando 122, en el momento de la transferencia del sector de empresa a SNS, el segundo informe Ecorys concluía, utilizando el método de ajuste contable, que el valor de mercado era de 39,9 millones de EUR, un valor mucho menor. Por último, la Comisión observa que las numerosas peticiones de mejora de las ofertas durante el procedimiento (véanse los considerandos 79 a 100) muestran claramente que había una dinámica competitiva entre CdI y SNS y que, aunque la primera fue posteriormente excluida del procedimiento, en el momento en que se hizo inicialmente la oferta ganadora de SNS, CdI participó activamente en el procedimiento con sus ofertas. Según reiterada jurisprudencia, cuando una autoridad pública vende una empresa a través de una licitación abierta, transparente e incondicional, puede presumirse que el precio de mercado corresponde a la oferta más elevada vinculante y creíble recibida. Además, según la jurisprudencia, ni siquiera la existencia de condiciones ilegales en el marco del procedimiento de licitación de que se trata puede desvirtuar esta conclusión si tales condiciones no han dado lugar a una reducción del importe de la oferta de que se trate [(191)](#ntr191-L_2022097ES.01000101-E0191). |

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| (528) | Habida cuenta de lo anterior, la Comisión concluye que las circunstancias de la transferencia excluyen la transferencia a SNS de cualquier ventaja económica de la que se habría beneficiado Siremar en AS. Por consiguiente, en este caso, el precio de transferencia no puede considerarse un indicador de continuidad económica. |

11.3.   Identidad de los propietarios

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| (529) | Cuando la transferencia de activos tiene lugar entre dos entidades vinculadas, este es un indicio de que el objetivo de la transferencia podría ser eludir la obligación de reembolsar la ayuda declarada ilegal e incompatible en una decisión de la Comisión. En el presente caso, la Comisión observa que Siremar en AS y SNS no tenía ni tiene ninguna relación entre ellas. La primera era una empresa pública propiedad al 100 % del Ministerio de Economía (véase el considerando 22), mientras que la segunda es una empresa privada propiedad al 50 % de Ustica Lines S.p.A. y del 50 % de Caronte & Tourist S.p.A. La Comisión observa, por lo tanto, que Siremar en AS no podía ejercer control alguno sobre SNS y viceversa. |

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| (530) | Habida cuenta de lo anterior, la Comisión concluye que el criterio de la identidad de los accionistas también indica que no existe continuidad económica en el presente caso. |

11.4.   Cronología de la transferencia

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| (531) | El hecho de que la transferencia de activos se produjera después de la adopción de una decisión de la Comisión que planteaba dudas sobre la compatibilidad de una ayuda ya concedida constituye un indicio adicional de que la transferencia pudo haberse organizado para eludir la orden de recuperación. En el presente caso, la Comisión observa que la convocatoria de manifestaciones de interés se publicó el 4 de octubre de 2010, mientras que CIN presentó su oferta vinculante el 23 de mayo de 2011. La decisión de la Comisión de incoar un procedimiento de investigación formal relativo, entre otras cosas, a la privatización de la sucursal empresarial de Siremar se adoptó varios meses después, el 5 de octubre de 2011. Posteriormente, el 20 de octubre de 2011, CdI firmó el contrato de venta, sobre la base de su última oferta presentada el 13 de octubre de 2011. La transmisión no se completó hasta el 30 de julio de 2012 debido a los recursos interpuestos contra la adjudicación de la sucursal comercial y al nuevo convenio a CdI. El 7 de noviembre de 2012, la Comisión amplió el procedimiento de investigación formal, entre otras cosas, al nuevo convenio firmado por CdI. El sector de empresa fue finalmente adjudicado a SNS en abril de 2016, tras el procedimiento judicial descrito en la sección 2.3.3.2. |

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| (532) | En este contexto, la Comisión considera que, aunque la transferencia a SNS tuvo lugar después de las decisiones de 2011 y 2012, cuando SNS preparaba y presentaba su oferta vinculante, es decir, en mayo de 2011, ni SNS ni Siremar en AS podían saber que, unos meses después, la Comisión abriría una investigación formal. Parece muy poco probable que una de las partes pudiera haber sido consciente del contenido de las decisiones de 2011 y 2012, evaluar los riesgos existentes y decidir transferir los activos para frustrar la investigación. |

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| (533) | La Comisión observa también que Italia le había informado con mucha antelación de su intención de vender el sector de empresa de Siremar junto con el nuevo convenio, en el contexto de las conversaciones con la Comisión sobre la aplicación del Reglamento sobre el cabotaje marítimo (véase también la sección 2.4). Además, Italia también notificó, por razones de seguridad jurídica, el proyecto del nuevo convenio (véase el considerando 9). Este es otro indicio de que Italia no tenía intención de eludir ninguna futura orden de recuperación organizando la transmisión de la rama de actividad y la atribución del nuevo convenio, tal como se describe y evalúa en la sección 8.1.3. |

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| (534) | A la luz de lo anterior, incluso si la transferencia a SNS tuvo lugar después de la adopción de las Decisiones de 2011 y 2012, la Comisión considera que, a la vista de las circunstancias específicas descritas anteriormente y, en particular, de la larga duración de los procedimientos judiciales relativos a la primera adjudicación del sector de empresa a CdI, el momento de los hechos sugiere que no existe continuidad económica en el presente caso. |

11.5.   Lógica económica de la operación

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| (535) | Este indicador se refiere tanto a las intenciones de las partes con respecto a la transferencia de activos como a la lógica económica de dicha transferencia a la luz de las actividades futuras de la empresa que gestionará los activos. A este respecto, la Comisión señala, en primer lugar, que, por una parte, las autoridades italianas pretendían cumplir la obligación de liberalizar el sector del transporte marítimo en virtud del Reglamento sobre el cabotaje marítimo mediante la privatización de su principal operador público, el grupo Tirrenia, que incluía Siremar, y encomendando a la empresa adquirente el cumplimiento de sus obligaciones de servicio público. Aunque este Reglamento no lo exige, la transferencia de activos y la compensación por servicio público asociada era, en efecto, una de las opciones de que disponía Italia para llevar a cabo la liberalización en cuestión (véase el considerando 136); En este contexto, también resultó ser una opción óptima en términos del precio de venta de los activos, en comparación con el uso de dos procedimientos distintos (véase el considerando 393). Por otra parte, la intención de SNS era explotar las rutas con obligación fe servicio público de manera más eficiente que Siremar (más tarde Siremar en AS), obteniendo así un beneficio. |

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| (536) | El ámbito de actividad, a saber, la prestación de servicios marítimos hacia y entre determinadas islas sicilianas bajo obligaciones específicas de servicio público en términos de frecuencia, tarifas y características de los buques, sigue siendo esencialmente el mismo. |

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| (537) | Por lo que se refiere a las actividades futuras de la empresa, la Comisión observa que, si bien es cierto que SNS ofrece rutas y frecuencias que son iguales o muy similares a las de Siremar, esta es la consecuencia lógica de la necesidad de seguir prestando servicios auténticos de interés económico general, tal como se definen en el nuevo convenio. En otras palabras, la continuidad del servicio público no coincide con la continuidad económica con arreglo a las normas sobre ayudas estatales y no debe confundirse con él. De hecho, la Comisión considera que Italia no habría podido modificar arbitrariamente el alcance de los servicios públicos prestados por SNS sin frustrar el objetivo mismo del nuevo convenio, que preveía: Garantizar la continuidad territorial entre el continente y las islas y ii) contribuir al desarrollo económico de las islas afectadas. |

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| (538) | Además, la Comisión observa que las condiciones relativas a la ejecución cotidiana de las obligaciones de servicio público de SNS son diferentes de las aplicadas hasta 2009 inclusive. El importe de la compensación se fija con arreglo a un mecanismo diferente, que obliga al operador a explotar el servicio de manera eficiente. Además, dado que no existe ninguna garantía de cobertura total de los costes y el importe nominal de la compensación se fija para varios años (y, por tanto, disminuye en términos reales), SNS no tenía más opción que llevar a cabo una revisión de la estrategia empresarial de Siremar. Esta última, a lo largo de su larga historia dentro del grupo Tirrenia, siempre ha funcionado de manera coherente desde una perspectiva de servicio público, sin adoptar ninguna estrategia destinada a lograr una rentabilidad sostenible, mientras que el objetivo de Siremar en AS era simplemente la liquidación ordenada de la empresa, garantizando al mismo tiempo la continuidad del servicio público, hasta la transferencia de propiedad a CdI y después a SNS, tras el procedimiento de licitación. |

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| (539) | De hecho, la Comisión observa que, en su primer plan de negocio, que abarca el período 2011-2022 y elaborado en mayo de 2011, el SNS tenía por objeto aumentar la eficiencia de la flota en términos de mantenimiento, seguros y costes de combustible; mejorar las ventas en línea; ahorrar costes laborales a través de nuevos contratos laborales y reducir costes mediante la celebración de nuevos contratos con los proveedores. En su segundo plan de negocio, relativo al período 2016-2027 y elaborado en febrero de 2016, SNS actualizó sus previsiones e hipótesis financieras sobre la base de los datos obtenidos por CdI, modificó las asignaciones de determinados buques a las distintas rutas, en particular por lo que se refiere a los servicios dedicados exclusivamente al transporte de pasajeros, y modificó determinadas hipótesis relativas a los costes de personal y a la amortización [(192)](#ntr192-L_2022097ES.01000101-E0192). Por último, a partir del 1 de septiembre de 2016, SNS repartió efectivamente sus actividades entre los servicios de transbordadores y los servicios de pasajeros, asignándolos a Caronte & Tourist y Liberty Lines, respectivamente, y transfiriendo sus activos proporcionalmente. La Comisión observa que esto representa una diferencia fundamental en la gestión de los servicios públicos entre SNS y Siremar en AS. |

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| (540) | Como consecuencia de ello, SNS cumplió sus obligaciones de servicio público en condiciones de funcionamiento diferentes a las de Siremar en AS, siguiendo su propia estrategia comercial. De hecho, las autoridades italianas no exigieron a SNS que siguiera ningún modelo de negocio específico, ni que mantuviera un determinado ámbito de actividad más allá de lo previsto en el nuevo acuerdo, ni que se hiciera cargo de activos o empleados específicos que no estuvieran intrínsecamente vinculados a la ejecución de las obligaciones de servicio público definidas en el nuevo acuerdo. A este respecto, SNS era (y sigue siendo) libre de introducir cambios en el modo de funcionamiento de la empresa. |

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| (541) | Habida cuenta de lo anterior, la Comisión observa que, aunque las obligaciones de servicio público, en términos de rutas y frecuencias, son en sí mismas bastante similares porque responden a necesidades similares de servicio público, las condiciones para su ejecución y la estrategia empresarial subyacente son diferentes. De hecho, esta similitud de hecho de la actividad realizada se debió a las circunstancias muy específicas del caso y se vio atenuada por las diferentes restricciones financieras impuestas a las operaciones del SNS. En general, por lo que se refiere a la lógica económica de la operación, la Comisión considera que existen indicios de la existencia de continuidad económica en el presente caso. |

11.6.   Conclusión sobre la continuidad económica entre Siremar en AS y SNS

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| (542) | Sobre la base de lo anterior, la Comisión observa que no hay indicios de continuidad económica en el precio de transferencia, el calendario y la identidad de los propietarios. Aunque el alcance de la operación y su lógica económica contengan elementos que indiquen una posible continuidad económica, la Comisión observa, para estos criterios, que los posibles elementos de la posible continuidad son atribuibles a las circunstancias muy específicas de esta operación, a saber, la combinación de la transferencia de activos y el contrato de servicio público en un único procedimiento, la entidad de la operación y las normas generales aplicables en materia laboral. En particular, no hay indicios de elusión de las obligaciones de recuperación. En este contexto, la Comisión concluye que, en última instancia, no existe continuidad económica entre Siremar y SNS. Esto significa también que la obligación de reembolsar las ayudas estatales ilegales e incompatibles concedidas a Siremar no debe ampliarse a SNS. |

HA ADOPTADO LA PRESENTE DECISIÓN:

Artículo 1

1.   La compensación concedida a Siremar y la prioridad en la asignación de puntos de amarre para la prestación de servicios marítimos en virtud del convenio inicial, prorrogado en el período comprendido entre el 1 de enero de 2009 y el 30 de julio de 2012, constituyen ayuda estatal a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE. Con excepción de la ayuda estatal concedida para la explotación de las rutas D1 (Trapani – Pantelleria), D4 (Porto Empedocle – Linosa – Lampedusa), D5 (Palermo – Ustica) y ALD/1 (Palermo – Ustica), Italia ejecutó ilegalmente la ayuda, infringiendo el artículo 108, apartado 3, del TFUE.

2.   La ayuda mencionada en el apartado 1 del presente artículo es compatible con el mercado interior.

Artículo 2

1.   La prórroga de la ayuda de salvamento desde el 28 de agosto de 2011 hasta el 18 de septiembre de 2012 constituye una ayuda a Siremar a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE. La ayuda estatal fue ejecutada ilegalmente por Italia, infringiendo el artículo 108, apartado 3, del TFUE.

2.   La ayuda mencionada en el apartado 1 del presente artículo, por un importe de 15 121 838,33 EUR, es incompatible con el mercado interior.

Artículo 3

1.   La exención de impuestos indirectos sobre la transferencia del sector de empresa de Siremar a SNS constituye una ayuda estatal en favor de Siremar en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE. La ayuda estatal fue ejecutada ilegalmente por Italia, infringiendo el artículo 108, apartado 3, del TFUE.

2.   El pago por parte de SNS de una cantidad fija para el registro del contrato de compra del sector de empresa de Siremar con arreglo a la Ley de 2010, en lugar del importe normalmente adeudado con arreglo al Derecho nacional, constituye una ayuda estatal concedida a SNS en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE. La ayuda estatal fue ejecutada ilegalmente por Italia, infringiendo el artículo 108, apartado 3, del TFUE.

3.   La exención del impuesto de sociedades para el producto de la venta del sector de empresa de Siremar a SNS constituye una ayuda estatal a Siremar a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE. La ayuda estatal fue ejecutada ilegalmente por Italia, infringiendo el artículo 108, apartado 3, del TFUE.

4.   Las ayudas mencionadas en los apartados 1, 2 y 3 del presente artículo son incompatibles con el mercado interior.

5.   En el momento de la adopción de la presente Decisión, Italia aún no ha abonado la ayuda mencionada en el apartado 3 del presente artículo.

Artículo 4

1.   La concesión a SNS del nuevo convenio para el período comprendido entre el 11 de abril de 2016 y el 11 de abril de 2028, asociada a la rama de actividad de Siremar y a su prioridad en el atraque, no constituye ayuda estatal a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE.

2.   La posibilidad de utilizar los recursos del Fondo utilizados para cubrir las necesidades de liquidez, tal como prevé la Ley de 2010, no constituye ayuda estatal en el sentido del artículo 107, apartado 1, del TFUE.

3.   Siremar no hizo uso de la posibilidad de utilizar, con carácter temporal, los recursos financieros ya comprometidos para la modernización y adaptación de la flota para cubrir las necesidades urgentes de liquidez previstas en la Ley de 2010. Por consiguiente, esto no constituye ayuda estatal en favor de Siremar a tenor del artículo 107, apartado 1, del TFUE.

Artículo 5

1.   Italia recuperará de los beneficiarios la ayuda incompatible mencionada en los artículos 2 y 3, en la medida en que se haya abonado.

2.   Las cantidades pendientes de recuperación devengarán intereses desde la fecha en que se pusieron a disposición del beneficiario hasta la de su recuperación.

3.   Los intereses se calcularán sobre una base compuesta de conformidad con el capítulo V del Reglamento (CE) n.o 794/2004 y el Reglamento (CE) n.o 271/2008 que modifica el Reglamento (CE) n.o 794/2004.

4.   Sobre la base de la información de que dispone, la Comisión reconoce que el beneficiario ya ha reembolsado el principal de la ayuda mencionada en el artículo 2 y una parte de los intereses de recuperación.

5.   Italia cancelará todos los pagos pendientes de la ayuda mencionada en el artículo 3, apartado 2, con efecto a partir de la fecha de adopción de la presente Decisión.

Artículo 6

1.   La recuperación de la ayuda mencionada en el artículo 5 será inmediata y efectiva.

2.   Italia garantizará que la presente Decisión se aplique en el plazo de cuatro meses a partir de la fecha de su notificación.

Artículo 7

1.   En los dos meses siguientes a la notificación de la presente Decisión, Italia transmitirá la siguiente información:

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| — | el importe total (principal e intereses) que debe recuperarse de los beneficiarios; |

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| — | una descripción detallada de las medidas ya adoptadas y previstas para el cumplimiento de la presente Decisión; |

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| — | documentos que demuestren que se ha ordenado a los beneficiarios que reembolsen la ayuda. |

2.   Italia mantendrá informada a la Comisión del avance de las medidas nacionales adoptadas en aplicación de la presente Decisión hasta que la recuperación de la ayuda mencionada en el artículo 6 haya concluido. Transmitirá inmediatamente, a petición de la Comisión, información sobre las medidas ya adoptadas y previstas para el cumplimiento de la presente Decisión. También proporcionará información detallada sobre los importes de la ayuda y los intereses ya recuperados de los beneficiarios.

Artículo 8

El destinatario de la presente Decisión es la República Italiana.

La Comisión podrá publicar los importes recuperados en relación con la ayuda y los intereses de recuperación de conformidad con la presente Decisión, sin perjuicio de lo dispuesto en el artículo 30 del Reglamento (UE) 2015/1589.

Hecho en Bruselas, el 17 de junio de 2021.

Por la Comisión

Margrethe VESTAGER

Vicepresidenta Ejecutiva

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